Why sack the secretary when the demand is for sacking the minister? The protest seeks a symbolic win. Give them that. Structural change is hard work, both to demand and deliver.
बड़ी ख़बर-
"जितनी भी योजनाएं धरती पर हैं, महाराज जी ने गोरखपुर में सब लागू कर दी हैं।"
"NEET अखबार" और "Home from work" के बाद रविकिशन शुक्ला का एक और ऐतिहासिक बयान।
चंद्रमा की कक्षा से खींचकर सीधे मठ में उतार दिया चंद्रयान!!
आंखों देखी, जंतर मंतर
बीती रात टॉलस्टॉय मार्ग पर ACP भगत पुलिस की टीम को लीड कर रहे थे। भीड़ में से एक लड़का आया और उसने चाकू मार दिया । एसीपी बुरी तरह ज़ख़्मी हो गए।
अब लोग कह रहे हैं कि ये छात्र नहीं है. तो फिर कौन हैं? छात्रों के भीड़ में क्यों हैं? इसकी जिम्मेदारी भीड़ इकट्ठा करने वाले आशुतोष रांका, अभिजीत दीपके, सौरव दास, अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह लेंगे?
कहने को 9 साल सरकार चला ली,
और करने को सिर्फ 9 बातें-
1- हिंदू
2- मुसलमान
3- मंदिर
4- मस्जिद
5- मज़ार
6- श्मशान
7- कब्रिस्तान
8- रमजान
और
9- ग़ाज़ी!!
धँसा हुआ विकास का एक्सप्रेस वे!
योजनाओं में करप्शन का गेटवे!
हासिल सिर्फ़ लफ़्फ़ाज़ी?
लाठी
लाठी पड़ी
और सतीश बेहोश हो गया।
बेहोशी में सपने का कोई नियम नहीं होता,
सो सपना आया।
सपने में वही सड़क थी,
वही भीड़, वही नारे,
बस सतीश इस बार
भीड़ में नहीं था।
वर्दी में था,
और उसके हाथ की लाठी
किसी की पीठ पर उतर रही थी
जो वेकेंसी नहीं निकलने पर
गुस्से से लाल था।
होश आया
तो पीठ पर निशान थे
और आंखों में करियर।
सतीश अब और मेहनत करेगा।
सुबह चार बजे उठेगा,
और दौड़ लगाएगा
करंट अफ़ेयर्स रटेगा।
इंक़लाब के लिए नहीं
एक ख्वाब के लिए।
लाठी के इस पार से
उस पार हो जाना है,
बैरिकेड क्रॉस करने वालों
पर जम कर लट्ठ बजाना है।
सवाल शुरू हो गया कि क्या अभिजीत दीपके मानेंगे?
इसका जवाब सरकार 6 जून से ही दे रही है।
सोनम को उठाने के बाद दीपके को हॉटल से गाड़ी में बिठाकर जंतर मंतर छोड़ना भी सरकार का मैसेज था।
राजनीति और खबरों को समझने वालों को सब पता है।
दीपके से कोई बात नहीं होगी ये स्पष्ट है। उन्हें सिर्फ लाठी मिलेगी सरकार क्लियर है।
आज जंतर मंतर पर जो भीड़ है से सोनम वांगचुक के नाम पर बुलाई गई भीड़ है न कि 22 मिलियन का कमाल।
इंस्टाग्राम से बना नेता है। आप इंस्टाग्राम के ऑडियंस को सीरियस मत लीजिए। स्टोरी में 'बोल कि लव आजाद' गाना लगाकर क्रांति कर देते हैं ये लोग।
बड़ी खबर-
गोरखपुर में विकास पानी पानी!
गोरखनाथ मंदिर के पड़ोस की कहानी!!
इधर रामपुर, संभल, बरेली में निशाने पर मुसलमान!
उधर बरसात में डूबा गोरखपुर, चीखे सुबह- शाम!!
गोरखपुर से Live गवाही!!
गोरक्षपीठ से बस 1.5 किमी पर जल तबाही!!
टॉप सीक्रेट पर पूरी रिपोर्ट!!
वेदना का साक्षात विस्फोट!!
नीतीश कुमार के 'Triple C' पर भला किसको एतराज हो सकता है @GarimaBharti19 जी? ये तो बिहार की राजनीति को देखने समझने वाले गवाह हैं कि नीतीश कुमार ने हमेशा अपने सिद्धांतों पर राजनीति की है.
90 के दशक में जो बिहार बदहाली के गहरे दौर में चला गया था, उस बिहार को उन्होंने सत्ता में आने के बाद एक घर के मुखिया की तरह सजाया और संवारा। चाहे वह सड़कों का जाल बिछाना हो, हर घर तक बिजली पहुंचाना हो, सुशासन का राज कायम करना हो या फिर महिला सशक्तिकरण को जमीन पर उतारना हो, नीतीश बाबू ने बिहार को एक नई दिशा दी।
लेकिन दूसरी तरफ सम्राट चौधरी जी जिस 'Triple T' की बात कर रहे हैं, उस पर तो चारों तरफ संदेह ही संदेह नजर आता है। और ताज्जुब की बात देखिए कि यह संदेह मात्र 90 दिनों के कार्यकाल में ही गहरा गया है। यह अद्भुत ही तो है। अब सम्राट जी के Triple T के पहले T को ही देख लीजिए. 'T' यानी Technology को। अब देखिए न उन्होंने इस तकनीक को भी अपनी सुविधा और राजनीति के अनुसार ही तो ढाल दिया है। तभी तो वे मंच से सरेआम कह रहे थे कि AI वाला कैमरा सिर्फ हरा गमछा वालों को ही पकड़ेगा। भला तकनीक का ऐसा राजनीतिकरण किसने देखा है?
दूसरा 'T' है Transparency यानी पारदर्शिता। अब आप ही बताइए, जो शख्स सूबे का डिप्टी सीएम और गृह मंत्री रहते हुए मंच से दहाड़कर यह कहता हो कि कुशवाहा के बेटे को कोई हाथ नहीं लगा सकता और अगर किसी ने हाथ लगाया तो खून का कतरा-कतरा बहा देंगे, उनसे कोई पारदर्शिता की उम्मीद कैसे कर सकता है? जब सूबे की पुलिस खुद गृह मंत्री के साथ पारदर्शी नहीं है, तो वे किस मुंह से Transparency की बात कर रहे हैं?
@GarimaBharti19 जी साफ है कि जब शुरुआती दो 'T' की बुनियाद में ही इतना बड़ा झोल और विरोधाभास छिपा है, तो उनके तीसरे 'T' के बारे में चर्चा करना ही बेमानी और बेवकूफी लगती है।
लेकिन जब ये खबरे इस तरह से लोगो के सामने परोसी जाएंगी तो यकीन मानिए कुछ दिनों बाद ना सरेआम पिस्टल लहराना नज़र आएगा ना ऑर्केस्ट्रा के आड़ में जारी जिस्म का कला कारोबार। सब कुछ इतना सरल हो जाएगा कि कल को सभी पत्रकार बड़े आराम से लिखेंगे, “सब कुक्ष सामान्य है।”
ऐसे में, वही मीडिया संस्थान ये कैसे लिख सकती है कि ‘बारातियों के स्वागत के लिए आर्केस्ट्रा का आयोजन किया गया था।’ कैसे? सोचिए…यदि इस संस्थान द्वारा पूर्व में दिखाए हुए रिपोर्ट सही थे (जो कि थे) तो क्या ये बताया जा सकता है कि आख़िर ये किस प्रकार का स्वागत था?
एक महीना TRP नहीं आएगी। सरकार चाहती है कि न्यूज चैनल TRP के चक्कर में अनाप शनाप खबरें न दिखाएं। सरकार को लगता है कि TRP का दबाव नहीं होगा तो एंकर चिल्ला चिल्लाकर और चैनल युद्ध का सायरन बजा बजाकर लोगों को डराना बंद कर देंगे! इसलिए सरकार ने TRP जारी करने वाली संस्था BRAC को आदेश दिया है कि अगले चार हफ्ते तो TRP के आंकड़े जारी न किए जाएं!
देख लेना, नहीं बदलेंगे! आदत हो गई है। #TRP #BARC
बीजेपी ने यूपी का अगला सीएम तय कर दिया है!!
बस चश्मा उतारने भर की देर है।
तस्वीर एकदम साफ़ है।
लखनऊ बीजेपी से महज़ 100 मीटर की दूरी पर स्थित चाय की एक दुकान पर एक रेडियो औंधा लेटा हुआ है।
रेडियो से गाना बज रहा है-
“समझने वाले समझ गये हैं
न समझे वो अनाड़ी है!”
After a gap of 53 years, Delhi conducted cloud seeding trials on Tuesday to induce artificial rain in the national capital amid surging pollution levels, even as the weather department did not record any traces of rainfall in the city.
📹PTI
लोजपा रामविलास अपने सभी लोकसभा सीट से 2 सीट की मांग कर रही है। समस्तीपुर लोकसभा सीट से 2 सीट की मांग है जिसमें समस्तीपुर विधानसभा सीट भी है। वहां से अनुपम कुमार सिंह लोजपा के लिए सबसे बड़े उम्मीदवार हैं।अनुपम कुमार सिंह वर्तमान में जिलाध्यक्ष है। #BiharElections2025#Samastipur
@ravishndtv सर आपको देखने और मानने वाले हजारों लाखों की संख्या में हैं। नीचे जो मैने स्क्रीनशॉट साझा किया है उसमें आपकी एक वीडियो दिखाई जा रही है। किसी एक मेडिसिन कंपनी के द्वारा। क्या आप इस वीडियो की पुष्टि करते हैं?
अगर नहीं तो आपकी प्रतिक्रिया अत्यावश्यक है!
#ScamAlert
My channel 'Shabd Sanchi' was deleted on March 10, 2025, without my consent. Found a suspicious login in my Google account. @TeamYouTube
please investigate and restore it #pleasehelp