#Reservation
VMMC–Safdarjung का 2012 मामला:
2010–2012 के दौरान दिल्ली के Vardhman Mahavir Medical College (VMMC)‚Safdarjung Hospital से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया था। मामला SC छात्रों के साथ कथित caste-based discrimination और परीक्षा में बार-बार fail किए जाने के आरोपों से संबंधित था।
रिपोर्टों के अनुसार‚ MBBS examination में 35 SC students ‘Physiology’ में fail हुए और इनमें से 25 students दोबारा उसी subject में fail हुए। छात्रों का आरोप था कि वे दूसरे subjects में पास हो रहे थे‚लेकिन Physiology में उन्हें लगातार fail किया जा रहा था।
यह मामला केवल examination result तक सीमित नहीं रहा। छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के सामने अपनी शिकायतें रखीं। जब उन्हें पर्याप्त राहत नहीं मिली‚तो मामला RTI और फिर बाद में Delhi High Court तक पहुंचा।
इसके बाद Court के intervention में students की दोबारा examination कराई गई तो फिर 25 में से 24 students re-exams में पास हो गए।
यहीं से मामले पर गंभीर सवाल उठे ...???
इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए National Commission for Scheduled Castes (NCSC) की ओर से Prof. Bhalchandra Mungekar को inquiry की जिम्मेदारी दी गई।
Mungekar inquiry में VMMC में SC students के साथ discrimination के आरोपों को गंभीरता से लिया गया। रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि institutional environment और कुछ faculty/officials के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल थे।
इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे केवल ‘कौन पास हुआ और कौन fail हुआ’ के रूप में नहीं देखा गया।
सवाल यह था कि क्या किसी student को उसकी caste identity के कारण academic evaluation में disadvantage किया जा रहा था?
अगर किसी particular subject में एक ही social category के students असामान्य रूप से बार-बार fail हों‚और दूसरे subjects में perform कर रहे हों और independent re-exams में अधिकांश students पास हो जाएं‚तो naturally यह सवाल उठता है कि evaluation system कितना fair, transparent and unbiased था।
इसीलिए इस मामले में केवल students के marks नहीं‚बल्कि पूरे examination process और institutional behaviour की जांच महत्वपूर्ण बन गई। Mungekar inquiry से जुड़ी recommendations में affected students के लिए compensation, जिम्मेदार अधिकारियों/faculty के खिलाफ action और SC students की grievances को effectively address करने के लिए institutional mechanism मजबूत करने जैसी बातें सामने आईं।
इस घटना से बड़ा सवाल क्या उठता है?
आज जब reservation के खिलाफ अक्सर ‘Merit’ और ‘Equality’ की बात की जाती है‚ तब ऐसे historical cases को भी समझना जरूरी है।
Reservation केवल examination और सरकारी जॉब्स में कुछ छूट देने की व्यवस्था मात्र नहीं है ....यह उस structural inequality का response है जिसमें historically marginalized communities को education‚ employment और institutions में समान अवसर तक पहुंचने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ा।
अगर किसी reputed medical institution में भी caste discrimination की शिकायत इतनी गंभीर हो सकती है कि मामला High Court और NCSC inquiry तक पहुंच जाए, तो यह समझना जरूरी है कि केवल यह कह देना कि:
“सबके लिए competition बराबर है, इसलिए reservation की जरूरत नहीं है”
पूरी social reality को explain नहीं करता।
Merit का मतलब केवल marks नहीं है।
Merit के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है
कि
•opportunity सबको बराबर मिली या नहीं
•evaluation impartial था या नहीं
• institutional environment discrimination-free था या नहीं
• historically disadvantaged students को वास्तव में समान अवसर मिला या नहीं।
VMMC‚Safdarjung का यह प्रकरण इसी बड़े सवाल की ओर ध्यान खींचता है।
Equality का अर्थ केवल एक जैसा treatment नहीं है बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाना भी है जिसमें discrimination और historical disadvantage के कारण कोई व्यक्ति पीछे न रह जाए। और शायद इसी वजह से reservation पर बहस करते समय केवल “Merit vs Reservation” की binary बनाना पर्याप्त नहीं है। हमें यह भी पूछना चाहिए
‘Merit तय करने वाली व्यवस्था खुद कितनी neutral और discrimination-free है?’
जय भीम 🌿
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@drjayeshkr@dr_adrenaline19
आरक्षण
आरक्षण का सिद्धांत कोई दान नहीं है‚
स्विस बैंक से लूटा कोई माल नहीं है।
सदियों से चली आ रही तुम्हारी
नीचता का प्रतिकार है ये ।
सर उठाकर माँगा जा रहा
कानूनी अधिकार है ये ।
हज़ार वर्षों की गुलामी‚
सैकड़ों लोगों की कुर्बानी‚
तुम्हारे ज़ुल्मों की निशानी–
शोषितों‚वंचितों‚पीड़ितों की ज़ुबानी
आग उगल रही कहानी सारी।
बद से बदतर की दास्तान है ये
टूटे सपने‚पीढ़ी-दर-पीढ़ी की पीड़ा‚
बंधी हुई ज़ंजीरों से निकलने का
गुलिस्ताँ है ये ।
दलितों-पिछड़ों का संवैधानिक अधिकार है ये‚
‘संघर्ष’ और घोर ‘तपस्या’ का परिणाम है ये।
बहुजनों का अभियान‚
महिलाओं का स्वाभिमान
और
Symbol of Knowledge,
Dr. Babasaheb Ambedkar
की जुबान है ये।
हज़ारों सालों के ज़ख्मों की भरपाई है ये
समाज की मुख्यधारा में जगह पाने का
एक मुकाम है ये।
एक दलित‚आदिवासी‚पिछड़े की
रोटी‚ कपड़ा और मकान है ये।
मुख्यधारा में आने का छोटा-सा ज़रिया है ये‚
और तुम्हारे पास आने का कानूनी प्रयास है ये।
अब मैं अपनी अंतिम बात कहना चाहता हूँ‚
इस पर गौर करें:
ज़हर पिया हमने सदियों तक‚
फिर भी हम ज़िंदा हैं।
रीढ़ की हड्डी तोड़ डाली तुमने‚
फिर भी नहीं तुम शर्मिंदा ।
सब कुछ तो छीन लिया तुमने‚
अब बचा थोड़ा-बहुत आरक्षण है‚
उस पर भी फन फैलाकर बैठे हो।
उसके बाद भी प्रश्न है
“आरक्षण कब तक?”
तो मैं बताता हूँ:
आरक्षण कब तक?
आरक्षण तब तक–
जब तक जाति व्यवस्था है‚
जब तक हम न पहुँचें तुम तक।
• मंदिर में मनुवादी व्यवस्था जब तक‚
• सर्वोच्च न्यायालय में कॉलेजियम जब तक‚
• छुआछूत मिट न जाए देश के हर कोने-कोने तक‚
• मैला ढोना बंद न हो तब तक‚
• बराबरी की भागीदारी न हो तब तक ।।
चलो आज एक सौदा करते हैं‚
वक़्त के पहियों को हज़ारों
साल पीछे ले जाते हैं।।
आरक्षण की अदला-बदली करते हैं
और बात यहीं पर ख़त्म करते हैं।
एक बात तो तय है‚मेरे दोस्त !
तुम एक दिन भी उस असहनीय
दर्द को झेल नहीं पाओगे।
एक ठोकर लगते ही
पल भर में ढेर हो जाओगे‚
परंतु आरक्षण को
क्षण भर में समझ जाओगे।।
जयभीम 🌿 जय संविधान
✍️ अज्ञात
#Reservation #bsp
14 अप्रैल सिर्फ एक तारीख नहीं है, ये उस महान व्यक्ति का जन्मदिन है जिन्होंने हमें बराबरी का हक और सम्मान दिलाया।🙏
जब भेदभाव अपने चरम पर था, तब उन्होंने शिक्षा को हथियार बनाया और व्यवस्था बदल दी।🌟
उन्होंने सिर्फ संविधान नहीं लिखा, बल्कि करोड़ों लोगों की किस्मत बदल दी।
रमज़ान के मुबारक/पवित्र महीने में एक महीना का रोज़ा और तरावीह आदि की इबादतों के बाद आज ईद-उल-फ़ित्र त्योहार के ख़ुशी की उत्तर प्रदेश व समस्त देशवासियों में भी ख़ासकर देश एवं दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुसलमान परिवारों को मेरी दिली मुबारकबाद तथा अन्य भारतीयों के साथ-साथ उन सभी के लिए भी अच्छी ज़िन्दगी की शुभकामनायें, जिसकी गारण्टी परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को दी है।
सभी लोग आपसी मेलजोल, भाईचारा, सौहार्द, संयम व सहनशीलता की परम्परा को बनाए रखने में अपना पूरा योगदान दें, ताकि देश में समतामूलक विकास की बात आगे बढ़े और यहाँ देश की ख़ुशी एवं ख़ुशहाली में सभी लोग उसके हिस्सेदार बनकर उस पर गर्व करें।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, आज उनकी जयंती पर मेरे व मेरे नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश भर में उनके अनुयायियों द्वारा शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिन्होंने परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की ‘सोच एवं मूवमेन्ट’ को पूरे देश में ज़िन्दा करके व उनके कारवाँ को आगे बढ़ाकर सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के मिशन हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करके लगातार कड़ा संघर्ष किया तथा जाति के आधार पर तोड़े और पछाड़े गये लोगों को ’बहुजन समाज’ की एकता में जोड़ने के उस ऐतिहासिक योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुये, बी.एस.पी. के ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट को तन, मन, धन से मज़बूत बनाने व पूरी ज़िद के साथ चुनावी सफलता अर्जित करने के संकल्प को दोहराया, जिसके लिए मैं पार्टी प्रमुख के रूप में, सभी लोगों का तहेदिल से आभार, धन्यवाद व शुक्रिया अदा करती हूँ।
साथ ही, यह आह्वान भी है कि ’बहुजन समाज’ के लोग ’बी.एस.पी. मूवमेन्ट से जुड़कर मिशनरी व ईमानदार अम्बेडकरवादी बने’ और अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा संविधान में देश के बहुजनों के हित, कल्याण, उत्थान तथा उनकी सुरक्षा व आत्म-सम्मान हेतु प्रदत्त अधिकारों को ज़मीन पर लागू करके वे भी, गुलामी और लाचारी के त्रस्त जीवन से मुक्ति पाकर, रोटी-रोज़ी-युक्त अच्छे दिन वाला ख़ुश एवं ख़ुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें, जो कि मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन व उनका जीवन संदेश भी है। धन्यवाद।
मैं किसी समुदाय की प्रगति उस समुदाय की महिलाओं की प्रगति के आधार पर मापता हूँ : - परम पूज्य बाबा साहेब
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ⭐🌹💫💐
"ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन को अन्न
, छोट-बड़ो सब सम बसै, रविदास रहे प्रसन्न"
संत रविदास जी की कामना ऐसी थी जँहा ऊंच नीच न हो, भेदभाव न हो, और किसी का अपमान न हो, कोई भूखा न रहे सब बरावर हो।
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं... 🙏💐🎉🥰🌹
1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है।
2. जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये।
3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
यूपी में मेरठ के सरधना थाना अन्तर्गत दलित माँ की हुई हत्या तथा बेटी के अपहरण की ताज़ा घटना अति-दुखद, शर्मनाक एवं चिन्तनीय। महिलाओं की इज़्ज़त-आबरू से खिलवाड़ और फिर हत्या आदि की घटनाओं को सरकार पूरी गंभीरता से लेकर दोषियों के खिलाफ तत्काल सख़्त कार्रवाई करे ताकि आपराधिक तत्वों को ऐसे घृणित कार्यों से आगे रोका जा सके। सरकार ख़ासकर महिला सुरक्षा के मामले में समुचित ध्यान दे।
आज की रात हमारे सुपरहीरो की आख़िरी रात थी। बाबा साहब बुद्धा एंड हिज धम्मा किताब पर काम कर रहे थे। देर रात तक काम किया और किताब को छाती पर रख हमेशा के लिये सो गये। नमन बाबा साहब 🙏🏾
भारतीय संविधान दिवस की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं...!
आइए अपने अधिकारों को समझें और कर्तव्यों को निभाएं। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि भारत सिर्फ एक देश नहीं, एक सोच है।
यह दिन संविधान के निर्माता डॉ.बी.आर.अंबेडकर, के योगदान को याद करने का अवसर है!
#Constitution
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी के कल 19वें परिनिर्वाण दिवस पर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वी.आई.पी. रोड पर बी.एस.पी. की सरकार द्वारा निर्मित किये गये विशाल व भव्य ’मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल’ में हुये महा आयोजन में अपने ख़ून-पसीने की कमाई से हर उम्र के आये लोगों में भी ख़ासकर युवाओं व महिलाओं की रिकार्ड तोड़ भीड़ व उनके जोश और उमंग के साथ-साथ यूपी के अगले चुनाव में अपनी बहनजी की पाँचवीं बार सरकार बनाने के लिये ज़िद के साथ काम करने के गगन चुम्बी नारों आदि के साथ व्यक्त किये गये दृढ़ संकल्प को देखकर विरोधी पार्टियों/संगठनों आदि की नींद व उनके नेताओं के होश उड़ जाना स्वाभाविक हैं और इस क्रम में इनकी बेतुकी बातें एवं बयानबाज़ी को महत्व ना देकर इनके बारे में कुछ ना कहा जाये तो यही बेहतर होगा।
वैसे भी ’बहुजन समाज’ के लोग अपने वोटों के बलबूते पर शोषित से शासक वर्ग बनकर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का सपना पूरा करने के लिए कितने तत्पर व संघर्षशील हैं इसकी स्पष्ट झलक कल उन लोगों ने यूपी सहित पूरे देश को दिखा दी है। अब उन्हें विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों से सजग व सावधान रहते हुये आगे अपने मिशन 2027 में पूरे तन, मन, धन से लग जाना है, यही संदेश।
साथ ही, कल मान्यवर श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर लखनऊ में हुये महा-आयोजन में, इनको अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ-साथ बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुनने के लिए यू.पी. के सभी 75 ज़िलों के गाँव-गाँव व शहर-शहर से बी.एस.पी. के लाखों-लाखों की संख्या में पार्टी के लोग पहुँचे थे जिनको सुरक्षित लाने व वापिस ले जाने में यू.पी. बी.एस.पी. यूनिट के हर स्तर के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों, नेताओं व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं आदि ने अपनी अहम् भूमिका निभाई है इन सभी की पार्टी बहुत-बहुत आभारी है।
इसके साथ ही, इस महा आयोजन में किसी न किसी रूप में उनके योगदान एवं भागीदारी के लिए पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकरियों, कार्यकर्ताओं, अनुयाइयों, शुभचिन्तकों आदि का पूरे तहेदिल से बहुत-बहुत आभार, शुक्रिया व धन्यवाद।
इसके अलावा, देश भर में उन सभी लोगों का भी हार्दिक धन्यवाद जिन्होंने अपने-अपने प्रदेश व ज़िलों में मान्यवर श्री कांशीराम जी को अपने-अपने हिसाब से कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया और उनके बी.एस.पी. मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प किया।
ये सुनते ही रोंगटे खड़े हो गए — अबकी बार आदरणीय बहन मायावती जी ने भी कह दिया है, “अबकी बार पाँचवीं बार बीएसपी की सरकार।”
उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा — “इसके लिए मैं अपनी पूरी ताकत लगा दूँगी, कोई कमी नहीं छोड़ूँगी। यह मेरा वायदा है पार्टी के लोगों से।”
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सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत, बासमसेफ, डी. एस. 4 व बसपा मूवमेन्ट के जन्मदाता एवं संस्थापक बहुजन महानायक मान्यवर साहब श्री कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि 🙏
भारत के प्रधान न्यायाधीश श्री बी. आर. गवई के साथ आज कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन पर अभद्रता करने की कोशिश अति-दुखद तथा इस शर्मनाक घटना की जितनी भी निन्दा की जाये वह कम है। सभी को इसका उचित व समुचित संज्ञान ज़रूर लेना चाहिये।
॥ बुद्धम् शरणम् गच्छामि ॥
॥ धम्मम् शरणम् गच्छामि॥
॥ संघम् शरणम् गच्छामि ॥
समस्त देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
भगवान बुद्ध की शिक्षा और उनके विचार संपूर्ण विश्व को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।
#budhapurnima#बुद्ध_पूर्णिमा