Javed Akhtar claims Sholay's temple scene where Lord Shiva and Hinduism were mocked can't be screened in today's India.
Wrong, Javed saab. You can screen it even today, just that in today's India, Hindus will ask you why you never had the guts to mock Allah or Islam similarly.
Barabanki, 2021. Gang rape is reported. FIR is filed without investigation. Accuser is given monetary compensation. Two men are arrested. One of them dies in jail. Four years later a court declares the entire case is fabricated.
A deep-dive into the SC/ST Act with @prasadaditi:
When Charu Majumdar, the leader of the first phase of Naxalite Movement 1967-73, went to China after Indira Gandhi’s govt annihilated the budding movement in Operation Crossbow, Zhou Enlai of China told Charu that “the reason for your failure is that you do not have your own leader as mascot of the revolution and people do not connect with Mao”.😂
Even today, the Leftists in India have not taken the lesson of Zhou and insist on invoking Mao whom even CCP seems to overlook now.
भाजपा: नेपोलियन के स्पेनिश अल्सर और हिटलर के स्टालिंग्रैड, दोनों से एक साथ जूझ रही है।🖋️
नेपोलियन बोनापार्ट और एडॉल्फ़ हिटलर की ऐतिहासिक ग़लतियों से आइए भारत की राजनीति को समझते हैं। दो फ्रंट पर लड़ने वाले कई बावन-वीर (या छप्पन-वीर) मुंह की खाते रहे हैं।
नेपोलियन को ब्रिटेन को निपटाना था तो उसने यूरोप में कांटिनेंटल सिस्टम लागू किया जिसके कारण फ्रांस को 1808 में पुर्तगाल और स्पेन पर हमला करना पड़ा। स्पेन ने फ्रांस के ख़िलाफ़ विद्रोह का बिगुल बजा दिया और देखते ही देखते चार साल में विद्रोह “स्पैनिश अल्सर” (Spanish Ulcer) का रूप धारण कर लिया।
बिना स्पेन और पुर्तगाल के फ्रंट को निपटाए, अचानक सन् 1812 में नेपोलियन ने दूसरा फ्रंट खोलते हुए रूस पर हमला बोल दिया और पहुँच गए मॉस्को तक। फिर जो हुआ उसका साक्षी इतिहास ख़ुद है। नेपोलियन बोनापार्ट के अंत की शुरुआत हो गई और वाटरलू ने उनकी किस्मत पर ताला जड़ दिया।
ठीक ऐसा ही कुछ हुआ एडॉल्फ़ हिटलर के साथ। हालांकि हिटलर को दो फ्रंट की समस्या का बोध था इसलिए ब्रिटेन और फ्रांस से उलझने के पहले हिटलर ने रूस से समझौता कर लिया था। पर बेल्जियम और फ्रांस को चुटकी में मसलने के बाद और ब्रिटेन पर भयंकर बमबारी से उत्साहित होकर, हिटलर दूसरा फ्रंट खोल देता है और स्टालिंग्रैड में रूस से उलझ जाता है। बस वहीं से उसके पतन की गाथा शुरू हो जाती है और अंत में उसे ख़ुद को एक बंकर में गोली मार कर जान देनी पड़ती है।
भारत की राजनीति को अगर धर्म और जाति के दो फ्रंट के हिसाब से देखें, तो साफ़ साफ़ दिखता है कि अभी धर्म के फ्रंट पर भाजपा ने कोई स्ट्रक्चरल जीत हासिल नहीं की थी, कोई समाधान नहीं दिया था, इसके बावजूद उसने जाति का फ्रंट खोल दिया। अब भाजपा, नेपोलियन के स्पेनिश अल्सर और हिटलर के स्टालिंग्रैड, दोनों से एक साथ जूझ रही है।
चलिए कारण बताए देता हूँ कि लोग इसे राजीव एक्ट न कहके मोदी एक्ट क्यों बोल रहे हैं।
क़ानून बना तो राजीव गांधी के कार्यकाल के आख़िरी दो महीने में लेकिन इस क़ानून को लागू किया 30 जनवरी 1990 को वी पी सिंह की सरकार ने जिसे भाजपा और वामपंथी दल समर्थन दे रहे थे।
खैर इसे जाने दीजिए। सच तो ये है कि इस कानून में शुरू से कुछ प्रावधान थे जो प्रोब्लेमाटिक थे, जिनका दुरुपयोग हो रहा था।
मोदी सरकार का दोष ये है कि आते के साथ 2014 में कंपनसेशन की राशि 2.5 लाख से 7.5 लाख कर दिया और फिर 2015-16 में 8.25 लाख कर दिया। साथ ही 2015 के अमेंडमेंट ने इस क़ानून को और पुख्ता बना दिया। इन सब कारणों से एससी एसटी एक्ट की एक अर्थव्यवस्था चल पड़ी।
इसके अलावे जब सुप्रीम कोर्ट ने इस क़ानून के प्रोब्लेमाटिक प्रावधानों को 2018 में निरस्त कर दिया तो बजाए इसके कि कुछ न किया जाता, सरकार ने इस क़ानून में 18A प्रावधान को जोड़ कर साफ़ साफ़ शब्दों में इसके प्रोब्लेमाटिक प्रावधानों को लिख दिया और राजीव गांधी के शाह बानो मसले की तरह कोर्ट को धत्ता बता दिया।
अब इस क़ानून में कंपनसेशन और बढ़ाने का प्रस्ताव है, इसे 12 लाख करने की बात चल रही है, दूसरी तरफ़ जातिवादी राजनीति की आँच तेज कर दी गई है जिसके कारण इस क़ानून का दुरुपयोग और होगा।
ऐसे में जो लोग इस क़ानून का दंश झेल रहे हैं वो इसे राजीव एक्ट की जगह मोदी एक्ट की तरह देखते हैं। और वो सही भी हैं। ये नाम चिपक गया है।
“उसके बाद क्या?”
वाला सवाल सही है। कोई भी व्यवस्था जो एक व्यक्ति की उपस्थिति पर इतनी निर्भर हो जाए कि उसके जाने के बाद अनिश्चितता बढ़ जाए, वह कमज़ोर विरासत छोड़ती है। मज़बूत विरासत वह होती है जिसमें संस्थाएँ, संघीय संतुलन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सामाजिक समूहों के बीच बातचीत के चैनल काम करते रहें — चाहे कोई भी सत्ता में हो।
ये अब भी वर्तमान परिस्थिति को चुनावी नज़रिए से देख रहे हैं। भई, बात चुनावों से बहुत आगे निकल चुकी है। मैं कोई चुनावी ज्ञाता नहीं, फिर भी कहूँगा, कि चुनाव तो कमोबेस आप सारे ही जीतोगे जबतक मोदी का नियंत्रण है। पर आपके लिए ज़्यादा ज़रूरी प्रश्न ये है कि उसके बाद क्या? विरोधाभासों से भरा साम्राज्य राजा के जाने की टकटकी लगाए रहता है। और आपने जो संतुलन बिगाड़ा है उसकी परिणति विनाश है।ऐसे में आप देश को भी राजनैतिक रूप से असुरक्षित बना कर जाओगे। यही आपकी विरासत होगी। तो मूर्खों! भारत को सिर्फ चुनाव की खूँटी पर टांग कर देखने से भविष्य सुरक्षित नहीं होगा, बल्कि सामाजिक संतुलन को संस्थागत तरीक़े से मज़बूत करने से होगा। पर वो समय तुम खो चुके, अब सिर्फ़ फायर-फाइटिंग ही बचा है। वही करो, और अपने ही थूक में डूब जाओ।
Smriti Irani DESTROYS Rahul Gandhi over his “Smash Patriarchy” remark 🔥
“What patriarchy do you want to smash in Hinduism?
– Ever heard of Nayiki Devi? She defeated Muhammad Ghori in Gujarat so badly he couldn't return for 13 years
– Rani Laxmibai rode into battle with a 2 kg sword and a baby tied to her back, leading an army of men
– Ahilyabai Holkar ruled as a widow from an ordinary caste
– 76 battles were fought across 500 years for Ram Janmabhoomi where caste didn't matter, and villagers gave up turbans and leather footwear
– You called us ‘terrorists’ to our face and coined ‘Hindu terror’. You want us to be apologetic?
– I am a Hindu woman married to a Parsi. My surname is Irani, yet nobody in the BJP questioned me
– I never breached a Parsi temple's boundary out of respect, while raising my children in my husband's faith
– Congress stopped Vande Mataram stanzas naming Maa Bhagwati & Lakshmi. Is Lakshmi ji from BJP?
– If you don't accept my Dharma, why flaunt your Gotra and visit temples?
– Ardhanarishvara, the divine balance of Shiva-Shakti, is our concept
– You mock our Gods and call us communal when we respond. You wouldn't dare do this to other religions”
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Hanuman Chalisa के हर एक शब्द के पीछे छिपे हैं कौन से गहरे राज?
Hanuman Ansh के Director Vishal Chaturvedi ने क्यों कहा, तुलसीदास जी से सीखनी चाहिए स्टोरीटेलिंग?
@RitikaChandola
While “cockroaches” are adding to the mess, the real Gen-Z are cleaning up! But I hope the local administrations and municipalities make sure these places remain clean!
It’s the least they can do! @PMOIndia@moefcc