Happy Friendship Day, India! 🇮🇱🤝🇮🇳
The strongest friendships are built on trust and standing by each other through every season. Today, we celebrate 34 years of friendship that have brought our people and nations closer together.
Here's to many more moments of togetherness. 💙
प्रधान ने त्यागपत्र दे दिया है। अब कॉकरोच क्या करेंगे? राहुल गाँधी अब कह रहा है कि कैबिनेट से ही हटा दो। फिर अब नई माँग हैं कि कमिश्नर माफी माँगे और पुलिस पर ही FIR की जाए।
साथ ही, हर दंगाई पर किया FIR निरस्त किया जाए चाहे वो प्रोटेस्टर छात्र थे या नहीं।
यह तमाचा जरूरी था सरकार के लिए। मुझे प्रसन्नता होनी चाहिए क्योंकि मैं सात महीने से शिक्षा मंत्रालय की बर्बादी पर लिख और बोल रहा था। पर मैं दुखी हूँ कि दंगाइयों के सामने सरकार कायरता से बिछ गई। फिर भी, परिस्थितियों के आलोक में अभिमान को पीछे रख कर समाज के हित में ही निर्णय है।
जब सरकार पुलिस का काम भी स्वयं करती है, तो यही सब होता है। मुझे याद है कि 19 दिसंबर 2019 को जामिया नगर का दंगा @DelhiPolice मे बंद करा लिया था, पूरा क्षेत्र खाली था। सरकार ने फिर अगले दिन उन्हें बैठने पर छोड़ दिया ताकि दिल्ली चुनाव में लाभ लिया जा सके।
इन सबमें एक बात और है। @RSSorg और @BJP4India के सौ से अधिक संगठन हैं, वीसी बनाए हैं, कला-विज्ञान की संस्थाएँ हैं जिसमें इन्होंने चेयरमैन बनाए हैं, वो हरामखोर कहाँ हैं? किसी ने एक लेख भी लिखा सरकार या विद्यार्थियों के पक्ष में?
वास्तविकता यह है कि आज की डेट में इस सरकार के पास न तो कोई संस्था है, न व्यक्ति। मोदी और शाह हर कार्य नहीं कर सकते। संस्थाएँ इसी दिन काम में आती हैं। अब आइटी सेल, चाटुकार गिनें कि कितने व्यू आ रहे हैं।
यह आरंभ है। जिस दिन पचास और सौ लोग थे जंतर मंतर पर, दिल्ली पुलिस के दो थाने और तीन बसें काफी थीं। आपने राम मंदिर की गर्मी से बचने के लिए उसे चलने दिया। पीएम के सलाहकारों पर यह प्रश्नचिह्न है कि वो स्थिति को समझ क्यों नहीं पाए?
सरकार को क्या सच में लगता है इथेनॉल का विषय दब जाएगा? राम मंदिर पर चर्चा नहीं होगी? सब होगी, समय
से होगी। जैसे कि शिक्षा पर चर्चा सात महीने से हो रही थी, लेकिन समय पर बवाल हुआ, जिसने भी किया।
राम मंदिर, इथेनॉल भी लौटेगा। यह यहाँ नहीं रुकेगा। सरकारी नकारेपन पर हर पार्टी रोटी सेंकेगी। मेरा दुख यह है कि अमृतकाल में त्यागपत्र दिया गया।
So this is how violence started.
Protesters attacked security personnel first.
To save him, other police officers came.
But international media and Marxist media will show only half the story.
When people lose expectations of any semblance of some justice, they have nothing but utter disdain for the courts. This is what most of us feel, but do not dare to utter because ultimately, we all have to see refuge of the very same institution.
देश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही दैनिक जीवन में गर्मी से होने वाली कई कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं। मैं सभी देशवासियों से आग्रह करता हूं कि जितनी अधिक सावधानी बरत सकें, अवश्य बरतें। कृपया स्वयं को हाइड्रेटेड रखें, घर से बाहर निकलते समय पानी साथ रखें। ऐसे मौसम में आपकी संवेदनशीलता भी बहुत बड़ा सहारा बन जाती है। यदि संभव हो, तो किसी प्यासे व्यक्ति को एक गिलास पानी अवश्य दें। मैं ऐसे लोगों की सराहना भी करूँगा जो अपने घरों के और दुकानों के बाहर मटके में जल रखते हैं ताकि कोई भी उनसे पानी पी सके।
A year ago, during #OperationSindoor, our armed forces showcased their valour and gave a firm response to those who attacked our people. Every Indian is proud of our armed forces. As a mark of respect to our forces and their success during #OperationSindoor, let us all change our display pictures on social media, including X, Facebook, Instagram and WhatsApp to the picture shared below.