रांका बोल रहा था कि यह स्वतंत्र युवा आंदोलन है, कोई राजनीतिक कनेक्शन नहीं। जबकि इसका इतिहास और वर्तमान कुछ और ही कहते हैं!
अब इस तिलचट्टे ने योगी जी को भी ललकार दिया है। आत्मविनाश की पटकथा लगभग पूरी हो चुकी है, बस देखना यह है कि कब्र में खुद उतरेगा, या तिलचट्टानरेश दिपके धक्का देगा।
अरे Sir आ गए आप आपका टाइम तो 8 बजे का रहता है, आप तो आज 12 बजे प्रकट हुए महाराज अच्छा आपको “मुसद्दा” भी मिल गया, मैंने तो सोचा आपको मसौदा मिला होगा, कोई बात नही।
ये फास्ट ट्रैक कोर्ट की नौटंकी आप न करें,
कोर्ट के सामने आपकी CBI सबूत ही नहीं रखेगी तो कोर्ट क्या कर लेगी?
आज ही आपकी CBI ने कहा “पेपर लीक में पकड़े गए संजीव मुखिया के ख़िलाफ़ कोई सबूत नही”
2024 पेपर लीक में तो आपकी CBI ने 90 दिन तक चार्ज शीट ही दाख़िल नही की और सार�� “पेपर चोर” छूट गए।
ऐसे कॉपी भरने वाले पैराग्राफ हम ने इंजीनियरिंग 1st ईयर में लिख-लिख कर छोड़ दिए। ये बक^दी अपनी पार्टी मीटिंग में किया करो, यहाँ नहीं।
भाषण नहीं, रिजल्ट चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लो।
और उसका नहीं ले सकते तो अपना दे दो।
राम राम🙏
मोदी ने तो अपनी ज़िंदगी जी ली।
दबा के मशरूम खाया, शिलाजीत खाया, विदेश घुमा, दबा के सेक्स किया और अपना हर शौक पूरा किया।
दिक्कत उसको होगी जो मोदी के बाद आयेगा।
मुझे नहीं लगता अब BJP/RSS पर कोई भरोसा करेगा।
Meksika’da bir akaryakıt istasyonu çalışanı, mola saatinde sokak köpeklerini yıkadığı gerekçesiyle işten çıkarıldı. Görüntülerin sosyal medyada yayılmasının ardından büyük tepki oluştu. Halkın boykot ettiği istasyon el değiştirirken, yeni işletme çalışanı geri almak istedi. Ancak o, bu sırada başka bir işe başlamıştı.
कुछ हिन्दू (सवर्ण) बेमतलब में भाजपा के एक तरफा आशिक बने रहते हैं:
>मोदी जी, कॉकरोचो�� को पेलो मोदी जी।
>इनका नैरेटिव मत चलने दो, मोदी जी।
>फलाना किया तो आप बैकफुट पर आ जाओगे, ढिमका किया तो आप हार जाओगे।
अरे हारने दो भाई। गांD मराए ये पार्टी और इनके नेता। तुमने ठेका लिया है क्या इनका? कुछ हिन्दुओं(खासकर सवर्णों) ने न जाने क्यों भाजपा को चुनाव जिताना शायद अपना धर्म मान लिया है।
इनको शायद भाजपा के वो 2012-13 वाले व्हाट्सएप/फेसबुक पोस्ट्स अब तक सच लगते हैं:
>भारतीय जनता पार्टी, हिन्दुओं की एकमात्र पार्टी।
>हिन्दू हृदय सम्राट नरेंद्र मोदी।
>They're not after me, they're after you. I'm just in the way.
>मु$लमान आ जाएँगे, सबको मार देंगे। तालिबान आएगा। हमको वोट दो। हम हिन्दुओं को बचाएँगे। हम ही मु$लमानों से लड़ सकते हैं।
😂😂😂
'बाप न मारी मेंढकी और बेटा तीरंदाज'
जो सुसरे नकल माफिया तक से लड़ नहीं पा रहे, मंदिर का दान का पैसा लूटे ले रहे, अपने कार्यकर्ताओं तक को बंगाल में मरने से बचा नहीं पाए थे। इनके भाड़े के टट्टे और आईटी सेलिए पूरे सोशल मीडिया पर गाते फिरते हैं कि ये हिंदुओं को IS-तालिबान और गज़वा-ए-हिन्द से बचाएँगे।
अजी मेरा🍆
चड्डीधारियों के बारे में सही कहा जाता है। जो, जब सबसे ज़्यादा पारवफुल लगता है ये उसके आगे झुककर पलट जाते हैं। इतिहास उठा लो:
-आजादी से पहले अंग्रेजों को बाप बनाया।
-आजादी के बाद खुद के आदमी ने जब गाँधी को मारा, और जवाब में कॉन्ग्रेस(पटेल) ने उस समय इनकी फाड़ी तो अपने ही आदमी से हाथ पीछे खींच लिया और धीरे-धीरे गाँधी को बाप बना लिया।
-आज जब भीमराव आंबेडकर की हवा चल रही है तो बाबा साहेब इनके नए बाप हैं।
लिखकर देता हूँ कि भारत पर कल को यदि IS-तालिबान या किसी भी इ$लामिक या ईसाई या यहूदी देश ने शासन स्थापित कर दिय�� तो नुन्नू छिलवाने की लाइन में चड्डी गैंग सबसे आगे खड़ा दिखेगा।
फिर भी पता नहीं क्यों कुछ लोग डिल्यूज़न में जीते हैं कि भाजपा खत्म तो हिन्दू खत्म। जैसे हिन्दुओं को रोटी यही दे रहे हैं, यही पाल रहे हैं। जबकि पाल तो हिन्दू इन्हें रहा है, टैक्स देकर-दान देकर।
80-90 के दशक या 1925 से पहले तो जैसे हिन्दू भूख�� मर रहा था। और कल को यदि ये हार जाएँ(जो कि गारंटी के साथ होगा) तो जैसे पूरा हिन्दू समाज सड़क पर आ जाएगा।
तो भाई बंद करो ये एक तरफा मोहब्बत, और अपने मुद्दे रीढ़ सीधी करके सामने रखा करो। इन्हें माई-बाप मानना बंद करो। भाजपा है तो हिन्दू नहीं है-हिन्दू है तो भाजपा है। सरदारों से ही कुछ सीख लो, फाड़ कर धनिया बो दिया दिया था इनके पूरे मंत्रिमंडल में with मिस्टर 56 इंची। मुँह पर थूका भी और माँगे भी मनवाईं।
'वोट तो आपको ही देंगे-काम आप से ही कराएँगे' वाली बकर बंद करो। माँगो को बाउंटी की तरह टेबल पर सामने रखना सीखो। जो पार्टी इन्हें पूरा करेगी उसे वोट मिलेगा। कोई नहीं करेगी, तो हम बैठेंगे घर या देंगे अपनी जात वाले को वोट, बात खत्म। जिसको भी हमारे घर बैठने से नुकसान होता हो, वो माँगें पूरी कर दे। ना तो जी राम-राम।
जब लगातार हारोगे तो आज नहीं तो कल घुटनों पर आना ही पड़ेगा।
और ये मु$लमानों का डर दिखाकर सवर्णों को हिन्दू एकता का चूरन चटाने वालों की पहले मारी जानी चाहिए। ये सब बकर काटने वाले आपको हमेशा सवर्ण ही मिलेंगे:
-'वो आजाएँगे, उनके लिए तुम सब काफिर हो'
>>अबे हाँ ठीक है ससुर। सुन लिया। 15-20 साल से सुन रहे हैं। अब जा, जाकर ये बक^दी दूसरे वाले काफिरों को सुना, वो वाले जो तुम्हें घास तक नहीं डालते।
आँखे खोलो भाई, मानसिक गुलामी बंद करो। भूरों की पार्टी की ��ुलामी करने के लिए गोरों से आजादी नहीं ली थी।
और सबसे पहले तो ये 'कॉकरोचों का नैरेटिव तोड़ो मोदी जी' का रुदाल बंद करो भाई। CJP आंबेडकरवादी-BJP और मोदी जी आंबेडकरवादी, वो दोनों भाई अपना देख लेंगे खुद।
तुम कौन-मैं खामखां।
गजब मजाक है।
Meat-eating Boomer. Eats eggs for breakfast, grilled chicken and veggies for lunch. Lives in a Bungalow and alternatively in multiple farmhouses and retreats in the countryside. Eats freshly grown vegetables and produce. Does not drink, doesn't smoke. Does not party. Early to bed, early to rise, makes a Man healthy, wealthy and wise. Fitness freak, exercises vigorously daily. Lives with entire family, never suffering from loneliness. Never did steroids. Result? Looks 20-30 years younger.
"आईएएस रिंकू सिंह की इस चिट्ठी ने ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा रखा है.. 6 पन्नों में सरकारी सिस्टम कि बखिया उधेड़ दी है उन्होंने.. ये चिट्ठी सबको जरूर पढ़नी चाहिए.."
आईएएस रिंकू सिंह राही जालौन में एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात हैं.. कुछ दिन पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.. किसी तरह वो बवाल शांत हुआ तो अब उन्होंने चिट्ठी लिखकर एक दूसरा बवाल खड़ा कर दिया है..
आईएएस रिंकू सिंह की इस चिट्ठी से साफ है कि सरकारी सिस्टम में ईमानदारी से काम करना कितना मुश्किल है..
वो लिखते हैं, आम जनता के हित और सरकारी कामों की निरंतरता के लिए मैंने कई मौकों पर व्यक्तिगत मान्यताओं और अंतरात्मा के प्रतिकूल व्यावहारिक संतुलन अपनाने का प्रयास किया.. विधायक गौरी शंकर वर्मा के साम��े डीएम ने आदेश दिया की तहसील क्षेत्र में अवैध कब्जों और अतिक्रमण के मामले में कोई कार्रवाई न की जाए..
इस आदेश की उपेक्षा की जगह मैंने बीच का रास्ता निकालते हुए सिर्फ प्राप्त शिकायतों पर ही नियमानुसार कार्रवाई शुरू की.. नतीजा ये हुआ कि शिकायतें बढ़ने लगीं.. और शिकायतों का फर्जी निस्तारण होने लगा..
रिंकू सिंह लिख रहे हैं कि जनपद क�� रैंक ऊपर रखने के लिए आईजीआरएस और एंटी भू माफिया के मामलों का फर्जी निस्तारण स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया.. इसका भी रास्ता मैंने निकाला, लेकिन मना कर दिया गया..
कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के नाम से अवैध कब्जे की जांच को लेकर ब्लॉक प्रमुख रामराजा निरंजन ने साजिश करके विवाद किया जिसके चलते मेरा तबादला कर दिया गया..
उन्होंने लिखा, ईमानदार पृष्ठभूमि वाले अधिकारी को जब ऐसे परिणाम का सामना करना पड़ सकता है तो अन्य अधिकारी और कर्मचारियों की स्थिति तो और भी चुनौती पूर्ण हो सकती है.
रिंकू सिंह ने पहले भी कहा था, काम नहीं तो वेतन नहीं.. अपने पत्र में उन्होंने लिखा, एसडीएम न्यायिक के तौर पर कोर्ट में उन्हें 2 घंटे काम करना होता है.. कोर्ट के बाहर फाइल्स को समझने और कानूनी कार्य करने के लिए चार घंटे और लग जाते हैं.. अगर रोज काम के 8 घंटे माने जाए तो भी यह 50 फीसदी ही है..
उन्होंने लिखा कि अभी ��ो आधा ही काम कर रहे हैं इसलिए उन्हें वेतन भी आधा ही दिया जाए..
रिंकू सिंह ने डीएम के जनता दर्शन की भी पोल-पट्टी खोली है..
उन्होंने लिखा कि जनता दर्शन में डीएम साहब के साथ बैठना होता है.. हालांकि, डीएम साहब शिकायतों के निस्तारण का दिखावा ही करते हैं जिससे अंतर्मन को ठेस पहुंचती है.. इसलिए डीएम साहब के साथ जनता दर्शन में समय गुजारना खुद को धोखा देना है..
उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब नौकरी के शुरुआती दौर में ही एक तहसील जैसे छोटे से प्रशासनिक क्षेत्र में नियमित एसडीएम के रूप में काम करने का मौका नहीं मिल रहा है तो आगे क्या मौके मिलेंगे!! वर्तमान हालात ऐसे है कि भविष्य में सीडीओ, नगर आयुक्त, डीएम जैसे पदों के लिए मेरी उपयोगिता के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकते हैं.
उन्होंने लिखा कि डीएम साहब ने मुझे एसडीएम न्यायिक के पद पर तैनात किया है, अगर मुझसे कोई गलती हुई हो.. जिसके लिए मैं जिम्मेदार हू�� तो मुझे नियमानुसार दंडित किया जाए.. और दंड की कार्रवाई पूरी होने के बाद अगर संभव हो तो उन्हें सीखने के लिए कैपेसिट�� बिल्डिंग के समान और पर्याप्त मौके उपलब्ध कराने के लिए जालौन की किसी तहसील में नियमानुसार एसडीएम के पद पर तैनाती के निर्देश दें..
अगर कोई तैनाती संभव न हो तो मेरा कैडर बदलने के लिए अनुमति और संस्तुति प्रदान करें..
उन्होंने चिट्ठी में लिखा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक 22 जुलाई 2026 से उन्हें आधा वेतन ही दिया जाए..
#IAS #SDM #Officer #Jalaun #Bureaucrats #Bureaucracy #Governance #Government #System #UttarPradesh #Letter
UP ke 5 sabse bade educationist ( who owns colleges ) Mai se 4 Samajwadi Party Mai hai aur ek BJP Mai hai who is SP sympathiser from past few months but inke colleges and schools pr bulldozer nahi Gaya
Wahi Azam khan ke university Mai pichle 5 saal se koi na koi building girayi jaa rahi just because he is Muslim while others are Yadav and UC
मैं शिक्षा से हिन्दू, कर्म से पारसी
औऱ दुर्भाग्य से मुसलमान हूँ।
- जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर
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मुगल बादशाह अकबर को वामपन्थी इतिहासकारों ने महान बादशाह चित्रित किया है। उनके विरोधी भी उन्हें शुद्ध गाजी, काफिर हन्ता, जिहादी , मन्दिर तोड़ू बादशाह बताते नही थकते।
लेकिन इतिहास के पन्नो को पलटें, तो कड़वी सचाई हमें बदायूंनी के लेखन में दिखाई देती है।
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जनाब अब्दुल कादिर बदायूंनी, जो जाहिर है बदायूं के रहने वाले इस्लामी स्कॉलर थे। अपनी क���ताब, मुंतखब उत तवारीख में अकबर की हकीकत बयां करते हैं। साफ बताते है कि अकबर सच्चा तो क्या, लेशमात्र भी मुसलमान नही था।
हुआ यह कि 1575 में अकबर ने इबादतखाना बनवाया, जहाँ वह धर्म कर्म पर उलेमाओं से चर्चा करता था। पर जल्द ही उसने विधर्मियो को बुलाना शुरू किया। उनकी बातों से प्रभावित हो गया।
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बदायूंनी कहते है कि अगले 5-6 साल मे उसमें इस्लाम का नामोनिशान न बचा। वह थोड़ा थोड़ा क्रिश्चियन हो गया।
य���रोपीय पादरियों से मिलकर उनके विचारों को सुनने लगा। बुलंद दरवाजे पर उसने बाईबल के एक वाक्य को, फ़ारसी में लिखवा दिया। जो आज भी देखा जा सकता है।
पादरियों द्वारा गॉस्पल प्रस्तुत करने पर शहजादा मुराद को उसे सीखने का आदेश दिया, और अबुल फजल को उनका फारसी अनुवाद करने कहा।
थोड़ा पारसी भी हो गया। उसने नौसारी गुजरात से आए पारसियों से अग्नि पूजा सीख��। महल में एटर्नल फायरप्लेस बनवाया और हमेशा जलती आग की देखभाल के लिए फुल टाइम कर्मचारी रखे।
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हिन्दू तो वह पूरा हो गया।
बीरबल ने उसे सूर्य पूजा की सलाह दी। अग्नि, जल, पत्थर, वृक्ष और गाय-गोबर की वंदना का सुझाव दिया। बदमाश अकबर रोज सुबह पंचमहल की छत पर सूर्य उपासना से दिन की शुरूआत करता।
माथे पर तिलक लगाना, ब्राह्मणों द्वारा राखी/रक्षासूत्र बंधवाना और अन्य हिंदू प्रथाएं अपनाने लगा। एक हिन्दू औरत से ब्याह कर लिया। और उससे पैदा दोगले बच्चे को युवराज बना दिया।
इतिहास गवाह है कि उस लड़के (जहांगीर) ने भी आगे चलकर हिन्दू महिला से ब्याह किया, और उसके लड़के (शाहजहाँ)को युवराज बना दिया। एक 75% हिन्दू - इस्लामी राज्य का बादशाह बनना, लानत की बात है।
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बहरहाल, राजकाज में भी अकबर इस्लामी मान्यताओं की खूब अवहेलना की। बदायूंनी बताता है, कि उसने गाय की ��त्या और गोमांस खाने पर प्रतिबंध लगवा दिया।
विभिन्न धर्मों के लिए अलग-अलग भवन बनवाये, मगर हिंदू साधुओं के लिए तो पूरा "जोगीपुरा".स्थापित करवा दिया। हिन्दुओ के तुष्टिकरण के लिए जजिया बन्द करवा दिया। इससे फिस्कल डेफिसिट में वृद्धि हुई।
नववर्ष के त्योहार पर सूर्य और अग्नि के सामने सार्वजनिक रूप से सिर झुकाना और दरबारियों को दीपक जलने पर खड़े होने का आदेश निकलवाया। क्या इस्लाम को मानने वा��े किसी बादशाह को ऐसा करना चाहिए?
नही न। लेकिन रुको जरा..
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अभी और सुनिए। वह हिन्दू समर्थक ही नही, इस्लाम विरोधी भी बन गया। पहले सूफियों के चक्कर मे पड़ा। मुल्ला मोहम्मद यज्दी की संगत में उसका इस्लाम दूषित हो गया था। पैगंबर मुहम्मद के सहाबा पर आक्षेप और निंदा को भी सुन लेता था।
बदायूंनी को बड़ी खीज हुई, जब उसने देखा कि अकबर पैगंबरत्व चमत्कारों, शरीयत और रहस्यो��्घाटन पर संदेह करने लगा। जल्द ही पुनरुत्थान (resurrection), कयामत (Day of Judgment) और पैगंबर की परंपराओं (traditions) से भी उसकी आस्था डिग गई।
परम् पूज्य बदायूंनी जी, बेहद दुख से लिखते हैं अकबर राजकाज में उलेमाओं की ज्यादा नही सुनता था। हिन्दू मंत्री घेरे रहते। उसकी हिंदू साधुओं और ब्राह्मणों के लम्बी लम्बी निजी मुलाकातें होती। जो हिंदू धर्म की सच्चाई और अन्य धर्मों की झूठाई साबित करते थे।
जिससे मूर्ख अकबर प्रभावित हो जाता था।
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उसके धर्मद्रोह की पराकष्ठा यह थी कि उसने उलेमाओ से यह हस्ताक्षर करवा लिया कि बादशाह धार्मिक फैसला सर्वोच्च है। याने राज्य, अब धर्म से ऊपर हो गया।
भारत मे यह सिकुलरिज्म की घटिया शुरुआत समझिए। बदायूंनी को पसन्द नही आया, क्योकि राजकाज में मौलवी, उलेमा की भूमिका कमजोर हुई। और फिर वो समय भी आया, जब अकबर ने इस्लाम से सबसे बड़ा द्रोह कर डाला।
उसने दीन �� इलाही की स्थापना कर दी-नया धर्म
जिसमे थी-एकता, समानता, भाईचारा, न्याय!!!
व्हाट नॉनसेंस??
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अरे भई, एक राजा का काम तो धर्म की रक्षा करना है। और सरकार का काम धर्म का पालन करवाना है। राजा हिन्दू है तो हिन्दू हित मे काम करे।
वह मुस्लिम है,
तो मुस्लिम हित मे काम करे।
वो दूसरे धर्म वालो के हित क्यो देखे। होंगी और धर्म मे कुछ अच्छाई, लेकिन सीख क्यो ले?? उनकी इज्जत क्यो करे??राजा को चाहिए कि अपने धर्म क�� तमाम बुराइयों पर आंख फेरे, खुर्दबीन से देखे की दूसरे धर्मों मे क्या क्या बुराई है।
फिर लोगो को पीट पीट कर उन बुराइयों को ठीक करवाये।और अपने वाले पंडे पुजारी/मौलवी उलेमा को सपोर्ट करे। आखिर वो लोग जिस दिन सत्ता में आये, तो यही नही करेंगे क्या??
ये पैराग्राफ बदायूंनी ने नही लिखा।
संघियो ने लिखा है।
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ऐसा नही है, कि बदायूंनी अकबर की राजनीतिक उपलब्धियों का सम्मान नही करते थे। अकबर ने बांध बनवाये, इसरो बनवाया, आईआईटी आईआईएम और पीएसयू बनवाये। इस देश मे एक नई सल्तनत की नींव रखी।
वेल एन्ड गुड!!
लेकिन धर्मिक भावनाओ का क्या?? अकबर को अपने धर्म वालों को विशेष सुविधा देनी चाहिए थी। राजकाज धार्मिक कट्टरता, शरिया और शुद्ध इस्लाम के आधार चलाना चाहिए था।
ये एकता, समानता, भाईचारा, न्याय.. सब बेकार की बाते आखिर सहने योग्य तो हैं नही।
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लेकिन राजा तो अकबर था।
सहना पड़ा।
बदाय���ंनी महान इतिहासकार थे। तो उन्होंने यह सब सत्य इतिहास अपनी किताब के दूसरे खण्ड मे लिखा, जब अकबर, सेफली और साउंडली, मर चुके थे।
बेस्ट सेलिंग के लिए बदायूंनी ने किताब के बैक कवर पर, एक वाक्य अकबर के मुंह से कहलवा दिया- जो असल मे उन्होंने कभी कहा नही था-
मैं शिक्षा से हिन्दू, कर्म से पारसी
औऱ दुर्भाग्य से मुसलमान हूँ।
- जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर
हनुमान जी के चरणामृत से नवाब के बीमार बेटे को चंगा करने वाले बाबा अभयरामदास को अयोध्या में हनुमानगढ़ी का निर्माण करने हेतु अवध के नवाब शुजाउद्दौला ने ५२ बीघा जमीन दान में दी थी। ये धार्मिक अनुदान "मदद-ए-माश" के नाम से अवध के राजकीय अभिलेखों (शा���ी फरमानों) में दर्ज है।
"मैं अखिलेश यादव जी से माफ��� मांगता हूं... मेरे पास टिन्नू यादव और अखिलेश जी की बातचीत के कोई तथ्य नहीं हैं"
◆ अमित भारद्वाज नाम के शख्स ने वीडियो जारी कर मांगी माफी
#Rammandir | Tinnu Yadav | Akhilesh Yadav | Chandachori
• राजस्थान के व्यापारी दिलीप सिंह राठौड़ के पास पत्थर की खदान के ठेके हैं
• दिलीप सिंह राठौड़ का कहना है कि मैं राम मंदिर के लिए मुफ्त में पत्थर देने के लिए तैयार था
• राम मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों ने उनसे पत्थर लेने से मना कर दिया और फिर 500 रुपए स्क्वायर फिट के दाम पर पत्थर खरीदे गए
• L&T ने कहा था कि हम 1 रुपए में मंदिर निर्माण कर देंगे, तो फिर निर्माण में 2100 करोड़ रुपए कै��े लग गए?
• आज ट्रस्ट दान के आभूषण दिखा रहा है, लेकिन सवाल है- बाकी छोटे-छोटे आभूषण कहां हैं, सिंधी समाज की तरफ से दी गईं 200 किलो चांदी की ईंटें कहां है?
• निर्मोही अखाड़े ने मंदिर आंदोलन के समय कहा था कि VHP के लोग 1,500 करोड़ रुपए का चंदा खा गए, वो कहां है?
नरेंद्र मोदी, BJP-RSS ने सबसे बड़ा पाप तो यह किया कि ट्रस्ट को राजनीतिक अड्डा बना दिया और उसमें धर्माचार्यों को नहीं रखा।
शायद ट्रस्ट में धर्माचार्यों को इसलिए भी नहीं रखा गया, क्योंकि इन्हें लूट करनी थी।
: @ssrajputINC जी
📍 दिल्ली
ट्रेन में सुहागरात का आइडिया सीरियसली कोई बुरा नहीं।
कमर्शियल तौर पर इसे प्रमोट किया जा सकता है।
कई बारातें ट्रेन से आती जाती हैं तो इसमें बुराई क्या है?
जब आप महाकुंभ जैसे धार्मिक आयोजन में लक्जरी सूट सरकारी तौर पर उपलब्ध कराते आए हो, गंगा में क्रूज़ पिकनिक करवा रहे हो तो ट्रेन में सुहागरात के कॉन्सेप्ट पर इतने नाराज क्यों हो?
इसमें कुछ भी बुरा नहीं है।
गोरखपुर में स्कूल जाने से ब��ने के लिए 12 साल के बच्चे ने किडनैप होने का ड्रामा किया। गर्मियों की छुटि्टयां खत्म होने पर मां अपने बेटे को लेने नानी के घर पहुंची। मंगलवार रात करीब 10 बजे मां, बेटे और अपने भाई के साथ बाइक ससुराल लौटने लगी।
ननिहाल से करीब 100 मीटर आगे बढ़ते ही बच्चा जोर-जोर से चिल्लाने लगा। कहने लगा- मेरा किडनैप हो गया है। मुझे बचाइए। बाइक पर जो आदमी और औरत बैठे हैं, ये किडनैपर हैं। मुझे किडनैप करके लेकर जा रहे है��।
बेटा करीब 5 किलोमीटर तक यही चिल्लाता रहा। उसका शोर सुनकर राह चल रहे लोग और घरों की महिलाएं बाहर आ गईं। उन्होंने पुलिस को सूचना दे दी। बच्चे के किडनैप की जानकारी होने पर 2 थानों की पुलिस ��ौड़ पड़ी। सीसीटीवी देखते हुए पुलिस रात करीब 1 बजे एक घर में पहुंची।
जहां बच्चा मिला, उन लोगों से पुलिस ने पूछताछ की। बच्चे से भी बात की। बच्चे ने बताया- मेरा पढ़ाई में मन नहीं लगता। घर जाता, तो वहां मुझे पढ़ना पड़ता। इसीलिए मैंने चिल्लाया। मुझे नानी के घर जाना है, मम्मी-पापा के घर नहीं रहना। इसके बाद बच्चे को नानी के घर भेज दिया गया। मामला चिलुआताल थाना क्षेत्र का है।
पढ़िए, लॉरेंस बिश्नोई पर अमरीका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने क्या आरोप लगाए हैं -
1 जुलाई को एक अमेरिकी अदालत (फेडरल ग्रैंड जूरी) द्वारा दायर किए गए एक आरोप-पत्र के अनुसार, भारत के पंजाब का रहने वाला 33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई लंब�� समय से भारत की जेल में बंद एक गैंगस्टर है। अपराध की दुनिया में आने से पहले वह खुद को यूनिवर्सिटी का छात्र नेता बताता था, लेकिन बाद में राजनीति से ऊबकर उसने और उसके साथियों ने जुर्म का रास्ता चुन लिया।
जनता के सामने बिश्नोई ने सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों के इंटरव्यू के ज़रिए खुद को एक "देशभक्त", "राष्ट्रवादी" और बहुत ही धार्मिक इंसान के रूप में पेश किया। उसने अपनी इस छवि का इस्तेमाल भारत, अमेरिका और अन्य देशों में अपने क्राइम सिंडिकेट में नए लोगों को शामिल करने के लिए किया।
लेकिन गुपच���प तरीके से, बिश्नोई एक बहुत बड़े आपराधिक नेटवर्क को चला रहा था जो कई महाद्वीपों में फैला हुआ था। जेल की अपनी कोठरी में छिपाकर लाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग डिवाइस का इस्तेमाल करके, बिश्नोई ने दुनिया भर में अपने गिरोह के लोगों से राजनेताओं की हत्या, मर्डर, गोलीबारी, जबरन वसूली (हफ्ता ��सूली), अपहरण, ड्रग्स की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य अपराध करवाए।
सितंबर 2025 में कनाडा सरकार ने बिश्नोई के गिरोह को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था।
अपने गिरोह के रोज़मर्रा के कामकाज को संभालने के लिए, बिश्नोई ने अपने भरोसेमंद साथियों और क्षेत्रीय नेताओं को ज़िम्मेदारी सौंपी। इनमें बिश्नोई गिरोह का उत्तरी अमेरिका का लीडर 32 वर्षीय सतिंदरजीत सिंह उर्फ "गोल्डी बराड़" (पंजाब, भारत), यूरोप का लीडर 37 वर्षीय रोहित गोदारा (राजस्थान, भारत) और 58 वर्षीय सुखराज सिंह कांग (पंजाब, भारत) शामिल थे। बराड़ और गोदारा बिश्नोई के इशारे पर ही काम करते थे और उन्होंने ही अमेरिका, कनाडा व अन्य देशों में गिरोह के लोगों से हिंसक घटनाओं को अंजाम दिलवाया।
इस गिरोह ने अमेरिका सहित हर उस देश में हिंसक वारदातों को अंजाम दिया जहाँ वे सक्रिय थे। उन्होंने खासकर भारत और दुनिया भर में रहने वाले भारतीय समुदायों क�� बीच डर का माहौल पैदा करने के लिए हिंसा का सहारा लिया। गिरोह ने ऑनलाइन वीडियो और इंटरनेट पोस्ट के ज़रिए अपने अपराधों का प्रचार करके लोगों को डराया और उनसे जबरन पैसे वसूले।
आरोप-पत्र में जिन अपराधों का ज़िक्र है, उनमें भारत के पंजाब राज्य के एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता की हत्या भी शामिल है। (ध्यान रहे कि आरोप पत्र में इस नेता का नाम H.S.N. लिखा है - जिसका मतलब हरदीप सिंह निज्जर लगाया जा रहा है) हत्या के समय वे कनाडा में रह रहे थे। बिश्नोई और बराड़ पर इस हत��या का आदेश देने का आरोप है। यह घटना 18 जून, 2023 को हुई थी, जब ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक सिख गुरुद्वारे से बाहर निकलते समय दो बंदूकधारियों ने गोली मारकर H.S.N. की हत्या कर दी थी।
आरोप-पत्र के अनुसार, यह गिरोह अक्सर प्रमुख धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाता था, और इन बड़ी घटनाओं का इस्तेमाल लोगों को डराने तथा उनसे पैसे ऐंठने के लिए करता था। उदाहरण के लिए, नवंबर 2023 में बिश्नोई ने कना��ा के वैंकूवर में एक मशहूर भारतीय अभिनेता और गायक के घर प�� हुई गोलीबारी की ज़िम्मेदारी ली थी। उसने एक फेसबुक पोस्ट में पंजाबी में चेतावनी दी थी, "तुम्हें हमसे कोई नहीं बचा सकता।"
बिश्नोई, बराड़, गोदारा और अन्य लोग व्हाट्सएप व अन्य मैसेजिंग ऐप के ज़रिए पीड़ितों या उनके परिवारों को जान से मारने की धमकी देकर पैसे वसूलते थे। उदाहरण के लिए, बिश्नोई, बराड़, गोदारा और अन्य आरोपियों ने लॉस एंजिल्स और थाउजेंड ओक्स में पीड़ितों से पैसे ऐंठने की कोशिश की, और ��िसंबर 2025 तथा जनवरी 2026 में एक पीड़ित से 50 लाख डॉलर (लगभग 41 करोड़ रुपये) की मांग की।
जबरन वसूली के अलावा, बिश्नोई का गिरोह अपने कामों के लिए पैसा जुटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स (नशीले पदार्थों) की तस्करी करता था और विरोधी गिरोहों के ड्रग्स भी चुराता था। उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 में बिश्नोई और बराड़ की देखरेख में 49 किलोग्राम कोकीन भेजी जा रही थी, जिसे रेडलैंड्स में पकड़ लिया गया। इसे ट्रक��ं के ज़रिए अमेरिका से कनाडा भेजा जाना था।
मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच, बिश्नोई ��िरोह ने लॉस एंजिल्स इलाके में अपने विरोधी ड्रग तस्करों से कुल लगभग 520 किलोग्राम कोकीन चुराई थी।
आरोपों में बिश्नोई, बराड़, गोदारा और छह अन्य आरोपियों पर संगठित अपराध (रैकेटियरिंग) की साजिश रचने, जबरन वसूली के ज़रिए व्यापार में बाधा डालने, जबरन वसूली के छह बार प्रयास करने और कोकीन व मेथामफेटामाइन की तस्करी की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।