श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में स्टे वैकेशन के लिए प्रयास जारी हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि शीघ्र ही आगे की कार्रवाई होगी और न्यायपूर्ण समाधान प्राप्त होगा। हम पूरी निष्ठा से संघर्षरत हैं।
#वंदेमातरम् राष्ट्र गीत ही नहीं, यह करोड़ों राष्ट्रभक्तों के गले का हार रहा है। ब्रिटिश क्राउन के पीछे चलने वाले ही इससे दूरी बना सकते हैं। कोई भी देशभक्त भारतीय इस गीत को नहीं भुला सकता। यह उसके हृदय में बसा हुआ है।
स्वतंत्रता सेनानी:
जेल भेज दो… फाँसी पर चढ़ा दो… लेकिन ‘वंदे मातरम्’ नहीं छोड़ेंगे।
कांग्रेस नेता:
फाँसी पर चढ़ा दो… जेल भेज दो… लेकिन पूरा वंदे मातरम् नहीं गाऊँगा।
तब वंदे मातरम् के लिए फाँसी मंज़ूर थी,
आज फाँसी पर भी वंदे मातरम् मंज़ूर ���हीं।
14 अगस्त 1947 का दिन इतिहास के उस क्रूरतम अध्याय का साक्षी है, जिसमें अमानवीय पीड़ा स��ते हुए लाखों लोगों को अपना जीवन गंवाना पड़ा और करोड़ों लोगों को घर, संपत्ति व अपनों को छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। देश के बँटवारे का यह दंश, जो कांग्रेस की देन है, उसे इतिहास कभी भूल नहीं पाएगा। इस विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले और अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष करने वाले सभी लोगों को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।
मोदी सरकार #PartitionHorrorsRemembranceDay के माध्यम से इस त्रासदी की स्मृतियों को युवा पीढ़ी तक पहुँचा रही है, ताकि देश को फिर से तोड़ने वाली ताकतें कभी सफल न हो सकें और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ ही हमारा सर्वोच्च ध्येय बने।
कल नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं भारत की विदेश नीति पर जो टिप्पणी की है, वो अत्यन्त निम्नस्तरीय और निन्दाजनक तो है ही, साथ ही मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत पीड़ा देने वाली भी ���ै।
अपने लम्बे राजनैतिक जीवन में, मैंने किसी भी नेता प्रतिपक्ष को, चाहे वो सुषमा जी या अरूण जेटलीजी रहे हो, अथवा अटल जी और आडवाणी जी रहे हो, या फिर अटलजी की सरकार में डॉ. मनमोहन सिंह हों या सोनिया गांधी जी रही हो, ऐसा अशोभनीय आचरण कल्पना से परे था।
ऐसा आचरण भारत में स्वस्थ्य लोकतंत्र के लिए, एक गंभीर खतरे का संकेत है। राहुल गांधी जी के मन में, प्रधानमंत्री जी के प्रति चाहे जितनी भी कुण्ठा भरी हो, ऐसी अभद्र टिप्पणी सर्वथा अस्वीकार्य है। विशेषकर तब जबकि मोदीजी के रूप में एक ऐसे प्रधानमंत्री, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया और विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त किया, ऐसे नेता के प्रति ऐसी अभद्र टिप्पणी, हर भारतीय के मन को, अन्दर से कष्ट देने वाली है।
मैं कांग्रेस पार्टी से यह भी कहना चाहूंगा, कि ऐसी भाषा और आचरण के बाद, क्या वे लोग अब, लाल, बाल, पाल से लेकर गांधीजी नेहरूजी, सरदार पटेल, सुभाष बाबू, राजेन्द्र बाबू से लेकर शास्त्री जी, नरसिम्हा राव जी से लेकर प्रणव मुखर्जी जी तक जैसे वि���ाट व्यक्तित्वों की विरासत का दावा कर सकते हैं?
मैं कह सकता हूं कि, आज इस आचरण से राहुल गांधी ने न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदीजी का अपमान किया है बल्कि भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का अपमान किया है, लोकतंत्र और नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को तार-तार कर दिया है। मैं तो यह कल्पना भी नही कर सकता कि जिसके नाम के आगे गांधी शब्द लगा हो, वह ऐसा शर्मनाक बयान दे सकता है!
विभाजन की पीड़ा और विस्थापन का दर्द देश के इतिहास ��ें आज भी अंकित है।
#PartitionHorrorsRemembranceDay पर इस त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वालों और विस्थापन का दंश झेलने वाले सभी लोगों को विनम्र नमन। आइए, उनकी स्मृति में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लें।
विभाजन की पीड़ा और विस्थापन का दर्द देश के इतिहास में आज भी अंकित है।
#PartitionHorrorsRemembranceDay पर इस त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वालों और विस्थापन का दंश झेलने वाले सभी लोगों को विनम्र नमन। आइए, उनकी स्मृति में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का संकल्प लें।
■ शब्द दूषित तो आस्था दूषित।
■ आस्था दूषित तो समाज दूषित।
■ समाज दूषित तो पराजय और गुलामी ही अंतिम नियति।
हाल ही एक वीडियो देख रहा था। अस्सी वर्ष की आयु में एक व्यक्ति ने पहली बार #समंदर के दर्शन किए। लेकिन उन बुजुर्ग के भाव अनुभव कीजिए। पैरों से समंदर के जल को स्पर्श नहीं किया। पहले साष्टांग प्रणाम किया।
फिर जल लेकर ��ाथे से लगाया।
बुजुर्ग के लिए समंदर दर्शन #तीर्थाटन था। साथ वीडियो बना रहे नाती या पोते के लिए संभवतः #पर्यटन।
आभार आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण जी। जीवन के इस पड़ाव पर आकर पहली बार जाना..
■ देशाटन
■ पर्यटन
■ तीर्थाटन
का अंतर।
पत्रकारिता में रहते रिपोर्टर्स से कहा करता था, "..क्या हुआ मेरा मित्र #कलेक्टर है? वह कलेक्टर तो अपन #एडिटर ..दोनों #टर्र_टर्र..! वह अपने #टर्र का धर्म निभाए। मैं अपने #टर्र ��ा.. लिखो खबर। "
अब मेरे जीवन में एक और #अटन जुड़ गया है...#भिक्षाटन। सबसे मुश्किल और दुसाध्य कर्म।
@Ramayatan_ प्रणाम स्वीकार करें।
राहुल गांधी की ऐसी हरकत पर कोई आश्चर्य नहीं क्योंकि वो ये सब करके गालीबाज़ों का नेता बनना चाह रहे..
आश्चर्य ये है कि देश में जनसमर्थन के बावजूद BJP और कब तक राहुल गांधी को ऐसेट की तरह यूज़ करने के लिए ये सब बर्दाश्त करती रहेगी
BJP वोटर्स को भी ये सब कमजोरी की निशानी लगने लगी है।
14 अगस्त 1947 — भारत के इतिहास का वह काला अध्याय, जब विभाजन की त्रासदी ने अखंड भारत की आत्मा को गहरी चोट पहुँचाई। सत्ता और स्वार्थ से प्र��रित मजहबी उन्माद ने देश को रक्तरंजित कर दिया। लाखों निर्दोषों की निर्मम हत्या हुई, करोड़ों लोग अपने घर, जमीन और जड़ों से उजड़ने को विवश हुए तथा असंख्य परिवारों ने अपनों को हमेशा के लिए खो दिया।
��ह केवल सीमाओं के बंटवारे की कहानी नहीं थी, बल्कि मानवता के सबसे भयावह विस्थापनों और त्रासदियों में से एक थी। विभाजन का घाव समय के साथ भले ही दिखाई न दे, लेकिन उसकी पीड़ा आज भी भारत की सामूहिक स्मृति में जीवित है।
विभाजन की उस विभीषिका को कभी भुलाया नहीं जा सकता और न ही उन परिस्थितियों को, जिन्होंने भारत की हजारों वर्षों पुरानी सामाजिक-सांस्कृतिक एकता को लहूलुहान किया।
‘विभाजन विभीषिका स्���ृति दिवस’ पर उन सभी हुतात्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने इस अमानवीय त्रासदी में अपने प्राण गंवाए। साथ ही उन करोड़ों विस्थापित परिवारों के संघर्ष, साहस और अदम्य धैर्य को सादर नमन।
पत्रकार कर्म से सन 1998 में श्रीनगर गया था। @BSF_India के एवरो प्लेन से। जिसमें रोल्स रॉयस के इंजन लगे हुए थे। कुछ साल पहले यह प्लेन दिल्ली एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। संभवतः अपनी तरह का आखिरी विमान था भारत के पास।
खैर, कश्मीर में BSF के ऑफिसर्स मेस #पन्था_चौक पर ठहरा। लॉन में घूमने से मना कर दिया गया। सामने बहती झेलम घ��मने पर तो बिल्कुल मनाही थी। कमरे में रहिए।
बाहर निकलें तो बुलेट फ्रूफ जिप्सी और साथ में हथियारों से लैस जवान। कमांडेंट लेबल के एक अधिकारी।
बताया गया, "...आपका मूवमेंट दिल्ली मुख्यालय से तय हो रहा है।" कारण पूछा तो बताया, "...आप एवरो से आए, आर्मी एअरपोर्ट उतरे। फिर जवानों की सुरक्षा में बुलेट फ्रूफ जिप्सी से यहां तक आए। #आतंकवादियों के निशाने पर हैं आप।"
डल गए घूमने। चार चिनार जाने का इरादा था। वहां बना बंगला भी सिक्युर��टी फ़ौज के नियंत्रण में। जब हम चले तो मेरे शिकारे पर बीएसएफ के चार जवान। चारों के हाथों में AK-47..! मेरे शिकारे के आगे-पीछे दो शिकारों पर सुरक्षा आठ जवान। सबके हाथ में AK-47.
किस्से बहुत हैं। पर आज #डलझील का दृश्य देख महसूस हो रहा है, जिस #कश्मीर में मैँ गए थे, वह इस #भारत में नहीं था।
कैसे धन्यवाद ना बोलूं प्रधानमंत्री @narendramodi को? कैसे कृतघ्न हो जाऊं #भारतीय_सेना के प्रति?
खासकर आज जब भारत के लिए #विभीषि��ा_दिवस है। मजहबी उन्माद और चंद नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर मारे गए लाखों निर्दोषों की #नरसंहार की कुस्मृति का दिन। तीस लाख हिन्दू, जो महज संख्या बनकर रह गए। इनका नाम, गांव, जाति और पंथ, कहीं दर्ज नहीं।
जिन्होंने भारत के निकट अतीत को भी नहीं देखा, वो क्या समर्पण करेंगे, स्वयं को ��ारत भूमि के चरणों में?
��िस ढंग से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विदेश नीति की बात करते हुए अपने ही दल के नेता को गले लगाते हैं और उसके बाद एक स्वतंत्र एवं संप्रभु राष्ट्र की महिला प्रधानमंत्री के लिए गलत भाषा का प्रयोग होता है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पूरी दुनिया की माताओं-बहनों का अपमान है।
हमारे युवा साथी देश का भविष्य ही नहीं, वर्तमान की सबसे बड़ी शक्ति भी हैं। उन्होंने अपनी संवेदनशीलता, सेवाभाव और सामर्थ्य से दुनियाभर में अलग पहचान बनाई है।
चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्।
प्रसादयति यो लोकं तं लोकोऽनुप्रसीदति।।
80 वर्ष की भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री को सार्वजनिक रूप से इतने अपमानजनक तरीके से संबोधित कभी नहीं किया गया, जितनी बदतमीजी और उदंडता से यह 56 बरस का अधेड़ करता है।
लेकिन देश को इस राजनीतिक अराजकता के चरम पर पहुँचाने के अपराधी अधेड़ की इस बेलगाम दुस्साहसिक बद्तमीज़ी और अराजकता का जिम्मेदार कौ�� है.?
शायद नेपाल या बांग्लादेश की सरकार या कोई और.? लेकिन @PMOIndia @narendramodi कतई नहीं। देश के हालात तो यही बता रहे हैं। आप भी सोचिए।