ये भले ही एक फिल्म का सीन है, लेकिन आज के एजुकेशन सिस्टम की सबसे खौफनाक हकीकत है!
सुरक्षा के नाम पर एक ईमानदार छात्रा का दुपट्टा हटा दिया जाता है, लेकिन धांधली करने वाले दलालों के लिए ओएमआर शीट बदलने के पूरे दरवाज़े खुले रहते हैं। NEET में भी तो हमने यही देखा! सेंटर के बाहर बच्चों के जूते-कपड़े तक उतरवा लिए गए, और दूसरी तरफ पूरा का पूरा पेपर बिक गया..😡
"जब आखिरी पेड़ काट दिया जाएगा, आखिरी नदी जहरीली हो जाएगी, तब इंसान समझेगा कि पैसा खाया नहीं जा सकता।"
और शायद इसी सवाल के बीच खड़ा है Google का 15 बिलियन डॉलर वाला Vizag AI Project।
AI और विकास के नाम पर इसे भविष्य की बड़ी छलांग बताया जा रहा है। लेकिन अगर पानी, ऊर्जा और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को नज़रअंदाज किया गया, तो यह प्रोजेक्ट भविष्य का "Environmental और Economic Disaster" भी बन सकता है।
सवाल AI ��ा नहीं, विकास के उस मॉडल का है जिसमें मुनाफे और पर्यावरण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
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क्या पैंतीस की उम्र तक भीख माँगने वाले आदमी की तुलना नेहरू जैसे नामी बैरिस्टर से की जा सकती है?
क्या देश को IIT, AIIMS, JNU और IIM जैसे उम्दा ग्लोबल शिक्षण संस्थान देने वाले इंसान की तुलना हज़ारों स्कूल बंद करवाने वाले व्यक्ति से की जा सकती है?🤔
@TANUCHA80101607@spgoyal@myogioffice@myogiadityanath Ye govt future pr bat krti hai present par nhi kyuki pta hai future me ye rhenge ni present pr krenge to janta question kregi isiliye ye ek sat sbko murkh bna rkhe hai aur jo bol rha uske upr case krk andr