मेरी सांसों पर तुम्हारा अनगिनत एहसान है
तेरी ख़ुशहाली रहे कहता मेरा ईमान है !!
मेरी सांसों में तिरंगे की बुलंदी की दुआ,
मेरे हिंदोस्तान तुझ पर जान भी क़ुर्बान ह
"मैं ठीक हूं, खुश हूं। प्रॉपर्टी कल भी उनकी, आज भी उनकी है"
"जिस तरह की बात बाबूजी (पिताजी) उठा रहे, ये तो शामली में दंगे क��ाने की बात हैं"
शामली, यूपी में जिस आयुष मलिक के कथित अपहरण/धमकाने की FIR हुई है, उसने Video जारी करके बताया है कि मैं एकदम ठीक हूं। पिता ने FIR में जो आरोप लगाए हैं, उन्हें आयुष ने एकदम झूठा बताया है। पिता का आरोप था कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद से आयुष गायब है।
उत्तराखंड की सरकार के मुखिया तक दीपक के खिलाफ बयान दे चुके हैं। सरकार को कोई बहाना नहीं मिल रहा था, अब बहाना मिल गया है। नफ़रत के अंधियारे में जले दी���क के खिलाफ फिर से नफ़रती हवाएं चली हैं। इस देश का दुर्भाग्य है कि आईडिया ऑफ इंडिया को जीने वाले दीपक के खिलाफ साज़िश रही हैं।
हेलो @RailMinIndia जी,
यात्री सरफराज के अनुसार, आज रात करीब 12:04 बजे, ट्रेन संख्या 13006 से अमृतसर से बरेली जाते समय करतारपुर स्टेशन पर दो GRP कर्मियों ने गुटखा रखने के आरोप में ₹10,000 जुर्माने की धमकी दी।
यात्री का आरोप है कि उसका पर्स चेक करने के बाद उसमें मौजूद ₹6,000 एक GRP कर्मी लेकर चला गया। घटना का वीडियो बनाए जाने पर दूसरा कर्मी भी मौके से जाने लगा।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला अत्यंत गंभीर है। कृपया PNR 2259719989 के आधार पर तत्काल जांच कर संबंधित ड्यूटी स्टाफ एवं उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।
@RailMinIndia@RPF_INDIA
यह ललित शर्मा नाम का जॉम्बी है। यह हिंदू रक्षा दल नामी अतिवादी संगठन का कार्यकर्ता है। इस संगठन ने ऐलान किया है कि यह मेरठ स्थित एक मस्जिद पर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। @Uppolice इसे ‘रोक’ रही है। देखिए! कितनी मशक्कत से रोक रही है। @meerutpolice इनका उचित इलाज क्यों नहीं करती? इसी प्रदेश में घरों में नमाज़ अदा करने पर FIR दर्ज हुई हैं, नमाज़ियों को हिरासत में लिया गया है। लेकिन इन अपराधियों के सामने @dgpup की पुलिस को मालूम नहीं क्या हो जाता है!
मेरठ में मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करने जा रहे ललित शर्मा और हिंदू रक्षा दल के अन्य सदस्यों को पुलिस ने रोककर समझाइश देकर छोड़ दिया जबकि नारे लगे:-
"यह न मुल्ला का है, न काज़ी का
यह देश वीर शिवाजी का ��ै"
जिस देश में घरों पर नमाज़ पढ़ने पर FIR हो जाती है उस देश में पुलिस हिंदू समुदाय पर मस्जिद में आतंकी तरीके से घुसकर हनुमान चालीसा पढ़ने की कोशिश करने वालों पर FIR नहीं करती।
खुलेआम मुसलमानों के नरसंहार की बाते हो रही है लेकिन पुलिस प्रशासन न्यायलय बस मुसलमानों के साथ नाइंसाफी और भगवाधारियों को प्रोत्साहित करने में लगी है।
उत्तर प्रदेश –
हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी भैया ने आज मेरठ की केसरगंज मस्जिद के बाहर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया है !!
दरअसल, इस मस��जिद में कुछ नया निर्माण शुरू हुआ है। जिसका स्थानीय हिंदू व्यापारी विरोध कर रहे हैं।
सोचिए आप 23 साल की उम्र में क्या कर रहे थे या क्या कर रहे हैं❓
सोचिए अगर इस उम्र में आप जेल में हों और आपके आखिरी समय सिपाही आएं और कहें चलो फांसी का वक्त हो गया है...तो आप क्या करेंगे...आप मैं हम सब परेशान होंगे रोएंगे चीखेंगे...अब सोचिए 23 साल की उम्र में और इस हाल में भगत सिंह क्या कर रहे थे❓
ये पढ़ते हुए रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि 23 साल की उम्र में भगत सिंह जेल में थे और फांसी के कुछ दिन पहले भगत सिंह ने अपने वकील प्राण नाथ मेहता से लेनिन की एक किताब लाने के लिए कहा था और उनके वकील वो किताब फांसी के कुछ घंटे पहले लेकर भगत सिंह के पास पहुंचे थे और भगत सिंह उस किताब को तुरंत पढ़ने बैठ गए थे।
जब जेल अधिकारी उन्हें फांसी के लिए लेने आए, तब भी वे किताब पढ़ रहे थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा,
“ठहरिए, एक क्रांतिकारी दूसरे क��रांतिकारी से मिल तो ले। क्या आप इस किताब का एक अध्याय भी खत्म नहीं करने देंगे?” अंग्रेज मान गए फिर कुछ देर तक किताब पढ़ने के बाद उन्होंने किताब ऊपर फेंक दी और कहा - “चलो, अब चलें...
फिर वे राजगुरु और सुखदेव के साथ “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए फांसी घर की ओर चले गए। फंदे पर चढ़ने से पहले उन्होंने फांसी के फंदे को चूमा भी था।
इसीलिए मैं बार-बार कहता हूं कि
भगत सिंह की ये जो पिस्तौल वाली तस्वीर वायरल होती रहती है और कुछ सांम्प्रदायिक और नफरती लोग भी उनकी टीशर्ट पहने घूमते रहते हैं वो गलत है भगत सिंह कभी ऐसे थे ही नहीं वो पढ़ने-लिखने वाले विचारशील और तार्किक इंसान थे...📚
भगत सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी का नाम बोघा था। भगत सिंह उसको बेबे (मां) कहकर बुलाते थे। जब कोई पूछता कि भगत सिंह ये भंगी बोघा तेरी बेबे कैसे हुआ? तब भगत सिंह कहता, मेरा मल-मूत्र या तो मेरी बेबे ने उठाया, या इस भले पुरूष बोघे ने। बो���े में मैं अपन�� बेबे (मां) देखता हूं। ये मेरी बेबे ही है।
यह कहकर भगत सिंह बोघे को अपनी बाहों में भर लेते
भगत सिंह जी अक्सर बोघा से कहते, बेबे मैं तेरे हाथों की रोटी खाना चाहता हूँ। पर बोघा अपनी जाति को याद करके झिझक जाता और कहता, भगत सिंह तू ऊँची जात का सरदार, और मैं एक अदना सा भंगी, भगतां तू रहने दे, ज़िद न कर।
सरदार भगत सिंह भी अपनी ज़िद के पक्के थे, फांसी से कुछ दिन पहले जिद करके उन्होंने बोघे को कहा बेबे अब तो ��म चंद दिन के मेहमान हैं, अब तो इच्छा पूरी कर दे!
बोघे की आँखों में आंसू बह चले। रोते-रोते उसने खुद अपने हाथों से उस वीर शहीद ए आजम के लिए रोटिया बनाई, और अपने हाथों से ही खिलाई। भगत सिह के मुंह में रोटी का गास डालते ही बोघे की रुलाई फूट पड़ी। ओए भगतां, ओए मेरे शेरा, धन्य है तेरी मां, जिसने तुझे जन्म दिया। भगत सिंह ने बोघे को अपनी बाहों में भर लिया।
ऐसी सोच के मालिक थे अपने व���र सरदार भगत सिंह जी...। परन्तु आजादी के 70 साल बाद भी हम समाज में व्याप्त ऊँच-नीच के भेद-भाव की भावना को दूर करने के लिये वो न कर पाए जो 88 साल पहले भगत सिंह ने किया।
महान शहीदे आजम को इस देश का सलाम।
माता जी, बात मस्जिदों को गिराने की नहीं है, केवल मस्जिदों को ही गिराने की है और उसके बल पर राजनीति करने की है। ये चीन और ऑस्ट्रेलिया में नहीं किया गया होगा।
अगर निष्पक्ष ढंग से बिना किसी धर्म को टारगेट किए अनधिकृत निर्माण हटाए जाएं तो शायद किसी को विरोध करने का न आधार मिलेगा और न ही उसका कोई समर्थन करेगा।
लेकिन पिछले 12 साल से देश में हिंदुओं के कितने धर्मस्थल तोड़े गए, कि��नों पर बुल्डोजर चलाए गए ज़रा उसके बारे में भी ज्ञानवर्धन कर लीजिए.
आप पत्रकारिता के नाम पर बीजेपी और आरएसएस के एजेंडे के लिए बैटिंग कर रही हैं। शर्मनाक है कि आप एक न्यूज़ एजेंसी की मालकिन हैं, जो देश भर को गुमराह करने में लगी है।
पाकिस्तान में चुनाव आयुक्त की बिट��िया रानी ने एक निर्दोष को जेल भिजवा दिया.
बाद में बिटिया रानी का केस पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बिटिया रानी को VIP ट्रीटमेंट मिला.
बिटिया रानी को उसकी पसंद का जज मिला, सुनवाई का ऑडियो म्यूट कर दिया गया. बिटिया रानी क�� पक्ष में आदेश भी आया.
मतलब फुल स्पेशल ट्रीटमेंट, वो भी पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में.
अच्छा है भारत में ऐसा नहीं होता, अपने यहां लोकतंत्र है, सिस्टम अभी भी सबके लिए बराबर है.
इसलिए कहता हूं - लोकतंत्र जरूरी है. वरना हमारा हाल भी पाकिस्तान जैसा हो जाएगा - जहां कोर्ट से लेकर चुनाव आयोग तक, सब बिक चुके हैं.
बाहर बुलडोजर खड़ा है अंदर मस्जिद में मुसलमान इबादत कर रहा है।
सैल्यूट उनके जज्बे और हौंसलों को दुआ करे इन ईमान परस्त मुसलमानों के लिए।
वह मर्द नहीं जो डर जाएं हालात के खूनी मंजर से
जिस दौर में जीना मुश्किल हो उस दौर में जीना लाज़िम है। #SaveUjjainShahiMosque
खुशखबरी :-
उज्जैन मध्यप्रदेश शाही मस्जिद के सामने प्रशासन ने बुलडोजर खड़े कर दिए थे लेकिन प्रशासन को मुसलमानों के सब्र हिम्मत के आगे बुलडोजर मस्जिद के सामने से हटाने पड़े।
एक बार फिर सलाम उज्जैन के मुसलमानों को उनकी हिम्मत ईमान और ताकत व मशक्कत से प्रशासन को पीछे हटना पड़ा।
आप लोग दुआ करे और लिखते रहिए हर लाइव अपडेट आपको मिल��ा रहेगा।
#SaveUjjainShahiMosque