अप्रतिम शौर्य की प्रतिमूर्ति, नारी शंक्ति, मातृभूमिं की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाली एवं वीरता की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर शत शत नमन्
मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई
:आलोक कुमार (@AlokKumarLIVE), सीनियर एडवोकेट, (अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद् )
भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में अंग्रेज अधिकारियों के द्वारा तमिलनाडु और बंगाल में हिन्दू मंदिरों का व्यापक सर्वेक्षण हुआ था। इस सर्वेक्षण से मालुम पड़ा कि लगभग सब हिन्दू मंदिरों में छोटा या बड़ा गुरुकुल और गौ-शाला थी। समाज अपने उत्सव जैसे नवरात्री और दीपावली इत्यादि मिलकर मंदिरों में मनाता था। परिवारों के शादी, मुंडन, शोकसभा जैसे सब कार्यक्रम भी मंदिरों में होते थे। समाज के झगड़े भी मंदिर में गर्भगृह की साक्षी में समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा निपटाएं जाते थे।
अंग्रेजों ने समझ लिया कि हिन्दू धर्म के प्राण मंदिरों में बसते हैं। अंग्रेज सरकारों ने मंदिरों का प्रबंधन सुशासन के नाम पर अपने हाथों में ले लिया। धीरे-धीरे अब मंदिर केवल व्यक्तिगत पूजा के स्थान बन रहे हैं। इससे हिन्दू धर्म कमजोर हो रहा है।
सरकार गुरुद्वारे, चर्च, मस्जिद, जैन-स्थानक और बौद्ध-विहार नहीं चलाती। भारत का शासन संविधान की मर्यादा में धर्मनिरपेक्ष है। फिर भी अनेक राज्यों में सरकारें हिन्दू मंदिरों को अपने मुट्ठी में क्यों दबाये हुए हैं। मंदिरों के चढ़ावे का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में जाता है। मंदिरों में सरकार के ऑफिसर कार्यकारी अधिकारी के नाते लगा दिए जाते है और उनका वेतन और भत्ते मंदिर की आय में से लिए जाते है। मंदिरों और मठों का नियंत्रण मठाधिपति या धार्मिक संत इत्यादि के हाथों में न रहकर इन बाबुओं के हाथ में रहता है।
हिन्दू समाज ने निर्णय किया है कि वह अपने मंदिरों का नियंत्रण सरकार के हाथों से वापस लेगा। समाज ने यह भी निर्णय किया कि हिन्दू मंदिरों का पैसा हिन्दुओं के लिए ही खर्च होना चाहिए।
इस उद्देश्य से पूज्य स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सन 2012 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में याचिका डाल कर कहा कि सरकार हिन्दू मंदिरों का सञ्चालन वापिस हिन्दू समाज को सौंपें। यह याचिका मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र, तेलंगाना और पुडुचेरी के सन्दर्भ में लगायी गयी थी। इसमें सरकारों को नोटिस हुआ और उनका जवाब रिकॉर्ड पर आया। कई बार इस याचिका में बहस के लिए तारीख निश्चित हुई पर किसी न किसी कारण से टलती गयी।
अंततः अप्रैल 2025 को यह मामला न्यायालय के समक्ष रखा गया। प्रतिपक्षी वकीलों ने कहा कि इस याचिका में कई राज्यों के कानूनों को चुनौती दी गयी है। यह सब कानून एक जैसे नहीं हैं। मांग की गयी कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को ख़ारिज करके याचिकाकर्ताओं को अपने-अपने राज्य में इन कानूनों को चुनौती देने की छूट दे दें। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करके 13 साल से लंबित यह याचिका ख़ारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका को ख़ारिज करने के निर्णय पर पुनर्विचार याचिका करने का आग्रह किया। इस प्रक्रिया में समय लगा। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने सोमवार 18 मई 2026 के आदेश में यह स्वीकार किया कि इस याचिका को गुण-दोष के आधार पर सुना जाना आवश्यक है। कोर्ट ने अप्रैल 2025 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके द्वारा इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया था।
अब यह विषय जुलाई में सुनवाई के लिए नियत किया गया है। हिन्दू अपने मंदिरों का स्वयं सञ्चालन करें और मंदिरों पर सरकार का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो। हिन्दुओं का पैसा हिन्दुओं के काम में आये। हिन्दू मंदिर स्वाधीन होने पर हिन्दू का संगठन, उसकी तेजस्विता और संस्कार युक्त जीवन पुनः अपने समाज को प्राप्त हो। मुकदमे में तथ्य और तर्क हमारे साथ हैं। श्री भगवान के आशीर्वाद से हम न्यायालय में सफल होंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा दिए गए हिंदू द्रोही जिहादी हिंसा को भड़काने वाले बयान पर विहिप अध्यक्ष श्री आलोक कुमार जी की प्रतिक्रिया ..
"न ईद मनेगी न ईद पर नमाज होगी..."
◆ सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक खास वर्ग के लोगों को मारने की धमकी देता दिख रखा शख्स
◆ खुद को हिंदू रक्षा दल का बता रहा कार्यकर्ता
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*Hindus in Bangladesh!*
*21वी सदी में इनका भाईचारा और मोहब्बत की दुकान देखें, और अंदाजा लगाएं की मुगल लुटेरों के राज में कितने जुल्म हुए होंगे! 🧐*
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय प्रन्यासी मंडल की बैठक में आज धर्मांतरण और घर वापसी जैसे गंभीर विषय पर चर्चा के उपरांत स्वर्गीय श्री राजेश्वर जी की पुस्तक
'घर वापसी क्यों और कैसे' का विमोचन भी हुआ..
आज का दिन कैलेंडर पर लिखी मात्र एक तारीख नहीं, अपितु एक नए कालचक्र का उद्गम है।
एक ऐतिहासिक नए युग के शुभारंभ का प्रतीक है। धर्म की पुनर्स्थापना का पावन दिवस है। 497 वर्षों के सतत् धर्म संघर्ष के बाद सनातन की विजय और भारत के पुनरोदय का प्रतीक है।
आज उन सभी वीरों, बलिदानियों, पूज्य संतों, योद्धाओं तथा धर्म रक्षकों को प्रणाम कर कृतज्ञता व्यक्त करने का भी दिन है जिनके निरंतर संघर्ष के फलस्वरूप ही श्री राम जन्म भूमि पर यह धर्म ध्वजा लहराई है ।
#DharmDhwaja
#RamMandirAyodhya
@bihar_police@DarbhangaPolice@MadhubaniPol
नाम:राधेश्याम यदुवंशी , मदन झा lic
पता : फुलपरास, बेनीपट्टी
मोबाइल नंबर:7079794842
डिटेल्स नीचे है ।
ये आदमी AI जनरेटेड फोटो डाल कर साइबर क्राइम कर रहा है इस मामले का संज्ञान ले और ये आदमी जल्द से जल्द गिरफ्तार हो
हिन्दू हृदय सम्राट, भारतीय संस्कृति के संवाहक, श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तम्भ, सनातन व हिंदुत्व के संरक्षण में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले, कुशल नेतृत्वकर्ता, सभी कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत व मार्गदर्शक, विश्व हिन्दू परिषद के पूर्व अध्यक्ष परमपूज्य अशोक सिंघल जी की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन ।
#AshokSinghal
लव जिहाद समझाने के लिए पूरे देश में ऐसी गाड़ियां घूमनी चाहिए ।
लव जिहाद के खिलाफ जिसने भी ये पहल की हे उसे दिल से धन्यवाद 🙏
आओ लव जिहाद को खत्म करे और हमारी बहन बेटियों को नरक से बचाएं।
सोसल मीडिया पर EVM का फोटो या वीडियो वायरल करना आदर्श चुनाव संहिता के नियमों का उलंघन है लेकिन ये लड़का इस नियम को खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है सर कृपा करके कार्यवाही करे कुशेश्वर स्थान थाना के दिनमो पंचायत के प्रमाणनंदपुर के है https://t.co/UWelWIGzLZ