जब जब BJP IT Cell के सरगना अमित मालवीय मुझे टारगेट करते हैं, मैं समझ जाता हूँ तीर निशाने पर लगा है - BJP बहुत पीड़ा में है। मगर इस बार एक ख़ुशी हुई कि चलिए इस बहाने इस घोर आरक्षण विरोधी और मनुवादी प्रवक्ता ने बाबासाहेब को पढ़ना तो शुरू किया। फ़िलहाल मामला “अधजल गगरी छलकत जाय” वाला है। डॉक्टर अंबेडकर ने संविधान सभा में civil disobedience जैसे हथियारों का आज़ाद भारत में इस्तेमाल करने का विरोध इस आधार पर किया था कि सरकार संविधान के अनुसार लोकतांत्रिक तरीके से काम करेगी, संवैधानिक संस्थाएं स्वायत्त होंगी, चुनाव निष्पक्ष होंगे, विपक्ष और विरोध की पूरी आज़ादी होगी। मोदी सरकार की इस तानाशाही के संदर्भ में इसका प्रयोग हास्यास्पद है। आज के संदर्भ में तो उनकी यही उक्ति याद रखनी चाहिए: “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो”
वैसे जब अमित मालवीय ने बाबासाहेब को पढ़ना शुरू कर ही दिया है तो दो और उद्धरण उनकी नज़र हैं:
“My definition of democracy is: A form and a method of government whereby revolutionary changes in the economic and social life of the people are brought about without bloodshed. That is the real test. It is perhaps the severest test.” (Pune, 22 December 1952).
“Bhakti in religion may be a road to the salvation of the soul. But in politics, Bhakti or hero-worship is a sure road to degradation and to eventual dictatorship.” (Constituent Assembly, 25 November 1949).
दिल्ली पुलिस भी प्रधानमंत्री हो गई है। प्रेस कांफ्रेंस नहीं कर रही है। चार दिन हो गए।पैलेट गन पर रिपोर्ट आती जा रही है। सादे लिबास वालों का पता नहीं। अनगिनत सवाल हैं।
विरोध की आवाज पूरे देश में उठ रही है !
ये गुजरात की फेमस अभिनेत्री और थिएटर आर्टिस्ट जिग्ना व्यास है जो छात्रों के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन में शामिल हुई थी !
जिग्ना व्यास को जब गिरफ्तार किया गया था तब गा रही थी :-
तू ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी की जीत में यकीन कर,
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!
ये ग़म के और चार दिन, सितम के और चार दिन,
ये दिन भी जाएंगे गुज़र, गुज़र गए हज़ार दिन,
कभी तो होगी इस चमन पर भी बहार की नज़र!
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
हमारे कारवां का मंज़िलों को इन्तज़ार है,
यह आंधियों, ये बिजलियों की, पीठ पर सवार है,
जिधर पड़ेंगे ये क़दम बनेगी एक नई डगर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर!.... तू ज़िन्दा है
DU ने पूरी निर्लज्जता के साथ लिखा है~
“अगर आप जंतर-मंतर जाएँगे तो आपकी academic progress और opportunities ख़तरे में होगी।”
देश के सभी कॉलेज-विश्वविद्यालय पर RSS क़ब्ज़ा कर रही है और संघियों को हर पद पर बिठा रही है ताकि शिक्षा व्यवस्था और उसके लोग RSS के सामने दण्डवत प्रणाम करें और ये भाजपा के आने के बाद ही शुरू हो गया था। उसका असर अब खुल कर दिख रहा है।
DU के पोस्ट से समझ सकते है ,रेंगना क्या होता है।
ये बहादुर और महान पत्रकार अभी तक ग्राउंड ज़ीरो पर दिखे नहीं रिपोर्टिंग करते है
मेरी समझ से इनको जाना चाहिए थे,, आप लोगो को क्या लगता है,, ये क्यों नहीं गए अभी तक जंतर मंतर पर?
वजह जानते है आप लोग ? , अगर हा तो बताइयेगा ज़रूर...
वैसे ये लोग भी आपका जवाब पढ़ेंगे ज़रूर....
Why is the Police personnel stopping the gentleman from giving Media byte as soon he started criticizing Madhya Pradesh BJP leader Kailash Vijayvargiya for his statements on Student protesting at Jantar Mantar.
Must watch!
“If courts don't step in, it's a licence to the police to get away with absolutely anything becoz they know they have the sanction of their political masters.”
- Sr. Adv. Gopal Sankaranarayanan
on the excessive force used by police against Jantar Mantar protestors.
तीन दिन हो गए। दिल्ली पुलिस ने प्रेस कांफ्रेंस तक नहीं की है। कम से कम अफ़सोस ही जता देती कि बच्चों के साथ ज़्यादती हो गई। सब वक़्त के गुज़रने के इंतज़ार में हैं या किसी कमज़ोर क्षण के इंतज़ार में हैं कि कोई ग़लती हो जाए, बड़ी घटना प्लांट कर दी जाए फिर कार्रवाई करेंगे। इससे कुछ भी हासिल नहीं होगा।
शुक्र है कि अभी बात केवल इस्तीफ़े की हो रही है, शिक्षा व्यवस्था की होने लगेगी और ये नौजवान ढक्कन उठा कर देखने लगेंगे तब फिर कोई जवाब बचेगा नहीं। सरकार सचमुच इस शिक्षा व्यवस्था को डिफेंड नहीं कर पाएंगी। कम से कम अपने मंत्री और सांसदों से ही पूछ लीजिए कि उनके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं तो वहाँ क्या अच्छा है जो यहाँ नहीं हो सकता। कहने में अच्छा नहीं लगता लेकिन सरकारी स्कूलों और कॉलेजों का हाल कबाड़ जैसा बना दिया गया है।
मैं बीजेपी के सांसदों और मंत्रियों को शानदार पिता मानता हूँ जिन्होंने अपने बच्चों को यहाँ के कबाड़ कॉलेजों में नहीं भेजा। वे मंत्री के रूप फेल हो गए मगर डैडी के रूप में पास। बस देश के बाक़ी बच्चों के लिए नहीं सोचा। दो चार दस कॉलेज ही बचे रह गए हैं वहाँ भी संघ की भक्ति चल रही है, पढ़ाई कम। बच्चों को शिक्षा की बर्बादी ने घेर लिया है। यह काम वही कर सकता है जिसका इस देश के कॉलेजों से लगाव जुड़ाव न हो। और कॉलेजों से नफरत की चिढ़ पैदा हुई थी 2016 के साल से। आप जानते हैं।
दिल्ली पुलिस ने इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों पर दागे जाने वाले पेलेट गन का इस्तेमाल भी आंदोलनकारियों के खिलाफ किया है।
आउटलुक मैगजीन का एक पत्रकार साथी भी बुरी तरह से घायल हुआ है। एक छात्रा को सर्जरी करानी पड़ी है। एक की आंख क्षतिग्रस्त हो गई है
अब आप मोदी जी का ट्वीट फिर से पढ़िए जिसमें वो छात्रों युवाओं को न्याय दिलाने की बात कर रहे हैं। याद रखिए भाजपा सरकार ने देश की पुलिस को भी ज्यादा से ज्यादा क्रूर बना डाला है। यह सबक सिखाने के इरादे से जनता के विरुद्ध अभियान चला रहे।
लोग मानने को तैयार नहीं हैं, विश्वास नहीं करते इनकी खबरों पर और इन लोगो पर!
157 वे स्थान तक पहुचाने वाले टीवी एंकरो को बताना पड़ रहा है के वो पत्रकार है।