आज सुबह अखबार में पीएम मोदी के जन्मदिन की ये खबर छपी देखी… कल दिल्ली में उनका 65 वा जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया गया… दिल्ली के एक स्टेडियम में 6 हज़ार स्कूली बच्चों से नाच गाना करवाया गया… कई कलाकारो के जत्थे भी पहुचे… परेड भी निकाली गई… सरकार और दिल्ली प्रशासन ने मोदी जी के जन्मदिन को भव्य बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी… आप चाहो तो ग्रोकवा से कन्फर्म कर सकते हो
अपने बाजू में एक देश है कंग्लुदेश इन चमन लोगो का ज्यादातर बॉर्डर भारत से ही लगता है लेकिन इनके पास सेना है कगलुओ को शायद गलतफहमी हुई कि भारत से खतरा है युद्ध के लिए चीन से टैंक खरीद लिए अब टैंक है तो उसका अभ्यास भी करना होगा तो टैंक में गोला दागने का अभ्यास करने की तैयारी हुई
ये झोपड़ी वाले भूल गए कि टैंक चीनी है लेकिन टैंक बिल्कुल नहीं भुला उसने वही किया जो चीन के बने हर सामान को करना होता है टैंक की तोप फट गई और अंदर बैठे दो कंगालू हूर से मिलने निकल गए
अब सवाल है कि बाकी टैंक ले के ये भारत से युद्ध करने आएंगे क्या
पाकिस्तानी अल्ला पर अज्ञात भारी 🚨
2008 मुंबई हमले के एक मास्टर माइंड कलीमुल्ला को बीच सड़क पर रावलपिंडी में
अज्ञात ने मारी गोली....
कलीमुल्ला ने मौके पे तोड़ा दम🔥
#DhurandharTheRevenge
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।
इस बौने ने मासूम बच्चों से भी मक्कारी कर ली 🤬
बौना : Bag कहां हैं सब बच्चों के
बच्चें : Bag तो हमारे स्कूल में हैं
बौना : ये तुम्हारा स्कूल नहीं हैं ?
बच्चें : हमारा स्कूल सूफियान मस्ज़िद के पास हैं, हमे वहां से लाए हैं
बौना : आपको यहां लाया कौन ?
बच्चें : ये Uncle (बौने की टीम की तरफ इशारा करते हुए)
एक तो बच्चों को चॉकलेट का लालच देकर दूसरे स्कूल में ले आए
ऊपर से नौटंकी कर रहा हैं
ये बौना नरवाल से भी बड़ा ठग हैं
टी.एन. शेषन: “जब मैं कैबिनेट सेक्रेटरी था, तब पीएम (राजीव) फोन कर कहते — मुख्य चुनाव आयुक्त से कहो चुनाव इस-इस तारीख को होंगे और चुनाव भी तभी होते थे ।
आज… राजीव का बेटा इलेक्शन कमीशन को ‘निर्पेक्षता’ पर भाषण देता है। #VoteChori
अब मैं भी उन लोगों की बात से सहमत होने लगा हूँ जो कहते हैं कि अमित शाह जी भारत के इतिहास के "सबसे कमज़ोर" गृह मंत्री हैं।
आज़ादी के दिन से पहले ISI समर्थित आ तं की गुट 'शहज़ाद भट्टी नेटवर्क' को खत्म कर दिया गया🔥
14 राज्यों में एक साथ छापेमारी, 253 गिरफ्तारियां कोई जानकारी लीक नहीं हुई ज़रा इसके पैमाने और इसे अंजाम देने के तरीके के बारे में सोचिए।
-80 से ज़्यादा FIR दर्ज की गईं
-I.E.D, ग्रे नेड और पि स्तौल बरामद किए गए
-पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड बरामद हुए
-जासूसी के लिए इस्तेमाल होने वाले CCTV उपकरण भी बरामद हुए
राज्य-वार गिरफ्तारियां:
उत्तर प्रदेश 62
हरियाणा 52
दिल्ली 51
पंजाब 44
राजस्थान 15
महाराष्ट्र 8
उत्तराखंड 5
कर्नाटक 3
गुजरात 3
बिहार 3
तेलंगाना 2
हिमाचल 2
J&K 2
केरल 2
ऐसा काम सिर्फ़ एक "कमज़ोर" गृह मंत्री ही कर सकता है।
कांग्रेस के "मज़बूत" गृह मंत्रियों के समय देश कितना सुरक्षित था।
है ना?
"जब सरकार ही संसद में सरेंडर कर दे—
'शहरी नक्सल' सोच का वो दौर याद है?"
📍 पुराना सच (THROWBACK):
जब संसद में RJD सांसद ने पूछा कि पाकिस्तान भारतीय मुद्रा (INR) के जैसा सेम कागज़, सेम स्याही और इंटैग्लियो तकनीक का इस्तेमाल करके नकली नोट कैसे छाप रहा है?
📍 तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का जवाब:
"हम उन्हें कैसे रोक सकते हैं? उनका सोर्स दूसरे देश में है। हम तो बस बॉर्डर पर एंट्री रोकने की कोशिश कर सकते हैं।" 😳
पढ़िए और सोचिए:
2014 से पहले भारत की सुरक्षा और कानून व्यवस्था संसद के अंदर अपनी बेबसी का रोना रो रही थी। पाकिस्तान से जाली नोटों का जाल देश को खोखला कर रहा था और सरकार कह रही थी—
"हम क्या कर सकते हैं?" 🤡
सबसे बड़ी ब्रेकिंग न्यूज़:
संसद सत्र के दौरान अमित शाह क्या कर रहे थे? वे कहाँ थे? इसका जवाब यहाँ है 👇
शायद भारतीय इतिहास में 'ऑपरेशन ऑक्टोपस' (PFI के खिलाफ कार्रवाई) के बाद सबसे बड़ा ऑपरेशन 12 अगस्त को अमित शाह की सीधी निगरानी में चलाया गया।
पाकिस्तान में रहने वाले ISI समर्थित एक गैंगस्टर और आतंकवादी ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके भारतीय मुसलमानों को कट्टरपंथी बनाने और भारत में एक आतंकी नेटवर्क (शहज़ाद भट्टी नेटवर्क / तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान) बनाने का काम किया था।
वह और उसका नेटवर्क पिछले साल नवंबर से ही सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में था।
उसने अपने नेटवर्क में 250 से ज़्यादा लोगों को शामिल किया था और वे 15 अगस्त को पूरे भारत में आतंकी हमले की योजना बना रहे थे।
उनकी योजना स्वतंत्रता दिवस को तबाही के दिन में बदलने की थी।
12 अगस्त की रात, जब हम सो रहे थे, 14 राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया और पूरे भारत से 253 लोगों को गिरफ्तार किया।
इस ऑपरेशन को पूरी तरह से गुप्त रखा गया था।
मेरे मन में एक सवाल बार-बार आता है: क्या कांग्रेस को पाकिस्तान से मिली जानकारी के ज़रिए इस ऑपरेशन के बारे में पता था? जिस तरह से कांग्रेस ने 1 से 12 अगस्त तक अमित शाह को निशाना बनाया और उन्हें संसद में बोलने के लिए बुलाने पर अड़ी रही, उससे गंभीर संदेह पैदा होता है।
12 अगस्त के बाद, पप्पू अमित शाह से कुछ ज़्यादा ही नाराज़ दिखे। क्या यही वजह थी? मुझे नहीं पता। भारतीय शायद कभी पूरी तरह से नहीं जान पाएंगे कि मोदी और शाह ने कितनी बार चुपचाप उनकी जान बचाई है।
ये लोग इसलिए नहीं सोते ताकि आप चैन से सो सकें।
ब्रिटेन आर्थिक रूप से कंगाल हो चुका है।
लन्दन में पॉकेटमारी, लूट, स्नैचिंग आम बात है।
लूट, स्नैचिंग कौन कर रहे हैं?
समझना मुश्किल नहीं है।
यह वही कौम है जिसे बसाने के लिए ब्रिटेन का लेफ्ट लॉबी एड़ी चोटी का पसीना बह रहा है।
भारत में इन्हें दिमागी नक्सली कहा जाता है।
और जिसका डर था वही हुआ
दिल्ली स्थित इटली के दूतावास ने राहुल गांधी ने जो अपने स्टेज पर जॉर्जिया मेंलोनी पर घटिया और अभद्र टिप्पणी किया उसे पर कड़ी आपत्ति और नाराजगी जताई
यह भो ..ड़ी वाला पूरे दुनिया के देशों से संबंध खराब करवायेगा
यह दोगला चाहता भी है कि भारत सिर्फ फिलिस्तीन से अच्छे संबंध रखें
इटली का दूतावास
नई दिल्ली
कथन
इटली का दूतावास भारत की लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बारे में की गई अपमानजनक टिप्पणियों पर गहरी चिंता और कड़ी निंदा व्यक्त करता है।
राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा है। हालांकि, भारत के आंतरिक राजनीतिक मामलों को इटली के प्रधानमंत्री का उपहास करने या उनका अपमान करने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
हम भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक विमर्श का सम्मान करते हैं, और हम इटली और उसके लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेतृत्व के लिए भी उसी सम्मान की अपेक्षा करते हैं।
राजनीतिक बहस का स्वागत है.
हमारे प्रधानमंत्री का अनादर करना उचित नहीं है।
इटली और भारत आपसी सम्मान, गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित एक दीर्घकालिक मित्रता साझा करते हैं।
इटली का दूतावास
नई दिल्ली
14 अगस्त 2026
इस आयु में लज्जा साथ छोड़ ही देती है। कॉन्ग्रेस ने संस्थान विवशता में बनाए क्योंकि शून्य के बाद एक ही आता है। अकेले मोदी ने जितना बना दिया है, वैसा तुम्हारी सात पुश्तों के प्रधानमंत्री में न तो साहस था, न विजन। लौंडियाबाजी और घोटालों के कारण साला देश को चाट कर बर्बाद कर गए और ज्ञान दे रहे हैं विकास का।
नेहरू की विदेश नीति का नायाब नमूना थीं उनकी “अनपढ़” बहन विजयलक्ष्मी पंडित
विदेश नीति से नेहरू-गांधी परिवार का पुराना नाता है... नेहरू से लेकर राहुल-प्रियंका तक... सब खुद को विदेश नीति का एक्सपर्ट समझते हैं... कई बार तो ऐसा लगता है कि नेहरू-गांधी परिवार के बच्चे स्कूल में एडमिशन नहीं लेते… बल्कि वो सीधे यूनाइटेड नेशन्स में पढ़ने चले जाते हैं... जहां वो A फॉर America… B फॉर Britain और C फॉर China सीखते हैं... नेहरू की ‘अनपढ़’ बहन विजय लक्ष्मी पंडित भी ऐसी ही हाईली टैलेंटेड थीं...
जिसे नेहरू ने सोवियत संघ, अमेरिका और ब्रिटेन में भारत का राजदूत / हाई कमिश्नर बनाया... वो “अनपढ़” बहन जिसने कॉलेज तो छोड़िये, स्कूल का भी मुंह नहीं देखा था, फिर भी उसे यूपी में मंत्री बनाया, महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया और सांसद भी बनाया !!! इस “अनपढ़” बहन को 8 करोड़ लाशों पर खड़ा चीन का तानाशाह माओ-त्से-तुंग अहिंसा के पुजारी गांधी की तरह लगता था!!! वो “अनपढ़” बहन जिसने भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट मिलने में अडंगा डाला !!!
ये कहानी ज़रा लंबी है, लेकिन सुनना बहुत ज़रूरी है। वो इसलिए क्योंकि जब इस देश में अनपढ़ नेताओं, नेताओं की फर्जी डिग्री और न जाने क्या-क्या चर्चा चल रही है तो आपको पता होना चाहिए कि परिवारवाद का वो काला सच जिसमें एक अनपढ़ इंसान सारी ऊंचाइयां पा लेता है, क्योंकि उसका जन्म आनंद भवन में हुआ था। जवाहरलाल नेहरू की छोटी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बचपन में कभी स्कूल नहीं गईं... घर में ही इन्हें एक अंग्रेज़ आया (केयर टेकर) जेन हूपर ने इन्हें अक्षर ज्ञान और थोड़ी बहुत शिक्षा दे दी। आप कहेंगे कि इसमें बुराई क्या है... ठीक बात है पहले कई लोग घर में ही शुरुआती शिक्षा लेते थे, लेकिन वो उसके बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी भी जाते थे... लेकिन विजयलक्ष्मी ने कभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी का मुंह नहीं देखा... वैसे भी जब आप नेहरू खानदान के चश्मों चिराग हो तो फिर किसी डिग्री की क्या ज़रूरत है? अब इनका करियर ग्राफ और इनके कारनामे देखिये –
सोवियत संघ (वर्तमान रूस) में भारत की प्रथम राजदूत
1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तो नेहरू ने अपनी बहन विजय लक्ष्मी पंडित को भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। ये 1949 तक इस पद पर रहीं और बेहद नाकाम साबित हुईं। तानाशाह स्टालिन पूरे दो साल तक नेहरू की इस अनपढ़ बहन से नहीं मिला। भारत और सोवियत संघ के संबंधों का ये सबसे ठंडा दौर था। मास्को में रहने के दौरान इनकी वजह से भारत को काफी बदनामी झेलनी पड़ी। आरोप है कि इन्होंने अपने सरकारी घर के लिये मास्को के बजाय स्वीडन के स्टॉकहोम से महंगा फर्नीचर खरीदा। जिस पर सोवियत संघ सरकार ने आपत्ति जताई। गांधी ने भी विजय लक्ष्मी पंडित की इस फिजूलखर्ची पर आलोचना की थी, इस पर नेहरू को सफाई देनी पड़ी।
अमेरिका में भारत की राजदूत
जब विजय लक्ष्मी पंडित की दाल स्टालिन के सामने नहीं गली तो इन्हें इनके जवाहर भैया ने 1949 में वाशिंगटन में भारत का राजदूत बना कर भेज दिया। यहां भी इन्होंने बंटाधार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अमेरिका और ब्रिटेन चाहते थे कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में चीन की बजाय भारत को स्थायी सीट दी जाये... इस प्रस्ताव की जानकारी जब विजयलक्ष्मी को मिली तो उन्होंने अपने भाई प्रधानमंत्री नेहरु को 24 अगस्त 1949 को एक पत्र और बताया कि – अमेरिकी विदेश मंत्रालय में भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट मिलने की चर्चा चल रही और भारत के पक्ष में माहौल बनाया जा रहा है। लेकिन मैंने सलाह दी है कि इस मामले में धीमे चलें क्योंकि भारत इसे पसंद नहीं करेगा।
जवाब में पंडित नेहरू ने अपनी बहन को लिखा कि - हम चीन के बदले ये जगह नहीं ले सकते। ये बुरी बात होगी। ये चीन का अपमान होगा। हमारे चीन से संबंध बिगड़ जाएंगे। हम यही प्रयास करेंगे कि चीन को स्थायी सदस्यता मिले। ... मतलब भारत के हाथ में इतना बड़ा मौका आ रहा था और भाई-बहन की इस जोड़ी ने इसे ठुकरा दिया।
(नोट – किसी को ये शक है कि ऐसा नहीं हुआ था, तो भैया-बहिन के ये सारे पत्र "नेहरू म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी"... यानी "प्राइम मिनिस्टर म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी" में Vijaya Lakshmi Pandit Papers, 1st Installment - Pandit 1, File No. 59 में पड़े हुए हैं। तीन मूर्ति भवन में जाकर चेक कर लेना।)
'अनपढ़' बहन को फिर चीन भेजा
नेहरू ने चीन के तानाशाह माओ त्से तुंग और चाऊ एन लाइ का मन टटोलने के लिए 1952 में अपनी लाड़ली बहन विजयलक्ष्मी पंडित को बीजिंग भेजा। इस यात्रा में क्या हुआ इसका संपूर्ण वर्णन लिबरू गैंग के प्रिय वामपंथी इतिहासकार कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक "भारत – गांधी के बाद" के पेज नंबर 212 पर लिखते हैं – विजय लक्ष्मी पंडित ने अपने भाई नेहरू को पत्र में लिखा कि -
"माओ बहुत कम बोलते हैं लेकिन उनमें गज़ब का सेंस ऑफ ह्यूमर है। जब वो जनता के बीच होते हैं तो वो गांधी की तरह लगते हैं। महात्मा गांधी की तरह जनता न केवल उनकी प्रशंसा करती है बल्कि उनकी पूजा करती है। उन्हे देखना बड़ा ही भावनात्मक पल है।" वाह... 8 करोड़ इंसानी लाशों पर खड़ा चीन का ये शैतान तानाशाह माओ-त्से-तुंग इस अनपढ़ बहन को गांधी की तरह दिख रहा था।
अब देखिए नेहरू की ये लाडली बहन चीन के एक और नेता चाउ एन लाई के लिए क्या लिखती है... विजय लक्ष्मी का ये पत्र भी कॉमरेड रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक में छापा है, अनपढ़ बहन लिखती है -
“चाउ एन लाई लोगों को हंसने पर मजबूर कर देते हैं और खुद भी अक्सर हंसते रहते हैं। हम लोगों ने बेहतरीन शराब पी और स्वादिष्ट खाना खाया। वो आगे लिखती हैं कि मास्को की तरह यहां लोगों पर अत्याचार नहीं किया जा रहा और चीन में हर आदमी खुश लगता है।”
चीन में आठ करोड़ लोग मार दिये गये और इस अनपढ़ महिला को सब खुश दिख रहे थे। नेहरू ने विजयलक्ष्मी पंडित की सलाह पर अमल किया और चीन से दोस्ती की राह पर आगे चल निकले और बाद में इसी माओ और चाऊ की जोड़ ने 1962 में भारत की पीठ पर खंजर भोंक दिया। तो ये था परिवारवाद का दंश... ये था अनपढ़ों के हाथ में शक्ति देने का पाप !!!
#Nehru #Congress #Rahul_Gandhi #Italy
इन सब 2 कौड़ी की लड़कियों को इतना फेमस करो कि इनका बाहर निकलना मुश्किल हो जाए , इनके घरवालों को ऐसी औलाद पैदा करने के लिए शर्म आए
इनको इनके मोहल्ले वाले ही न रहने दे मोहल्ले में ,
मोहल्ले का दुकानदार सामान तक देने से मना कर दे
गलियाँ बहुत ज्यादा हैं , वीडियो को अपने रिस्क पर देखें ।
और शेयर करना बहुत जरूरी है ताकि सब इनको पहचान ले , इनकी सजा इनको इनके अपने और पहचान वाले ही देंगे ।।
यह बच्चा लेफ्ट लिबरल्स के लिए सचमुच सिरदर्द बन चुका है 🔥
गहरी रिसर्च के साथ CJP प्रोटेस्ट को हर तरफ से एक्सपोज़ कर रहा है 🔥
लिबरल्स ने कॉपीराइट स्ट्राइक से उसे चुप कराने की कोशिश की,
लेकिन अब वो उन्हें 10x स्पीड पर पेल रहा है।
उसे और ताकत मिले 🙌🔥
🚨 कार्रवाई शुरू!
इंस्टाग्राम पर वीडियो की बाढ़ आ गई है: पुलिस CJP प्रोटेस्ट के गुंडों के घर जा रही है जो हिंसक हो गए थे।
पुलिस तुम्हारे दरवाज़े पर, पड़ोसी ड्रामा देख रहे हैं
— ‘बेटा, क्या कर दिया?’
फिंगरप्रिंट लिए गए, लेक्चर दिए गए कि ‘2 मिनट के मज़े के लिए अपना खानदान खराब मत करो।’ 😂
तुम्हारा पूरा भविष्य + परिवार की इज़्ज़त दांव पर लगी है क्योंकि तुम बेकार के जोकरों के साथ खड़े थे।
प्रोटेस्ट? इंसाफ मांगो? बिल्कुल।
लेकिन अगली बार PYROMANIACS के साथ यह सोचकर पोज़ मत देना कि ‘भैया यह सिर्फ़ वाइब्स हैं।’
पुलिस काउंसलिंग सेशन आने वाला है: ‘बेटा, स्कूल में पढ़ लो, यह नहीं।’
इंस्टाग्राम पर दो मिनट की हीरोगिरी से बहुत नुकसान हो सकता है। सोचो!!
#CJPMovement
कॉकरोच खुलकर अंधभक्त को चुनौती दे रहा था
जंतर मंतर प आ रहा हु जो उखाड़ना हे उखाड़ लो
फिर क्या कॉकरोच के प्राइवेट पार्ट तक को नहीं छोड़ा
खुलकर पिटाई की फिर डरकर जंतर मंतर से भागा
कहा मैने लाठी खाई में जा रहा हु घर मित्तर 😅
🚨✅ CJP का राज खुल गया! 😂
अभिजीत दीपके ने खुद कबूल किया: “अमेरिका में बेरोजगार था, 5 दिन पहले नौकरी ढूंढ रहा था… केजरीवाल ने फोन किया और CJP का प्रोजेक्ट दे दिया!”
ये NEET का आंदोलन नहीं, AAP का पेड़ा प्रोजेक्ट है। बेरोजगारों को AAP में ही प्रोटेस्ट करने की “नौकरी” मिल जाती है!
#CJPExposed #KejriwalScam