💠 वे ब्रह्म समाज के प्रमुख सदस्य थे. तत्वबोधिनी सभा की स्थापना की और तत्वबोधिनी पत्रिका भी आरंभ की.
💠 शिक्षित भारतीयों में प्रमुख थे जिन्होंने आधुनिक भारत की आधारशिला रखी.
💠जयंती पर सादर नमन🙏
@MIB_India I @airnewsalerts
आधा है चन्द्रमा🎵🎶
तू छुपी है कहाँ 🎶🎵
अभिनेता महिपाल पर फ़िल्माए गए ऐसे कई गीत आज भी लोकप्रिय हैं. वे धार्मिक फ़िल्मों में देवताओं का किरदार निभाने के लिए मशहूर थे. उनकी ऐतिहासिक और Arabian Nights पर आधारित फंतासी फ़िल्में भी कामयाब हुईं.
पुण्यतिथि पर सादर नमन🙏
@MIB_India I @airnewsalerts
@maliniawasthi सबसे आगे सबसे तेज की होड़ ने मानवीयता को ताक पर रख दिया है।
इसलिए आज भी सटीक और विश्वसनीय खबरों के लिए हमारे जैसे लोग आकाशवाणी पर निर्भर रहते है।
आकाशवाणी पर देर ही सही लेकिन सही खबर रहती है।
आकाशवाणी को कभी गलत खबर के लिए माफी मांगते नहीं सुना है।
@raj05tilak@MukeshPathakji आकाशवाणी और दूरदर्शन की उपयोगिता आज भी है भाई।
बस थोड़ा सुधार चाहिए।
मेरे पिताजी के पास सूचना और मनोरंजन के लिए आकाशवाणी के सिवा कुछ भी नहीं है।
आज भी 24घंटे के न्यूज चैनल के अंधी दौड़ में आकाशवाणी समाचार आज भी सटीक और प्रासंगिक है।
रेडियो के लोकल chhannel पर आज भी स्थानीय विशेष
शर्म की बात पर ताली बजाना
ये देखकर सच में बड़ी हैरानी होती है कि एक देश के तौर पर हममें पहचान का इतना संकट क्यों है। वरना ऐसा कैसे हो सकता है कि एक तरफ हम इस बात में भी गौरव तलाशते हैं कि हम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। एशिया में हम ही चीन को चुनौती दे सकते हैं। एक हम ही हैं जो ट्रंप के टैरिफ के दबाव में नहीं झुके। दूसरी तरफ हम इस बात के लिए खुद को शाबाशी दे रहे होते हैं कि देखो भारत के बगल में बांग्लादेश से लेकर नेपाल और श्रीलंका में तख्तापलट हो गया लेकिन हमारे यहां कुछ नहीं हुआ।
अगर आपके नाम ओलंपिक और वर्ल्ड रिकॉर्ड है तो आप इस बात पर खुश कैसे हो सकते हैं कि पूरे ज़िले में मेरे से तेज़ कोई नहीं दौड़ सकता। आप इस बात पर कैसे खुश हो सकते हैं कि देखो फलां गांव का बनवारी तो मेरे आगे कहीं नहीं ठहरता। नेपाल में लोकतंत्र का कोई इतिहास नहीं रहा। पाकिस्तान और बांग्लादेश बनने के बाद से वहां आधे वक्त तक सेना की हुकूमत रही है। अब इन देशों में तख्तापलट हो जाना और हमारे यहां न होना हमारे लिए गर्व का विषय कैसे हो गया।
दरअसल इस तरह का झूठा गौरव आत्महीनता से आता है। अंदर से हम भी जानते हैं कि इन देशों जितने न सही लेकिन राजनीति से लेकर लगभग हर क्षेत्र तक हम भी इतने ही भ्रष्ट हैं। सैकड़ों करोड़ की लागत से सालों के इंतज़ार के बाद पुल बनता है और वो एक महीने की बारिश में गड्ढों में तब्दील हो जाता है। इसके बावजूद क्या कभी किसी इंजीनियर या ठेकेदार को सज़ा होते देखी?
एक बलात्कारी बाबा कुछ महीनों में 12 बार पैरोल पर बाहर आ जाता है, क्या ये कानून का मज़ाक नहीं है। एक नेता का दूधमुंहा बच्चा किस काबिलियत पर स्टेट क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष बन जाता है, क्या ये भ्रष्टाचार नहीं है। एक नेता देश की सबसे मुश्किल परीक्षा पास करके पुलिस अधिकारी बनी महिला से गुंडों की ज़बान में बात करता है, क्या ये देश के टैलेंट का मज़ाक नहीं है।
चारों तरफ लोग बाढ़ के पानी में डूबकर मर रहे हैं। हर तरफ सड़क पर आवारा जानवर घूम रहे हैं। प्राइवेट अस्पताल आम आदमी की पॉकेट से बाहर है। सरकारी अस्पताल में इलाज करवाने से अच्छा आदमी चाय में फिनाइल घोलकर पी ले। इस पर भी एक मुल्क की गैरत नहीं ललकारती। चीजें ज्यों की त्यों बनी रहती हैं, तो इसलिए नहीं कि हम बड़े सहिष्णु हैं। इस देश की जड़ें बहुत मज़बूत हैं। वो इसलिए क्योंकि ये देश भाग्यवादी है। सड़क हादसे में आदमी इसलिए नहीं मरता कि ये उसकी नियति थी। वो इसलिए मरता है क्योंकि रात के अंधेरे में उसकी बाइक सड़क के बीचों-बीच बने गड्ढे से जा टकराई थी।
मरने वाले के परिवारवाले इसे ईश्वर की मर्ज़ी मानकर संतोष कर लेते हैं। व्यवस्था में बैठे लोगों के शरीर में शर्म का रसायन बनना बंद हो चुका है। जो लोग इस हादसे का हिस्सा नहीं हैं उनके लिए ये लोकल एडिशन के तीसरे पेज के किसी आखिरी कोने में छपी ख़बर है। इसके बावजूद हालात इसलिए नहीं बदलते क्योंकि हर कोई अपने-अपने हिस्से का भारत खाने में लगा है।
नेता और ब्यूरोक्रेसी को मोटे तौर पर देश से इसलिए लेना-देना नहीं क्योंकि वो इस देश में किराएदार की तरह रहते हैं। जिनके बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं, जो छुट्टियां विदेशों में मनाते हैं, इलाज विदेशों में करते हैं। जो अपने-अपने शहरों के वीआईपी इलाकों में रहते हैं, जहां न कोई पटरियों पर अवैध कब्ज़े होते हैं, न आवारा पशु घूमते हैं। इसलिए जब ये देश झूठा दंभ भरता है कि हम तो इतने ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी हो गए तो ऐसा लगता है कि उन्हें इस बात का भान ही नहीं कि भाई असल मुद्दा ये है ही नहीं।
एक देश जो अपनी लगभग पूरी आबादी को पीने का साफ पानी नहीं दे पा रहा है, ना साफ हवा दे पा रहा है, ना उसे ट्रांसपोर्ट की चिंता है, न उसे हर साल रोड एक्सीडेंट्स में मरने वाले लोगों की फिक्र है। जहां खाने की एक भी चीज़ बिना मिलावट के नहीं मिलती, वो देश जब बार-बार अपने उभरने की, अपने विश्व शक्ति बनने की बात करता है तो इससे बड़ी निर्लज्जता और कुछ नहीं हो सकती। मगर हम ऐसे निर्लज्ज बन गए हैं जो दूसरों की बदहाली से खुद की तुलना कर अपने लिए महानता तलाशते हैं। जिस बात पर माथा पीटना चाहिए, उस पर ताली बजाते हैं।
#Nepalprotest
-Neeraj Badhwar
बेएसा, रोहतास के बैनर तले कार्यपालक सहायकों ने सेवा 📝 स्थायीकरण, 🏛️ राज्यकर्मी का दर्जा,💰 वेतनमान, 📑 ईपीएफ, 🏥 चिकित्सा लाभ व 👨👩👧👦 अनुकंपा नियुक्ति सहित 11 सूत्री मांगो के समर्थन में चौथे दिन जिला मुख्यालय पर धरना/प्रदर्शन का कार्यक्रम किया।
@NitishKumar@IPRDBihar@Jduonline
बेएसा, बिहार के आह्वान पर सभी जिला इकाई के बैनर तले कार्यपालक सहायकों ने अपनी मांगो के समर्थन में रविवार को जिला मुख्यालय पर धरना/प्रदर्शन 🪧का कार्यक्रम किया गया।
उक्त धरना मे सैकड़ों की संख्या में सभी विभागों के कार्यपालक सहायकों ने भाग लिया।
@NitishKumar@samrat4bjp