#JusticeForTeachers
शिक्षक दोषी नहीं हैं।
उन्होंने वही योग्यता पूरी की जो नियुक्ति के समय मान्य थी।
पुरानी नियुक्तियों पर नई शर्त क्यों?
#JusticeForTeacher
#JusticeForTeacher
हम शिक्षक, शिक्षा की गुणवत्ता के पक्षधर हैं, पर वर्षों की सेवा और अनुभव को नजरअंदाज करना उचित नहीं। नियुक्ति समय के नियमों के आधार पर कार्यरत शिक्षकों पर नई अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत पुनर्विचार चाहता है।
एक शिक्षक का काम सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि देश के भविष्य को गढ़ना है। लेकिन अगर वो शिक्षक खुद मानसिक तनाव, असुरक्षा या अन्याय का सामना कर रहा है, तो हम एक बेहतर समाज की कल्पना कैसे कर सकते हैं?
#JusticeForTeachers
#JusticeForTeachers
देश के सभी राज्यों में आरटीई लागू होने के पूर्व राज्यों द्वारा निर्धारित अर्हता रखने वाले अभ्यर्थियों को ही शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया है जोकि 25-30 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं ।
परन्तु आरटीई लागू होने के बाद शिक्षक पद पर नियुक्ति हेतु निर्धारित अर्हता उसके पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर थोपना सरासर अन्याय है ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि संसद द्वारा कानून पारित कराकर इस अन्याय पर रोक लगाकर देश के लाखों शिक्षकों और उनके परिजनों को न्याय दिलाया जाये ।
@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@jayantrld@CMOfficeUP@myogiadityanath@rajnathsingh@aajtak@brajeshlive@Aamitabh2@ABPNews
#NoTetBeforeRteAct
शिक्षकों के साथ वार्ता में जो बयान देते हैं ,संसद में उसके विपरीत बयान दे रहे हैं ।
तो फिर सभी राज्यों से जो आँकड़े और सूचना माँगी गई है क्या वो सब मिथ्या है ।यदि आप शिक्षकों के साथ है तो उत्तर में सभी राज्यों से सूचना माँगे जाने और विचार करने का उल्लेख आना चाहिए था ।आपके इस बयान की जितनी निंदा की जाये वो कम है ।ऐसा लगता है कि शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार ने कसम खा ली है,कि देश में किसी को शान्ति से नहीं बैठने देंगे ।देश के 20 लाख शिक्षक जो आपके द्वारा निर्धारित योग्यता हासिल करके शिक्षक बने हैं उन्हें सेवा में आने के 20-25 वर्ष वर्तमान की योग्यता हासिल करने को बाध्य करना कितना न्यायोचित है?
20 वर्ष पहले पुलिस,सेना या अर्धसैनिक बलों में 10 किमी की रेस लगाकर भर्ती अधिकारी या सैनिक को यदि आज दौड़ा दिया जाए तो विभाग ख़ाली हो जाएगा ।
देश में कितने माननीय न्यायाधीश हैं जो आज CLAT EXAM में बैठने को तैयार हैं?50-55 वर्ष के शिक्षकों को आज परीक्षा में बैठने को मजबूर किया जा रहा है और शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार तमाशा देख रहा है ।
देश के नागरिक अपने सांसद इसलिए चुनते हैं कि संसद में उनके हितों की रक्षा करेंगे ।देश की संसद में सभी राज्यों से सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदो ने गत संसद सत्र में इस विषय को उठाया था लेकिन उसके बाद भी इस प्रकार का उत्तर देना यह सिद्ध करता है कि इनको किसी के हितों से कोई मतलब नहीं है ।
@PMOIndia@narendramodi@jayantrld@dpradhanbjp
यदि अकारण ही शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किये गए शिक्षक गलत थे तो शिक्षिका का निलंबन क्यों और यदि निलम्बन की कार्यवाही उपयुक्त है तो शिक्षक के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट क्यों?
हम शिक्षक इस समस्त प्रकरण की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।
#Istandwithbrijendraverma