सोनम वांगचुक की जमानत, NSA लगाने की वजह से नहीं हो सकती है पर इसके पीछे की असली कहानी को पढ़िये , रिसर्च किजिये लोगों से शेयर किजिये👇
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सूखे, बर्फीले रेगिस्तान लद्दाख में ऐसा क्या है, जो पूरे भारत में कहीं नहीं है?
लद्दाख के पर्यावरणविद सोनम वांगचुक उसी लद्दाख को छठी अनुसूची का राज्य बनाने पर क्यों अड़े हुए हैं?
बीजेपी का ऐसा क्या दांव पर लगा है कि चुनावी घोषणापत्र में लद्दाख को अलग राज्य बनाने का वादा करने के बाद भी आज तक उसे पूरा नहीं किया गया?
नरेंद्र मोदी क्यों लद्दाख को केंद्र के अधीन रखना चाहते हैं?
किसी यूट्यूबर, घर बैठे मीडिया चैनलों के लिए दलाली वाली वीडियो बना रहे या टीवी चैनलों में बकवास करते किसी विद्वान कथित इन्फ्लूएंसर्स ने इन सवालों का जवाब ढूंढा?
नहीं। क्योंकि जवाब के लिए तर्क, तथ्य और रिसर्च करना होगा। दिमाग लगाना होगा।
सो उन्होंने बीजेपी IT सेल के कहने पर सोनम को गद्दार ठहरा दिया। ये आसान काम था।
इन सारे सवालों का एक जवाब है–अदानी।
कैसे? यहां जानिए 👇
लद्दाख में बहुत कम बारिश होती है। कड़ाके की ठंड के बावजूद वहां सूर्य की रोशनी साल के 7 महीने भरपूर होती है।
यानी सोलर पावर। अदानी सेठ चाहता है कि लद्दाख में वह चीन से मंगवाए सस्ते सोलर पैनल लगाकर खूब सौर बिजली बनाए।
लेकिन, क्या आप जानते हैं कि रेगिस्तान में जहां भयंकर धूप है, वहां सोलर पावर बनाने में अदानी को क्यों दिक्कत हो रही है?
क्योंकि वहां सोलर पावर बनाने से आसपास के बहुत बड़े इलाके का तापमान 2–4 डिग्री तक बढ़ जाता है। यह वैज्ञानिक शोध में साबित हो चुका है।
यानी थार रेगिस्तान में सोलर पावर प्लांट लगाने से गुजरात तक गर्मी बढ़ेगी।
सो अदानी यह काम लद्दाख में करना चाहता है, ताकि गुजरातियों का पसीना न छूटे।
लद्दाख भारत का वह इलाका है, जहां सबसे ज्यादा ग्लेशियर्स हैं। वहां सोलर प्रोजेक्ट लगाने से अगर कश्मीर और हिमाचल तक तापमान 4 डिग्री बढ़ जाए तो क्या होगा?
भारत की तमाम बड़ी नदियां सूख जाएंगी। मानसून अरावली से आगे नहीं बढ़ेगा। लोग प्यासे मर जाएंगे।
लेकिन अगर लद्दाख छठी अनुसूची का राज्य बन गया तो अदानी और मोदी यह काम नहीं कर पाएंगे।
अब भी अगर आप सोनम की मांगों को गद्दारी, देशद्रोह मानते हैं तो फिर मैं कहूंगा कि...
असली गद्दार आप हैं।।
Saumitra Rai
#Laddakh
#लद्दाख_की_डेमोग्राफी #SonamWangchuk
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तीन मिनट का वीडियो हर भारतीय पत्रकार को देखना चाहिए।
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दिबांग और संदीप ने कुछ नया नहीं किया…
बस सत्ता से सवाल पूछे।
और वही सवाल सरकार की नाकामी की परतें उधेड़ गए।
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पहलगाम हमले को 4 दिन बीत गए।
देश ने सरकार पर भरोसा किया, साथ दिया।
अब सरकार कह रही है —
"हमें खबर ही नहीं थी कि बैसरन घाटी खुली थी।"
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ये चूक नहीं, विश्वासघात है।
Accountability कौन लेगा?
देश प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं मांग रहा,
लेकिन एक विशेष संसद सत्र तो बनता है!
प्रधानमंत्री जवाब दें।
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दिबांग ने दिखा दिया —
पत्रकार वो नहीं जो सरकार के गुण गाए,
पत्रकार वो जो सत्ता से सवाल पूछे।
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यहाँ सवाल ऐसे नहीं थे —
"आप आम काटकर खाते हैं या चूसकर?"
"आपमें इतनी ऊर्जा कहां से आती है?"
"आप तो फकीरी की मिसाल हैं!"
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सवाल थे —
"हमले के वक़्त एजेंसियां कहां थीं?"
"बैसरन घाटी पर किसकी निगरानी थी?"
"जनता की जान की जिम्मेदारी किसकी थी?"
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देश के गोदी पत्रकारों के लिए सबक है —
भक्ति से नहीं, सवालों से लोकतंत्र बचता है।
#घोरकलजुग
#PahalgamTerroristAttack
@JaikyYadav16 क्यों @grok ये ब्राह्मण ऐसे भ्रामक वीडियो बना के किसको मूर्ख बनाना चाहते है और इससे किस जात को सबसे ज्यादा नुकसान होता है और कैसे प्रभाव पड़ता है ।कृपया पूरी तरह से अच्छे से विवरण दीजिए ।