साहब! तीसरी बार आया हूँ, समाधान नहीं हुआ।
बस यही तो है असली 'सम्पूर्ण समाधान दिवस' का मर्म! अधिकारी बदलते हैं, तारीख बदलती है, बस फरियादियों का दर्द और उनका चक्कर लगाना ही नहीं बदलता. अगली बार शायद गिनीज बुक वाले भी आएं कि एक ही समस्या के लिए कितनी बार अर्जी दी जा सकती है!
नाम — साध्या तिवारी
काम बुर्का पहनकर अपने बदन पर शराब की बोतलें बांधकर तस्करी करना, ताकि मुस्लिम लड़कियों और महिलाओं को बदनाम किया जा सके।
मतलब कमाई अपनी और बदनामी पूरे मुस्लिम समाज की?
भक्तों तुम्हरी दीदी कितनी शातिर हैं। 🤐
कहीं राशन कार्ड में विलंब तो कहीं तकनीकी खामियां
सिस्टम के दांव पेंच में उलझा राशन कार्ड ग्रामीण काट रहे दफ्तरों के चक्कर
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