नमस्कार साथियों !
हम सभी ने भारत का इतिहास पढ़ा है और भारत माता की महिमा की गाथाएं सुनी हुई हैं। इतिहास के पन्नों में भारत को विश्वगुरु यानी कि विश्व को पढ़ाने वाला अथवा पूरी दुनिया का शिक्षक कहा जाता था, क्योंकि भारत देश की प्राचीन अर्थव्यवस्था, राजनीति और यहाँ के लोगों का ज्ञान इतना समृद्ध था कि पूरब से लेकर पश्चिम तक सभी देश भारत के कायल थे भारत की समृद्धिता और धन को देख कर विदेशी लोग इतने लालची हो गए थे कि उन्हें भारत पर आक्रमण करना पड़ा ताकि भारत के धन से अपने भूखे पेट भर सकें। लेकिन हम बात कर रहे हैं, भारत के विश्वगुरु होने की ।
मैं इस account के माध्यम से आपको भारत के गौरवशाली इतिहास , हमारी संस्कृति और विरासतों से जोड़ना चाहता हूं ।
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नीचे तस्वीर को देखकर आप सोच रहे होंगे कि शायद यह किसी वीडियो गेम का वॉलपेपर है, परंतु यह हमारे पूर्वजों द्वारा बनाई गई गौरवपूर्ण धरोहर हैं। हो सकता है आज का युवा केवल पब्जी और सोशल साइट्स पर व्यस्त रहता हो, परंतु सोशल साइट्स के माध्यम से ही कई ऐसे युवा भी हैं जिनमें मैंने अपने सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रति एक गर्व का भाव देखा है।
चित्रदुर्ग किला स्थानीय रूप से एलुसुत्तिना कोटे (जिसका अर्थ है सात चक्रों वाला किला) के नाम से जाना जाता है और यह देश के सबसे मजबूत पहाड़ी किलों में से एक है। मूल रूप से किले में 19 प्रवेश द्वार, 38 पश्च-द्वार, 35 गुप्त प्रवेश द्वार और 4 'अदृश्य' प्रवेश द्वार थे। इनमें से कई अब अस्तित्व में नहीं हैं। दरवाजे मजबूत और मोटे लकड़ी के बीम से बने थे जिन्हें लोहे की प्लेटों से बांधा गया था। ऊंची प्राचीर चट्टान से काटी गई है जो ऊबड़-खाबड़ परिदृश्य के पूरक हैं और इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि किलेबंदी की प्रत्येक पंक्ति नीचे की अन्य पंक्तियों को देखती है। टेढ़े-मेढ़े रास्ते दुश्मन सैनिकों की गति को धीमा कर देते थे और बैटरिंग रैम का इस्तेमाल करने से रोकते थे। इसके अलावा, मुख्य प्रवेश द्वार के दरवाजे हाथियों को दूर रखने के लिए लोहे की कीलों से सजे हुए थे।
स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के बारे में हम सभी लोगों ने सुना होगा परंतु इस अद्भुत धरोहर के बारे में शायद ही कोई जानता हो। वामपंथी इतिहासकार कभी नहीं चाहते थे की हमारे पूर्वजों के ऐसे अविश्वसनीय कौशल एवं उनके बलिदान हमारे आने वाली पीढ़ी को गौरवान्वित कर सकें।
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नमस्कार 🙏🙏
जिस तरह राजस्थान का भानगढ़ किला शापित और भूतिया माना जाता है जिसमे रात में ठहरा नही जा सकता है उसी तरह राजस्थान के बाड़मेर में भी एक मंदिर है जहां रात में रुकने की सख्त मनाही है
राजस्थान के बाड़मेर जिले का किराडू मंदिर यह अपने रहस्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है इसके बारे में कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद यहां ठहरने वाले लोग यहां पत्थर के बन जाते हैं इसके पीछे एक साधु का श्राप माना जाता है ।
यहां कुल 5 मंदिर हैं जिसमे से 1 मंदिर भगवान विष्णु के लिये और बाकी के 4 मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं । इन मंदिरों में सोमेश्वर मंदिर सबसे भव्य और प्रसिद्ध है ।
किराडू जिसका पुराना नाम (किरातकूप) था इस पर परमार, चालुक्य, चौहानों का अधिकार रहा। यहां 11वीं व 12वीं सदी में अद्भुत शिल्पकलाओं से युक्त मंदिरों का निर्माण हुआ। इस मंदिर का निर्माण भी उसी समय हुआ ऐसी ही ऐतिहासिक धरोहर को जानने के लिए हमारे साथ जुड़ें ।
धन्यवाद
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क्या आप जयपुर के जंतर-मंतर के बारे में जानते हैं ? यह दुनिया की सबसे बड़ी खगोलीय वेधशाला है और भारत के सर्वश्रेष्ठ ऐतिहासिक स्थानों में से एक है। इस जगह का निर्माण 1728 से 1734 यानि 18वीं शताब्दी में राजा सवाई माधो सिंह ने करवाया था क्योंकि वह विज्ञान के बहुत बड़े प्रशंसक थे। वेधशाला में ऐसे उपकरण लगे हैं जो आपको आकाशीय पिंडों की स्थिति बताते हैं।
वेधशाला में समय मापने, ग्रहण की भविष्यवाणी करने , पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते समय प्रमुख तारों की स्थिति का पता लगाने, ग्रहों के झुकाव का पता लगाने और आकाशीय ऊँचाई और संबंधित पंचांग निर्धारित करने के लिए उन्नीस उपकरण हैं।
जंतर मंतर नाम -
जंतर नाम संस्कृत शब्द "यंत्र" से लिया गया है, जिसका अर्थ है "यंत्र, मशीन", और मंतर " मंत्रणा" से लिया गया है, जो संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है "परामर्श, गणना")। इसलिए, जंतर मंतर का शाब्दिक अर्थ है 'गणना करने वाला उपकरण'।
विश्व की सबसे बड़ी सूर्य घड़ी -
वृहत स्मारक यंत्र एक विशाल सूर्यघड़ी है, जिसे जंतर मंतर वेधशाला के केंद्र में रखा गया है। यह 27 मीटर लंबा है और दुनिया की सबसे ऊंची सूर्यघड़ी के रूप में प्रसिद्ध है।
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