नेहा भारती ने कहा 👇
कि दलित समाज को हिंदू कहने से पहले यह देखना चाहिए कि क्या उन्हें वास्तव में बराबरी का अधिकार मिला है। उनका कहना था कि अगर दलितों को मंदिरों में सम्मानपूर्वक प्रवेश नहीं मिलता और आज भी भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं, तो फिर यह कैसे कहा जा सकता है कि दलित पूरी तरह समान अधिकारों के साथ हिंदू समाज का हिस्सा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जब भी मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाने की बात आती है, तब दलितों को हिंदू बताया जाता है, लेकिन सामाजिक बराबरी और सम्मान देने की बात आती है तो उनके साथ भेदभाव किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिला और उन्हें जाति के आधार पर अलग-थलग रखा गया।
बहस के दौरान नेहा भारती ने यह भी कहा कि "इस देश का दलित हिंदू नहीं है और उसे खुद को हिंदू मानना भी नहीं चाहिए।" उनके अनुसार दलित समाज पर जितने अत्याचार हुए हैं, उतने किसी अन्य समाज पर नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों के साथ सबसे अधिक अन्याय ऊंची जातियों ने किया है।
बातचीत के दौरान एंकर ने उनसे सवाल किया कि क्या मुसलमानों ने दलितों पर अत्याचार नहीं किए? इस पर नेहा भारती ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि उनका मुद्दा दलितों के साथ हुए सामाजिक भेदभाव और उनके अधिकारों का है।
यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।
आप इस पूरे बयान को किस तरह देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर शेयर कीजिएगा।
सोशल एक्टिविस्ट नेहा भारती ने कहा कि "अगर कोई लड़की सुंदर है तो सारे ब्राह्मणवादी लोग कह देते हैं कि तू तो दलित या जाटव लग ही नहीं रही।"
यह बात सुनकर मुझे वर्ष 2021 का अपना अनुभव याद आ गया।
मैं SC/ST एक्ट के मेरे मामले में न्याय की मांग लेकर तत्कालीन राजस्थान के मुख्य सचिव निरंजन आर्य से मिलने गया था। निरंजन आर्य जी स्वयं दलित समाज से आते थे। लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने मुझसे कहा, "तू दलित लगता तो नहीं है, अच्छे कपड़े और अच्छे जूते पहने हो।"
ब्राह्मणवाद पर हम लोग हा हल्ला जरूर करते है लेकिन बड़े पदों पर विराजे ऐसे दलित अधिकारियों का यह कौनसा वाद है जो ब्राह्मणवाद से भी ज्यादा खतरनाक है।
देशी गुंडा #भरत_भूषण_तिवारी पर इतने संगीन केस, व आरोप हैं, फिर भी इसकी मूर्ति बनाकर पूजने का बात हो रहा है।
अवैध हथियार रखना।
पुलिस पर फायरिंग करना।
सरकारी काम में बाधा डालना।
पुराना केस (मार्च 2025): शाहपुर थाने में एक केस दर्ज। पुलिस अधिकारी (दारोगा रामाशंकर बैठा) पर हमला, कॉलर पकड़ना, धक्का-मुक्की, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी
भगवान बुद्ध ने जीवहत्या और पशु-बलि का पुरजोर विरोध किया था .उनके अनुसार, सभी जीव जीवन से प्रेम करते हैं और मृत्यु से डरते हैं. उन्होंने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना और किसी भी देवता को प्रसन्न करने के लिए बेजुबान जानवरों की बलि को व्यर्थ व क्रूर बताया。
गज़ब का खेल चल रहा है।
जिस राम मंदिर चढ़ावा डकैती की जांच SIT कर रही थी, उसने अपनी रिपोर्ट ACS (गृह विभाग) संजय प्रसाद को सौंप दी है।
सोचिए, ये वही संजय प्रसाद हैं जो ख़ुद राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य हैं।
अस्सी के दशक में जब से मंदिर आंदोलन शुरू हुआ है, तब से चंदे की चोरी का सिलसिला भी चलता आ रहा है। संभावना है कि इन लोगों ने अब तक कई हज़ार करोड़ रुपये चोरी किया। आज से 36 साल पहले 1990 के एक आयकर अधिकारी का इंटरव्यू सुनिए।