जिस्त से जंग कहां हारी है
कोशिशें अब भी मेरी जारी है
उसको मैं कैसे भूल सकता हूं
पल तेरे साथ जो गुजारी है
आज ये कल वो फ़िर कोई और के
ये तो फितरत मियां तुम्हारी है
जॉन बेहद अज़ीज़ हैं मुझको
नक्ल बस इसलिए उतारी है
#Aktar_Ali_Aalif
ग़ज़ल
बचाया है मेरी इज़्ज़त को रब ने
वगरना क्या कमी छोड़ी थी सब ने
मेरी आंखों में भी आएं थे आसूं
रुलाया था मुझे तेरे सबब ने
मैं लेकर क्या करूं इस सादगी का
डुबोया है मुझे मेरे अदब ने
मैं अच्छा हूँ ये सब तो जानते हैं
मगर छोड़ा नहीं मेरे ही ढब ने
Aktar Ali
@Arif61916342