सभी लोगों को UPI चार्ज से बचने के लिए कैश का प्रयोग करना शुरू कर देना चाहिए,
अब और अधिक हम अपने देशवासियों के ऊपर चार्जेज के नाम पर सरकार को लूटने नहीं देंगे,
आने वाले समय में सबका जवाब मिलेगा।
अब 2,000 रुपए से ऊपर के लेन-देन पर 0.5% तक चार्ज लगेगा… यानी 5,000 पर 25 रुपए, और 10,000 पर 50 रुपए।
पहले कैशलेस का माहौल, फिर डिजिटल भुगतान, और अब उसी UPI के नाम पर जनता की जेब काटने का 'मोदी फरमान'।
4th grade 🚨🚨
सभी कंडीडेट जिनको चाहे कोई सा भी विभाग मिला हो मिलकर आवाज उठानी होगी 🙏
क्योंकि हर विभाग में किसी न किसी तरह से शोषण हो रहा हैं (, वार्ड बॉय, रसोइया, चौकीदार, सफाई कर्मी)
सभी साथ मिलकर आवाज उठाओगे तो कुछ हो सकता है 🙏 वरना हालत खराब है 🙏 ✅✅
@ravisohu1
आज जहां एक तरफ लोग रक्षाबंधन की खुशियां मना रहे वहीं दूसरी तरफ बेरोजगार छात्र सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि काश सरकार युवाओं के हित में भी कुछ फैसला लेगी,
पिछले 12 वर्षों से युवाओं के हाथों में केवल निराशा मिली है,
लेकिन कयास लगाई जा रहे है कि प्रदर्शन के बाद युवाओं के लिए कुछ पिटारा खुल सकता है,
लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है,
उम्मीद करते हैं कि जल्द ही युवाओं के लिए कुछ अच्छे फैसले सुनाई पड़ेंगे।
कैसी एकरूपता भाई जी..?
शिक्षा व्यवस्था को ठेके पर लोग नहीं स्थाई शिक्षक चाहिए।
कोरोना कॉल में पास आउट बच्चों को सीधा सीधा फायदा मिलेगा इसमें और जो लंबे समय से विषयों पर पकड़ बनाए हुए है वो देखते रह जायेंगे।
कांग्रेस सरकार ने अभिशाप और बीजेपी में यही योजना वरदान कैसे हो गई ।
सुभाष नाम का व्यक्ति नोएडा मे एक कम्पनी मे नौकरी करता था,सैलरी भी अच्छी थी उसकी
उसका बैंक अकाउंट ICICI बैंक मे था, एक दिन सुभाष ऐसे ही मोबाइल ऐप मे कुछ देख रहा था तो उसे 250000/- रूपये के पर्सनल लोन का ऑफर दिखाई दिया,
सुभाष को लोन की जरुरत न थी फिर भी उत्सुकतावश उसने उस पर क्लिक किया, और जैसे जैसे स्टेप आते गए वो क्लिक करता गया
और अचानक उसके पास मेसेज आया, बधाई हो आपका पर्सनल लोन अप्रूव हो गया और फिर प्रोसेसिंग फीस काट कर 238000/- बैंक खाते मे आ गए,
5 साल का लोन था जिसमे 60 किस्त बनी जो तक़रीबन 5765/- रूपये के आस पास थी, सुभाष भी खुश हो गया और पैसो से अपनी जरुरत पूरी करने लगा
साल भर बाद अचानक नौकरी मे कुछ समस्या आयी तो छोड़नी पड़ी, फाइनेंशियल कंडीशन बिगड़ने लगी नतीजा EMI बाउंस होने लगी,
बैंक वाले दिन रात फोन करके परेशान करने लगे, और एक दिन घर आ गए, उन्होंने सुभाष पर प्रेशर डाला कि बैंक का पैसा वापिस करे,
सुभाष ने उन्हें समझाने की कोशिश की, कहा अभी पैसे नहीं है लेकिन वो सुनने को तैयार न थे
हँगामा हुआ, मोह्हले वालो ने शोर सुना तो घर लके बाहर जमा हो गए, सुभाष को बेइज्जती महसूस हुई,
हार्ट अटैक आया और उसकी मौत हो गयी...
ये एक आम आदमी की कहानी थी कि कैसे बैंक अपना पैसा रिकवर करने के लिए प्रेशर डालते है लेकिन, अगर क़ोई बड़ा आदमी हो तो उसका 99% लोन माफ़ कर देते है
जी न्यूज के मालिक और पूर्व बीजेपी सांसद सुभाष चंद्रा जैसे लोगो को 22 हज़ार करोड़ का लोन देने के बाद NCLT मात्र 6. 6 करोड़ पर सेटलमेंट कर लेता है
Subash Chandra को बैंको ने जो लोन दिया वो बैंक वालो के बाप का पैसा नहीं था, वो भारत की जनता का पैसा था जिसे NCLT के नाम पर दोनों हाथो से लुटा रहे है
लेकिन क़ोई पूछने वाला नहीं, आम लोगो पर ही बैंक वालो की दादागिरी चलती है,
ये विभागों की मनमर्जी से बचने के सरकार से निवेदन है कि चतुर्थ श्रेणी का ऑफिसियल जॉब चार्ट जारी किया जाए ।
एवं साफ सफाई वाले की अलग से व्यवस्था की जाए ।