बिहार का जंगलराज 👇
जमुई में दरिंदों ने नाबालिग लड़की और लड़के के साथ दुर्व्यवहार किया
दरिंदों के सामने लड़की हाथ जोड़ती रही, गुहार लगाती रही, लेकिन वे लड़की को नोचते-दबोचते रहे
आज बिहार की BJP सरकार में बच्चियां, महिलाएं असुरक्षित हैं. लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह से बर्बाद है
The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
कल से #DUSU चुनाव के नतीजों के संदर्भ में वो लोग भी टिप्पणी कर रहे हैं जो इसके एतिहासिक चरित्र से वाक़िफ़ नहीं है। @swatiatrest द्वारा शेयर किया पोस्ट कई भ्रांतियों को ख़त्म करता है क्योंकि एक छात्र और फिर उसी विश्वविद्यालय के शिक्षक के रूप में यही सार हमने पाया।
जय हिन्द
मोदी जी के अंधभक्तों और BJP के लंपटों का दिल से शुक्रिया
प्रधानमंत्री की हीहीही खीखीखी वाली विदेश नीति को हर घर तक पहुँचाने के लिए
खास बात है कि बिना नाम लिए ही सब लोग जान गए कि ऐसी नौटंकी कौन करता है
हमने तो बस दिखाया था, मोदी जी कैसे अपना और देश का मखौल बनाते हैं
BJP के दिग्गज नेताओं ने तो इसे जन जन तक पहुंचाया - Thank you तो बनता है 🙏
PR events. Designer clothes. Luxury cars. Aircraft. Skincare.
Modi has money for everything - except the education of India’s youth.
No adequate infrastructure. No quality teachers. No training. No hostels. No jobs.
At this point, the authenticity of his degree is almost irrelevant. His contempt for education explains how 'educated' he is.
"सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है - हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?"
यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा।
गाँव से पढ़ने शहर आई। हॉस्टल है नहीं, तो PG में रहना पड़ता है। सिर्फ़ सुरक्षित रहने में लाखों ख़र्च हो जाते हैं। हर महीने किराए की चिंता, और बेघर होने का डर - इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है।
कई लड़कियाँ इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं। सिर्फ़ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है।
और आवास भत्ता? महंगाई के साथ बढ़ता नहीं, ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
@narendramodi जी - उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है आपके पास?
No-this is not crass humour. This is not immature behaviour. This is a much-needed long-awaited phenomenon. To fearlessly lampoon a PM is a democratic right long denied to Indians.
देश पर एक system का कब्ज़ा है - परत दर परत।
कौन है ये सिस्टम?
RSS और "हम दो, हमारे दो" की अगुवाई में गिनती के लोगों ने मिल कर भारत की हर संस्था पर अपना नियंत्रण कर लिया है।
सरकार हो, व्यापार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, खेल हो, मीडिया हो, न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या bureaucracy - इस सिस्टम में हुनर नहीं, पैसा और पहुंच मायने रखता है।
इस क़ब्ज़े के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ छात्रों की आवाज़ ही सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसीलिए system को students से खतरा है - क्योंकि वो सवाल पूछते हैं, जवाबदेही मांगते हैं।
इसी डर से सिस्टम छात्र नहीं, अंधभक्त चाहता है - छात्रों को प्रताड़ित करता है, अंधभक्त को बढ़ावा देता है, ताकि कोई सवाल न उठे और मनमानी चलती रहे।
#ChhatronKiGoonj
दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती।
दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।
अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ़ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं।
दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सज़ा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।
महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।
On one hand, the BJP wants us to believe that Modi is immensely popular.
On the other hand, it uses the ECI to hijack electoral finance, delimitation, electoral rolls, political parties and the entire electoral system.
The contradiction is hard to miss.
They boast so confidently — photo-ops, big rallies, influencer summits, paid PR, films, documentaries. You name it, they have it.
Yet the BJP does not trust its popularity to speak for itself. It sneaks back into power through the back door - with the ECI at its side.
That is not the characteristic of brave men.
And the thing about cowards? They don’t last very long.
The things we do to placate his insecurity. Getting ministers, influencers and film-stars to wish him on his birthday. Full page ads in newspapers, non stop spectacle of a million diyas being lit in his honour. Getting people to call him lord incarnate. Hope he is feeling better
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी। अब पार्टी चोरी - ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं।
ECI की संवैधानिक ज़िम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है - मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं।
यह लड़ाई सिर्फ़ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
Nancy Mace: "It never happened... it was made up out of thin air, with no names.
Me: "Her name is Natalie Johnson... that's what she said. Take it up with your former comms director."