अब तो पाक अधिकृत कश्मीर का भारत में विलय और कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति ही आतंकवादियों, उनके समर्थकों और रहनुमाओं को यह एहसास दिलाएगा कि उनसे बहुत बड़ी गलती हो गई है ।
यह न केवल कश्मीर समस्या का स्थायी समाधान होगा वरन् शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी।
नेपाल का वो आइकानिक घर अभी तक चर्चा में हैं....पर इस बार चर्चा की वजह कुछ और है...
बरखा दत्त जब उस घर के लोगों का इंटरव्यू ले रही थी तो इस कपल ने जो बाते बताई ,वो प्रेम की इंतेहा है...
चूंकि घर में कुछ बचा नही है ,सिर्फ प्राण संपत्ति की रक्षा हुई...पर इस घर की स्वामिनी इस घर से रेस्क्यू होने के वक्त कुछ भी निकाल कर अपने साथ नही लेकर आई..लेकर आई तो लाल रंग की दो पोटली,उसपर भी कीचड़ लगा हुआ है...
जब बरखा ने उनसे पुछा कि इसमें क्या है तो उसने बोला कि इस दोनो पोटली में मेरी और मेरी सास के सिंदूरदानी है ,जिससे हमारे ब्याह के वक्त हमको सिंदूर लगाया गया था...सभी धन संपदा से भी कीमती मुझे ये था ,इसलिए मै ये ही निकाल कर अपने साथ लायी हूं...
ये बोलते वक्त उस महिला का चेहरा गर्व से दपदप कर रहा था और वो सिंदूरदानी खोल कर अपने पति से अपनी मांग फिर से भरवा लेती है...
ये बस प्रेम करना नही है,ये प्रेम में समर्पित हो जाना है..कोई विवाह परफेक्ट नही होती,उसे इसी तरह समर्पित होकर सुंदर बनाया जाता है,वरना आज कल तो कंपेटिबिलिटी की कमी कह कर तलाक लेकर अलग हो जाने के हजार बहाने भरे पड़े हैं...
ये घर बस इसलिए नही बचा कि इसपर प्रकृति सहाय थी,ये घर इसलिए भी बचा कि इस घर में रहने वाले लोंगो के प्रेम की कहानी इस तरह ही बाहर आनी थी...
इस्लाम के नाम पर 14 वर्षीय बच्ची की जबरन शादी एक 63 वर्षीय बुज़ुर्ग से कर दी जाती है और महिला अधिकारों का ढोल पीटने वाले ख़ामोश रहते हैं। इन्हें केवल हिंदू धर्म में कमियाँ निकालनी होती हैं।🤔
छोटी छोटी बेटियों के सरकारी स्कूल में बनी ये
अवैध बड़ी मस्जिद जे जे कॉलोनी वजीरपुर आप को हटानी पड़ेगी
किस बात की प्रतीक्षा करे रहे है आप ?
@gupta_rekha@LtGovDelhi@HMOIndia
एक एक ईट गिरने तक लड़ेंगे हम
राहुल गांधी के केरल का महिला सशक्तिकरण मॉडल देखिए
केरल में, इस्लामिक स्कॉलर कांथापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार ने कहा कि महिलाओं को घर के अंदर ही रहना चाहिए और महिलाओं के सार्वजनिक रूप से बाहर निकलने से भारी तबाही होती है। महिलाओं के बाहर निकलने से प्राकृतिक आपदाएं आती हैं
इसके बाद, बिग टीवी की पत्रकार अपर्णा कुरुप ने अपने शो में उनके विचारों पर सवाल उठाए और उनकी आलोचना की।
और अब, बिग टीवी ने न केवल सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से शो का वीडियो हटा दिया है, बल्कि पत्रकार अपर्णा कुरुप ने माफ़ी भी मांगी है।
तो, अब मीडिया की आज़ादी खतरे में नहीं है, और ऐसा लगता है कि हमारे छद्म नारीवादियों (pseudo feminists) ने फेविकोल पी लिया है। तथाकथित "पितृसत्ता को खत्म करो" (Smash the Patriarchy) वाला ग्रुप पूरी तरह से चुप हो गया है।
शायद वे "पितृसत्ता को खत्म" नहीं करना चाहते क्योंकि उन्हें डर है कि इस मामले में उनके अपने सिर ही न फूट जाएं।
और दोगला राहुल गांधी अपने द्वारा शासित राज्य केरल में हो रहे महिलाओं के दमन पर चुप है कि एक महिला को गलत के खिलाफ बोलने पर माफी मांगने पर मजबूर किया गया
13 वर्षीय वियाम को 29 वर्षीय मोहम्मद से शरिया कानून के तहत शादी करने के लिए मजबूर किया गया। रोते हुए वियाम कहती है, “लड़की इस शादी के लिए मना नहीं कर सकती, क्योंकि यह हमारे मज़हब के ख़िलाफ़ माना जाता है।
वहीं, मोहम्मद का कहना है कि वियाम कम उम्र की है और उसे उसकी हर बात माननी चाहिए। उसके अनुसार, अगर वह उसकी बात मानने से इनकार करती है, तो वह उसके साथ मारपीट करेगा।
हिंदुओं पर Free में ज्ञान बाँटने वाली स्वरा भास्कर जी, अपने कुछ अनमोल वचन मज़हब की इस “ख़ूबसूरती” पर भी फ़रमाइए।
#साका_जौहर पर विद्वानों की घनघोर राय आ रही है। इस तस्वीर को रखकर मित्रों से राय मांगी, कैसे देखते हैं, #जौहर और इन #औरतों को आमने-सामने रखते हुए? तस्वीर के दूसरे पहलू को सामने रखे बिना तो #जौहर की गरिमा की स्थापना संभव नहीं।
■ ऐसी तस्वीर उन #मजहबी_औरतों की हैं, जिन्हें अल्लाह से अधिक #श्रीराम पर विश्वास है। यह #ईमान इतना अडिग है, कि इन्हें पता है #श्रीराम_भक्त कभी निशस्त्र पर! महिला पर! बुजुर्ग पर! बच्चो पर! और गौ मां पर प्रहार नहीं करेगा। यही यदि यह यकीन हो जाए, सामने वाला औरत-बच्चा, बुजुर्ग देखे बिना गोली मारेगा! तो मुकाबले में एक ना दिखेगा।
■ लेकिन यही यदि इस #मजहबी_भीड़ के सामने #गैर_ईमान वाली नारी, बच्चे, बुजुर्ग और निशस्त्र पुरुष खड़े हों तो #निगलते एक पल ना लगे। वह भी एकजुट होकर। परवरदिगार का हुक्म कबूल कर।
■ यह "यकीन के मजहब" का विषय है। वैश्विक स्तर पर हर "गैर यकीनी मुल्क" में यही मंजर मिलेगा। आमने-सामने की जंग में औरतों और बच्चो को आगे कर दो। गाजा में या फिर समुद्री रास्ते घुसपैठ में मारे गए औरत और बच्चो के #मुर्दा_जिस्म को लेकर #इंसानियत_की_गुहार लगाओ। नुमाइश करो। हमदर्दी हासिल करो। चंदा भी जुटाओ।
■ वामपंथ से निकल कर जब कभी स्वयं को हिन्दू स्वीकार कर इतिहास का पुनर्पाठ करता हूं तो पाता हूं, #हिन्दू अपने उच्च आदर्श, श्रेष्ट जीवन मूल्यों के कारण बार-बार पराजित हुआ। लूटा गया। मारा गया। जलावतन हुआ।
■ अब इस तस्वीर पर दुबारा गौर कीजिए। अपनी पराजयों पर विचार करें। स्वयं को बहुत विवश पाता हूं। छटपटा कर सोचता हूं, ये किन शत्रुओं से लड़े हमारे पुरखे? किन परिस्थितियों में #जौहर और #साका का मार्ग चुनने को बाध्य हुए? याद रखिए, #बाध्य लिख रहा हूं।
वामपंथ और इस्लाम कभी नहीं कहता कि शत्रुओं का कत्ल नारी, बच्चे या बुजुर्ग देख कर किया जाए। इनका अतीत ही इससे भरा हुआ है। #इसराइल के "सुपरनोवा म्यूजिक फेस्टिवल" पर हमला हो या #अमेरिका का 9/11...या फिर ताजातरीन #भारत का पहलगाम। हर कहीं सामने वाला #गैर_मजहबी होना चाहिए। यही एकमात्र शर्त है।
#कुरान_मजीद का साफ हुक्म है, गैर ईमान वाले को पहले #ईमान_की_दावत दो। ना माने तो गुलाम या रखैल बना लो या कत्ल कर दो।
कृपा कर खुद की पीठ ठोकना
बंद करें। बेहतर होगा, सामने वाले को उसकी #असलियत बताएं। उसकी #औकात बताएं।
आपका #वजूद तभी तक है जब तक इस धरती पर #श्रीराम_भक्त हैं।
अगर कोई मुझसे पूछे की रेप और सैक्स में क्या फर्क है
तो मेरा सीधा सा जवाब होगा,हम खैरात अपनी मर्जी से करते हैं तो उसमें हमें खुशी मिलती है, लेकिन वही पैसा अगर कोई हमसे चाकू पिस्टल की नोक पर छीन ले तो दुःख होता है
जबकि पैसा दोनों ही मामलों में जा रहा है हमारा फर्क बस इतना है कि, एक में हमारी मर्जी शामिल होती है दूसरी में नहीं
आजकल जौहर को लेकर एक बार फिर से चर्चा चल रही है, इसमें मुस्लिम मजे ले रहे हैं उनका मजे लेने का कारण समझ में आता है, क्योंकि वो जिस विचारधारा को फालो करते हैं, वहां मर्जी और रेप जैसा कोई कांसेप्ट है ही नहीं
मर्द का खड़ा हो गया तो औरत को देना पर फर्ज है फिर वो किसी भी हालत में हो चाहे दर्द ए जेह से ही क्यों न गुजर रही हो लेकिन मना नहीं कर सकती शौहर को
इस सैक्ट में रेप का कही कोई जिक्र नहीं है बाद में शरियत में इसे जोड़ा गया है और हद वही रखी गई है जो दो लोग अपनी मर्जी से गैर के साथ सैक्स करते हैं उसपर मिलती है
जो गुलाम बन गई,वो पूरे घर खानदान रिश्तेदार को भी नहीं मना कर सकती उसका बस एक ही काम है टांग फैलाकर लेटी रहे चुपचाप
आज देश ही नहीं दुनिया में पचास फीसदी से ज्यादा इनकी आबादी जो है वो उम्म उल वलद के हसब नसब से है और वो इसपर फख्र करते हैं एजाज़ समझते हैं इसे
ये लोग कहते हैं कि हमारे बुजुर्ग ईमान लाये थे, मैं पूछता हूं आज भी बर्रे सगीर की इनकी आधी से ज्यादा आबादी को अरबी नहीं आती तो हजार आठ सौ साल पहले कैसे कोई ईमान लाया होगा पढ़कर, अगर पढ़कर ही ईमान लाना था तो जबरदस्ती, और जजिया की बात क्यों आई
खैर उनसे क्या गिला उधर खड़े होकर देखने पर ये सब जायज ही लगता है
गिला उनसे है जिनके साथ ये सब हुआ आज भी हो रहा है और वो लोग हस रहे हैं कि ये तो उसके साथ हो रहा है मेरे साथ थोड़ी न
उन्हें ये समझना चाहिए कि ये सबके साथ हुआ है आगे सबके साथ होगा
जो हजारों औरतों ने जौहर किया था उसमें सिर्फ एक क्षत्रिय समाज की ही औरतें नहीं थी, बल्कि महल में रहने वाली हर जाति हर वर्ण की सेवादार औरतों ने भी जौहर किया था,आज अगर तुम हस रहे हो, तो ये बहुत मुमकिन है कि अपने ही समाज की उस औरत पर हस रहे हो जिन्होंने जहर पीकर जान देने से बेहतर जलकर मरना चुना, क्योंकि उन्हें पता था कि ये वो लोग हैं जो लाश को भी नहीं बख्शेंगे
इतना आत्ममुग्ध, इतना लापरवाह, इतना चूतिया समाज इस धरती पर दूसरा कोई भी नहीं है,न होगा
विचार कीजिए
- 1020–1140, चालुक्यों बनाम परमारों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1100–1200, परमारों बनाम चौहानों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1150–1180, चालुक्यों बनाम चौहानों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1160–1180, चौहानों बनाम गहड़वालों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1200–1500, सिसोदियों बनाम राठौड़ों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1300–1400, सिसोदियों बनाम परमारों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1300–1500, सिसोदिया वंश के भीतर उत्तराधिकार के युद्ध: कोई जौहर नहीं
- 1300–1400, राठौड़ों बनाम परमारों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1350–1500, राठौड़ों बनाम भाटियों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1100–1300, कछवाहों बनाम चौहानों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1000–1200, चौहान वंश की विभिन्न शाखाओं के आंतरिक संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1100–1300, भाटियों बनाम जादौन का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1100–1150, तोमर बनाम चौहान संघर्ष: कोई जौहर नहीं
- 1400–1500, राठौड़ों बनाम कछवाहों का संघर्ष: कोई जौहर नहीं
राजपूतों के बीच मुस्लिमों की किसी भी भागीदारी के बिना कम-से-कम दो दर्जन बड़े युद्ध लड़े गए। इनमें से एक भी युद्ध में किसी भी प्रकार का आत्मदाह नहीं हुआ। एक भी नहीं। न तो भारतीय और न ही विदेशी विवरणों में इसका एक भी उदाहरण मिलता है।
अब यह देखिए:
- 712–712, सिंध के राजा दाहिर बनाम मुहम्मद बिन क़ासिम: जौहर हुआ।
- 1232–1232, ग्वालियर (राजपूत) बनाम इल्तुतमिश: जौहर हुआ।
- 1301–1301, रणथंभौर बनाम अलाउद्दीन खिलजी: जौहर हुआ।
- 1299–1299, जैसलमेर बनाम अलाउद्दीन खिलजी: जौहर हुआ।
- 1303–1303, चित्तौड़ बनाम अलाउद्दीन खिलजी: चित्तौड़ का पहला जौहर।
- 1327–1327, कम्पिली बनाम मुहम्मद बिन तुगलक: जौहर हुआ।
- 1326–1326, जैसलमेर बनाम ग़ियासुद्दीन तुगलक: जौहर हुआ।
- 1486–1486, कुवा (कांकावती) बनाम महमूद बेगड़ा: जौहर हुआ।
- 1528–1528, चंदेरी बनाम बाबर: जौहर हुआ।
- 1535–1535, चित्तौड़ बनाम बहादुर शाह: चित्तौड़ का दूसरा जौहर।
- 1543–1543, रायसेन बनाम हुमायूँ: तीन जौहर हुए।
- 1568–1568, चित्तौड़ बनाम अकबर: चित्तौड़ का तीसरा जौहर।
- 1634–1634, बुंदेलखंड बनाम औरंगज़ेब: जौहर हुआ।
- 1710–1710, दद्दानाला बनाम मीर फ़ज़लुल्लाह: जौहर हुआ।
कोई भी जौहर का महिमामंडन नहीं करता। यह कोई उत्सव या मनोरंजन नहीं था।
हम इसका सम्मान करते हैं। नहीं, आत्मदाह का नहीं, बल्कि उस पीड़ादायक भावना का, जो इसके पीछे थी। हम इसका सम्मान इसलिए करते हैं क्योंकि इस भावना के माध्यम से हम अपने पूर्वजों की स्मृति को जीवित रखते हैं। जानते हैं क्यों?
क्योंकि जिन राक्षसी प्रवृत्तियों ने हमारे पूर्वजों को ऐसी चरम परिस्थितियों तक पहुँचाया था, वे आज भी हमारे बीच जीवित हैं और साँस ले रही हैं।
और उनमें ज़रा भी बदलाव नहीं आया है।
जब कोई व्यक्ति आपके स्पर्श को स्वीकार करने की अपेक्षा मृत्यु को चुनना पसंद करे, तो आखिर आप हैं क्या?
राम सिंह ठाकुर नाम का यह लड़का छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का चर्चित हिंदुत्ववादी है जो हिंदुत्व के विरोध में होने वाले हर कांड के सामने खड़ा हो जाता है |
अब से कुछ दिन पहले राम सिंह ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था जिस पोस्ट पर आकर मोहम्मद सोहेल ने हिंदू प्रतीकों को लेकर ओछी टिप्पणी करी थी | 😡😡
इस ओछी टिप्पणी की वजह से क्षेत्र में तनाव फैल गया और माहौल सामान्य से असामान्य हो गया |
माहौल खराब करने की शुरुआत मोहम्मद सोहेल ने करी थी लेकिन बिलासपुर पुलिस ने कई गंभीर धाराओं में राम सिंह ठाकुर के खिलाफ एफआईआर कर दी |
अब राम सिंह ठाकुर सोशल मीडिया पर आ कर अपने लिए समर्थन मांग रहा है तो हिंदुओं से बस यही कहना है कि अगर राम सिंह को समर्थन नहीं किया | 😡😡
तो आगे आगे छत्तीसगढ़ पुलिस ना जाने कितने हिंदुत्ववादियों को जबरन शांत कर घर बैठा देगी और किसी भी हिंदू विरोधी घटना पर कोई हिंदूवादी बोलने की हिम्मत नहीं करेगा |
आज हम बेशक राम सिंह के समर्थन में बिलासपुर नहीं पहुंच सकते पर सोशल मीडिया के माध्यम से इन हिंदू को इतना समर्थन दे सकते है जो मौके पर पहुंचने से भी ज्यादा मजबूत माना जाएगा |
मां पद्मिनी के जौहर की गाथा जो स्कूल में सुनी थी!
स्कूल की बात है, स्कूल में जब कोई टीचर नहीं आते थे तो उनकी जगह टेम्परेरी टीचर कुछ दिन के लिए पढ़ाने आते थे। तब मैं सिवेन्थ क्लास में था और हमारी हिन्दी की मैम एक दो महीने के लिए कहीं गयीं थीं। उनकी जगह एक नीरज सर पढ़ाने आने लगे, टेम्परेरी टीचर्स अक्सर मज़े से पढ़ाते हैं। वो हमको कहानियाँ सुनाया करते थे, हम रोज उनके पीछे पड़ जाते सर कहानी, सर कहानी, अब उनको कोर्स भी कवर करना होता था तो हफ्ते में 2-3 कहानी तो सुना ही देते थे। जब वो कहानी सुनाते तो सारी क्लास चुपचाप सुनती, कुछ एक्स्ट्रा पीरिएड भी वो ही ले लेते और ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाते।
ज्यादातर वो इतिहास की बातें बताते, एक बार उन्होंने स्वामी विवेकानन्द की कहानी सुनाई, कैसे उन्होंने शून्य पर भाषण दिया, एक बार भानगढ़ के भूतों की और एक बार राजा हम्मीर की, एक बार भगत सिंह की और एक बार अक़बर के नवरत्नों की। पर जिस कहानी ने हमें पूरी तरह झकझोर डाला था और कई साल तक क्लास के सब बच्चे उस कहानी की वजह से उनको याद करते रहे वो कहानी थी रानी पद्मिनी के जौहर की।
क्लास में वीररस की वर्षा हो रही थी, शायद ही कोई ऐसा बच्चा था जिसके रोंगटे खड़े न हों। चित्तौड़ के किले की विश्वसुन्दरी रानी के सौंदर्य, उसके पति के अद्भुत पराक्रम, क्षत्रियों की विस्मयकारी रणनीति, आततायी ख़िलजी की नीचता और किले की हज़ारों वीरांगनाओं के भीषण जौहर की वह कहानी मेरे दिल में आज तक ज्यों की त्यों बनी हुई है। चित्तौड़ के किले की मिट्टी आज भी काली है, चित्तौड़ के किले से रात आठ बजे बाद आज भी मर्माहत चीखें सुनाई पड़ती हैं, यह सुनकर हम बच्चे अनुमान लगा पाते थे कि जिन्दा जलने का दर्द क्या होता है? पर बौद्धिक पशु यह नहीं समझ सकते कि क्यों उस फूल सी कोमल रानी ने अपनी सुंदरता समेत स्वयं को दावानल में झुलसा डाला था? क्यों किले की हज़ारों औरतें, बच्चे, बूढ़े आग के दरिया में हंसकर कूद पड़े? रतन सिंह, गोरा और बादल जैसे हज़ारों क्षत्रिय वीरों ने अपने प्राण युद्ध में बलिदान कर दिए?
मैं बचपन में सुनी उस कहानी को आज इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि वेटिकन-अरब के टुकड़ों पर पलने वाले वामियों ने हिन्दुओं की माँ बहनों के साहस और बलिदान का भद्दा मज़ाक बनाया है।
महारानी पद्मिनी संसार की अद्वितीय सुंदरी थीं, देश देशांतर में उनकी सुंदरता की कथाएं प्रसिद्ध थीं। जब अलाउद्दीन खिलजी ने यह बात सुनी तो सत्ता के मद में उसकी हवस जाग उठी और रानी पद्मिनी को पाने के लिए चित्तौड़ पर भारी सेना के साथ हमला बोल दिया, युद्ध महीनों चला पर राजपूतों के दुर्ग में पांव धरने में वह सफल न हुआ। इससे क्षुब्ध ख़िलजी ने कपट भरी चाल रची कि यदि राजा पद्मिनी का मुख भर दिखा दें तो वह दिल्ली लौट जाएगा। रतन सिंह और सरदारों का खून खौल उठा, परन्तु स्वयं के कारण अनावश्यक रक्तपात न हो, आखिर विशाल सेना के सामने छोटी सी राजपूत सेना कब तक जूझती, चित्तौड़ की प्रजा की बर्बादी रोकने के लिए महारानी बोलीं कि उसे मेरा प्रतिबिम्ब दिखाने की अनुमति दी जा सकती है। कुटिल ख़िलजी इस बात पर मान गया। सुल्तान का राजसी आतिथ्य हुआ। रानी को आईने के सामने बिठाया गया। आईने से खिड़की के ज़रिये रानी के मुख की परछाई सरोवर के पानी में साफ़ पड़ती थी वहीं से अलाउद्दीन को रानी का मुखारविंद दिखा। सरोवर के जल में रानी के मुख की छाया मात्र देखकर ख़िलजी ने किसी भी कीमत पर पद्मिनी के हरण का निश्चय कर लिया। असल में प्रतिबिम्ब भी किसी और का ही दिखाया गया था। दुर्ग से लौटते समय ख़िलजी और उसकी तैयार सेना ने आक्रमण कर दिया और रतन सिंह को धोखे से बन्दी बना लिया। अलाउद्दीन ने पद्मिनी को पाने की कीमत पर ही राजा को छोड़ने की शर्त रखी।
राजपूत खेमा भड़क उठा, पर पद्मिनी के चाचा गोरा और भाई बादल ने गहरा षड्यंत्र रचा, शर्त स्वीकार ली गई कि आपके साथ जाने से पूर्व रानी राजा के दर्शन करेंगी, और सौइयों पालकियाँ सजाकर ख़िलजी के खेमे में पहुंचीं। पर पालकियों में राजपूत वीर बैठ गए और कहार भी सैनिकों को बनाया गया, पद्मिनी की पालकी में बैठा सुन्दर किशोर बादल। जब पालकी जांचने के लिए पर्दा उठाया गया तो बादल को कोई पहचान न सका। थोड़ी ही देर में म्यानों से तलवारें निकल गईं और जो भी शत्रु हाथ में आया, उसे मार डाला। इस अकस्मात आक्रमण से सुल्तान हक्का-बक्का रह गया। उसके सैनिक तितर-बितर हो गये और अपनी जानें बचाने के लिए यहाँ-वहाँ भागने लगे। रतन सिंह छुड़ा लिए गए। पर युद्ध में अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए गोरा मारा गया।
ख़िलजी यह घाव भूला नहीं और कुछ महीनों बाद लाखों की सेना के साथ उसने आक्रमण कर दिया। दुर्ग की घेराबंदी से खाद्य की आपूर्ति रोक दी। आखिर उसके छ:माह से ज़्यादा चले घेरे व युद्ध के कारण क़िले में खाद्य सामग्री अभाव हो गया तब महाराणा रतन सिंह के नेतृत्व में केसरिया बाना धारण कर हज़ारों राजपूत सैनिक क़िले के द्वार खोल भूखे सिंहों की भांति ख़िलज़ी की लाखों की सेना पर टूट पड़े, भयंकर युद्ध हुआ पर कई गुणी सेना के सामने आखिर छोटी सी सेना कब तक टिकती, महाराणा और किशोर बादल समेत सब मारे गए।
यह खबर किले में पहुंची तो ख़िलजी की बन्दी बनने की अपेक्षा राज्य की आन बान शान के लिए महारानी ने जौहर का निश्चय किया। जौहर के लिए विशाल चिता का निर्माण किया गया। रानी पद्मिनी के नेतृत्व में हज़ारों राजपूत रमणियाँ जौहर चिता में प्रवेश कर गईं। किले के बच्चे और बूढ़े भी चिता में कूद पड़े। थोड़ी ही देर में देवदुर्लभ सौन्दर्य अग्नि की लपटों में दहककर क्षत्रिय कीर्ति का अंगारा बनकर चमक उठा । जौहर की ज्वाला की लपटें देख अलाउद्दीन ख़िलज़ी के होश उड़ गए और धर्मकीर्ति की ध्वजा चतुर्दिक फहर गई। यह कहानी इसी रूप में आजतक मेरी स्मृतियों को झंकृत करती रही है।
यह संक्षेप में पद्मिनी के बलिदान की कहानी है जो मैंने बचपन में सुनी थी, हो सकता है तथ्यात्मक रूप से कुछ भिन्नताएं हों, यहां मैंने किसी भी किताब को देखे बिना केवल वह लिखा है जो मैंने क्लास में सर से सुना था और मेरे मन पर अमिट रूप से अंकित हो गया था। और उस शौर्यगाथा पर आक्षेप करने का अधिकार किसी को नहीं है। आज भी चित्तौड़ के दुर्ग से उन रानियों की चीखें सुनाई देती हैं पर अपनी आत्मा बेचने वाले और माँ बहनों की इज्जत बेचने वाले बॉलीवुड को वह चीखें सुनाई नहीं देंगी क्योंकि पैसे की खनक से कान ही नहीं बन्द होते, आत्मसम्मान भी मर जाता है, स्वाभिमान भी सो जाता है।
कुलगौरव के लिए जौहर की ज्वालाओं में जलकर स्वाहा हुईं रानी पद्मिनी की कीर्ति गाथ अमर है और सदियों तक गौरवपूर्ण आत्म बलिदान की प्रेरणा प्रदान करती रहेगी। ऐसे पूर्वजों को हम नमन करते हैं।
---- @MuditUpdates
(9 साल पहले 28 जनवरी 2017 को लिखा था ये पद्मावत फ़िल्म के समय, पर आज भी यथावत है।)
इस्लाम बहुत उदार है। अल्लाह के हुक्मनामे #कुरान_मजीद में गुलाम, रण्डी, लौंडिया, जजिया...हरेक की बहुत विस्तृत व्याख्या है। पूरी व्यवस्था है।
@ReallySwara ने कुरान मजीद की इन व्यवस्थाओं में अपने लिए सम्मानजनक एक राह चुनी, लेकिन वो वीरांगनाएं #कायर थीं, जिन्होंने "अल्लाह के हुक्म" को खारिज कर #जौहर का मार्ग चुना।
वरना #जौहर_व्रती_वीरांगनाओं के सामने क्या मजबूरी थी जो इन #मोहतरमा की मांनिद गुलाम, रण्डी या लौंडिया का रास्ता अख्तियार ना किया? आखिर कुरान इतना सम्मानजनक ओहदा तो दे रहा है ना?
ध्यान रहे, अल्लाह के हुक्म #कुरान का एक लफ्ज तो क्या, जेर, जबर, नुक्ता तक बदलने की ताकत #इंसान में नहीं है।
स्वरा भाष्कर #ब्राह्मण हैं ऐसे ब्राह्मणों के लिए हिन्दू व्यवस्था में एक शब्द है, #पतित_ब्राह्मण। पतित शब्द सिर्फ ब्राह्मण के लिए आरक्षित है। अन्य किसी वर्ण को यह #उपाधि नहीं मिलती।
खैर अब स्वरा की सफाई आ रही है, जिसमें उन्होंने कहा, "...अंग्रेजी में मैंने कहा, क्या रेप विक्टिम को जीने का हक नहीं है? कम जानकर समझ नहीं पाए!"
तो अब तीन सवाल..
■ क्या बलात्कार पीड़ित को #कुरान ससम्मान जीने का हक देता है? कृपया कुरान या हदीस के हवाले से बताएं?
■ दूसरे, क्या जानबूझ कर बलात्कार को आमंत्रित करना चाहिए? बलात्कार होने की प्रतीक्षा करो? फिर #मृत्युपरांत मृत देह के साथ #नेक्रोफिलिया होने दो?
■ तीसरा और आखिरी सवाल, निकाह के बाद नाम क्यों नहीं बदला? खुद को मुस्लिम घोषित करने में #शर्म क्यों? #नबी पर यकीन नहीं? यदि अभी भी हिन्दू हो तो कुरान में आपका दर्जा #रखैल का है। और आपका शौहर #वाजिब_उल_कत्ल के काबिल। आप दोनों ने अभी तक कितनी बार #हज किया?
सरकारी स्कूल के खराब हालत की जिम्मेदार कांग्रेस है।
कांग्रेस वर्षों तक देश की सत्ता में रही तो सरकारी स्कूल को बदल क्यों नहीं दिया।
मुझे कांग्रेस सरकार से खासकर ज्यादा गुस्सा इसलिए है क्योंकि वो लोग वर्षों तक सरकार में रहे लेकिन सरकारी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए कुछ नहीं किया।
: सोनम वांगचुक
इस Video को तबतक शेयर करों जबतक यह पुलिस वाला सस्पेंड नहीं हो जाता 😡
भदोही ज्ञानपुर कोतवाली मे एक लड़की अपने साथ छेड़छाड़ की शिकायत लेकर गयी तो पुलिस अधिकारी कहता है की तुम इसी लायक हो।
CM @myogiadityanath जी और @Uppolice की छवि धूमिल करने का काम ऐसे ही अधिकारी करते है।
*40 लाख एकड़ जमीन*
*565 रियासतें*
*43 किले*
*18700 छोटे दुर्ग*
*ये सब कुछ राजपूतों ने देश के लिए समर्पित कर दिया।*
*और कांग्रेस की मेहरबानी से इसका मालिक बन गया मुस्लिम वक्फ बोर्ड।*
*कितनी भयानक साजिश थी ये!*
*● पाकिस्तान बना — कांग्रेस के शासन में!*
*● बांग्लादेश बना — कांग्रेस के शासन में!*
*● धारा 370 लागू हुई — कांग्रेस के शासन में!*
*● अल्पसंख्यक बिल आया — कांग्रेस के शासन में!*
*● मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बना — कांग्रेस के शासन में!*
*● अल्पसंख्यक मंत्रालय बना — कांग्रेस के शासन में!*
*● अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय बना — कांग्रेस के शासन में!*
*"कांग्रेस" ने यह सब कुछ सिर्फ मुसलमानों के लिए किया — वो भी तब, जब देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था।*
*तो क्या कांग्रेस पहले से ही "गजवा-ए-हिंद" की तैयारी कर रही थी.....?*
*इस्लामिक देश के लिए योजनाएं बनाई गईं, और हिन्दुओं को केवल "आरक्षण" दिया गया ताकि हिन्दू समाज आपस में ही लड़ता रहे और "गजवा-ए-हिंद" की साजिश को कभी समझ न सके।*
*पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अपनी किताब "मेरा जीवनचरित्र" के पृष्ठ संख्या 456 पर लिखा है:-*
*"मुझे समझ नहीं आता कि नेहरू को हिन्दुत्व से इतनी नफरत क्यों थी....?"*
*सरदार पटेल ने नेहरू को चेताया था कि अगर आप "एंटी-हिन्दू कोड बिल" लाएंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा, और हिन्दू समाज को सरकार के खिलाफ आंदोलन के लिए सड़कों पर ले आऊंगा।*
*पटेल की इस धमकी से नेहरू डर गए और सरदार पटेल के निधन के बाद ही वह बिल संसद में पास हुआ।*
*इस विधेयक पर बहस के दौरान आचार्य जे.बी. कृपलानी ने नेहरू से कहा था: —*
*"नेहरू, तुम साम्यवादी और मुस्लिम समर्थक हो। तुम सिर्फ हिन्दुओं को धोखा देने के लिए जनेऊ पहनते हो। अगर सच में हिन्दू होते तो हिन्दू कोड बिल की बजाय सभी धर्मों के लिए एक कॉमन सिविल कोड लाते।"*
*कई बार लगता है ऐसी पोस्ट ही न करें — लेकिन फिर लगता है शायद कोई हिन्दू पढ़े और देश के हित में जागे।*
*बीबीसी के प्रसिद्ध पत्रकार मार्क टुली ने कहा था:-*
*"मोदी जी देश के उस जहरीले पेड़ को जड़ से उखाड़ रहे हैं, जो वर्षों से देश को धीमे ज़हर से खा रहा था। इसके लिए उन्हें लगातार संघर्ष करना होगा।"*
*मोदी जी ने देश में छिपे सभी ज़हरीले साँपों के बिलों में सही दवा डाली है।*
*इसलिए ये साँप फुफकार मार रहे हैं — वामपंथी, जेहादी, नक्सली, मिशनरी, सब प्रकार के सांप जिन्हें कांग्रेस ने अपने साथ पनाह दे रखी थी ताकि भारत को बर्बाद किया जा सके।*
*मोदी जी सत्ता में आए और देश को जागरूक और सजग किया।*
*उन्होंने इन ज़हरीले सांपों को उजागर किया —*
*अगर ऐसा न हुआ होता, तो आने वाले समय में ये सांप भारत भूमि और हिन्दू संस्कृति को पूरी तरह निगल गए होते।*
*हमारी आने वाली पीढ़ियों के पास कुछ नहीं बचता — सिवाय रोने और अफसोस के।*
*मोदी जी को बहुत संघर्ष करना होगा और वो लड़ेंगे, लेकिन इस देश के लोगों को, खासकर हिन्दुओं को, मोदी जी के साथ अडिग होकर खड़ा रहना होगा।*
*क्योंकि यह युद्ध मोदी जी ने अपने लिए नहीं छेड़ा, बल्कि देशवासियों, उनकी संतानों, और भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए छेड़ा है।*
🦚श्री राधे राधे 🦚
कांग्रेसी सरकार द्वारा,सनातन को नीचा दिखाने का कार्य ,
कांग्रेस पार्टी उस समय सत्ता में थी जब नौवाँ एशियन गेम दिल्ली भारत में हुआ था।
उस समय इन्होंने कुछ मेमोयर डाक टिकट जारी किये थे। इस डाक टिकट का ध्यान से अवलोकन करें ।
यह 1982 के IX Asian Games, New Delhi की स्मारक डाक-टिकट श्रृंखला का टिकट है।
–:चित्र कुश्ती (Wrestling Bout) का है।
–:जारी होने की तारीख: 30 अक्टूबर 1982।
–:अंकित मूल्य: ₹1 (100 पैसे)।
आपकी तस्वीर में दिख रहा, पहलवान किस धर्म के प्रतीकों के साथ हैं, कौन पटका जा रहा है, कौन पटक रहा है?
देखिये कांग्रेसियों की मानसिकता!
दो लड़ रहे पहलवानों को उनके अटायर तथा धार्मिक पहचान एवं संकेतों के साथ क्यों प्रस्तुत किया गया।
क्या केवल कुश्ती के लिये मैदान में उतरे दो एक जैसे पहचान वाले दो प्रतिद्वन्दी इस स्टाम्प के लिये पर्याप्त नहीं थे।
कांग्रेसी कार्य कुत्ते इस पर जवाब देंगे या अपनी माँ का भरोसा जीतने में लगे हुए है?
💔 हरदोई की एक बच्ची चली गई… दलित टीचर ने एक ब्राह्मण बच्ची को इतना मारा कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई ।
13–14 दिन बीत गए, लेकिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव के कान में जू तक नही रेंगी और PDA में PD का मतलब पंडित बतायेंगे?।
सोचिए, अगर आरोपी और पीड़ित की जाति का समीकरण उलटा होता, तो क्या यही खामोशी रहती?
क्या ब्राह्मण बच्ची के दर्द पर आपकी संवेदना इतनी छोटी है कि 13 दिन में एक शब्द भी नहीं निकला?
राहुल गांधी जी, अखिलेश यादव जी आपकी चुप्पी इस बच्ची की मौत की दोषी नहीं है, लेकिन न्याय के सवाल पर यह चुप्पी जरूर शर्मनाक है।💔
हरदोई के भरखनी ब्लॉक में 8वीं की छात्रा क्षमा दीक्षित की दलित शिक्षक द्वारा पिटाई के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत से पहले बच्ची का वीडियो भी सामने आया है।
सीधा सवाल—अगर बच्ची दलित और आरोपी ब्राह्मण होता, तो क्या अब तक पूरे उत्तर प्रदेश में हंगामा नहीं मच चुका होता?
फिर इस मामले में इतनी खामोशी क्यो.?
2014 में एक पिता ने अपनी बेटी के ऑपरेशन के लिए AIIMS में पैसे और खून जमा कराया था। उसे भरोसा था कि अब उसकी बेटी ठीक हो जाएगी लेकिन 12 साल तक अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद सर्जरी नहीं हुई और उसकी बेटी की 2026 में अभी मौत हो गई।
12 साल तक तारीखें मिलती रहीं, जांचें होती रहीं, शिकायतें होती रहीं और एक पिता अपनी बेटी को लेकर AIIMS के चक्कर लगाता रहा।
2026 में उसकी 15 साल की बेटी की मौत हो गई।
यह कहानी है मुकेश परियानी और उनकी बेटी की, जिसके इलाज को लेकर पिता ने AIIMS पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मुकेश के मुताबिक, वह पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को अपनी बेटी को लेकर AIIMS की OPD पहुंचे थे। बच्ची के इलाज के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे तक भेजा गया और शुरुआती जांचों में करीब एक साल लग गया।
बाद में उन्हें डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया। पिता के अनुसार, डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए पैसे और खून जमा कराने को कहा। उन्होंने 4 अप्रैल 2014 को पैसे और खून दोनों जमा करा दिए।
फिर आई 2 सितंबर 2015 की तारीख। पिता ऑपरेशन की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें बताया गया कि ऑपरेशन दिवाली के बाद होगा।
इसके बाद उनका आरोप है कि ऑपरेशन की तारीख लगातार टलती रही।
उन्होंने PMO में शिकायत की। शिकायत के बाद अस्पताल से बुलाया गया। लेकिन पिता का आरोप है कि डॉक्टर ने शिकायत वापस लेने तक ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया।
2018 में फिर जांचें हुईं। 2023 में फिर AIIMS पहुंचे। 2025 में दोबारा शिकायत की। 28 जुलाई 2025 को अस्पताल बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर छुट्टी पर थे। बाद में परिवार से कहा गया कि बच्ची दवाइयों से संभाल सकती है।
9 फरवरी 2026 को पिता ने फिर शिकायत की। जांचें चलती रहीं, लेकिन उनके मुताबिक ऑपरेशन नहीं हुआ।
और फिर वह दिन आया, जिसका डर एक पिता को सबसे ज्यादा होता है।
उसकी 15 साल की बेटी की मौत हो गई।
अब मुकेश का सवाल है—अगर 2015, 2016 या 2017 में ऑपरेशन से बेटी ठीक हो सकती थी, तो इतने साल तक ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ?
क्या इलाज में देरी हुई? क्या समय पर ऑपरेशन से बच्ची की जान बचाई जा सकती थी? इतने वर्षों में अस्पताल और डॉक्टरों की ओर से क्या-क्या कदम उठाए गए?
पिता के आरोप बेहद गंभीर हैं। इनका सच सामने आना जरूरी है।
AIIMS और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर 2012 से 2026 के बीच इस बच्ची के इलाज में क्या हुआ और उसकी मौत के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो वह कौन है?
आज एक दोस्त ने राहुल गांधी का वो video भेजा, जिसमें वो बार-बार कह रहे थे—“Indian Economy Is Dead” और reporter से पूछ रहे थे कि वो इतने हैरान क्यों हैं।
आज मोदी ने इसी ‘झूठ की गूंज’ और negative approach का जिक्र किया। अमेरिका-ईरान युद्ध से तेल महंगा हुआ, supply chain disturb हुई और दुनिया की economies पर असर पड़ा। भारत पर भी असर पड़ सकता था। लेकिन भारत की GDP growth दुनिया में सबसे बेहतर रही। मोदी ने इसका credit भारत के लोगों की मेहनत और कुशलता को दिया, लेकिन मजबूत leadership और stable सरकार के बिना ये संभव नहीं था।
#EconomicGrowth #IndiaGDP #MyTake #AajKiBaat