"इलाज नहीं हो रहा, फिर किस काम की सरकार है ये"
"मोदी होते तो हम यहां होते"
"मर जाएंगे तब इलाज होगा"
तो ये तस्वीर है 2026 की !
पिछले 10-20 सालों में हमने क्या किया है? अगर हॉस्पिटल में हम पर्याप्त बेड तैयार करने में फेल रहे हैं तो कम से कम हम लोगों के लिए पर्याप्त वेटिंग रूम भी क्यों नहीं बना पाए हैं ?
बीमार लोग, सड़क पर इलाज का इंतजार करेंगे? और इंतजार में कुछ और बीमारी से ग्रसित हो जाएंगे?
वजह क्या है ? मान लो जमीन पर ही सोना है, इलाज के इंतजार में... तो क्या हम इन्हें साफ-सुथरी जमीन भी नहीं दे सकते?
और कहते हैं, हम विकसित भारत बनने जा रहे हैं ?
कोई भी देश रातोंरात एक से 100 पर नहीं पहुंचता... पहले एक से 10 पर पहुंचेंगे, फिर 20, फिर 30 पॉइंट पर... लेकिन क्या हम आगे बढ़ भी रहे हैं?
अगर हां तो इस बच्चे के लिए हमने क्या किया?
क्या स्वास्थ्य कहीं से हमारी सरकारों की प्राथमिकता में दिखाई देती है?
देश के प्रधानमंत्री, महीने में कितनी बार, हेल्थ या एजुकेशन को बेहतर करने पर बात करते हैं ?
संसद जब चलता है तो कितने दिन विपक्ष के नेता, हेल्थ या एजुकेशन का मुद्दा उठाते हैं ?
हम और आप, आमलोग, एक साथ आकर, कितनी बार सरकार को इस पर घेरते हैं....
क्या बिना हेल्थ सिस्टम ठीक किए, बिना एजुकेशन सिस्टम ठीक किए, कोई देश विकसित बन जाएगा...
लोग मरते रहें और GDP बढ़ती रहे तो क्या हम 2047 में अचानक विकसित हो जाएंगे?
आपको क्या लगता है, solution किधर से निकलेगा?
हिंदुस्तान में फैली लालच और लापरवाही की महामारी आज फिर एक युवा की जान ले गई।
एक बेटा, एक सपना, माँ-बाप की पूरी दुनिया - सब कुछ एक झटके में उजाड़ दिया गया।
यह हादसा नहीं, हत्या है - और हत्यारी है जवाबदेही से भागती सत्ता।
असली क़ातिल सड़क नहीं, गैरज़िम्मेदार सत्ता है।
क्योंकि यहां
न इस्तीफ़ा होता है,
न सज़ा मिलती है,
न किसी की अंतरात्मा जागती है।
इंदौर का जहरीला पानी
नोएडा में युवराज की जान लेने वाली सड़क
गिरते पुल, टकराती ट्रेनें, दम घोंटता प्रदूषण...
#TINA - There Is No Accountability
और जब तक जवाबदेही नहीं होगी,
तब तक कोई न कोई लालच की महामारी का अगला शिकार बनता रहेगा।
बेहद शर्मनाक!!
Epstein files में नरेंद्र मोदी का नाम आ गया है। अमेरिका के सीरियल रेपिस्ट, बाल यौन अपराधी और मानव तस्कर जेफरी एपस्टीन ने 9 जुलाई 2017 को एक मेल में लिखा 👇
"The Indian Prime Minister Modi took advice and danced and sang in Israel for the benefit of the US president. They had met a few weeks ago. IT WORKED!"
एपस्टीन का साफ कहना है कि 'मोदी ने मुझसे सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए इजराइल में जाकर नाचे और गाए। यह भी कहा कि ये काम कर गया।'
• याद रहे- प्रधानमंत्री मोदी 4 से 6 जुलाई 2017 के बीच इजराइल दौरे पर थे। इसके तीन दिन बाद एपस्टीन ने यह मेल लिखा है
• इजराइल दौरे से ठीक पहले 25-26 जून 2017 को मोदी, अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले थे
👉 जेफरी एपस्टीन के मेल की कड़ियों को जोड़ें तो समझ आता है कि मोदी, जून 2017 में अमेरिका गए और वहां एपस्टीन से सलाह ली
👉 इसके एक हफ्ते बाद (4 से 6 जुलाई 2017) मोदी इजराइल पहुंचे और सलाह के मुताबिक- वहां नाचे और गाए और काम हो गया
अब साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी का जेफरी एपस्टीन से बहुत ही गहरा और पुराना नाता है, जो भारत के लिए शर्मनाक है।
यह मामला राष्ट्रीय गरिमा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का है, जिसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना चाहिए।
सवाल है:
1. नरेंद्र मोदी, जेफरी एपस्टीन से कैसी सलाह ले रहे थे?
2. मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के किस फायदे के लिए इज़राइल में नाच और गा रहे थे?
3. एपस्टीन ने लिखा है- "IT WORKED!"... तो इसका क्या मतलब है?
नरेंद्र मोदी जी, देश जवाब मांग रहा है। सीरियल रेपिस्ट एपस्टीन से आपका क्या रिश्ता है?
Epstein files में नरेंद्र मोदी के जिक्र का लिंक: https://t.co/3eoYQFlwV4
चिंता की बात तो यह है कि पत्रकार @SushantBSinha सत्ता के साथ अपना नैरेटिव बदलने को ही जियोपॉलिटिक्स कहने लगें।
बच्चों को अंधेरा भविष्य नहीं, अंधी पत्रकारिता अंधेरे में ले जा रही है,
जो न कभी सरकार से बेरोज़गारी पर सवाल करती है, न शिक्षा पर।
सवाल पूछना सीखिए, भाई साहब, सत्ता के हिसाब से समझाना आपका काम नहीं है।
जियोपॉलिटिक्स बदलती है-बिल्कुल सही बात है, पर आपका स्टैंड हर बार सत्ता के साथ ही क्यों बदल जाता है?
आप पत्रकार हैं,प्रवक्ता नहीं।
'पापा मैं डूब रहा हूं, मुझे आकर बचा लो...'
पिता जब पहुंचे, तो बेटा कार समेत गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था और बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था. लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका. पिता के सामने ही बेटे की तड़प-तड़पकर मौत हो गई. घटना यूपी के ग्रेटर नोएडा की है, जहां शुक्रवार रात हादसे में 27 साल के युवराज मेहता की दर्दनाक मौत हो गई. घने कोहरे और तेज रफ्तार के कारण युवराज का कंट्रोल कार से छूट गया. कार सड़क के किनारे नाले की दीवार तोड़कर एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में जा गिरी. युवराज कार का दरवाजा नहीं खोल पाए और लापरवाही के गड्ढे में डूबकर उनकी मौत हो गई. ये प्रॉपर्टी नोएडा अथॉरिर्टी ने अपने कब्जे में ले रखी थी. बेसमेंट में पानी भर जाने के बाद भी कोई सुरक्षा के इंतेजाम नहीं किये गए थे. ऐसे में युवराज के पिता ने लापरवाही से मौत का आरोप प्रशासन पर लगाया है.
#GreaterNoida
ये संयोग है - या मोदी सरकार का प्रयोग है?
27 नवंबर को खबर आई थी कि अडानी ने भारत में पायलेट ट्रेनिंग की सबसे बड़ी कंपनी FSTC को खरीद लिया है।
इसके तीन दिन बाद ही भारत में फ्लाइट देरी होने और कैंसिल होने की खबरें आने लगी थी।
चैनलों में चलने लगा कि भारत में पायलटों की भयंकर कमी है। पूरी तरह से माहौल बनाया गया कि भारत में पायलटों की भर्ती और ट्रेनिंग पर खास ध्यान देना होगा।
क्या ये जानबूझकर अडानी को फायदा पहुंचाने की साजिश है?
क्योंकि इससे पहले भी जब अडानी को लो क्वालिटी का कोयला महंगे दाम पर बेचना था, तो देशभर में कोयले की कमी की खबरें फैलाई गई थीं। बताया जाता था कि देश में 1-2 दिन का कोयला बचा है, जिसका सीधा फायदा अडानी को हुआ।
क्या नरेंद्र मोदी और अडानी इस बार भी यही फॉर्मूला अपना रहे हैं? देश जवाब मांग रहा है।
मतदान केन्द्रों के CCTV वीडियो जारी करने के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश जी ने क्या कहा था याद है न? “
“…चुनाव आयोग को किसी की माँ, बहू या बेटी का CCTV वीडियो साझा करना चाहिए क्या…?”
और अब ‘घर की बहू बेटियों के ऐसे नाचते हुए वीडियो’ डाल रहा है चुनाव आयोग? बड़ा सवाल क्या ये ज्ञानेश जी के अप्रूवल से हुआ है? ये तो उनके अपने ही stand के ख़िलाफ़ जाता है!
बाक़ी हम जैसों को न तो CCTV फ़ुटेज से दिक़्क़त है और न ही हमारी माता बहनों और बेटियों के किसी भी मौक़े पर नृत्य से।
BLO सर्वेश सिंह ने भी आत्महत्या कर ली
सर्वेश यूपी के मुरादाबाद में SIR का काम कर रहे थे. सुसाइड नोट में सर्वेश ने लिखा है 👇
• मैं जीना चाहता हूं, लेकिन बहुत बेचैनी और घुटन है. मैं डरा महसूस कर रहा हूं.
• रात दिन काम करता रहा, फिर भी SIR का टारगेट हासिल नहीं कर पाया.
• समय ज्यादा होता तो मैं SIR का काम पूरा कर देता. इतना समय मेरे लिए पर्याप्त नहीं था. मैं जीवन में पहली बार BLO बना हूं.
मुझे माफ कर देना.
यूपी - जिला मुरादाबाद में SIR कार्य कर रहे BLO/टीचर सर्वेश सिंह ने फांसी लगाकर जान दी !!
सुसाइड नोट में लिखा- मुझे इस कार्य का पूर्ण ज्ञान नहीं है। इससे मैं अपना टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा। रात को 2-3 घंटे भी नहीं सो पा रहा हूं। 4 छोटी-छोटी बेटियां हैं। 2 की तबियत खराब है। परिवार ने तो मेरा हौंसला बढ़ाया, लेकिन मैं हार गया।
यूपी के फतेहपुर में SIR सुपरवाइजर सुधीर कुमार ने अपनी शादी से एक दिन पहले फांसी लगाकर जान दे दी।
सुधीर के परिजनों ने बताया कि 26 नवंबर को सुधीर की शादी थी। इसीलिए सुधीर ने छुट्टी के लिए एप्लीकेशन दी थी, लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं दी गई।
शादी के कार्यक्रम के चलते जब सुधीर SIR के काम पर नहीं गए तो कानूनगो ने घर आकर उन्हें डराया और नौकरी से निकालने की धमकी दी।
नरेंद्र मोदी और ज्ञानेश कुमार SIR के नाम पर निर्दोषों की जान से खेल रहे हैं। लोग मौत के मुंह में जा रहे हैं, लेकिन इन्हें रत्ती भर फर्क नहीं पड़ रहा।
शर्म आनी चाहिए..
फतेहपुर में शादी से एक दिन पहले लेखपाल ने सुसाइड कर लिया। कल यानी 26 नवंबर को बारात जानी थी। घर में शादी की रस्में शुरू हो चुकी थी। सोमवार रात को परिवार के लोग सोने चले गए। सुबह उठे तो देखा लेखपाल कमरे से बाहर नहीं आए।
मां-बाप ने आवाज लगाई, लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा तो अंदर फंदे से लाश लटकी हुई थी। लाश देखकर मां-बाप बेहोश हो गए। जैसे-तैसे रिश्तेदारों ने उन्हें संभाला।
SIR के नाम पर देश भर में अफ़रा-तफ़री मचा रखी है - नतीजा? तीन हफ्तों में 16 BLO की जान चली गई। हार्ट अटैक, तनाव, आत्महत्या - SIR कोई सुधार नहीं, थोपा गया ज़ुल्म है।
ECI ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हज़ारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ें। मक़सद साफ़ है - सही मतदाता थककर हार जाए, और vote chori बिना रोक-टोक जारी रहे।
भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है, मगर भारत का चुनाव आयोग आज भी काग़ज़ों का जंगल खड़ा करने पर ही अड़ा है।
अगर नीयत साफ़ होती तो लिस्ट डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती - और ECI 30 दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम ठेलने के बजाय उचित समय ले कर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देता।
SIR एक सोची-समझी चाल है - जहां नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और BLOs की अनावश्यक दबाव से मौतों को “कॉलैटरल डैमेज” मान कर अनदेखा कर दिया है।
यह नाकामी नहीं, षड़यंत्र है - सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि है।
बेटे को कैंसर, बाइक पर साथ लेकर चलता हूं: 8 हजार कमाए बिना बच्चे का खून नहीं बदलवा सकता, अचानक तबीयत बिगड़ने से डरता हूं
#Bihar#Patna#EXCLUSIVE By @manishabhalla
पूरा वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें- https://t.co/OblJ8VZUXt
राकेश कुमार रूस गया था.. पढ़ने के लिए.. और रूसी मिलिट्री के अफसरों ने उसे भेज दिया यूक्रेन से युद्ध लड़ने..
उत्तराखंड के उधमसिंहनगर की सितारगंज तहसील के शक्ति फार्म कुशमोठ गांव का रहने वाला राकेश 7 अगस्त को स्टडी वीजा पर रूस गया था. सेंट पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी में पढ़ने.. 10 दिन तक तो परिवारवालों की बात हुई.. उसके बाद उसका संपर्क टूट गया. कुछ दिन पहले एक +79011095732 नंबर से राकेश के परिवारवालों को कॉल आई.. अनजान नंबर से..
वो राकेश ही था. रूस के किसी नंबर से उसने किसी तरह परिवारवालों को कॉल की थी. राकेश ने बताया रूस के सैन्य अफसरों ने उसे जबरन यूक्रेन से युद्ध लड़ने के लिए भेज दिया है.
उसका पासपोर्ट छीन लिया गया.. सारे दस्तावेज छीन लिए गए.. मोबाइल और लैपटॉप से सारे ऑफिशियल मेल्स भी डिलीट कर दिए गए.
यूक्रेन के डोनबास रीजन ले जाकर उसकी मिलिट्री ट्रेनिंग कराई गई.. इसके बाद उसे वार फ्रंट पर भेज दिया.. परिवारवालों की राकेश से बात नहीं हो पा रही है.. सब परेशान हैं.. चिंतित हैं. राकेश जिंदा भी है या नहीं किसी को नहीं मालूम..
परिवारवालों ने भारतीय अफसरों को पूरा मामला बताते हुए मदद की गुहार लगाई है..
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से विनम्र निवेदन है कि उत्तराखंड के इस नौजवान का पता लगाकर उसे घर वापस लाने में सहयोग करें..
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