द्वेष मत करो। कर्मणा हिंसा बैर है। कर्मणा हिंसा मत करो। अपने वचनों में संयमता रखो। विनम्रता रखो। वाचा अहिंसा का पालन करो और ध्यान है मनसा अहिंसा।जब बिल्कुल र्निविचार हो जाते हो।उस स्थिति का नाम ध्यान है।अगर मन से तुम हिंसा भाव त्याग दो तो ध्यान में प्रवेश हो जाता है।
-Samarthguru
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कर्म में अकर्म है, अकर्म में कर्म है
पार्थ, ऐसी दृष्टि योग है, धर्म है
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कर्म करता सदा, जग में निष्काम हो
ज्ञानी है, जिसकी ऐसी प्रज्ञा अहो
🏵 -समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी 🏵
#श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय-4, ज्ञान कर्म संन्यास योग
@SiddharthAulia Ji
आज विश्व भर की युवा पीढ़ी (#GenZ) व्यवस्था से नाराज़ है और शिकायत भाव में जी रही है। इस कारण यूरोप के कई देशों में विद्रोह की आग फैल चुकी है । विरोधी पार्टियां भारत में भी अराजकता के लिए युवाओं को भड़का रही हैं। यदि हम चाहते हैं कि हमारे छात्र और युवा अहोभाव और सकारात्मक भाव में जिएँ, तो उन्हें बेहतर शिक्षा के साथ-साथ श्रेष्ठ एवं आदर्श जीवन दर्शन का प्रशिक्षण भी देना होगा । इसके लिए जीवन रूपान्तरण के कार्यक्रम उच्च विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नियमित रूप से संचालित करने होंगे। ऐसे कार्यक्रम भारतीय योग एवं प्रबंधन संस्थान, मुरथल, हरियाणा (email: [email protected]) के सैकड़ों आचार्यों द्वारा पिछले कई सालों से संचालित किये जा रहे हैं , जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। सरकार और शिक्षण संस्थानों को इसके लिए शीघ्र आगे आना होगा ।
@narendramodi@RSSorg@JoshiPralhad@myogiadityanath@NayabSainiBJP
यह जो दुनिया है, यह एक मैदान है और यह जो ज़िन्दगी है, यह एक गेंद की तरह है। एक खेल चल रहा है। इस खेल को जरा सलीक़े से खेलो।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
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कर्म अकर्म क्या, तुझे कहता हूँ मैं
जानता जो इसे, मुक्त करता हूँ मैं
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कर्म स्वीकृत जग में, वर्जित विकर्म है
कर्त्ता का त्याग श्रेष्ठ है, अकर्म है
🏵 -समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी 🏵
#श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय-4, ज्ञान कर्म संन्यास योग
@SiddharthAulia Ji
तुम भी किसी पूरा सद्गुरु से जुड़ो। उससे ओंकारत्व को जानो, उस चैतन्य आत्मतत्व को जानो और एक बार आत्मतत्व को जान लोगे तो गोविन्द की जो यह रहस्यमय लीला है, रचना है इसके तुम साक्षी हो जाते हो।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 🏵
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कर्मफल में हमारी, रुचि है नहीं
जानता जो मुझे, मुक्ति पाता वही
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पूर्व में भी कई, मुक्तकामी हुए
त्याग कर्मों का फल, महाज्ञानी हुए
🏵 -समर्थगुरू सिद्धार्थ औलिया जी 🏵
#श्रीमद्भगवद्गीता
अध्याय-4, ज्ञान कर्म संन्यास योग
@SiddharthAulia Ji
देवासुर संग्राम निरन्तर चल रहा है। वहाबी,सलाफ़ी, देवबंदी, वामपंथी,चरम पंथी,माफिया,आतंकवादी, गुरूद्रोही आदि तत्व आज की आसुरी शक्तियाँ हैं। शीलवान, आध्यात्मिक, मानवतावादी, परोपकारी, अहिंसक,दयालु,सज्जन तत्व देव पक्ष में खड़े हैं। तुम अपना पक्ष चुन लो।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji
भीतर आनंद और बाहर मंगल। अगर इस भाव में आप जीते है कि बाहर सब कुछ मंगलमय All is Well और भीतर आनंद ही आनंद है - यह छोटा सा सूत्र आपके जीवन में क्रांति ला सकता है। यह छोटा सा सूत्र आपके चेहरे पर हमेशा मुस्कान ला सकता।
-Samarthguru @SiddharthAulia Ji 💐