मीनाक्षी नटराजन जी का राज्यसभा के लिए नामांकन रद्द कर दिया गया।
जब रिटर्निंग ऑफिसर से पूछा गया कि आपने ये गलती क्यों की?
तब रिटर्निंग ऑफिसर का जवाब आया- मुझे पता है मैंने गलती की है, लेकिन मुझे नौकरी करनी है और इनके साथ रहना है। सरकार इन्हीं की है।
हालात देखिए कि रिटर्निंग ऑफिसर भी मान रहा है कि उसने दबाव में गलत काम किया है।
वहीं, दूसरी तरफ चुनाव आयोग भी सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर रहा है। चुनाव आयोग ने कल सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उन्हें हमारी याचिका नहीं मिली, जबकि कांग्रेस का डेलिगेशन दो दिन पहले उनसे मिल चुका है।
अफसोस की बात है कि चुनाव आयोग ही लोकतंत्र का गला घोंट रहा है। BJP पहले 'वोट चोरी' किया करती थी, अब वो सीधा 'सीट चोरी' करने लगी है।
: मध्य प्रदेश के CLP नेता @UmangSinghar जी
📍 दिल्ली
Americans never used to take India for granted. They knew India was a serious country.
And then we elected a clown and now Americans treat us like a circus.
सवाल पूछा तो पूरा चैनल बंद कर दिया!
अभिसार शर्मा सरकार से तीखे सवाल पूछते थे, इसलिए न्यूज़क्लिक पर ED, IT और दिल्ली पुलिस ने छापेमारी कर दी।
चैनल मालिक प्रबीर पुरकायस्थ 5 महीने के लिए जेल गए, अभिसार को पूछताछ में घसीटा गया।
बैंक खाते बंद हुए चैनल बंद हुए 100 लोग अचानक बेरोजगार हो गए।
अब अदालत का फैसला आया कि सारी कार्रवाइयाँ गलत और अवैध थीं।
जिन 100 परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली गई, उनका नुकसान कौन भरेगा...
सरकार मुआवजा देगी?
अन्तर्राष्ट्रीय जल में तीन दिन में तीन जहाज़ों पर अमेरिकी हमलों में तीन भारतीयों की मृत्यु हो गई। और हमारे Compromised PM? एक शब्द तक नहीं।
जब कोई विदेशी ताकत किसी भारतीय की हत्या करे, तो प्रधानमंत्री को बोलना पड़ता है। लेकिन मजाल है जो ये एक शब्द बोल जाएं।
अगले हफ्ते G7 में, हमारे नाविकों की हत्या के बस चंद दिनों बाद, मोदी जी मुस्कुराएंगे, गले मिलेंगे और समझौते करेंगे - मगर, उन तीन भारतीयों के लिए उनके पास एक शब्द भी नहीं होगा।
Compromised PM भारत माता के बेटों की रक्षा नहीं कर सकते, क्योंकि जिन्होंने उन बेटों की जान ली उन्हें नाराज़ करने की इनमें न हिम्मत है, न ताकत।
ओमान की खाड़ी से एक दुखद खबर आई है.
#StraitOfHormuz के पास एक टैंकर पर सवार तीन भारतीय नाविक
आदित्य शर्मा,
शिवानंद चौरसिया और
पटनाला सुरेश
अमेरिकी सैन्य हमले में मारे गए.
तीन नाविकों की मौत के बावजूद इस घटना पर न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा है और न ही भारत सरकार ने कोई कड़ा सार्वजनिक बयान दिया है.
सरकार चुप क्यों है?
#America का एक हेलीकॉप्टर गिरता है तो हायतौबा मचा देते हैं #Trump, तो तीन भारतीयों की मौत पर हमारी सरकार सख्त विरोध क्यों नहीं कर रही?
आखिर डर किस बात का है?
Rarely has any Indian government reacted so meekly to aggression from world powers. This exhibition of weakness could have serious long-term consequences too.
अमेरिका हमारे तीन इंडियन को होर्मुज में हमले में मार देता है! तीन दिन में तीन हमला! अभी भी कुछ लोग गायब हैं! इन लोगों की अपील के बाबजूद अमेरिका हमला करता है! हमले के बाद अमेरिका गलती तो नहीं हो मानता है बल्कि इसे सही ठहराते हुए उसका वीडियो जारी करता है।
लेकिन इस घटना के बाद भारत की चुप्पी बहुत ही शमर्नाक है! औपचारिक टाइप रोष जताकर मामला समाप्त कर दिया है! खुद को राष्ट्रवादी बताने वाली सरकार मामले पर आक्रोश दिखाने की जगह इसे हलके में ले रही है! ईरान तक ने भारत के पक्ष में बयान दिया!
लेकिन एक न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर तो लम्बा चौड़ा पोस्ट लिखकर इस एक्ट को जस्टिफाय तक कर दे रहे हैं!
कहाँ गया गुस्सा ? क्या सारा गुस्सा अब अपने ही लोगों को नीचे दिखाने के लिए रखने लगे हैं?
याद कीजिये जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तो किस तरह हमारे एक अधिकारी के साथ अमेरिका ने गलत किया था हमने उनके दूतावास से साडी सुरक्षा वापस ले ली थी!
भारत को इस मामले में बहुत कड़ा स्टैंड लेना चाहिए था! और आप टीवी मीडिया से तो अब कोई उम्मीद नहीं कर सकते हैं की वे आमजन के लिए खड़ा हो! या आप इसे ही बड़ी बात कह सकते हैं की दूरदर्शन या कोई दूसरे कुछ लोगों मरे भारतीय को पाकिस्तान से मिला हुआ नहीं बताया! इसके लिए आप इन्हें धन्यवाद दे सकते हैं। हमारी मीडिया अभी अपनी जनता नहीं ईरान के लोगों के रोटी को गिनने में लगी है। इसीलिए उनसे कोई उम्मीद न रखें!
Watched this woman destroy an innocent girls life while reading her WhatsApp Messages on the news. For ratings. Had her call me anti-national on the news for speaking about women’s safety. For ratings. Now she’s ‘concerned’ about women. For ratings. Give me a break. That’s my take.
How is it not a bigger deal that US strikes have claimed 3 Indian lives? How's there no reciprocation at all? Or even an outrage by so many who claim to be nationalists? Where's our spine gone really?
“एक राजा था। उसके चाटुकारों ने उसको कह दिया था कि वह महान है। एक दिन किसी ने उसको आईना दिखा दिया। इसके बाद राजा ने ऐलान कर दिया, “जो आईना दिखाए वह दुश्मन है। जो सवाल पूछे है वो ग़द्दार है।
ऐसा ही एक राजा हमारे देश में भी है”