बरसों बीत गये
हमको मिले बिछड़े
बिजुरी बनकर
गगन पे चमकी
बीते समय की रेखा
मैंने तुमको देखा।
सदाशिव! आप और भगवती दोनों ने प्रेम लीला खेली जिस पर गीतकार की उपरोक्त पंक्तियां सटीक हैं। जगत को आप और भगवती ने शिक्षा दिक्षा समीक्षा मुमुक्षा परीक्षा तितिक्षा प्रेम आदि बहुत कुछ दिया।
भगवान शिव के प्रथम बार दर्शन होने पर सती की मन:स्थिति शब्दों में अभिव्यक्त नहीं कि जा सकती।सत्य भी है प्रेम शब्दों में कहा भी नहीं जा सकता वह तो नेत्रों में उतर आता है। प्रेम समय सीमा में निबद्ध है भी नहीं। प्रेम के तो कुछ क्षण भी गाथा बनते हैं जिनका वर्णन युग और सदियां करते हैं।
दक्षिण भारत का सुप्रसिद्ध भजन-
जय कृष्ण मुकुन्द मुरारे।
भगवान ने भक्त से पूछा जिसका गान कर रहे हो उसे देखा है ? भक्त बोला प्रभु कण कण में है और मन की आंखों से उन्हें देखा है। और भक्त के भाव देख भगवान प्रकट हो जाते हैं।
भजन गायिका के स्वर में भी है।👇
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श्री रुद्र ! शास्त्र आपके तीसरे नेत्र की बड़ी चर्चा करते हैं। पापी घबराते हैं की आपका तीसरा नेत्र खुला तो विनाश हो जायेगा। योगशास्त्र और योगी आपके तीसरे नेत्र को आज्ञा चक्र और ज्ञानचक्षु कहते हैं। ज्ञानमार्ग ने आपके तीसरे नेत्र को आध्यात्मिक दृष्टी कहा। क्या अद्भुत महिमा है भगवन।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:।
( गीता 18.66 )
योगक्षेमं वहाम्यहम।
( गीता 9.22 )
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।
(गीता 4.8)
परब्रह्म परमात्मा योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के अवतरण दिवस जन्माष्टमी की बधाई।
कृष्णार्पणमस्तु।
श्री हरि।
नम: शिवाय।
श्री ललिता।
कैलाश पर उमा महेश्वर के भक्ति, मुक्ति, कर्म, सात्विकता, ज्ञान विज्ञान परक संवाद हो रहे हैं जिसे सुनने हेतु योगी,अवधूत,सिद्धा,वेदान्त विशारद समाधि लगाते हैं। उमा जीव जगत के कल्याण हेतु महेश्वर से प्रश्न कर महेश्वर के श्रीमुख से ही रहस्योद्घाटन करवाती हैं।
नम: शिवाय।
श्री ललिता।
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The Atharva Forum panel at the IKS Div. Dhara event at @IITBHU_Varanasi. V. Suresh, Sr Scientist, Vastuvidya Gurukulam, explains the composition of Aṣṭabandha – the permanent glue (organic) used in ancient Indian in construction, esp in temples.
मां के दूध से आती है। सत्य कहने में यह भी बड़ा कारण है। हानि लाभ, सुख दु:ख, मित्रता शत्रुता की चिंता वाले सत्य बोलना तो दूर उसे दोहरा भी नहीं सकते। सत्य बोलने वाले का अहित करने कि चेष्टा सत्य के अहित की ही चेष्टा है लेकिन लोग भूल जाते हैं सत्य ही शिव है।
नम: शिवाय।
श्री ललिता।
सत्य को कहने के कारण हैं। जिससे प्रेम किया उससे सत्य बोलना। जिस पर विश्वास किया उससे सत्य बोलना। ईश्वर अनुग्रह प्राप्ति हेतु सत्य बोलना, आदर्श रक्षा हेतु सत्य बोलना। अत: सत्य प्रेम, विश्वास, ईश्वरीय अनुग्रह, अादर्श रक्षण हेतु बोला जाता है। एक कारण और है निडरता। निडरता विशेषत:
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कट्टरता की सोच अस्तित्व विस्तारीकरण तक सीमित है अत: विवेक से जड़ हो जाती है। जबकी संवेदनशीलता सोच को जड़ता मुक्त विवेक और रचनात्मकता का वरदान मिला। गर्व है अद्वैतवाद सनातन की देन है और इसने सनातन की संवेदना व रचनात्मकता बनाये रखी व उसे जड़ नहीं होने दिया।
नम: शिवाय
श्री ललिता।
सर्प भी आश्वस्त की उसे शिव तो धारण कर ही लेंगे, विष भी आश्वस्त की उसे शिव के श्रीकण्ठ में स्थान मिल जायेगा, विभूति भी आश्वस्त की उसे शिव अपने श्रीदेह पर धारण कर ही लेंगें, अनाथ भी आश्वस्त कि भगवान विश्वनाथ के रहते कोई अनाथ नहीं सभी सनाथ हैं, चन्द्र भी आश्वस्त की चूड़ालंकार के
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सावन आरंभ हुआ आज सोमवार है। सोचा आज इस पुराने पोस्ट को पुन: प्रस्तुत कर दें। गीत, काव्य, ग्रन्थ, लेखन, वर्णन वास्तव में उसी का तो प्रचार और उसी से तो अभिव्यक्ति है जिससे बहुत प्रेम किया है। यह पोस्ट काफी पहले पोस्ट किया था। आज सोमवार पर बाबा को समर्पित।
नम: शिवाय।
श्री ललिता।
सर्प भी आश्वस्त की उसे शिव तो धारण कर ही लेंगे, विष भी आश्वस्त की उसे शिव के श्रीकण्ठ में स्थान मिल जायेगा, विभूति भी आश्वस्त की उसे शिव अपने श्रीदेह पर धारण कर ही लेंगें, अनाथ भी आश्वस्त कि भगवान विश्वनाथ के रहते कोई अनाथ नहीं सभी सनाथ हैं, चन्द्र भी आश्वस्त की चूड़ालंकार के
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English Subtitles https://t.co/8yzJmXI3Qb
Age of Brahmā-ji as per Brahmaloka—Puri Shankaracharya-ji on the purpose of the divine creative endeavour.
ब्रह्मलोक के 100 वर्षके अनुसार मनुष्यलोक की कुल आयु - पूज्य पुरी शङ्कराचार्यजी @govardhanmath
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Nati Kashta". In time interval Buddhism has allowed to eat flesh of dead animals. But Jainism never compromised with Charya (Sattvikta,Austerity,Ahimsa) given by Mahavira. Its one of the many reasons that Jainism limitized upto some regions & buddhism adopted across overseas."
Buddhist Bhikku- Buddha & Mahavira belongs to same timeline in history. Buddhism extended across overseas. Why Jainism remained unextended?
Jain Muni-Buddha & Mahavira belongs to same timeline. Buddha firstly adopted digambaratva then diverted to Madhyam Marg of "Naati kama,
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