UGC नियमों के खिलाफ 600 किलोमीटर की पदयात्रा, महिपाल सिंह मकराना की तबीयत बिगड़ी
UGC के नए इक्विटी नियमों के खिलाफ चल रहे #UGCROLLBACK आंदोलन के प्रमुख चेहरे और श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना की तबीयत अचानक बिगड़ गई है।
करणी सेना के जयपुर कार्यालय की ओर से 29 जुलाई को जारी जानकारी के अनुसार, करीब 600 किलोमीटर की पदयात्रा और अनशन के बाद मकराना की तबीयत खराब हुई। (संलग्न तस्वीरों में देखें।)
दरअसल, जनवरी 2026 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए नए इक्विटी नियम जारी किए थे। इन नियमों के तहत सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में Equity Committee, Equal Opportunity Centre और भेदभाव संबंधी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की गई हैं।
करणी सेना और कई जनरल कैटेगरी संगठनों का मानना है कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग हो सकता है। संगठनों का कहना है कि इससे झूठी शिकायतों का खतरा बढ़ेगा और उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत तनाव पैदा हो सकता है। इसी आधार पर इन नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग की जा रही है।
आंदोलन को तेज करने के लिए महिपाल सिंह मकराना ने जनवरी और फरवरी से देशभर में विरोध प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस, मशाल जुलूस और महापंचायतों का आयोजन किया। सांसदों के घेराव और दिल्ली मार्च जैसे कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई।
इसके बाद 11 जुलाई को राजस्थान के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर से 600 किलोमीटर की पदयात्रा शुरू की गई। इस यात्रा का उद्देश्य UGC नियमों के खिलाफ जनसमर्थन जुटाना और सरकार पर दबाव बनाना था।
28 जुलाई को यात्रा घाटवा पहुंची थी, जहां स्थानीय लोगों ने मकराना और उनके समर्थकों का स्वागत किया। हालांकि, अगले ही दिन लंबी पदयात्रा और अनशन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई।
करणी सेना के समर्थक अब उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी सामने नहीं आई है।
(इस संदर्भ में यदि आपको कोई विशेष जानकारी है तो आप कमेंट बॉक्स में साझा कर सकते हैं।)
"ये लोग कहते हैं कि नीट पर 18 घंटे चर्चा करेंगे, लेकिन क्या ये नीट की असली समस्याओं पर 18 मिनट भी बोल पाएंगे?"
"चर्चा किनसे करेंगे जो चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए हैं? उन्हें मेरी समस्या पता है क्या? उन्हें पता है कि एक नीट छात्र और उसका परिवार किन मुश्किलों से गुजरता है?"#neet
ये वीडियो डराने वाला है। जानकारी के अनुसार तीन महिलायें जमशेदपुर से हजारीबाग जा रही थीं। इसी दौरान रांची के दशम फाल थाना क्षेत्र में उनकी कार एक स्कॉर्पियो से टकरा गई। उसके बाद दोनों के बीच विवाद हुआ। महिलाओं ने अपनी कार वहां से आगे बढ़ा दी। तब युवकों ने उसका पीछा किया और कार पर हमला कर दिया। पुलिस को मामले की जांच कर कारवाई करनी चाहिए।
भाई साहब, अयोध्या में भगवान राम के नाम पर जो अंधेर नगरी का खेल चल रहा है, उसे देखकर आज देश का हर आम नागरिक और सच्चा रामभक्त खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। चौराहों से लेकर चाय की दुकानों तक आज बस यही चर्चा है कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों का असली चरित्र अब सरेआम नंगा हो चुका है। फाइनली, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर करके यह कुबूल कर ही लिया कि मंदिर के चंदे और चढ़ावे में भयंकर लूट हुई है। लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या इतने भर से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया? बिल्कुल नहीं भइया! यह तो उस बड़े रैकेट का सिर्फ एक छोटा सा मोहरा बदलने वाला खेल है, ताकि जनता का गुस्सा शांत हो जाए और चंदे का माल आना फिर से शुरू हो सके।
ज़रा इस डकैती की क्रोनोलॉजी देखिए, ट्रस्ट मान रहा है कि लूट हुई है, लेकिन जो एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट आई है, उसमें मुख्य कर्ताधर्ता चंपत का नाम ही कहीं नहीं है। जब नाम ही नहीं है, तो फिर इस्तीफा किस बात का लिया गया? देश की जनता समझ रही है कि यह वही सौ साल पुराना मॉडल है, जहाँ बड़ा चोर हमेशा बच निकलता है और कोई छोटा कर्मचारी बलि का बकरा बन जाता है। इस पूरे केस को इतनी चालाकी से घुमाया जा रहा है कि आम आदमी सही और गलत का फैसला करने की हालत में ही न रहे।
लोग इस बात पर भी हैरान हैं कि कल तक ट्रस्ट के जो कोषाध्यक्ष महोदय मीडिया के सामने छाती पीटकर कह रहे थे कि मैं तो सिर्फ नाम का कोषाध्यक्ष था, मुझे कोष पर कोई अधिकार ही नहीं था, आज अचानक से वही व्यक्ति पूरे ट्रस्ट का 'प्रवक्ता' कैसे बन गया? जिसे कल तक अपने पद का अधिकार नहीं पता था, वो आज इस्तीफों और नई नियुक्तियों के फैसले सुना रहा है। वहीं दूसरी तरफ, अध्यक्ष महोदय महंत नृत्य गोपाल दास जी का हाल देखिए। जो व्यक्ति उम्र और व्याधियों के कारण व्हीलचेयर पर है, अपना ध्यान रखने में असमर्थ है, वो इतने बड़े ट्रस्ट का अध्यक्ष किस लालच से बना हुआ है? साक्षात भगवान का खजाना लुट गया, और ये लोग मोदी और योगी को एक रद्दी सी चिट्ठी लिखकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
किस मोदी से गुहार लगा रहे हैं, जिसने इस पूरे घोटाले पर एक शब्द नहीं बोला? और किस योगी से, जिसकी इंटेलिजेंस यूनिट को इतनी बड़ी डकैती की भनक तक नहीं लगी? जनता साफ देख रही है कि यह पूरा खेल सिर्फ पद और पैसे की आसक्ति का है, जिसमें न्यूनतम नैतिकता भी नहीं बची है। अब आप खुद देखिए कि इन घटनाओं को देखकर किस तरह से फैसले लिए गए हैं। इस पूरे घोटाले का सबसे बड़ा मज़ाक यह है कि चोरी का पहला जिम्मेदार ट्रस्ट है, केस भी ट्रस्ट ने दर्ज कराया, जांच की सिफारिश भी ट्रस्ट ने की, रिपोर्ट भी ट्रस्ट को सौंपी गई और सज़ा का फैसला भी ट्रस्ट ने ही सुना दिया! मतलब जज, ज्यूरी और जल्लाद... सब खुद ही बन बैठे। और सज़ा के नाम पर किया क्या? एक पदाधिकारी को हटाया और उसकी जगह दूसरे चहेते व्यक्ति (कृष्णमोहन) को बैठा दिया, जिस पर खुद इस घोटाले को दबाने के आरोप लगते रहे हैं।
लोग सरेआम कह रहे हैं कि इस सारे फसाद की जड़ ही यही है कि इन ठेकेदारों ने राम मंदिर को अपनी निजी जागीर मान लिया है। मंदिर निर्माण के बाद उसे हिंदू समाज या अयोध्या के असली साधु-संतों को क्यों नहीं सौंपा गया? आज तक दान का एक-एक रुपये का हिसाब पारदर्शी तरीके से क्यों नहीं बताया गया? इतनी बड़ी डकैती के बाद भी रामभक्तों से सार्वजनिक माफी क्यों नहीं मांगी गई? देश अब इस लीपापोती से खुश नहीं होने वाला। आगे का रास्ता तभी साफ होगा जब यह मौजूदा ट्रस्ट पूरी तरह से भंग होगा और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में इस पूरी डकैती की निष्पक्ष जांच होगी। जो लोग भगवान राम के दानपात्र की सुरक्षा नहीं कर पाए, वो आज पूरे समाज की सुरक्षा का ठेका लिए घूम रहे हैं, इससे बड़ा पाखंड और क्या हो सकता है!
सुप्रीम कोर्ट में एथनॉल को लेकर सुनवाई चल रही है
केंद्र सरकार ने कहा है - पेट्रोल में एथनॉल मिलाना एक एक्सपेरिमेंट है, अगले साल तक रिज़ल्ट मिलेंगे
यानी आपकी हमारी गाड़ी सरकार की गन्ना नीति के तहत किए जाने वाले एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है.
इंजन सीज़ नहीं हुआ तो प्रयोग सफल, और अगर इंजन सीज़ हो गया, तो सरकार मानेगी ही नहीं.
मुख्यमंत्री रहते हुए हेमंत सोरेन ने माइनिंग लीज ली थी, खूब तमाशा बना। ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफे तक की नौबत आई। हालांकि उस मामले में चुनाव आयोग से झारखंड के राज्यपाल को आई चिट्ठी आज तक नहीं खुली। लेकिन उस वक्त शोर मचाने वाले इस विषय पर अपने मुखारबिंद से आलोचना के दो शब्द भी बोल पाएंगे।
मोदी कैबिनेट के कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने अपने ही फार्म के लिए अपने ही अधीन आने वाले बोर्ड से (जिसके वो आपसे अध्यक्ष हैं) 99 लाख की सब्सिडी ले ली। अब जब मंत्री ने ऐसा किया तो सचिव (IAS) कहां पीछे रहने वाले थे, उन्हें भी एक करोड़ की सब्सिडी मिल गई।
क्या ये भ्रष्टाचार नहीं है? क्या ये मामले कॉन्फलिक्ट ऑफ इंटरेस्ट से जुड़े नहीं हैं? या इस मामले में भी मंत्री और सचिव महोदय वैसे ही पाक साफ बताए जाएंगे, जैसे मोहन यादव बताए जा चुके हैं?
बांग्लादेश में दीपू दास लिंचिंग का मुख्य अभियुक्त हसन सहादत बिजली के तार से लटका हुआ पाया गया
उस्मान हादी से शुरू हुआ ये सिलसिला अब तक कई क्रांतिकारियों को निपटा चुका है
अज्ञात बंदूक़धारियों का ख़ौफ़ अब बांग्लादेश भी पहुंच चुका है
19 साल पहले भी SDPO राजेश कुमार शर्मा का नाम एक एनकाउंटर में आया था और वो केस अभी तक चल रहा है!
4 नवंबर 2007 को मुजफ्फरपुर में तीन युवकों का एनकाउंटर हुआ था,उस एनकाउंटर में भी राजेश कुमार शर्मा थें,राजेश कुमार शर्मा उस समय मुजफ्फरपुर सदर थाना के थानेदार थें,सरकार ने CID जांच करवाकर पुलिस को क्लीन चीट दे दी थी लेकिन मानवाधिकार आयोग ने केस को जिंदा रखा था,तीन में एक मृतक मनीष की मां अनीता देवी ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए केस की और वो केस अभी तक कोर्ट में चल रहा है और इस बीच प्रोमोशन पर प्रोमोशन लेकर राजेश कुमार शर्मा थनेदार से SDPO तक बन गए,19 साल बाद फिर से एक एनकाउंटर में राजेश कुमार शर्मा शामिल हैं,भोजपुर जिले के जगदीशपुर में एनकाउंटर हुआ है और एनकाउंटर पर फिर से सवाल उठें हैं और मृतक भरत तिवारी की मां राजेश कुमार शर्मा सहीत और भी पुलिस पर FIR दर्ज कराई है!
#BharatTiwari #Bihar #RajeshSharma
बहुत सही कहा ठोक ही देना चाहिए विधायक के पास समस्या लेकर जाओ तो उसपर SC/ST Act ठोक देना चाहिए और प्रशासन के पास जाओ तो गोली से ठोक देना चाहिए । well done संविधान
अवैध पिस्टल दिखाकर पुलिस या कहें पूरे सिस्टम को चुनौती दोगे तो सही और अब जब पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ठोक दिया तो गलत।
ई ना चलतो …
करारा जवाब मिलेगा…
Well Done Bhojpur Police…
@samrat4bjp@bihar_police@bhojpur_police
The Embassy of the Islamic Republic of Iran in India categorically rejects the reports and claims circulated by certain media outlets regarding the economic situation in Iran and alleged difficulties in the supply of essential goods and public necessities.
It is emphasized that, despite the imposition of three wars and extensive pressures against the Iranian nation, no shortage of essential commodities or basic necessities has occurred to date. Owing to the effective measures and responsible management of the Government of the Islamic Republic of Iran under the leadership of President Dr. Masoud Pezeshkian, the procurement, supply, and distribution of the goods required by the country continue in a normal, stable, and uninterrupted manner.
The Embassy of the Islamic Republic of Iran also urges respected Indian media organizations to obtain and disseminate news and reports concerning Iran from credible, official, and verifiable sources. In this regard, it should be recalled that Iran International is a media outlet affiliated with opponents and adversaries of the Iranian people and has a long record of disseminating biased narratives aligned with anti-Iranian political agendas. Consequently, it cannot be regarded as a credible source for accurately reflecting the realities of Iran.
@aajtak