झील किनारे बैठी प्यारे,
देख रही थी ख़्वाब तुम्हारे।
शीत लहर ने पांव पसारे,
नील गगन में टिमटिम तारे।
सर्द सी रातें बीती बातें,
जीत गये कुछ कुछ थे हारे।
दूर तलक वीरान सड़क पर,
हाथों में थे हाथ तुम्हारे।
सैर करेंगे साथ कभी फिर,
देखेंगे हम साथ नजारे।
मेरी क़लम✍️
अनामिकाअनु