जिस हड़बड़ी में जेटेट की सिलेबस जारी की गई है, सभी विद्यार्थी यह जानना चाहते हैं कि कक्षा 1_5 और 6-8 तक की किस पुस्तक में इस स्तर की पढाई करवाई गई है? CBSE जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्था की भी ऐसी सिलेबस नही होती,और ना हीं हमारे परिषद् की इतनी काबिलियत है।
#CHANGE_JTET_SYLLABUS
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के जन्मदिन को झारखंड के युवा बेरोजगार दिवस के तौर पर मना रहे हैं। नौकरियों के वादे को लेकर हेमंत सोरेन जी ��र विपक्ष भी हमलावर है। आज युवाओं का हैशटैग
#युवा_विरोधी_हेमंत_सरकार , #झारखंड_बेरोजगार_दिवस ट्रेंड क��� रहा।
मैं आज उन 12 लाख छात्रों के हित में खड़ा हूं, जिन्होंने D.El.Ed. का कोर्स ख़त्म कर लिया, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली।
साल 2017 में केंद्र सरकार एक नोटिफिकेशन निकालती है, जिसमें कहा गया कि देश में छात्र D.El.Ed. का डिप्लोमा कोर्स लें। ऐसे में करीब 12 लाख लोगों ने कोर्स किया।
लेकिन भारत सरकार फिर से एक और आदेश निकालती है कि यदि छात्र 2 साल का कोर्स 18 महीने में भी ख़त्म होता है, तो वे पढ़ाने के योग्य होंगे।
लेकिन जब साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक नियम निकालते हुए कहा कि हम 2 साल और 18 महीने हो एक समान नहीं मान सकते हैं। जिन्होंने 18 महीने में कोर्स ख़त्म किए, वे योग्य नह��ं माने जाएंगे।
ऐसे में देश के ये 12 लाख छात्र कहां जाएं? क्योंकि इन्होंने तो सरकार के निर्देश पर ये सब किया।
मेरी मांग है कि केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय एक गजट नोटिफिकेशन निकालेगा तो इन 12 लाख छात्रों को न्याय मिल जाएगा।
: लोक सभा में उप नेता @GauravGogoiAsm जी
झुमरी तिलैया का झंडा चौक। एक वक्त में देश भर में झुमरी तिलैया का नाम रेडियो के ज़रिए गूंजता था। हर घर से विविध भारती में गाने की फ़रमाइस के लिए चिट्ठी लिखे जाने की परंपरा थी। एक वक्त वह भी था जब माईका खदान की वजह से विदेशी लोग झुमरी तिलैया में शॉपिंग करने आते थे। लेकिन अब झुमरी तिलैया काफ़ी बदल गया…
5 साल @JmmJharkhand को दिया गया इस उम्मीद से कि झारखंडी युवाओं के हित में स्थानीय और नियोजन नीति बनेगा लेकिन @HemantSorenJMM को चाहिए था BMW और मंत्री,विधायकों का अध���क वेतन।
1932 खतियान के नाम पर 60:40 नीति लेकर आया ओर सभी पदो को लाखों में बहारी युवाओं को बेच दिया।
@amarbauri
मुख्यमंत्री @ChampaiSoren एवं @JmmJharkhand प्रवक��ता @SupriyoJMM से पुनः वही सवाल दोहरा रहा हूँ।
बहरियों को रोकना का कौन सा गेटवे बनाएं है।
आज ओडिशा राज्य में अनुदेशक विज्ञापन जारी हुआ जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि Odia भाषा का विषय 10th में होना जरूरी है।
@amarbauri @JbkssTiger
@ExamsFighters@PankajTiwarri@dasraghubar चुप हो जा भाई। घंटा नौकरी मिला। राज्य का गेम करके चलते बनते है सब नेता लोग। मोमेंटम झारखण्ड का उड़ता हाथी भूला नही है कोई।
चापलू���ी मत करो कोई नेता का। काम किया होता यहां का नेता लोग पलायन नही करना पड़ता बच्चो को दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे आदि शहरों में नौकरी के लिए।
झारखंड की राजनीति कमाल की है। अगर सरकार नौकरी ना दे तो बवाल, और दे, तो डबल बवाल।
कल करीब ढाई हजार लोगों को सरकारी नौकरी क्या मिली कि कुछ लोगों ने विवाद शुरू कर दिया। कहीं से अनरिजर्वड श्रेणी के चयनित उम्मीदवारों की लिस्ट के 2-3 पन्ने निकाल कर ��गे चिल्लाने कि सरकार ने सारी नौकरी बाहरियों को दे दी।
इनमें कुछ लोग हैं जो शिक्षा का कारोबार करते हैं, कुछ हैं जो स्वयं को आंदोलनकारी कहते हैं और कुछ राजनीति करते हैं। कोई 70, कोई 80 तो कोई 90% सीटें बाहरियों को मिलने का दावा कर रहा है।
मजेदार बात यह है कि उनकी बातों पर उछल रहे अधिकतर लोग आरक्षित श्रेणी से आते हैं, जिनकी एक भी सीट बाहरियों को नहीं मिली है। जी हां, राज्य सरकार द्वारा आरक्षित (एसटी/ एससी/ ओबीसी) 60% की सीमा में कोई बाहरी अतिक्रमण नहीं कर पाया है। उनकी सारी सीटें स्थानीय लोगों को मिली हैं।
अब सवाल यह उठता है कि बाकी के अनारक्षित 40% में कुछ बाहरी लोग क्यों आ गये? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? इसके बारे में जानने के लिए आपको 2021 की नियोजन नीति को समझना होगा, जिसमें राज्य सरकार ने स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने के लिए झारखंड से 10वीं/ 12वीं पास को अनिवार्य कर दिया था।
उस आधार पर नौकरियों के विज्ञापन निकले ही थे कि भाजपा नेता रमेश हांसदा के पेट में दर्द शुरू हो गया। कुछ बाहरी अभ्यर्थियों के साथ उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका डाली, सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों को याद दिलवाया कि भारत में 60% से ज्यादा आरक्षण की अनुमति नहीं है, जिसके बाद कोर्ट ने उस नियोजन नीति को रद्द कर दिया। ध्यान से देखने पर आप पाएंगे कि उस नीति के रद्द होने पर तालियां बजाने वाले लोग ही आज सोशल ��ीडिया पर ड्रामा कर रहे हैं।
उस नीति के रद्द होने के बाद सरकार के पास कोई विकल्प ही नहीं था, क्योंकि अगर फिर 60 फीसदी से ज्यादा आरक्षण का प्रयास होता, तो फिर कोई ना कोई ग्रुप कोर्ट में होता और पिछली बार की तरह सारी नियुक्तियां रद्द होतीं। इसलिए एक टेलीफॉनिक सर्वे के बाद राज्य सरकार ने तय किया कि कम से कम 60% स्थानीय लोगों को तो नौकरी मिले, उसके अलावा जेनरल/ अनारक्षित सीटों पर भी कई स्थानीय चुने जाए��गे, और वे चुने भी गए हैं।
अगर आप आदिवासी, दलित या पिछड़ा वर्ग से आते हैं तो कौवे के पीछे दौड़ने से पहले अपना कान चेक कीजिए। इन सभी पोस्टों को ध्यान से देखने पर पता चलेगा कि हर बाहरी व्यक्ति UR यानि Unreserved कोटे का अभ्यर्थी है। मतलब, वह सीट कम से कम आपके लिए तो नहीं थी।
इस मामले में महत्वपूर्ण यह है कि कुछ लोगों की घटिया राजनीति का खामियाजा युवाओं को भुगतना पड़ रहा है। भाजपा के अमर बाउरी और बाबूलाल मरांडी जैसे लोग जब इस मामल��� में सवाल उठा रहे हैं, तो उनसे पूछना बनता है कि 1932 के खतियान आधारित नीति को दो साल से राजभवन क्यों अटका कर बैठा है? 27% ओबीसी आरक्षण को लटकाने वाले आज उन्हीं लोगों को गुमराह कर, राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं। वैसे भी, यह चुनावी साल है तो राजनीति चलती रहेगी, मुद्दे बनते- बिगड़ते रहेंगे।
झारखंड में नेतृत्व परिवर्तन के बाद जेएस��ससी की कार्यशैली में काफी बदलाव दिख रहा है। तेजी से परिणाम निकल रहे हैं। कल मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने हजारों नौकरियों की घोषणा की है, तो फिलहाल फोकस तैयारी पर रखिए, ताकि जेपीएससी के अभ्यर्थियों की तरह अतिरिक्त समय के लिए अभियान ना चलाना पड़े।
आप सभी को अगली परीक्षा/ रिजल्ट के लिए शुभकामनाएं।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @ChampaiSoren जी,कृप्या आप कुछ मत कीजिए सिर्फ अपने पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ का नियोजन नीति को यहां पर लागू कीजिए,दोनो राज्य में बहुत समानताएं हैं,जब वहां राज्य की 3rd और 4th ग्रेड में 100% लॉक हो सकता है हो हमारे राज्य में क्यों नहीं?आखिर..@RajeshThakurINC
दोनों राज्य आदिवासी बहुल राज्य हैं और दोनो का जन्म भी एक ही साथ हुआ है।वहां भी ये काम वहां की पिछली सरकार(कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार)ने किया है,तो यहां भी आपसब इसे कर ही सकते हैं।कृप्या राज्य हित में बड़ा दिल दिखाइए। @JmmJharkhand@INCJharkhand@PradeepYadavMLA@bandhu_tirkey