।।दैनिक प्रेरणा।।
"जिसे अपने राष्ट्र का अभिमान है, वह किसी भी परिस्थिति में पराई भाषा का अभिमान लेकर नहीं चल सकता। प्रत्येक भाषा उस समाज की जीवन-पद्धति को प्रकट करने का माध्यम है।"
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श्री गुरु जी
#suvichar#thoughts#thoughtoftheday
।।दैनिक प्रेरणा।।
"जिस प्रकार केवल एक ही बीज पूरे जंगल को पुनर्जीवित करने के लिए पर्याप्त है, उसी प्रकार एक ही मनुष्य विश्व में बदलाव लाने के लिए पर्याप्त है। ये मनुष्य आप हो सकते हैं।"
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स्वामी विवेकानंद
स्वयंसेवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में सहभागिता की, जेल गए और बलिदान भी दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वतंत्रता आंदोलन
संघ की प्रतिज्ञा थी -
“मैं हिन्दू राष्ट्र को स्वतंत्र कराने के लिए ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ का घटक बना हूँ”।
भारत छोड़ो आंदोलन 1942 के आंदोलन में जब मैं भूमिगत थी, तब दिल्ली के लाला हंसराज जी ने अपने घर पर पंद्रह दिन आश्रय देकर सुरक्षा का पूरा प्रबंध किया था - कांग्रेस नेता अरुणा आसफ अली #स्वतंत्रता_दिवस#Swatantra_25
संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर समाज में भी उत्सुकता - डॉ. मनमोहन वैद्य
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना को 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं. 1925 में नागपुर में संघ स्थापना हुई थी. संघ का कार्य किसी की कृपा से नहीं, केवल संघ के कार्यकर्ताओं के परिश्रम, त्याग, बलिदान के आधार पर तथा समाज के लगातार बढ़ते समर्थन से और सर्वशक्तिमान श्रीपरमेश्वर के आशीर्वाद से सतत बढ़ता आ रहा है. अनेक विरोध, अवरोध और संकटों को पार कर संघ का व्याप, शक्ति और प्रभाव लगातार बढ़ता रहा है. इसलिए संघ की चर्चा भी सर्वत्र होती दिखती है. संघ अपनी शताब्दी कैसे मनाएगा इसकी भी उत्सुकता लोगों में है. (मई 2022 में प्रकाशित)
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
भारत का विभाजन अभूूतपूर्व मानव विस्थापन और मजबूरी मेंं पलाायन की दर्दनाक कहानी है। धार्मिक आधार पर एक हिंसक विभाजन के दुखद अध्याय के साथ यह इस बात की भी कहानी है कि कैसे एक जीवन शैली और वर्षों पुुराने सह-अस्तित्व का युग अचानक और नाटकीय रूप से समाप्त हो गया। विस्थापितोंं का काफिला 10 से 27 मील तक लंंबा था। बारिश, भूूख और दंंगों में कइयों को जान गंंवानी पड़ी।
विभाजन की इस विभीषिका में अपनी जान गँवाने वाले सभी नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि।