हर जगह आसाराम घूम रहे हैं...
पुणे: बाबा राधा मोहन मिश्रा ने एक महिला का रेप किया।
छत्तीसगढ़: बाबा अमित गोस्वामी ने एक लड़की का रेप किया।
कानपुर: बाबा हरिओम यादव ने महिला से छेड़खानी की।
जरा सोचिए, ये महज पिछले दो दिन में घटित घटनाएं हैं।
दिल दहला देने वाली घटना!
यूपी के संत कबीर नगर में एक दलित परिवार में शादी थी। मोहम्मद नासिर नामक हैवान अपने गुर्गों के साथ परिवार की लड़कियों के साथ अश्लील इशारे और छेड़छाड़ कर रहा था।
इस दुष्टता को देख लड़की के चाचा आनंद कुमार ने नासिर को थप्पड़ मार दिया, तो अब नासिर ने दो हफ्ते बाद उन पर तलवार से हमला किया और गला रेंतकर उनकी हत्या कर दी। इन हैवानों को कानून का कोई डर नहीं है। मतलब अगर कोई व्यक्ति इन्हें बहन-बेटियों से छेड़छाड़ करने से मना करेगा तो ये उनकी हत्या कर देंगे?
विपक्ष एवं पूरा सेक्युलर लिबरल जमात तो इस घटना पर मौन है। तुष्टिकरण की आड़ में कोई हत्यारों का हमदर्द कैसे बन जाता है, यह इन जातिवादी सेक्युलर लफ्फाजों से सीखना चाहिए। हमारी मांग है कि हत्यारे मोहम्मद नासिर को उसके किए की सजा मिले और उसके घर की वैधता की जांच करके उस पर बुलडोजर चलाया जाए।
मोहम्मद नासिर अभी फरार है। वह अत्यंत ही खूंखार एवं आपराधिक किस्म का व्यक्ति है। प्रशासन पर भी हमला कर सकता है। अतः मेरा सुझाव है कि प्रशासन उसे गिरफ्तार करने पुरे दल-बल के साथ जाए। और प्लीज, अगर एनकाउंटर की स्थिति तो पैरों पर नहीं मत मारना, सीने पर गोली लगनी चाहिए। मोहम्मद नासिर जैसे कट्टरपंथी हैवान धरती पर बोझ हैं।
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मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए जो भावनाएं व्यक्त कीं, वह उनके मानवीय पक्ष को दर्शाता है। भावुक होना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने सम्मान और सच्चाई के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है।
@PalVishwnathbsp
चुनाव जीतने के लिए "वोट" से ज्यादा जरूरी "पैसा" है। नोटबन्दी के कारण बसपा आज तक उबर नही पाई।
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मीडिया वाले भी अजीब है। 40 साल बाद स्ट्रिंग कर रहे है। अरे भाई हमने 40 साल पहले खुलकर कहा है कि;
"एक नोट, एक वोट चाहिये।
हम खुलेआम कहते आये है। 40 साल बाद नींद काहे खुल रही है।
हम घोटाले नही करते। हम गरीब जनता से पैसे लेते है। हम कूपन देते है। पदाधिकारी व उस व्यक्ति की जिम्मेदारी है जो बहनजी से मिलता है, बहनजी जानती है टिके रहने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी "पैसा" है।
"पैसा न होने" के कारण ही एकाएक बसपा का ग्राफ गिरा। "नोटबन्दी" करी ही गयी थी 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव को ध्यान मव रखकर। बसपा जैसी पार्टियां 2017 में इसलिए धराशाई हुई क्योंकि "नोटबन्दी" में उसे सबसे बड़ा झटका लगा था। इसलिए नोटबन्दी का सबसे ज्यादा विरोध बहनजी ने किया था। नोटबन्दी का कारण यह था कि सपा, बसपा, आरजेडी से लेकर कई पार्टियां चुनाव न लड़ सके। सपा, वग़ैरह ने तब भी उधोगपतियों से मैनेज कर लिया। लेकिन धराशाई वो भी हुई। बसपा नही कर पाई। बसपा ने 104 करोड़ रुपया गाजियाबाद के एक्सिस बैंक की शाखा में दिसम्बर 2016 में जमा किया। जिससे घबराकर उस एकाउंट पर ED व इनकम टैक्स की नजर पड़ी व होल्ड लगा दिया गया और एक माह बाद अथार्त जनवरी 2017 में चुनाव प्रचार पर फर्क पड़ा। बिना पैसे के बसपा 2017 चुनाव लड़ी, आज तक उबर नही पाई है।।
इन 10, 100, 200 के कूपन गरीब शोषित एससी समाज मे बाँटकर चुनावी खर्च पूरा किया जाए। हमे सपा या आरजेडी, ममता केजरीवाल और इंहा तक कि वामदलों को मिलने वाले उधोगपतियों के चंदे नही मिलते है।
केजरीवाल ने शुरू में हम लोगो की तरह डिनर डिप्लोमेसी अपनाई। एक व्यक्ति एक व्यक्ति से 20000 इसलिए लिए जिससे वो केजरीवाल से मुलाकात कर सके। तब तक सही चला। फिर उन्होंने इसे छोड़कर शराब व अन्य तरिके अपनाए, पूरी पार्टी का बंटाधार हो गया।
हम आज भी उसी पर कायम है;
"एक नोट, एक वोट"
जो पदाधिकारी से अलग 5 लाख के कूपन बाँटकर पार्टी फंड में जमा करेगा, बहनजी उससे मिलेगी। पार्टी पर फंड होगा, चुनाव लड़ा जाएगा, जितने सत्ता में पहुचने पर हम उसी सबसे गरीब, जिसने साहयोग दिया, उसे गरीबी से मुक्त करवाने, उसे अपने मानव अधिकार होने का एहसास दिलवाने के कार्य करेंगे। हम गरीब शोषित की आंखों से आँसू पोछेंगे।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati@AnandAkash_BSP@bspindia
मूत की मनोहर कहानियाँ।
लॉकडाउन में हिंदू महासभा के स्वामी चक्रपाणि ने दिल्ली में "गौमूत्र पार्टी" रखी थी। उनका दावा था कि इससे कोरोना ठीक हो जाएगा। इसे पीते ही कई लोग बीमार हो गए थे।
अब IIT रुड़की के द्रोणाचार्य प्रोफेसरों से सवाल है कि क्या वे लोग स्वयं "गाय का मूत" पिएंगे? एकदम नीट। आखिर जब आप दावा कर रहे हैं कि गौमूत्र के आयुर्वेदिक अर्क में एंटीवायरल गुण होते हैं और इससे चिकनगुनिया जैसी बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं, तो आप सभी द्रोणाचार्य प्रोफेसरों के बीच "गौमूत्र पार्टी" रखिए और अपनी महान मेरिट का प्रदर्शन कीजिए। इसी बहाने बेचारे अंधभक्त भी इस सोमरस का आनंद उठा लेंगे।
ट्विट्टर पर मेरी रिच एकाएक काफी कम हो गयी।। पहले औसत 15 हजार रहती थी।।
ऐसा क्यो?
जबकिं;
"फेसबुक पर एक लेख की औसत रिच 20 हजार व पूरे दिन में एक कि रिच सवा लाख से ऊपर पहुच जाती है।
"
ट्विट्टर पर ऐसा क्या हो गया। यह एकाएक गिरी।
वैसे जैसी ही गिरी अपने पुराने घर फ़ेसबुक पर ज्यादा समय बिताने लगे।
बहुजन व अम्बेडकरवादी संदेशों का प्रसार ही प्रथम व अंतिम उद्देश्य है।
विकास कुमार जाटव
आर्मी के जवान बने शैतान।
मिजोरम में BSF के दो जवानों ने एक चकमा आदिवासी लड़की से गैंगरेप कर उस पर एसिड से हमला किया था।
एसिड अटैक की वजह से पीड़िता का चेहरा बुरी तरह जल गया। उसकी सहेली का शरीर भी एसिड से सना हुआ मिला था।
अब अदालत ने दोनों जवानों को गैंगरेप एवं एसिड अटैक का दोषी करार दिया है। मामला जुलाई 2017 का है जब पीड़िता और उसकी सहेली बांग्लादेश सीमा के पास बांस के अंकुर (बैम्बू शूट्स) खोजने गई थीं। तभी वहां खड़े BSF के जवानों ने उन्हें रोक लिया। पीड़िता की सहेली कुछ देर के लिए शौच के लिए गई थी। इसी दौरान मौका पाकर इन दरिंदों ने पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न किया और उसके चेहरे पर एसिड डाल दिया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गई और उसकी एक आंख की रोशनी भी चली गई।
यह मामला पीड़िता के भाई की शिकायत पर दर्ज FIR से शुरू हुआ। पीड़िता के भाई ने इन दोनों हैवानों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। साथ ही उसकी सहेली पर भी एसिड से हमला किया गया। ग्रामीणों को वह बेसुध और दयनीय हालत में मिली थी। उस मामले में अलग से कार्रवाई चल रही है।
हमारी मांग है कि इन खूंखार हैवानों को फांसी की सजा मिले। ये दरिंदे न केवल BSF की छवि को कलंकित कर रहे हैं, बल्कि देश की बेटियों के भी दुश्मन साबित हुए हैं। देश सेवा छोड़िए, ऐसे दरिंदे समाज में रहने लायक भी नहीं हैं।
मेरिटधारी IPS गिरफ्तार!
लखनऊ में मिथलेश शुक्ला नामक व्यक्ति खुद को IPS अधिकारी बताकर लोगों पर रौब झाड़ रहा था। उसने दुकान से ₹40 का सामान लिया, पर पैसे देने से मना कर दिया।
दुकानदार ने पुलिस बुला ली। मिथलेश शुक्ला ने पुलिसकर्मियों पर भी रौब झाड़ा और उन्हें सैल्यूट करने को कहा। वह उन्हें सस्पेंड करने की धमकी भी देने लगा। शुरुआत में पुलिसकर्मी भी सकपका गए, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने पूछताछ शुरू की और सख्ती दिखाई, तो फर्जी IPS मिथलेश शुक्ला की सारी हेकड़ी निकल गई।
जांच में पता चला कि मिथलेश शुक्ला खुद को IPS अधिकारी बताकर लोगों को ठगता था। इन मेरिटधारियों के कारनामे बड़े कमाल के हैं। ₹40 की दक्षिणा लूटने के चक्कर में IPS होने का सारा गुरूर चकनाचूर हो गया।
खान सर को खुदा मानते हो तो 5-7 मिनट निकालकर वीडियो देख लो, आंख खुल जाएगी।
सबसे बड़े कोचिंग माफिया हैं ये जानते हो तो कोई बात नहीं, उतनी समझ ऑलरेडी बन गई होगी।
40 हजार और 75 हजार के UPSC कोर्स देकर, सिलेक्शन 0.1% से भी कम करवा पाने वाले माफिया की ब्रांडिंग ऐसे हुई है जैसे सस्ती शिक्षा का संसार बना दिया है।
@shubhankrmishra@KapilSharmaK9 और @SrBachchan ने paid या unpaid ऐसा प्रचार करवाया कि हमें भी लगा उनकी बात सही है।
अब जब खुद मीडिया में बोले अपनी आंखों से देखा हूं 7-8 राउंड गोली चली है, अगले दिन फुटेज आई तो पलट गए; पता चल गया किसकी गुंडागर्दी चल रही है।
अंजना बनाम टीचर्स एक अलग पॉलिटिकल मुद्दा है।
एडमिशन सीजन में कोचिंग माफियाओं का आपसी गैंगवार बिल्कुल अलग मुद्दा।
रौशन सर कोई दूध के धुले नहीं होंगे, ऐसे ही होंगे मगर इतने पावरफुल तो नहीं है, तभी जेल चले गए।
उनके भाई जो पूरी कोचिंग की जिम्मेदारी देखते थे नेपाल में छुपे थे अब उनकी अचानक मौत हो गई है।
सुनिए दोनों ग्रुप के एक साथी शिक्षक ने क्या बताया समझाया है, कमोबेश स्थिति यही है।
@samrat4bjp और @yadavtejashwi सब जानते हैं सबकी सच्चाई कौन कितना नोबेल है मगर शिक्षकों को सपोर्ट इतना है कि गैंग्स ऑफ़ क्लासेपुर खुलेआम चल रही है।
@bihar_police जांच तो चल ही रही होगी कि रौशन आनंद के भाई की मौत कैसे हुई वो एक अलग मसला है मगर इसकी जांच कब होगी कि कैसे पटना में खुलेआम गैंगवार चल रही है!
समाजवादी पार्टी टूट के कगार पर , सपा के नेताओं में भगदड़ मची हुई है....
शंकराचार्य के कार्यक्रम में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गिरीश यादव और वर्तमान जिलाध्यक्ष लक्ष्मी धनगर आपस में उलझ गए....
इसी नोकझोंक व बीच तीखी बहस के बाद हाथापाई शुरू हो गई!
इथेनॉल पेट्रोल का खेल देखिए, जनता को मूर्ख कैसे बनाया जा रहा है, नितिन गडकरी देश के लोगों को कैसे अंधकार में झोंके हुए हैं और मोदी जी की आँख देख नहीं पा रही है।।
इसके बावजूद भी पेट्रोल मंहगा हो रहा है!
#इथेनॉल#petrol#India
देखों कैसे ब्राह्मणधर्म में हमारी नदियों को कूड़ा करकट बना दिया गया है ।।😡
एक भी Pogga पण्डित नही कहता है कि यह सब बन्द करो क्योंकि हमारी नदिया प्रदूषित हो रही है कभी नही कहेगा🤡
क्योंकि धर्म से ही तो आज तक इनके कितने परिवार का लालन पालन हो रहा है उसे देश और प्रकृति से कोई मतलब नहीं है बस रोजगार धन्धा मिलना चाहिए 💲💲
बाप बना जल्लाद।
यूपी के बांदा में शिवानी चौहान एवं ललित वर्मा आपस में प्रेम करते थे। अतः उन्होंने घर से भागकर शादी कर ली।
दोनों हिंदू थे, लेकिन अलग जाति के थे। अतः लड़की के पिता को यह उसके शान के खिलाफ लगा और उसने थाने में घुसकर पुलिस के सामने ही बेटी की निर्मम हत्या कर दी।
गिरफ्तारी तक रिपोस्ट न रुके✊🚨
महोदय @@sultanpurpolice कृपया कार्यवाही हेतु प्रेषित !!
अभियुक्त का नाम:- विनोद वर्मा
पता:-ग्राम सभा गोल्हनपारा
थाना:-दोस्तपुर (जिला सुल्तानपुर)
उक्त आरोपी के द्वारा "संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी" व "SC समुदाय के चमार जाति" पर जातिगत टिप्पणी कर वीडियो प्रसारित किया गया है, जो बेहद निन्दनीय कृत्य है और बर्दाश्त योग्य नहीं है !!
इस तरह का कृत्य न की महापुरुषों के सम्मान। के साथ खिलवाड़ है,बल्कि सामाजिक माहौल को खराब कर दंगे करवाने जैसा है !!
@ipsCharuNigam जी तत्काल मामले को संज्ञान में लेकर आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कर गिरफ्तारी करे जिससे सामाजिक शाहौर्द बना रहे !!
Requesting to:- @sultanpurpolice@adgzonelucknow@igrangeayodhya@ipsCharuNigam@Uppolice arrest him ASAP🚨
जातीय आतंक का घिनौना चेहरा!
उत्तराखंड के चंपावत जिले में एक दलित टैक्सी ड्राइवर कम किराए पर सवारी ले गया, तो अन्य सवर्ण ड्राइवरों ने जूतों की माला पहनाकर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया।
ये हरामखोर खुद तो सवारियों को मनमाना लूटते हैं, लेकिन अगर कोई दलित सही किराया ले तो उसे भी अपमानित करते हैं। इन कायर झुंड ने जिस तरह एक दलित को घेरकर उसे मां-बहन एवं जातिसूचक गालियां दीं, उसे जूतों की माला पहनाई, भरी सड़क पर खड़ा करके उसका वीडियो बनाया, और इतने से मन नहीं भरा तो पूरे दलित समाज को अपमानित करने के लिए उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। इतना खूंखार एवं निर्दयी तो कोई आतंकी भी नहीं होता है। ये हरामखोर उससे भी ज्यादा निर्मम होते हैं।
पीड़ित की तहरीर व साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने द्विज हिंदू सोबरन सिंह, सोबरन सिंह, हरीश बोहरा और मोहन चंद्र के खिलाफ BNS एवं SC-ST Act की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एक मासूम एवं ईमानदार ड्राइवर को घेरकर उसे जूतों की माला पहनाते समय ये गुर्गे दबंग बन रहे थे, अब FIR होते ही सारी हेकड़ी अंग विशेष में घुस गई है। भागे-भागे घूम रहे हैं। इतनी कठोर धाराएं लगी हैं कि अब ये अपनी गंदी परवरिश एवं जातिवादी मानसिकता पर पूरा जीवन पछताएंगे।