हमारी सरकार द्वारा बनाए गए नए जिलों में से 9 जिलों को निरस्त करने का भाजपा सरकार का निर्णय अविवेकशीलता एवं केवल राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।
हमारी सरकार के दौरान जिलों का पुनर्गठन करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में 21 मार्च 2022 को समिति बनाई गई थी जिसको दर्जनों जिलों के प्रतिवेदन प्राप्त हुए। इन्हीं प्रतिवेदनों का परीक्षण कर समिति ने अपनी रिपोर्ट दी जिसके आधार पर नए जिले बनाने का निर्णय किया गया।
मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के अलग होने के बाद राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य बन गया परन्तु प्रशासनिक इकाइयों का पुनर्गठन उस अनुपात में नहीं हुआ था। राजस्थान से छोटा होने के बाद भी मध्य प्रदेश में 53 जिले हैं।
नए जिलों के गठन से पूर्व राजस्थान में हर जिले की औसत आबाादी 35.42 लाख व क्षेत्रफल 12,147 वर्ग किलोमीटर था (हालांकि त्रिपुरा राज्य का क्षेत्रफल 10,492 वर्ग किलोमीटर, गोवा राज्य का क्षेत्रफल 3,702 वर्ग किलोमीटर, दिल्ली केन्द्र शासित प्रदेश का क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर है) जबकि नए जिले बनने के बाद जिलों की औसत आबादी 15.35 लाख व क्षेत्रफल 5268 वर्ग किलोमीटर हो गया था।
जिले की आबादी व क्षेत्र कम होने से शासन-प्रशासन की पहुंच बेहतर होती है एवं सुविधाओं व योजनाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो पाती है। छोटी प्रशासनिक इकाई होने पर जनता की प्रतिवेदनाओं का निस्तारण भी शीघ्रता से होता है।
भाजपा सरकार द्वारा जिन जिलों को छोटा होने का तर्क देकर रद्द किया है वो भी अनुचित है। जिले का आकार वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। हमारे पड़ोसी राज्यों के जिले जैसे गुजरात के डांग (2 लाख 29 हजार), पोरबंदर (5 लाख 85 हजार) एवं नर्बदा (5 लाख 91 हजार), हरियाणा के पंचकुला (5 लाख 59 हजार) एवं चरखी दादरी (लगभग 5 लाख 1 हजार), पंजाब के मलेरकोटला (लगभग 4 लाख 30 हजार), बरनाला(5 लाख 96 हजार) एवं फतेहगढ़ साहिब (6 लाख) जैसे कम आबादी वाले जिले हैं।
कम आबादी वाले जिलों में सरकार की प्लानिंग की सफलता भी ज्यादा होती है। छोटे जिलों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल रखना भी आसान होता है क्योंकि वहां पुलिस की पहुंच अधिक होती है।
परिस्थितियों के आधार पर जिलों की आबादी में भी अंतर होना स्वभाविक है जैसे उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले की आबादी करीब 60 लाख है जबकि चित्रकूट जिले की आबादी 10 लाख है। परन्तु सरकार के लिए प्रशासनिक दृष्टि से छोटे जिले ही बेहतर लगते हैं।
सरकार की तरफ से एक तर्क यह दिया जा रहा है कि एक जिले में कम से कम 3 विधानसभा क्षेत्र होने चाहिए जबकि भाजपा द्वारा 2007 में बनाए गए प्रतापगढ़ मे परिसीमन के बावजूद भी केवल दो विधानसभा क्षेत्र हैं।
सरकार द्वारा जहां कम दूरी का तर्क दिया जा रहा है वो भी आश्चर्यजनक है क्योंकि डीग की भरतपुर से दूरी केवल 38 किमी है जिसे रखा गया है परन्तु सांचौर से जालोर की दूरी 135 किमी एवंअनूपगढ़ से गंगानगर की दूरी 125 किमी होने के बावजूद उन जिलों को रद्द कर दिया गया।
हमारी सरकार ने केवल जिलों की घोषणा ही नहीं की बल्कि वहां कलेक्टर, एसपी समेत तमाम जिला स्तरीय अधिकारियों की नियुक्ति दी एवं हर जिले को संसाधनों के लिए बजट भी दिया।
हम भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए इस अदूरदर्शी एवं राजनीतिक प्रतिशोध के कारण लिए गए निर्णय की निंदा करते हैं।
वर्तमान सिस्टम में
अधिकारी वही है जो सच्चाई से दूर हो,
जो कल्पनाओं में जीता हो,
जिसके पास हवा हवाई सपने हों ,
जिसके पास करने को कुछ न हो लेकिन कहने को ज्ञान का भंडार,
जैसे कलेक्टर
कर्मचारी वह है जो व्यवहारिक है ,
जिसके पास कहने से ज्यादा करने के लिए टारगेट है,
जो अधिकारी की कल्पनाओं के झूठे दस्तावेज तैयार करता है,
जो असंभव काम को भी दस्तावेज में करके दिखाता है,
जैसे पटवारी
मनीष भार्गव
#कचहरीनामा
#सिस्टम
मोबाइल खोने या चोरी होने पर लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसे नज़रअंदाज न करें।
इसकी रिपोर्ट स्थानीय पुलिस थाने में करने के साथ ही https://t.co/BUjXDwnCBg के Block Stolen/Lost Mobile सेक्शन में जाकर मोबाइल को ब्लॉक करना न भूलें जिससे आप फोन के गलत उपयोग से बच सकें।
राजस्थान पुलिस आपकी सहायता के लिए हर समय तैयार है।
#RajasthanPolice
#श्रीगंगानगर जिले के #स्थापना_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
आज ही के दिन #26_अक्टूबर 1927 को ‘महाराजा गंगासिंह’ सहित अन्य अतिथियों की मौजूदगी में गंगनहर में जल का प्रवाह किया गया।
तत्कालीन समय में आयोजित कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग से देखें स्थापना दिवस की झलकियां..
🧵(1/2)
कांग्रेस को एक रेवंत रेड्डी उत्तरी राज्यों में भी चाहिए होगा।
तेलंगाना में कांग्रेस का कोई भी प्रभाव नहीं था, विधानसभा में मात्र 19 सीटें थीं मगर रेवंत रेड्डी ने 2023 के विधानसभा चुनाव में 64 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
अबकी बार लोकसभा चुनाव में बताया जा रहा है कि
कांग्रेस जिसके पास 2019 में मात्र 3 सीटें थीं वह इस लोकसभा चुनाव में 13 से भी ज़्यादा सीटें जीत सकती है।
BJP जिसके पास 2019 में 4 लोकसभा सीटें थीं वह 2 सीट तक सीमित हो सकती है।
BRS जिसके पास 2019 में 9 लोकसभा सीटें थीं वह मात्र 1 सीट तक सीमित रह सकती है।
हैदराबाद वाली सीट पर अब भी ओवैसी साहब मज़बूत स्तिथि में हैं।
तेलंगाना में कांग्रेस का ग्राफ तेजी से ऊपर ले जाने में रेवंत रेड्डी का सबसे बड़ा योगदान है।
हेल्दी रहने के लिए कुछ बड़ा करने की ज़रूरत नहीं है, बस इन बातों का रखें ख्याल
👉नमक (5mg से कम )और चीनी कम ही खाएं
👉दिन में 8 गिलास पानी पीना याद रखें।
👉जूस नहीं ,फल का सेवन करें
👉दिन भर में सबसे कम खाना डिनर का हो
👉हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज या हफ्ते में कम से
कम 5 दिन 30 मिनट एक्सरसाइज करने का प्रयास करें।
👉धूप सेंकें ,घास पर नंगे पांव चलें
👉6-8 घंटे की नींद लें
👉हो सके तोह दो हफ्ते में एक बार उपवास करें
👉मोबाइल की दुनिया से निकल कर ,रियल दुनिया में जियें ,लोगों
से मिले
👉हमें फॉलो करें @drvikas1111 और दूसरों तक शेयर करें 😜
#HealthyLiving #Health #healthtips