On this Janmashtami, we remember the greatest strategist of Sanatan Dharma.
Sri Krishna dismantled tyranny not through empty rhetoric, but with relentless intellect, strategic strength, and the timeless principle of Karma over birth-based entitlement.
#HappyJanmashtami https://t.co/00AUrk5PBl
टैक्स पूरे समाज और हर नागरिक से वसूला जाएगा, लेकिन विदेश के टॉप विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का खर्च उठाते समय केवल जाति का प्रमाण-पत्र देखा जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार का यह विज्ञापन साफ दर्शाता है कि तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति में कोई भी दल पीछे नहीं रहना चाहता।
एक तरफ सामान्य और निम्न-मध्यम वर्ग का मेधावी छात्र देश के कॉलेजों की सामान्य फीस भरने के लिए भी एजुकेशन लोन और कर्ज़ के बोझ तले दब रहा है,
और दूसरी तरफ राज्य के खजाने से विदेश में मास्टर्स और पीएचडी कराने की योजनाएं केवल एक वर्ग विशेष तक सीमित कर दी गई हैं।
यदि यह छात्रवृत्ति विशुद्ध रूप से मेधा (Merit) और आर्थिक पिछड़ेपन (Economic status) के आधार पर होती, तो प्रदेश के हर गरीब और साधनहीन छात्र को बराबर मौका मिलता।
योग्यता की उपेक्षा करके केवल जातिगत आधार पर अवसर बांटना सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के होनहार युवाओं के साथ खुला पक्षपात है।
@DrMohanYadav51@CMMadhyaPradesh@narendramodi@PMOIndia
#MadhyaPradesh #ScholarshipScheme #MeritMatters #TaxpayersMoney #GeneralCategory #EqualOpportunities #MPPolitics
अगर यही शिकायत किसी अन्य वर्ग की तरफ से आई होती, तो अब तक प्रशासन ने बिना किसी प्रारंभिक जांच के भी गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी होती।
लेकिन जब पीड़ित सामान्य वर्ग का एक साधनहीन ग्रामीण परिवार होता है, तो तंत्र की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
कानून का भय दिखाकर खुलेआम अभद्रता करना और उल्टे मुकदमों की धमकी देना इस बात का प्रमाण है कि एकतरफा कानूनी प्रावधानों का किस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है।
कानून के राज की पहली शर्त यही है कि अपराधी केवल अपराधी हो और पीड़ित केवल पीड़ित।
प्रशासन को दबाव से मुक्त होकर तथ्यपरक जांच करनी चाहिए ताकि ज़मीन पर किसी भी निर्दोष परिवार को कानून के डर से प्रताड़ित न होना पड़े।
@myogiadityanath@dgpup@kasganjpolice@UPGovt
#KasganjNews #EqualJustice #StopMisuseOfLaw #RuleOfLaw #YogiAdityanath #UPPolice #SavarnCommission
अगर यही शिकायत किसी अन्य वर्ग की तरफ से आई होती, तो अब तक प्रशासन ने बिना किसी प्रारंभिक जांच के भी गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई शुरू कर दी होती।
लेकिन जब पीड़ित सामान्य वर्ग का एक साधनहीन ग्रामीण परिवार होता है, तो तंत्र की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
कानून का भय दिखाकर खुलेआम अभद्रता करना और उल्टे मुकदमों की धमकी देना इस बात का प्रमाण है कि एकतरफा कानूनी प्रावधानों का किस प्रकार दुरुपयोग हो रहा है।
कानून के राज की पहली शर्त यही है कि अपराधी केवल अपराधी हो और पीड़ित केवल पीड़ित।
प्रशासन को दबाव से मुक्त होकर तथ्यपरक जांच करनी चाहिए ताकि ज़मीन पर किसी भी निर्दोष परिवार को कानून के डर से प्रताड़ित न होना पड़े।
@myogiadityanath@dgpup@kasganjpolice@UPGovt
#KasganjNews #EqualJustice #StopMisuseOfLaw #RuleOfLaw #YogiAdityanath #UPPolice #SavarnCommission
पीड़ित व्यक्ति और महिलाएं हमारे सवर्ण समाज (ठाकुर समाज)से आते हैं इनका कहना है जब महिलाएं खेत पर जाती है तो जाटवो के लड़के नंगे खड़े हो जाते हैं कुछ कहने पर SC ST एक्ट लगाने की धमकी देते हैं प्रशासन भी उन लोगों के ही साथ है, खैर जैसा कि महामानव ने कहा था बदला लिया जाएगा तो बदला लिया जा रहा है।
मामला कासगंज का है।
अनुज शुक्ला यूरेशिया वाले ✍️
@neha_laldas यह बहुत ही सराहनीय और समयोचित कदम है।
जब राजनीतिक दल वोट बैंक की होड़ में सुप्रीम कोर्ट के 50% आरक्षण की लक्ष्मण रेखा को रौंदकर 91% तक पहुंच जाएं, तो न्यायपालिका ही अंतिम सहारा बचती है।
सामान्य वर्ग के वो गरीब और मध्यम वर्गीय माता-पिता जो पेट काटकर अपने बच्चों को कोचिंग दिलाते हैं, उनकी मेधा पर यह सीधा तुष्टीकरण का प्रहार है।
योग्यता (Merit) को पूरी तरह दरकिनार करके सिर्फ 9% खुली सीटें छोड़ना सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि सामान्य वर्ग के भविष्य पर ताला लगाना है।
प्रभावित छात्रों और अभिभावकों को अपने जायज संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इस कानूनी मंच का सहारा लेकर मजबूती से आगे आना चाहिए।
#UPMBBS #ReservationReality #GeneralCategoryRights #MeritFirst #NEETUG #LegalFight
किसी भी छात्र या नागरिक के साथ हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है और कानून के तहत दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन नेता प्रतिपक्ष का सिलेक्टिव चश्मा देखिए, जब तक किसी मामले में जातिगत नैरेटिव और वोट बैंक का एंगल न फिट बैठे, तब तक इनकी संवेदनाएं कभी नहीं जागतीं।
उत्तर प्रदेश के हरदोई में जब 13 साल की मासूम क्षमा दीक्षित के दोनों हाथ बेरहमी से तोड़ दिए गए थे, तब राहुल गांधी या कांग्रेस की तरफ से कोई ट्वीट नहीं आया, क्योंकि पीड़ित सामान्य वर्ग से थी।
अपराध सिर्फ अपराध होता है, लेकिन हर स्थानीय विवाद और छात्र राजनीति की झड़प को सीधे 'दलित बनाम अन्य' बनाकर समाज में ज़हर घोलना न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि शुद्ध विभाजनकारी सियासत है।
न्याय निष्पक्ष जांच और कानून से मिलता है, हर अपराध को जातिवादी चश्मे से देखने से सिर्फ समाज में खाई चौड़ी होती है।
#RahulGandhi #SelectiveOutrage #JusticeForAll #NoToCastePolitics #EqualityBeforeLaw #RuleOfLaw
आधुनिक अपराधों और मध्यकालीन बर्बरता के विरुद्ध वीरांगनाओं के 'जौहर' को एक ही तराजू में तोलना घोर अज्ञानता का प्रमाण है।
जब सामने क्रूर आक्रांता खड़े हों जिनका एकमात्र उद्देश्य महिलाओं को लूटकर अपनी हवस की दासी बनाना था,
तब क्षत्राणियों ने आत्मसमर्पण के बजाय अग्नि-समाधि चुनकर इतिहास रच दिया था।
स्वरा भास्कर जैसे गिरोह को यह बात कभी समझ नहीं आ सकती, क्योंकि इनका पूरा विमर्श सनातन प्रतीकों को कटघरे में खड़ा करने तक सीमित रहता है।
जौहर कोई पराजय या लाचारी नहीं, बल्कि आक्रांताओं के मुंह पर कालिख पोतने वाला सर्वोच्च और साहसी आत्मोत्सर्ग था।
इतिहास की ज़रा भी समझ न होना और फिर भारतीय नारियों के सर्वोच्च बलिदान पर उपदेश देना सिर्फ़ अपनी बौद्धिक दरिद्रता को जगज़ाहिर करना है।
#JauharPride #StopDistortingHistory #TrueHistory #SanatanHeritage #SwaraBhaskerExposed #RealityCheck
अगर सिर्फ़ नाम के पीछे 'मिश्रा' लगाने से ही CEO की कुर्सी मिल जाती,
तो भाई देर किस बात की? तुम भी कल सुबह आधार कार्ड में नाम बदलकर 'प्रतीक मिश्रा' कर लो और बन जाओ किसी बड़े ट्रस्ट या कॉर्पोरेट के CEO—किसने रोका है?
हर प्रशासनिक ज़िम्मेदारी और योग्यता में जाति का रोना रोने वालों को यह समझ नहीं आता कि पदों पर चयन ट्रैक रिकॉर्ड, प्रशासनिक अनुभव और मेरिट (Merit) से होता है, जातिगत पर्चियों से नहीं।
राम मंदिर आंदोलन और ट्रस्ट का इतिहास उठाकर देख लो—1989 में मंदिर के शिलान्यास की पहली ईंट रखने वाले कामेश्वर चौपाल जी (दलित समाज) थे,
लेकिन तब तुम्हारी यह विभाजनकारी टूलकिट अंधी हो गई थी क्योंकि वहाँ नफ़रत फैलाने का मौका नहीं मिला।
हर जगह बिना मेहनत के कोटा और विक्टिम कार्ड ढूंढने वालों को जब कोई सामान्य वर्ग का व्यक्ति अपनी काबिलियत से आगे बढ़ता दिखता है, तो छाती पीटना इनकी पुरानी आदत है।
अपनी इस कुंठित सोच का इलाज करवाओ!
#RamMandir #MeritMatters #StopCastePolitics #VictimCardExposed #RealityCheck #EqualityBeforeLaw
@yadavakhilesh सड़क पर दो सांडों के टकराने पर चुटकुले बनाने से पहले अपने उस कार्यकाल का रिकॉर्ड देख लीजिए,
जब थानों पर सपा के गुर्गे तांडव मचाते थे और पुलिस हाथ बांधे खड़ी रहती थी।
स्थानीय निकायों को आवारा पशुओं पर सख्त कदम उठाने ही चाहिए,
लेकिन एक पूर्व मुख्यमंत्री का हर स्थानीय घटना पर सस्ती ट्रोलिंग पर उतर आना उनकी राजनीतिक हताशा दिखाता है।
जिस पार्टी का पूरा राजनीतिक आधार ही अपराधियों को संरक्षण देने और खास जातियों की चौधराहट पर टिका रहा हो, वह आज विकास और अर्थव्यवस्था पर तंज कस रही है?
यूपी की जनता आज सुरक्षित महसूस करती है क्योंकि माफियाओं और दंगाइयों की जिस 'युद्ध-कला' को आपकी सरकार ने पाला-पोसा था, उस पर कानून का बुलडोज़र चल चुका है!
#SPReality #DoubleStandards #UttarPradesh #JungleRajVsLaw #Governance #FactCheckUP
अपराध हुआ ही नहीं, प्रतिमा पर खरोंच तक नहीं आई
लेकिन सिर्फ़ भीड़ और राजनीतिक दबाव के आगे घुटने टेककर पुलिस ने 37 लोगों पर मुक़दमा दर्ज कर दिया!
यह प्रशासनिक कायरता नहीं तो और क्या है कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए सवर्णों को बलि का बकरा बना दिया जाए?
37 लोगों पर मुक़दमा दर्ज होने का सीधा मतलब है कि 37 परिवारों के बच्चों की सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और भविष्य पर बिना किसी अपराध के ताला लगा दिया गया।
अगर यही घटना किसी आरक्षित वर्ग के साथ हुई होती, तो अब तक मानवाधिकार आयोग से लेकर संविधान बचाओ गिरोह तक आसमान सिर पर उठा चुका होता; लेकिन यहाँ पीड़ित सामान्य वर्ग है, इसलिए सबकी बोलती बंद है।
जब तक फ़र्ज़ी SC-ST एक्ट के तहत मुक़दमा दर्ज कराने वालों को उसी अपराध की सज़ा भुगतने का कड़ा कानून नहीं बनेगा, तब तक यह कानूनी डकैती यूं ही चलती रहेगी!
#SCSTActReality #KasganjNews #SelectiveJustice #UPPolice #FairInvestigation #SavarnAayog
मैं एक निम्न-मध्यम वर्गीय क्षत्रिय (सवर्ण) परिवार से आता हूँ, और यह बात मेरे सभी ओबीसी (OBC) भाइयों को ठंडे दिमाग से समझनी होगी:
जब हम 'सवर्ण आयोग' या अपने अधिकारों की मांग करते हैं, तो हम आपके विरोधी नहीं बनते।
गाँव-देहात की ज़मीन पर खेत की मेड़ से लेकर सुख-दुख तक क्षत्रिय और पिछड़े वर्ग का जीवन हमेशा साझा रहा है।
एक आम सवर्ण के घर की मजबूरी और एक आम ओबीसी किसान-मजदूर के बेटे का संघर्ष रत्ती भर भी अलग नहीं है
महंगाई, रोज़गार का अभाव और सीमित संसाधन दोनों को बराबर झेलने पड़ते हैं।
सियासी दल अपनी तिजोरियां और वोट बैंक भरने के लिए हमारे बीच नफ़रत की दीवार खड़ी करते हैं, जबकि सरकारी योजनाओं और सत्ता की मलाई केवल कुछ रसूखदार राजनीतिक घराने चाटते हैं।
हम अपने मेधावी बच्चों के भविष्य और बिना जांच होने वाले झूठे मुकदमों से कानूनी सुरक्षा मांग रहे हैं, आपका हक छीनने नहीं आए।
अपनी थाली की रोटी मांगना किसी दूसरे की थाली छीनना नहीं होता;
असली चाल उन नेताओं की है जो हिंदू समाज को आपस में लड़ाकर सत्ता की रोटियां सेक रहे हैं!
@ObcCommunity@BJP4OBCMorcha
#SavarnWithOBC #SamajikSamrasta #Kshatriya #OBCBrothers #SanatanUnity #RealityCheck #NoHateOnlyFacts
डेटा एनालिटिक्स और ब्रांडिंग के पर्दे के पीछे वही पुराना जातिवादी खेल चल रहा है।
'जन सुराज' की पदयात्रा का अंत भी आखिरकार उसी तुष्टीकरण की नाली में जाकर हुआ जहाँ बाकी पार्टियां दशकों से नहा रही हैं।
मेरिट को रौंदकर और सामान्य वर्ग के युवाओं के अधिकारों को नजरअंदाज करके कोई राज्य आगे नहीं बढ़ सकता।
बड़ी-बड़ी डिग्रियों और कंसल्टेंसी का लबादा ओढ़े ऐसे 'शिक्षित' नेता जब वोट बैंक के सामने नतमस्तक हो जाते हैं,
तो यह साबित होता है कि समस्या अनपढ़ नेताओं की नहीं, बल्कि इस पूरी अवसरवादी व्यवस्था की है!
#MeritOverCaste #PKReality #Hypocrisy #EqualityBeforeLaw #SavarnRights
बात का मर्म सही है कि जब तक सत्ता की कुर्सी पर सीधी आंच न आए, तब तक सरकारें कानों में तेल डालकर सोती रहती हैं।
लेकिन सड़कें फूंकने और अनशन की नौटंकी सवर्ण समाज के लिए कभी समाधान नहीं हो सकती;
क्योंकि सिस्टम का दोहरा चरित्र ऐसा है कि अगर सामान्य वर्ग का युवा सड़क पर उतरा, तो प्रशासन चौबीस घंटे में एनएसए और करियर बर्बाद करने वाली धाराएं ठोक देगा।
सवर्ण समाज की लड़ाई अराजक उपद्रवियों या 'प्रोफेशनल ब्लैकमेलरों' के दम पर नहीं, बल्कि अपने वोट को किसी की बपौती मानना बंद करने से जीती जाएगी।
जिस दिन राजनीतिक दलों को समझ आ जाएगा कि सामान्य वर्ग का वोट किसी पार्टी का 'बंधुआ' नहीं है और यह चुनावी गणित बिगाड़ सकता है, उस दिन बिना एक भी पत्थर चले सरकारें खुद मांगें मानने टेबल पर आएंगी!
#SavarnRights #PoliticalReality #DevendraFadnavis #MaharashtraPolitics #VotePower #NoToAnarchy #RealityCheck
जब सिनेमा में सनातन, संतों और भक्ति का सच्चा भाव उतरता है, तो करोड़ों के पीआर और बॉलीवुडिया सिंडिकेट के सारे गणित धरे के धरे रह जाते हैं।
मात्र 2 करोड़ के बजट में बनी 'हनुमान अंश' का महज़ दो हफ़्तों के भीतर 1.5 करोड़ से सीधे ₹50 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार करना कोई सामान्य घटना नहीं है।
"मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई"
इस एक भजन और बाबा नीम करोली महाराज के प्रति जन-आस्था ने साबित कर दिया कि दर्शक अब फूहड़ता और प्रोपेगैंडा नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ना चाहता है।
300-400 करोड़ फूंक कर हिंदू विरोधी विमर्श गढ़ने वालों के मुंह पर यह करारा तमाचा है; जब आस्था निष्कपट हो और नीयत साफ़, तो सनातन की शक्ति के आगे कोई लॉबी नहीं टिक सकती!
#HanumanAnsh #NeemKaroliBaba #SanatanCinema #BoxOfficeMiracle #KainchiDham #FaithWins
सस्ती टीआरपी और चंद लाइक्स के लिए महिलाओं पर अश्लील टिप्पणियां करने वाले सड़कछाप ट्रोल्स अब नारी अस्मिता पर ज्ञान पेलेंगे?
तेरी यह घटिया पोस्ट किसी सवाल के लिए नहीं, बल्कि अपनी गटर छाप मानसिकता और नफ़रत से समाज में ज़हर घोलने के लिए की गई है।
अपनी कुंठा निकालने के लिए सोशल मीडिया पर जो तू खुलेआम अश्लीलता और सामाजिक वैमनस्य फैला रहा है, उसका इलाज बहुत जल्द कानून करेगा।
महिलाओं के शील और गरिमा को ठेस पहुंचाने, समाज में उन्माद भड़काने और अश्लीलता परोसने के जुर्म में IT Act और BNS (भारतीय न्याय संहिता) की गंभीर धाराओं में जेल की हवा खाने के लिए तैयार रह।
@Cyberdost@Uppolice इस विकृत मानसिकता वाले के खिलाफ धार्मिक-सामाजिक भावनाएं भड़काने और अश्लील सामग्री फैलाने के तहत तत्काल संज्ञान लेकर गैर-जमानती FIR दर्ज की जाए!
#TakeAction #CyberCrime #LegalAction #StopObscenity #ExposeHate
सस्ती टीआरपी और चंद लाइक्स के लिए महिलाओं पर अश्लील टिप्पणियां करने वाले सड़कछाप ट्रोल्स अब नारी अस्मिता पर ज्ञान पेलेंगे?
तेरी यह घटिया पोस्ट किसी सवाल के लिए नहीं, बल्कि अपनी गटर छाप मानसिकता और नफ़रत से समाज में ज़हर घोलने के लिए की गई है।
अपनी कुंठा निकालने के लिए सोशल मीडिया पर जो तू खुलेआम अश्लीलता और सामाजिक वैमनस्य फैला रहा है, उसका इलाज बहुत जल्द कानून करेगा।
महिलाओं के शील और गरिमा को ठेस पहुंचाने, समाज में उन्माद भड़काने और अश्लीलता परोसने के जुर्म में IT Act और BNS (भारतीय न्याय संहिता) की गंभीर धाराओं में जेल की हवा खाने के लिए तैयार रह।
@Cyberdost@Uppolice इस विकृत मानसिकता वाले के खिलाफ धार्मिक-सामाजिक भावनाएं भड़काने और अश्लील सामग्री फैलाने के तहत तत्काल संज्ञान लेकर गैर-जमानती FIR दर्ज की जाए!
#TakeAction #CyberCrime #LegalAction #StopObscenity #ExposeHate
जब अपने लिए अलग-अलग आयोग, अनगिनत विशेषाधिकार और बजट चाहिए होते हैं, तब तो संविधान की दुहाई दी जाती है; लेकिन जैसे ही सवर्णों के लिए एक आयोग की बात उठी, नफ़रत का उल्टी करना शुरू कर दिया!
क्या सामान्य वर्ग के गरीब, किसान और निम्न-मध्यम वर्गीय युवाओं को अपनी समस्या रखने का भी अधिकार नहीं है?
'दलित-पिछड़ा वोट से जीते' का रोना रोने वालों, लोकतंत्र में सवर्ण भी वोट देता है, टैक्स का सबसे बड़ा हिस्सा भरता है और देश की सीमाओं से लेकर व्यवस्था तक में लहू बहाता है।
सच्ची सामाजिक समरसता तब आएगी जब हर वर्ग की जायज समस्याओं को सुना जाएगा, न कि एक वर्ग को निशाना बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकी जाएंगी।
संविधान का नाम लेकर सिर्फ एक ही वर्ग के खिलाफ विषवमन करने वाली यह विभाजनकारी टूलकिट अब बेनकाब हो चुकी है।
सवर्ण आयोग किसी का हक छीनने के लिए नहीं, बल्कि निर्दोषों और गरीबों को न्याय दिलाने के लिए समय की मांग है!
#SavarnCommission #DoubleStandards #EqualityBeforeLaw #TrueJustice #RealityCheck #NoToHatePolitics
आखिर जाति का असली रंग दिखा ही दिया, भाजपा के सवर्ण सांसद दलितों/पिछड़ों/आदिवासियों के वोटों से जीतेंगे और बात करेंगे स्वर्णों की, जनता सब देख रही है।
भाजपा के दलित पिछड़ा आदिवासी सांसदों को शर्म आनी चाहिए उन्हें चुल्लू भर पानी में डूब जाना चाहिए या फिर राजनीति से सन्यास ले ले नहीं तो इतना इनके घरों पर आकर सवाल पूछेगी तो कही के नहीं रहेंगे।
मैं फिर कह रहा साथियों, भाजपा और कांग्रेस सिर्फ धोका असल में जनहित की लड़ाई भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी लड़ रही है एक बार मौका दो।
@Jatassociation समाज द्वारा इस मांग का समर्थन करना उन विभाजनकारी ताकतों के मुंह पर करारा तमाचा है जो हिंदू समाज को आपस में लड़ाकर अपनी रोटियां सेकते हैं।
सच्चा लोकतंत्र वही है जहाँ हर वर्ग के पास अपनी व्यथा, आर्थिक पिछड़ेपन और कानूनी प्रताड़ना को दर्ज कराने का एक अधिकृत मंच हो।
दशकों से सामान्य वर्ग को सिर्फ 'टैक्स भरने' और चुपचाप अन्याय सहने के लिए छोड़ दिया गया है; न कोई कानूनी सुरक्षा, न कोई सुनवाई का फोरम।
अगर बाकी सभी वर्गों के लिए अलग-अलग आयोग और विशेष अधिकार पूरी तरह जायज हैं, तो सवर्ण आयोग की मांग पर छाती पीटने वाले शुद्ध नफ़रती मानसिकता के शिकार हैं।
यह मांग किसी के हक छीनने की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए एक समान मंच पाने की है!
#JatSamaj #SavarnCommission #FairJustice #EqualityForAll #SavarnUnity #SanatanDharma #TrueEquality