Uttar Pradesh Grameen Bank removed fix Lunch Break for Branch employees, but no clarification, 'How single window Branch will work in such condition!'
Most of Rural Branches working on single Cashier, How will they manage with such Orders! Authority out of their Mind!
हारे हुए लोग कहाँ जायेंगे ? ?
हारे हुए लोगों के लिए कौन दुनिया बसाएगा ?
उन पराजित योद्धाओं के लिए ,
तमाम शिकस्त खाए लोगों के लिए।
प्रेम में टूटे हुए लोग,
सारी जिंदगी को कहीं दांव लगाकर हारे हुए लोग
थके-हारे लोग, गुमनाम लोग
वो बूढ़े पिता जो अब अकेले रह गए हैं
वो कल्पनाओं में खोया रहने वाला बच्चा
जो परीक्षा में फेल हो गया है
वो लड़की जो तेज कदमों से घर की तरफ लौट रही है
वो बूढ़ा गुब्बारे वाला जो कांपते हाथों से पैसे गिनता है
एक असफल लेखक
मैच हार गया खिलाड़ी
इंटरव्यू से वापस लौटा युवा
और ऐसे तमाम लोग
जिन्हें पता था कि वे सफल हो सकते हैं
मगर उन्होंने असफलताओं से भरा रास्ता चुना,
वो लोग जिन्होंने
हमेशा गलत राह पर चलने का जोखिम उठाया
वो लोग जिन्होंने
गलत लोगों पर भरोसा किया
वो जिन्होंने
चोट खाई, धोखा खाया, ठोकर खाई
गिरे और धूल झाड़कर खड़े हुए
वे कहां जाएंगे ?
क्या कोई ऐसी दुनिया होगी
जहां दो हारे हुए इंसान
एक-दूसरे की हथेलियां थामे
कई पलों तक खामोश रह सकते हों
अपनी चुप्पी में तकलीफ बांटते हुए।
जिन्होंने इकारस की तरह
सूरज की तरफ उड़ान भरी
और उनके पंख पिघल गए
हारे हुए लोगों के लिए कोई जगह नहीं है
न किसी घर में, न समाज में, न किसी देश में।
क्या जो विजेता थे
वो इनसे बेहतर हैं? बेहतर थे?
नहीं, वही हारा जिसने जिंदगी की अनिश्चितता पर यकीन किया
वही जिसने अनजान रास्तों पर चलने का जोखिम उठाया
जिसने गलती करनी चाही , जो मक्कार चुप्पियों के पीछे छिपा नहीं।
जो बोल सकता था मगर बोला नहीं
उसने वो चुना जिसे चुनने का कोई तर्क नहीं था
सिवाय उसकी आत्मा के
जो हारा आखिर वो भी एक नायक था।
एक पराजित नायक के दर्द को
कौन समझना चाहेगा?
जाएंगे कहाँ सूझता नहीं
चल पड़े मगर रास्ता नहीं
क्या तलाश है कुछ पता नहीं
बुन रहे हैं दिल ख़्वाब दम-ब-दम।
~ दिनेश श्रीनेत
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल मिश्रण) नीति पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।
"आम लोग गिनी पिग नहीं हैं। हमारी सड़कें टेस्ट ट्रैक नहीं हैं। हमारी जेबें आपका ट्रायल बजट नहीं हैं। E20 वापस लो। पहले साबित करो। फिर, लागू करो।"
#5DayBanking तो नहीं हुई, हर रोज़ 15-20 मिनट के लंच के लिए और क्लेश शुरू हो गया है।@RBI के लोग मस्त #5DayBanking का मजा ले रहें हैं। लेकिन आम बैंकर्स के लिए 30 मिनट लंच का टाइम भी फ़िक्स नहीं कर पा रहें हैं। जबकि चार घंटे के काम के बाद 30 मिनट के लंच का क़ानूनी प्रावधान है। अभी इनको कोई सरकारी योजना लागू करवानी हो तो फिर यह देखो कैसे हाइपर एक्टिव हो जाते हैं। @bankpediaa@idesibanda
युवाओं, जागो!!! जब तक अपनी आवाज़ बुलंद नहीं करोगे, तब तक तुम्हारे भविष्य के साथ यही आतंक चलता रहेगा। एक बार फिर से तुम्हारे साथ धोखा हुआ है। महाराष्ट्र में TET का पेपर लीक हो गया और परीक्षा टल गई।
NEET, CBSE, SSC, CUET और अब TET... यह सिलसिला बंद तभी होगा जब आंदोलन खड़ा करके अपनी ताक़त दिखाओगे। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री जी की तुम्हारे प्रति कोई जवाबदेही नहीं बनेगी। न वे परीक्षाओं में भ्रष्टाचार पर लगाम लगायेंगे, न तुम्हारे भविष्य की ज़िम्मेदारी लेंगे।
Ayodhya raised questions. Ujjain raises even more.
One sacred city after another, allegations emerge of those close to power benefiting from land transactions linked to major public and religious development projects.
The BJP cannot wrap itself in the flag and faith while looking away from charges of cronyism and profiteering.
Ram belongs to the people, Mahakal belongs to the people, not to politically connected land speculators. The country deserves a credible, independent probe.
भगवान राम के मंदिर की लूट के बाद….
अब महाकाल उज्जैन में भी मची है लूट,
जो मुनाफा कमा सके तो खुल कर कमाई की छूट !
“सरकार की ज़िम्मेवारी” बनाम “व्यक्तिगत हितों के टकराव” का इससे बड़ा मामला और सबूत क्या हो सकते हैं, जो @IndianExpress की इन्वेस्टीगेशन दिखा रही है ।
👉 श्री मोहन यादव का इस्तीफा कब होगा?
👉 सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से हितों में टकराव की जांच कब होगी?
देश के हर युवा से मेरी एक बात - आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सज़ा मिलती है।
हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती - सिर्फ़ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है।
मैं जानता हूँ आप थक चुके हैं। ग़ुस्से में हैं। पर याद रखिए - जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज़ ऊँची करनी पड़ती है।
इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूँ - 17 जून, कोटा। छात्रों की गूंज।
आइए, मिलकर एक ऐसी हुंकार बनें जिसे अनसुना करना नामुमकिन हो। कोटा से शुरुआत - फिर देश के हर कोने तक।
ये आपके भविष्य की लड़ाई है। और मैं आपके साथ हूँ।
🗓️ 17 जून | छात्रों की गूंज | कोटा महारैली
#ChhatronKiGoonj
जिस पार्टी के दफ़्तर को कभी कूड़ा घर और पशुओं का अड्डा बताया जाता था, आज उसी के नाम पर 20 सांसद और केंद्रीय सुरक्षा का तमाशा खड़ा किया जा रहा है।
मोदी-BJP ने लोकतंत्र को मज़ाक बना दिया है।
देश इस शर्मनाक खेल को कभी नहीं भूलेगा !
मीनाक्षी नटराजन पर अब कोई आरोप ही नहीं है।
तमिलनाडु के जिस कोर्ट के सामने वह याचिका लाई गई थी जिसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया गया कोर्ट ने वह याचिका ही वापस कर दी है।
सुनवाई योग्य न मानते हुए फरियादी को वापस लौटाई।
अब क्या है?
अब एक शिकायत है और जिसका ना पहले था ना अब है मीनाक्षी से कोई संबंध।
ना कोई कानूनी स्टैंड।
इस तरह की जैसे कोई कहे कि फलाना आपके ट्वीट पर आकर यह कमेंट कर गया है इसलिए आप दोषी!
सुप्रीम कोर्ट ने तो सुनवाई की ही नहीं कोई भी कोर्ट करेगा तो उसे मनाना पड़ेगा की मीनाक्षी को चुनाव अधिकारी ने बिना गुनाह के सजा दे दी।
हां यह कह सकता है सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले
की तरह की चलो कोई बात नहीं इस बार भुगत लो अगली बार देखेंगे।
यही कहा था ना बंगाल के चुनाव में लाखों वोटरों को इस बार नहीं दे पाए तो कोई बात नहीं अगली बार दे लेना।
राहुल ने कहा है इस सीट चोरी।
मगर यह सीट का डाका है। खुलेआम डाला गया है और चुनाव अधिकारी से लेकर चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति कहीं सुनवाई नहीं।
अब राहुल का जन प्रतिरोध ही काम करेगा। यह डाका बहुत महंगा पड़ेगा। डाके से लोग डर तो जाते हैं मगर नफरत भी बहुत करते हैं।
Rejecting Smt. Meenakshi Natarajan ji’s nomination to the Rajya Sabha is a blatant attempt by the BJP to destroy the democratic process in a clandestine manner. The allegation of any error or non-disclosure in her nomination is complete humbug and a desperate attempt to snatch a seat from the INC.
They stooped so low as to reject her nomination when they realised that their dirty tricks to compromise our INC MLAs is going to fail.
This shows the BJP’s hollow commitment to the Constitution and democracy. At every step of the way, they are hell-bent on Vote Chori - one way or another.
We will not take this daylight robbery of democracy lying down, and will fight this legally as well as politically on the streets tooth-and-nail.
कांग्रेस के सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व उप मुख्यमंत्री चुनाव आयोग के बाहर बैठ गए हैं.
पिछले 1 घंटे से ये नेता चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलना चाहते हैं, लेकिन उनसे मिलने को कोई तैयार ही नहीं.
मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने के बाद कांग्रेस के नेता चुनाव आयोग पहुंचे थे.
टाटा समूह में 7,50,000 कर्मचारी हैं।
एल एंड टी में 3,38,000 लोग कार्यरत हैं।
इंफोसिस में 2,60,000 कर्मचारी हैं।
महिंद्रा एंड महिंद्रा के 2,60,000 कर्मचारी हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के 2,36,000 लोग हैं।
विप्रो में 2,10,000 कर्मचारी हैं।
एचसीएल में 1,67,000 कर्मचारी हैं।
एचडीएफसी बैंक में 1,20,000 कर्मचारी हैं।
आईसीआईसीआई बैंक में 97,000 कर्मचारी हैं।
टीवीएस समूह में 60,000 कर्मचारी हैं।
मात्र ये दस कंपनियां मिलकर लगभग 25 लाख भारतीयों को रोजगार देती हैं - सम्मानजनक वेतन के साथ।
ये केवल वो आँकड़े हैं जो इनके डायरेक्ट पेरोल पर हैं। इनके अलावा ऑफ रोल्स, ऐसोशिएट्स, डीलर्स, एजेंट्स, इनके प्रोडक्ट्स से जुड़े सहायक प्रोडक्ट्स की कंपनियां। इनके सहारे जन्मी पैकेजिंग कंपनियां, ट्रांसपोर्ट सेक्टर। लिस्ट बहुत लंबी है।
किसी कंपनी के अगर डायरेक्ट 1 लाख कर्मचारी हैं तो मान के चलिए कि कम से कम चार लाख ऐसे हैं जिनका चूल्हा उसी कम्पनी के कारण चलता है।
और मैं मात्र 10 बड़ी कंपनियों की बात कर रहा हूँ। हजारों ऐसी प्राइवेट कंपनियां हैं देश में जो रोजगार पैदा कर रही हैं।
ये 25 लाख कॉर्पोरेट नौकरियां भारत में पिछले 70 वर्षों में सृजित कुल केंद्र सरकार की नौकरियों (48.34 लाख) के आधे से अधिक हैं।
यह पिछले 70 वर्षों में कर्नाटक जैसे बड़े राज्य में सृजित कुल सरकारी नौकरियों का भी 5 गुना है!
निजी क्षेत्र का सम्मान करें, उन्हें गालियों से मत नवाजें। अपने राजनैतिक एजेंडे और पसंद नापसंद के कारण उन लोगों का मजाक ना उड़ायें जो देश के विकास में बहुत बड़े सहभागी हैं।
नौकरी देने वालों के लिए जयकार जयकार भले ना करें लेकिन उन्हें इज़्ज़त देना तो सीखिए।
वे लाखों भारतीयों के लिए आजीविका पैदा कर रहे हैं।
भारत में 3 पीढ़ियों की आर्थिक क्षमता को बर्बाद करने वाले असफल समाजवादी राजनेताओं की बात न सुनें। यदि आप आने वाली पीढ़ियों के लिए उज्ज्वल भविष्य चाहते हैं, तो भारत को ऐसे हजारों नए निगमों की आवश्यकता है जो उच्च वेतन वाली नौकरियों का सृजन करते हैं।
अपने दो कौ ड़ी के राजनैतिक एजेंडे के चलते अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद ना करें। खुद कभी आईना जरूर देखें कि क्या आपकी राजनैतिक नफ़रतें आपकी पीढ़ियों के भविष्य से ज्यादा जरूरी है।
एक बात नोट की है मैंने..
— इस सरकार में मंत्री इस्तीफा नहीं देते…
— गायब हो जाते हैं।
— अर्थव्यवस्था लड़खड़ाए → निर्मला सीतारमण गायब।
— पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़े → धर्मेंद्र प्रधान गायब।
— विदेश नीति पर सवाल उठें → जय शंकर गायब।
— न प्रेस कॉन्फ्रेंस।
न जवाब।
न जिम्मेदारी।
— बस कैमरे और PR वापस आते ही फिर प्रकट हो जाते हैं।
— क्या यही “न्यू इंडिया” की accountability है?
#घोरकलजुग #NEETScam
Member of Parliament is entitled for phone and internet usage of ₹1,50,000 per year.
That comes to around ₹12,500 per month.
However with current telecom plans, even premium unlimited calling and high-speed internet would not exceed ₹10,000 per year, which is less than ₹1,000 per month.
If Government wants to curtail wasteful spending, this kind of mismatch between entitlement and real usage should be rationalised.
Dear Bankers,
Tell me honestly have you ever heard anything more ridiculous than this
For me this is easily one of the most laughable statements so far
#5DaysBanking to ladkar lenge 🤣🤣🤣
@rupamsmail aakhir kab aur kaise
Koi real plan framework timeline hai bhi ya bas stage pe jaake catchy slogans bolne ka routine ban gaya hai
Because at this point it does not sound like a policy discussion it sounds like empty words being repeated without any groundwork just to get applause in the moment
People in the banking system are not asking for drama They are asking for clarity practicality and implementation.
VC: @Hellobanker_in
#5daybanking #Bankersvoice