@MockingBirdY2K रोते रहते हैं तन्हाई में, अक्सर हम,
दिल के जज्बात, आँखों में उतारे हैं।
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
इश्क़ में हर बार, हम क़िस्मत से हारे हैं,
क्या बताएं कैसे, हमनें ये दिन गुजारें हैं।
रोते रहते हैं तन्हाई में, अक्सर हम,
दिल के जज्बात, आँखों में उतारे हैं।
तू तबाह कर या आबाद कर हमको,
अब तो हम, बस तेरे ही सहारे हैं।
खुशियां हमसे, दूर ही रही हमेशा,
हमने सदा, गम ही तो पुकारे हैं।
दिल ये कहता है, अब शिकवा भी न कर,
जब किस्मत में लिख्खे, सितम ही सारे हैं।
ज़िन्दगी अब जैसे कोई बोझ हुई 'अंतर',
उसके बिना लगते, हम कितने बेचारे हैं।
— अंतरव्योम
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#AntarViyom #Shayari #Ghazal #HindiPoetry #UrduPoetry #Rekhta
@2011_bedtet रोते रहते हैं तन्हाई में, अक्सर हम,
दिल के जज्बात, आँखों में उतारे हैं।
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
अब किसी को बुलाने से क्या फ़ायदा
ख़ुद को यूँ ही रुलाने से क्या फ़ायदा
हम ने जो खो दिया, वो किस्मत थी हमारी
उस पर अब पछताने से क्या फायदा
ये मुहब्बत भी इक कारोबार है मियाँ
इसमें अश्क बहाने से क्या फायदा
ये जो अश्कों का दरिया है आँखों में
इसे मुस्कुरा कर छुपाने से क्या फ़ायदा
वस्ल की आस तो एक धोखा ही थी
उम्र उसमें गँवाने से क्या फ़ायदा
जब कोई क़द्र-दाँ ही नहीं शहर में
अपना फ़न यूँ दिखाने से क्या फ़ायदा
ज़िंदगी एक वीरान सा साज़ है अंतर
इस पे नग़्मे सजाने से क्या फ़ायदा
#ग़ज़ल #शायरी #UrduPoetry #HindiPoetry #Shayari #अंतर_व्योम
@ydsumaak रोते रहते हैं तन्हाई में, अक्सर हम,
दिल के जज्बात, आँखों में उतारे हैं।
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
ज़िंदगी को इश्क़ में आख़िर गँवा कर क्या मिला
दर्द की इस आँच पर ख़ुद को जला कर क्या मिला
उम्र भर ये तिश्नगी दिल की कभी कम ना हुई
प्यास अपनी, आँसुओं से बुझा कर क्या मिला
महफ़िलों में हम क्यों, ग़म के फसाने गाते रहे
ज़ख़्म अपना इस ज़माने को दिखा कर क्या मिला
दर्द तो बस एक तमाशा है ज़माने के लिए
हाल अपना दोस्तों को बता कर क्या मिला
जब तअल्लुक़ ही नहीं बाक़ी तो फिर रोना है क्या
बेवफ़ा को इस तरह आख़िर मना कर क्या मिला
इस क़दर वीरानियाँ हैं अब दिल-ए-नाशाद में
ख़्वाब की झूठी महक से घर सजा कर क्या मिला
रोज़ अपना हाल-ए-दिल उसको सुना कर क्या मिला,
आंसुओं को इस तरह आख़िर बहा कर क्या मिला।
— अंतरव्योम
कौन-सा शेर आपके दिल के सबसे क़रीब लगा? 💔
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@RemantMishra5 रोते रहते हैं तन्हाई में, अक्सर हम,
दिल के जज्बात, आँखों में उतारे हैं।
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
@iamAshwiniyadav अब किसे ढूंढता फिरता है तू "अंतर"
जो तेरा था, वो तो बस तेरी यादों में रहा
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है,
मेरे गम का दुनिया में मरहम कहाँ है।
वो सावन की बूंदें, वो झूले झूलना,
वो छुप-छुप के छत पर तेरा आना-जाना।
वो हँसना तेरा, फिर तेरा मुस्कुराना,
वो बारिश का प्यारा मौसम कहाँ है।
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है।
ये दीवार-ओ-दर अब तो तकते हैं मुझको,
ये पूछा करें हैं, 'किधर है वो साथी?'
इन्हें क्या बताऊँ, इन्हें क्या सुनाऊँ,
वो आँखों की हया, वो शबनम कहाँ है।
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है।
मेरे गीत भी अब तो रोते हैं सुन कर,
मेरी हर गजल, हर तरन्नुम है खाली।
तेरी पायलें थीं तो सुर जिंदा थे सब,
मेरी शायरी की वो सरगम कहाँ है।
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है।
मुझे याद है वो हँसी की खनक भी,
जो बजती थी कानों में हर एक पल।
उसी खनक को आज भी ढूँढता हूँ,
मगर शोर-ए-दुनिया में वो गुम कहाँ है।
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है।
कभी सोचते थे कि ये जिंदगी अब,
तुम्हारे ही संग-संग गुजर जाएगी।
मगर वक़्त के हाथ में था वो खंजर,
बचाए जो उससे, वो हमदम कहाँ है।
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है।
ये दुनिया तो चलती है अपनी ही धुन में,
यहाँ कौन किसकी खबर रखता है।
मेरे जख्म हैं और है ये तन्हाई मेरी,
इन जख्मों का कोई मरहम कहाँ है।
तुम्हारी वो पायल की छम-छम कहाँ है,
मिरे गम का दुनिया में मरहम कहाँ है।
मेरा प्यार, वो मेरा हमदम कहाँ है।.....
#ग़ज़ल #शायरी #UrduPoetry #HindiPoetry #अंतर_व्योम
@__Talasha अब किसे ढूंढता फिरता है तू "अंतर"
जो तेरा था, वो तो बस तेरी यादों में रहा
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
@SarveshMarut अब किसे ढूंढता फिरता है तू "अंतर"
जो तेरा था, वो तो बस तेरी यादों में रहा
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
वो सामने न था मगर हम बात करते रहे
ख़्वाब-ओ-ख़याल में ही मुलाक़ात करते रहे
न सुनने वाला था कोई, न कोई हमराज था अपना
हम अपने आप से ख़ुद ही फ़रियाद करते रहे
ज़मीं उसके दिल की तो बंजर हो चुकी थी
हम उस पर यूंही आँसुओं की बरसात करते रहे
जमाने ने सबक़ दिया हमें दुनिया-दारी का
हम उसके खातिर खुद को बर्बाद करते रहे
उसकी तस्वीर, उसके खत को सिरहाने रख
हम यूँ ही रात भर उसको याद करते रहे
घर जो हो चुका था हिज्र में वीरान कब से
हम अपनी यादों में उसको आबाद करते रहे
ज़माना तोड़ता था इश्क़ की हर एक इमारत को
हम उस मलबे पे फिर से नई बुनियाद करते रहे
उसकी यादों को ताजा रखने की खातिर "अंतर"
हम यूँ ही रंज-ओ-गम के सिलसिले ईजाद करते रहे।
#ग़ज़ल #शायरी #UrduPoetry #HindiPoetry #Shayari #अंतर_व्योम
@2011_bedtet अब किसे ढूंढता फिरता है तू "अंतर"
जो तेरा था, वो तो बस तेरी यादों में रहा
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
तेरा गम था जो सीने में, आशियाना बन गया है
दिल का हर जख्म जीने का, बहाना बन गया है
जो था मशहूर उल्फत में, वो अब दीवाना बन गया है
ज़माने के लिए वो इक नया अफ़साना बन गया है
जिन गलियों में ख़ुद को ढूँढने निकला था इक दिन
उन्हीं गलियों में अब वो ख़ुद से बेगाना बन गया है
मेरी ख़ामोशियों को तो समझता था बस तू ही
वो राज अब सारी दुनिया का, तराना बन गया है
जहाँ हर शाम सजती थी तेरे ही नाम की महफ़िल
वो दिल हिज्र की रातों का, मय-ख़ाना बन गया है
मुझे अब कोई भी मजहब नहीं देता तसल्ली
मेरा मिजाज ही अब तो, काफ़िराना बन गया है
यक़ीं, उम्मीद, हसरत, आरज़ू, सब तुझपे वारे थे
मिरा हर लफ्ज अब बे-रंग, बे-मआ'ना बन गया है
"अंतर" लोग कहते हैं, कि अब बदला सा है वो शख़्स
उन्हें क्या इल्म, जो शीशा था वो अब पैमाना बन गया है
#ग़ज़ल #शायरी #UrduPoetry #HindiPoetry #Shayari #अंतर_व्योम
ये आलम हसीन, ये फ़ज़ा कुछ और है,
इन दिनों मौसम की, अदा कुछ और है।
दर्द तो पहले भी, होता था मुझे,
पर तेरे जाने की सज़ा, कुछ और है।
लोग दुनिया में वफ़ा करते तो हैं,
पर तेरी रस्म-ए-वफ़ा, कुछ और है।
वो सितमगर है, और उस का हर सितम,
सज़ा भी है मगर उसका मज़ा, कुछ और है।
दिल के शीशे में, जो दिखता है मुझे,
वो तेरा ही अक्स है या, कुछ और है?
हाथ अब भी उठाता हूँ दुआ के वास्ते,
पर लबों पर अब दुआ, कुछ और है।
इश्क़ सब करते हैं दुनिया में "अंतर",
पर तेरा मेरा सिलसिला, कुछ और है।
— अंतरव्योम
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"तेरी शक्ल दिखाई दे हर अल्फ़ाज़ में" — लफ़्ज़ों में महबूब की सूरत उतार देने की ये ख़्वाहिश बेहद नाज़ुक और ख़ूबसूरत है। बहुत ख़ूब 👏
हर गजल, हर नज्म में बस जिक्र तेरा ही तो है
हम जमाने को तेरी बातें अब सुनाने लगे हैं
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
"मेरी मोहब्बत की बस इतनी-सी हसरत है" — बिना किसी शिकवे के, महबूब के सुकून की दुआ माँगती ये बेग़र्ज़ मोहब्बत सीधे दिल को छू गई। बहुत ख़ूब 👏
वो एक ख्याल, जो कभी लबों तक नहीं आया,
वो एक दुआ, जिसे दिल ने हमेशा दोहराया।
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
"माँ बिन घर सूना-सूना लगता है" — माँ के होने से घर की दीवारों तक में ख़ुशबू बस जाने का ये एहसास दिल को भिगो गया। बहुत ख़ूब 👏
वो गर्मी की छुट्टियाँ वो रातें सुहानी
याद है मुझको वो परियों की कहानी
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
"जबसे तुम आये हो जिंदगी में, अब तो ज़माना भी ग़ैर लगने लगा है" — किसी एक के आ जाने से पूरी दुनिया के बदल जाने का ये एहसास बड़ी ख़ूबसूरती से उतारा है। बहुत ख़ूब 👏
ये जीवन है, बस एक परिवर्तन,
हर पल है नया, हर पल है गहन।
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏
"वक्त, बेवक्त तुम याद आ ही जाते हो" — यादों के सिलसिले की ये बेबसी हर उस दिल की कहानी है जो भुलाना चाहकर भी भुला नहीं पाता। बहुत ख़ूब 👏
कभी ख़्वाबों में मेरे, मुझे तुम याद आते हो
कभी दुआओं में मेरी, मुझे तुम याद आते हो
— अंतर व्योम 🌌
आपको अंतर व्योम की महफ़िल-ए-सुख़न में दिल से दावत है, ज़रूर तशरीफ़ लाइए 🙏