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"नीतीश आर्काइव को आपके सहयोग की जरुरत: एक अपील"
50 दिन पहले जब नीतीश आर्काइव की शुरुआत हुई थी, तब सिर्फ एक विचार था— नीतीश कुमार से जुड़ी बिखरी हुई स्मृतियों को सहेजने का।
आज, 50 दिन बाद, यह विचार आपके प्यार, स्नेह, सुझाव और सहयोग से एक जीवंत अभियान बन चुका है। इन साठ दिनों में जो अपनापन आपने दिया है, उसने हमें यह भरोसा दिया है कि यह काम अकेले का नहीं, बल्कि हज़ारों हाथों और लाखों भावनाओं का साझा प्रयास है। सच कहें तो अब यह सिर्फ हमारा सपना नहीं रहा, यह आप सबका अपना अभियान बन चुका है।
अब वक़्त आ गया है पटना की सीमा से बाहर निकलने का।
एक महीने बाद नीतीश आर्काइव बिहार के हर ज़िले में जाएगा— उन गाँवों, गलियों और मोहल्लों तक, जहाँ आज भी कोई बुज़ुर्ग किसी पुरानी सभा को याद करते-करते अचानक मुस्कुरा देता है... फिर कुछ पल बाद उसकी आँखें नम हो जाती हैं। जहाँ कोई पुराना कार्यकर्ता किसी भूली हुई घटना को वर्षों से अपने सीने में ऐसे संभाले बैठा है, जैसे वह उसके जीवन की सबसे अनमोल धरोहर हो। हम उन लोगों तक पहुँचना चाहते हैं, क्योंकि उनके जाने के साथ सिर्फ एक इंसान नहीं जाएगा... इतिहास का एक पूरा अध्याय भी हमेशा के लिए चला जाएगा।
यह यात्रा आसान नहीं होगी। रास्ते लंबे हैं, संसाधन सीमित हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती रास्ते नहीं हैं...
सबसे बड़ी चुनौती समय है।
समय हर रोज़ हमसे कुछ न कुछ छीन रहा है।
हर दिन कोई स्मृति थोड़ी और धुंधली हो रही है।
हर दिन कोई गवाह उम्र के एक और पड़ाव पर पहुँच रहा है।
और हमें डर है कि कहीं ऐसा न हो कि जब तक हम पहुँचें... तब तक बहुत देर हो चुकी हो।
पिछले 50 दिनों के दौरान पटना में बैठकर काम करने के लिए हमने किसी से एक रुपया भी नहीं माँगा। यह काम हमने अपने दम पर, अपने संसाधनों से किया। क्योंकि हमें लगा कि जब तक संभव होगा, यह ज़िम्मेदारी हमारी होगी।
लेकिन बिहार की यह यात्रा उससे कहीं बड़ी है। और ईमानदारी से कहें, तो अब हमारे व्यक्तिगत संसाधन इसके लिए पर्याप्त नहीं हैं। और शायद हो भी नहीं सकते।
इसलिए आज पहली बार हम आपसे मदद नहीं, साथ माँग रहे हैं।
हमें फंडिंग नहीं, आपका सहयोग चाहिए। छोटा, अपनापन भरा योगदान— ₹5 से लेकर अधिकतम ₹5,000 तक।
यह सिर्फ रकम का सवाल नहीं है।
यह उस भरोसे का सवाल है कि क्या हम मिलकर अपनी स्मृतियों को बचाना चाहते हैं !
क्या हम आने वाली पीढ़ियों के लिए वह सब सुरक्षित रखना चाहते हैं, जिसे समय हर रोज़ हमसे छीनता जा रहा है।
आपके ₹5 शायद किसी को बहुत छोटी रकम लगें...
लेकिन हमारे लिए वही पाँच रुपये किसी दूर के गाँव तक पहुँचने का पहला कदम बन सकता हैं।
वही पाँच रुपये किसी बुज़ुर्ग की आख़िरी गवाही को कैमरे में दर्ज करा सकता हैं।
वही पाँच रुपये किसी ऐसी कहानी को हमेशा के लिए बचा सकता हैं, जो आज अगर छूट गई... तो फिर कभी वापस नहीं मिलेगी।
शुरुआत से ही हम यह स्पष्ट कहते आए हैं— नीतीश आर्काइव जनसहयोग से, जनसहभागिता के ज़रिए, जनहित के लिए चलाया जा रहा एक स्वतंत्र और स्वायत्त अभियान है। इसका किसी दल, किसी विचारधारा, किसी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था से न तो प्रत्यक्ष और न ही अप्रत्यक्ष कोई नाता है।
तो आइए... इस यात्रा में हमारे साथ चलिए।
क्योंकि इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं मिलता...
इतिहास उन लोगों की यादों में भी मिलता है, जो आज हमारे बीच हैं, लेकिन हमेशा नहीं रहेंगे।
और जब वे नहीं रहेंगे...
तो शायद हम लाख कोशिश कर लें, लेकिन उनकी आवाज़, उनकी याद और उनके अनुभव कभी वापस नहीं ला पाएँगे।
हर सहयोगी का नाम और योगदान सार्वजनिक किया जाएगा। क्योंकि यह अभियान आपका है, आपके लिए है।
और सच कहें...
अगर इस सफ़र में आप हमारे साथ नहीं होंगे, तो शायद हम चल तो पड़ेंगे... लेकिन बिहार की हर उस स्मृति तक नहीं पहुँच पाएँगे, जहाँ पहुँचना सबसे ज़रूरी है।
कृपया सिर्फ सहयोग मत कीजिए... इस इतिहास को खोने से बचाइए।
क्योंकि कुछ चीज़ें पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं...
और बीत चुका समय... उनमें सबसे कीमती चीज़ है।
क्यूँ इंडियन एक्सप्रेस के संतोष सिंह अपने इंडियन एक्सप्रेस की रैंकिंग से ही सहमत नहीं है?
इंडियन एक्सप्रेस ने नीतीश कुमार की रैंकिंग क्यूँ गिरा दी?
ऐसा क्या किया तेजस्वी यादव ने जो उनका रैंकिंग 16 अंक सुधर गया है ?
ऐसा क्या है चिराग पासवान के पास जो नीतीश कुमार के पास नहीं है ?
हमारा नाम संजीव से संजीवनी हो गया। कुछ लोग मुझमें पहले से ही औरत अधिक और मर्द काम देखते थे और अब तो मीडिया को भी संजीव में संजीवनी दिखने लगा है।
@News18Bihar पर भूमिहार-ब्राह्मण विवाद पर मेरी समझ।
बिहार के औषधि पौधों में ज़हर होता है क्या?
बिहार को पिछले तीन सालों के दौरान एक फूटी कौड़ी नहीं दिया है केंद्र सरकार ने प्रदेश में औषधि पौधों के उत्पादन और प्रोत्साहन के लिए। हालाँकि इस दौरान बिहार सरकार ने तीज प्रोजेक्ट का प्रपोज़ल दिया था केंद्र सरकार को लेकिन तीनो प्रपोज़ल को केंद्र सरकार ने रेजेक्ट कर दिया और दूसरी तरफ़ उत्तर प्रदेश सरकार के 13 प्रोजेक्ट को अप्रूव कर दिया और उत्तर प्रदेश को कुल 6 करोड़ 46 लाख रुपए भी अनुदान के रूप में दिया है। बिहार को ये पैसे तब नहीं दिया जा रहा जब भारत के पूर्व राष्ट्रपति खुद बिहार कई बार आए हैं बिहार में औषधि पौधों को प्रमोट करने के लिए। पालिगंज में पहला पौधा कलाम साहब ने ही लगाया था जिसके बाद यहाँ के किसानों को फ़ायदा भी हुआ था। कलाम साहब ने पटना यूनिवर्सिटी को जठरोफ़ा पर रीसर्च करने के लिए बोला था। लेकिन बाद में कलाम साहब के प्रयासों पर पानी फेर दिया गया। कलाम साहब ने 2002 में ही इस मुहिम की शुरुआत राष्ट्रपति भवन में हरबल प्लांट लगाकर किया था। और अब मोदी सरकार उसे बर्बाद कर रही है।
भारत में ITI संस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए वर्ल्ड बैंक से 2200 करोड़ का क़र्ज़ लेकर STRIVE (Skills Strengthening For Industrial Value Enhancement) योजना शुरू किया गया जिसके तहत राज्यों को दिया गया कुल 7000 करोड़ और इसमें बिहार को मिला अंडा। जोड़ी मोदी आ नीतीश जी के हीट होई।
ये एक पुराना वीडियो है –
जिसे हाल ही में लड़की के वायरल MMS कांड से जोड़कर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया जा रहा है।
ये वीडियो लगभग 8 माह पुराना अहमदाबाद के वस्त्रालय इलाके का है। जिसमें कुछ अराजकतत्वों ने दिनांक 13 मार्च को यात्रियों पर लाठी-डंडों और तलवारों से हमला किया था। साथ ही वाहनों में भी तोड़फोड़ की थी। तब गुजरात पुलिस ने सख्त एक्शन लेते हुए कुल 14 हमलावरों को गिरफ्तार किया था। जिसने एक ये नाबालिक भी था, जिसकी वीडियो इस समय MMS कांड से जोड़कर वायरल किया जा रहा है।
~ साभार: @NCIBHQ
ज़रा ग़ौर से ढूँढिए इसमें बिहार का नाम, हमें तो नहीं मिला, क्या पता NDA के नेताओं को इसमें बिहार का नाम मिल जाए। ये केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वदेश दर्शन योजना (पार्ट-२) के तहत देश के अलग अलग राज्यों को अपने अपने राज्यों में पर्यटन के विकास के लिए दिए गए राशि का विवरण है
Old Video: बीजेपी-जदयू गठबंधन टूटने के बाद नेता प्रतिपक्ष नन्द किशोर यादव का नीतीश कुमार पर हमला |
साल 2013 में जब नीतीश कुमार नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री चेहरा को मुद्दा बनाकर NDA से अलग हुए थे और कांग्रेस के समर्थन से बिहार में सरकार बनाए थे तब नेता प्रतिपक्ष के रूप में नन्द किशोर यादव ने जो भाषण दिया था वो सुनने लायक है.
#BiharPolitics #Bihar @NitishKumar@nkishoreyadav #narendramodiji #BJP #RJD #jdu @BJP4Bihar
Old Video: Terrorist Attack on Hindus in Jammu & Kashmir Discussed in Lok Sabha
On June 19, 1998, twenty-five Hindu residents of Korra, a village in Doda district, were killed by militants returning from a wedding in Champnagri. On July 29, 1998, the incident was discussed in Lok Sabha, with participation from Bihar Governor Arif Mohammad Khan, Ramvilas Paswan, and others. Madan Lal Khurana responded on behalf of the BJP-led central government.
#PahalgamTerroristAttack #Pahalgam #pahalgamattack
Old Video: Story of Baba Saheb Bhimrao Ambedkar by Ramvilas Paswan
Ramvilas Paswan was the most vocal Dalit leader from Bihar who always made references to life, works and teachings of Baba Saheb Bhimrao Ambedkar in both the houses of parliament (Lok Sabha & Rajya Sabha)
#ambedakarJayanti #BiharNews @LJP4India
Sanjay Raut said that Tahawwur Rana will be hanged just before the Bihar elections so that he can take advantage in the elections
Maharashtra CM Fadnavis said that I do not respond to fools ( मैं मूर्खो की बात का जवाब नहीं देता )
पूरा विडियो देखने के लिए लिंक पर क्लीक करे |
Viral Video: Why Bihar is Being Abused Repeatedly? हर बार बिहार बदनाम क्यूँ ?
https://t.co/RKQ9igX33k
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Nitish Kumar का दुर्लभ विडियो जब लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाला केस में सीबीआई ने चार्ज शीट दायर करने के लिए परमिशन माँगा था तब लोकसभा में दिनभर बहस चली थी.
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