इस देश में कुत्तों तक की समस्या सुनने हेतु व्यवस्था है पर अनारक्षित वर्ग हेतु कुछ नहीं, अपितु उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने हेतु सरकार उनके पैसे से ही असामाजिक तत्त्वों को बढ़ावा देगी - जगद्गुरु निग्रहाचार्य
#Nigrahacharya#निग्रहाचार्य#ReservationReformआंदोलन #reservationhataomovement #UGC_काला_कानून_वापस_लो
बेहद दुखद भाजपा के राज में दिल्ली की सड़कों पर बस से उतार कर सवर्ण समाज के युवाओं को
दिल्ली पुलिस द्वारा मारा जा रहा है
सवर्ण समाज कोटे से जीतकर आने वाले नेताओं शर्म से डूबकर मर जाओ समय आने पर इसका जवाब जरूर मांगे इन राजनेताओं से और जुते से स्वागत करना भी भूलना मत....
#सवर्ण_विरोधी_भाजपा
No. I mean 80 years of caste politics and ever increasing reservations is keeping the caste divide alive and burning.
The only people benefitting from this now are politicians.
The whole thing needs a hard, ground-up review.
That is all.✌🏽#ReservationReformआंदोलन
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय के अनुसार, केंद्र की भाजपा सरकार ने इस याचिका का विरोध किया है।
-अश्विनी उपाध्याय, अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट
जंतर मंतर पर जो रिजर्वेशन पर समीक्षा की मांग कर रहे हैं उन्हें ना भी सुनिए लेकिन आरक्षण पर उनकी तो सुन लें इस देश की पार्टियां जिनकी सोच और दिशा लेकर वो यहां तक पहुंची हैं।
#ReservationReformआंदोलन
Why @myogiadityanath govt is offering free coaching only to SC/ST/OBC students?
What about poor General category? Don't they deserve good future?
We demand that new batch admit Poor GC students too.
This open discrimination will not work anymore!
जिस दिन गरीब दलित ये समझ जाएगा कि उसका दुश्मन ब्राह्मण नहीं, बल्कि अमीर दलित है जो उसके हिस्से का आरक्षण खा रहा है। उस दिन अंबेडकरवादियों की दुकान बंद और गरीब दलित का उद्धार हो जाएगा।
#PralayShootBegins
In 2016, a female assistant professor Deepshikha filed cases under SC/ST Act against her 3 senior professors at Allahabad University.
8 years later, in 2024, Allahabad High Court found that she had filed false cases.
Such misuse of the SC/ST Act will also occur under the UGC Promotion of Equity Regulations if protection against caste-based discrimination does not extend to General category students on campuses.
It will be used as a weapon to settle personal grudges, jealousy, and destroy careers.
When I warned everyone earlier, during the Nupur Sharma episode, I said this is their real character. BJP abandoned her, boycotted her, and distanced itself from a genuine Hindu under pressure. That moment exposed everything.
This party’s pattern is clear.
Exclude the real Sanatanis to protect power.
Sacrifice truth to preserve optics.
Today, trusting any BJP leader is like placing flowers on your own grave.
Sister Nupur Sharma is a true Sanatani.
She stood for facts, not convenience.
We bow to her with respect.