मेरी कविताओं का दुर्भाग्य केवल इतना है, कि वे जिनके लिए लिखी गईं, वे उनके द्वारा कभी पढ़ी न गईं।
(आज का सूरज जाने किसकी खातिर निकला था?)
20 सितम्बर 22 https://t.co/AzOTUdFTTw
अक्सर आप लोग कई खूबसूरत सुझाव देते हैं,
कोई रचना पढ़कर सुनाने के लिए।
जो भी कहानी या कविता आप मेरी आवाज़ में सुनना चाहते हैं,
उसे इस छोटे-से गूगल फ़ाॅर्म,
फ़रमाइश
में लिंक या PDF में मुझे दे सकते हैं!
https://t.co/Uxhcd9Q6u2
We, the people of India, are more concerned about what others think of our history than how we act or what we do in the present.
How convenient (and foolish, may be?) it is to ignore that we are living in the history of the future.
#RandomThoughts
कितना कुछ खोते हैं हम उस तनख़्वाह के लिए जो महीने के आख़िर में मोबाइल पर एक मैसेज की शक्ल में आती है। चमचमाती दुनिया की इसी तल्ख़ हक़ीकत को बयान करती है @AnurviMehra की कविता 'तनख़्वाह'
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@Pratilipi_Hindi@spotifyartists