जनजागरण अभियान के तहत जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज बहरौली,CPLइंटर कॉलेज हरदोईया मे शिक्षकों कर्मचारियों,ग्राम पंचायत नबीनगर मे बुद्धिजीवी समाज के साथियों एवं मोहनलालगंज में अधिवक्ता साथियों के साथ संवाद किया गया।
सभी ने एक स्वर से #लखनऊ स्नातक क्षेत्र से भरपूर समर्थन का भरोसा दिया।
ओ पी एस की मांग बिहार के जिला परिषदों के कर्मचारी पूर्व में जिला बोर्डों के कर्मचारियों द्वारा बिहार लोकल बाडीज इम्प्लाइज फेडरेशन का अंग होने के नाते करते रहे हैं।
आज जन जागरण यात्रा की शुरुआत गाँव हथिगवां कुण्डा प्रतापगढ से शुरु हुई
गाँव के कई बुजुर्गों का आशीर्वाद एवं पुराने मित्रों से मुलाकात भी हुई। इसके बाद बाबागंज पहुंचेगी।
महोदय, GDCE की पिछली दो भर्ती 2023-24 अधूरी होने से कर्मचारीयों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित हो रहे हैं तथा उनके प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी कमजोर पड़ रहा है SECR में जल्द GDCE की अधिसूचना जारी की जाए
#Gdce_Notification_Secr@GMSECR@pcpoSecr@AshwiniVaishnaw@min_rail
25 नवंबर कार्यक्रम के लिए हर स्तर पर रुकावटें डाली जा रही है ब्लाक जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर लगातार रोकने का प्रयास किया जा रहा है शासन -प्रशासन द्वारा कार्यक्रम को असफल करने के लिए जोर लगाया जा रहा है लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि #अटेवा NMOPS ने जो तय कर लिया है उसको सफल किया। पिछले 1 अक्टूबर 2023 की रैली में भी रोकने के सारे जतन किए गए लेकिन उस रैली ने सारे रिकॉर्ड तोड़े।
#25नवंबर चलो दिल्ली
#vijaykumarbandhu
संघर्ष के दिन
पहले भी किए हैं आज भी कर रहे हैं आगे भी करेंगे जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती
पुरानी यादे
*अटेवा के वो पांच दिन- पांच राते*
26 अगस्त 2016 की पोस्ट है
(भूख हङताल- लखनऊ )
.✍️✍️विजय बन्धु✍️✍️
पुरानी पेंशन की बहाली के चरणबद्ध आन्दोलन के क्रम मे अटेवा का भूख हड़ताल ( 21अगस्त से 25 अगस्त 2016) महत्वपूर्ण पड़ाव मे एक था। यादगार भी ,संघर्ष ,संवेदना और त्याग की पराकाष्ठा भी।
सुबह की शुरुआत प्रशासन के साथ भीषण संघर्ष -जद्दोजहद के बाद गांधी प्रतिमा तक पहुंचने मे दोपहर हो गया पर बिना पहुचे माने नही अटेविन्यस। पहली जीत हौसला बढाने के लिए काफी थी। उसके बाद गिरफ्तारिया शुरु होती है बसो पर भर भर करके ले जाया जाता है लोगो का जुहूम बढ़ता जा रहा था ,गगनभेदी नारे लग रहे थे *जय युवा-- जय अटेवा* से पूरा लखन्ऊ गूज रहा था। सभी को लक्ष्मण मेला मैदान मे लेकर छोड़ा गया।
*वहा हुई अहम बैठक लिया गया बड़ा फैसला* ।
पुरानी पेंशन के लिए अटेवा का एक बडे व कठोर निर्णय के तहत बैठ गये भूख हड़ताल पर ,शासन और प्रशासन में हड़कम्प मच गये। साधन कम थे साधना बड़ी थी --दिन गुलजार रहते थे रात काली रहती थी। गजब की तपस्या थी बस एक जुनून था पुरानी पेंशन के कुछ भी करेगे। दिन रात बरसात की मार रातो मे मच्छरो का प्रकोप ,बोलना भूखे रह कर ,थके रह कर व्यवस्था करना ,लोगो से मिलना नही तो नाराज न हो जाये, प्रदेश के कोने कोने से आये है उनकी भी अपेक्षा है। प्रशासन को भी बताना,मिडिया का जबाव देना। अगले दिन की तैयारी -- रात अपने आप मे भारी। क्या न कराये आन्दोलन बस चलते जाना भूखे प्यासे बढ़ते जाना।
आन्दोलन के जीवन काल में सबसे कठिन दौर वो पांच दिन पांच राते। वो दिन रात और उसकी बाते। रोचक भी ,पीड़ादायक भी ,लोगो का हुजूम उत्साह का कारण भी । तमाम परेशानियो के बाद भी हौसले मे कोई कमी नही। हजारो साथियो का साथ ताकत देता था हिम्मत देता था । उसी से भूख और प्यास का पता नही चलता था बस लड़ना था शासन से, प्रशासन से ,मौसम से लेकिन वीर अटेवियन्स डटे रहे -हटे नही। तमाम उठापटक के बाद वो क्षण भी आया जब सरकार का हमारी बात सुनना पड़ा और शासन से वार्ता हुई पुरानी पेंशन पर पहली बार सरकार से कई बैठको का दौर शुरु हुआ और उसका शानदार प्रतिफल निकला कि *nps कर्मियो को ग्रेचुटी और परिवारिक पेंशन का GO जारी हुआ* । यह उत्तर प्रदेश निकला आदेश देश व अऱ्य राज्यो के लिए नजीर साबित हुआ । और इसकी महत्ता तब लोगो का समझ मे आया जब किसी के यह दुःखद घटना हुई और उनका परिवार अटेवा के इस संघर्ष की वजह से आर्थिक सुरक्षा के दायरे मे आया तो लोगो ने अटेवा का आभार जताया। कोरोना महामारी मे हजारो परिवार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। लेकिन उस दिन अटेवा द्धारा किया गया त्याग और बलिदान की वजह से उन्हें परिवारिक पेंशन का छाव मिला यह हमारे लिए और अटेवियन्स के लिए सुकून व राहत की बात है। और लगा कि अटेवा ने बड़ा काम कर दिया है।
*आज का संघर्ष कल की राहत होती है ऐसी धारणा के साथ अटेवा आगे बढ़ रहा है* पहले भी संघर्ष किया है और आगे भी जारी रहेगा। आप सभी का सहयोग और समर्थन अटेवा को बल देता है। हजारो- हजार अटेवियन्स के मेहनत,त्याग और बलिदान से यह पेंशन आन्दोलन
खड़ा हुआ -बड़ा हुआ और आगे बढ़ रहा है । विश्वास बनाये रखे आपका नेतृत्व और संगठन अपनी मंजिल तक पहुचा कर ही दम लेगा। बस संगठन के दिशा निर्देश मे दिये गये कार्यक्रमो को आगे बढ़ाते रहे है । अपने दायित्वों को निभाते चले हम सब जीतेगे ।
वो पांच दिन- पांच रातो का संघर्ष आज सुखद एहसास करा रहा है आज का संघर्ष कल सुखद दिन (पुरानी पेंशन ) लायेगा ।
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