📢 राजस्थान सरकार से सीधा सवाल
उत्तर प्रदेश @myogiadityanath में आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए “उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम” स्थापित कर सरकार ने एक व्यवस्थित, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाया है।
वहीं दूसरी ओर राजस्थान @RajCMO में व्यावसायिक शिक्षा लगातार स्कूलों तक विस्तार पा रही है, लेकिन इसे धरातल पर लागू करने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों का भविष्य आज भी आउटसोर्सिंग और अस्थिर सेवा व्यवस्था के भरोसे है। राजस्थान के आधिकारिक पोर्टल पर भी 2026-27 के लिए व्यावसायिक शिक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी हैं।
जब उत्तर प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था के लिए नया मॉडल बना सकता है, तो राजस्थान सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्थायी जॉब पॉलिसी कब बनाएगी?
👉 व्यावसायिक शिक्षा स्थायी, तो व्यावसायिक प्रशिक्षक अस्थायी क्यों?
👉 स्कूलों में कौशल शिक्षा जरूरी, तो प्रशिक्षकों की नौकरी सुरक्षित क्यों नहीं?
👉 हर वर्ष टेंडर और एजेंसी बदलने की व्यवस्था कब तक?
राजस्थान सरकार से हमारा स्पष्ट सवाल है—
“व्यावसायिक प्रशिक्षकों की स्थायी जॉब पॉलिसी आखिर कब?”
जागो राजस्थान सरकार
#स्थाई_जॉब_पालिसी_लागू_करो
#CSR_2022
@rajeduofficial@RajCMO@RajGovOfficial@BhajanlalBjp@madandilawar
रक्षाबंधन पर भी खाली रही व्यावसायिक प्रशिक्षकों की जेब, विभाग मौन—कंपनियों की मनमानी से बढ़ा आक्रोश
जयपुर। दीपावली और होली के बाद अब रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी राजस्थान के राजकीय विद्यालयों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों को मानदेय का इंतजार ही करना पड़ा। कई प्रशिक्षकों का कहना है कि त्योहार बीतते जा रहे हैं, लेकिन उनकी मेहनत का भुगतान समय पर नहीं हो रहा। इससे प्रशिक्षकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।
व्यावसायिक प्रशिक्षकों का आरोप है कि विभाग की ओर से कंपनियों को समय-समय पर मानदेय भुगतान के निर्देश जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद कुछ कंपनियां विभागीय आदेशों की पालना नहीं कर रही हैं। प्रशिक्षकों का सवाल है कि जब विभाग आदेश जारी कर चुका है तो उन आदेशों की पालना नहीं कराने पर जिम्मेदारी किसकी है?
एक तरफ अनिवार्य व्यावसायिक शिक्षा की बात, दूसरी तरफ प्रशिक्षकों का शोषण
प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा को मजबूत करने और विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की बात लगातार की जा रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा भी व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य विषय के रूप में बढ़ावा देने को लेकर सार्वजनिक रूप से जोर दिया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर इसी व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षक मानदेय और नौकरी की अस्थिरता से जूझ रहे हैं।
प्रशिक्षकों का कहना है कि केंद्र सरकार के ‘स्किल इंडिया—कुशल भारत’ जैसे महत्वपूर्ण उद्देश्य के तहत चलने वाली व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था को राजस्थान में डबल इंजन सरकार का समर्थन होने के बावजूद जमीनी स्तर पर प्रशिक्षकों को समय पर मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है।
शिक्षा मंत्री कहते हैं ‘आप हमारे नहीं’, कंपनियां कहती हैं ‘विभाग से पेमेंट नहीं आया’
प्रशिक्षकों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर विभागीय अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के पास जाते हैं तो उन्हें यह कहकर जिम्मेदारी से अलग कर दिया जाता है कि वे विभाग के प्रत्यक्ष कर्मचारी नहीं हैं। दूसरी ओर संबंधित कंपनियों से भुगतान को लेकर संपर्क करने पर कई बार यह जवाब मिलता है कि विभाग की ओर से भुगतान प्राप्त नहीं हुआ है।
ऐसे में व्यावसायिक प्रशिक्षकों का सवाल है—“आखिर हम जाएं तो जाएं कहां?”
त्योहारों पर भी भुगतान का इंतजार
प्रशिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जिनके अधीन कार्यरत प्रशिक्षकों को दीपावली, होली और अब रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर भी समय पर मानदेय नहीं मिल पाया। परिवार की जरूरतों और त्योहारों के खर्च के बीच मानदेय का इंतजार प्रशिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति का कहना है कि यदि विभाग ने कंपनियों को भुगतान के स्पष्ट निर्देश दिए हैं तो उनकी पालना नहीं करने वाली कंपनियों के खिलाफ जिम्मेदारी तय करते हुए उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही आगामी टेंडर प्रक्रिया में उन कंपनियों के रिकॉर्ड और प्रशिक्षकों के बकाया भुगतान को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के ट्वीट और जमीनी हकीकत में अंतर का सवाल
प्रशिक्षकों का कहना है कि सरकार एक ओर राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने और इसे अनिवार्य विषय बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रही है, लेकिन दूसरी ओर व्यावसायिक शिक्षा को विद्यालयों तक पहुंचाने वाले प्रशिक्षक ही आर्थिक असुरक्षा और ठेका प्रथा का सामना कर रहे हैं।
प्रशिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग से मांग की है कि व्यावसायिक प्रशिक्षकों के मानदेय भुगतान की स्थायी व्यवस्था, समयबद्ध भुगतान और ठेका प्रथा से मुक्ति के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
प्रशिक्षकों का कहना है कि सरकार यदि वास्तव में ‘कुशल भारत’ और रोजगारपरक शिक्षा के लक्ष्य को धरातल पर उतारना चाहती है तो सबसे पहले उन प्रशिक्षकों के हितों की सुरक्षा करनी होगी, जो वर्षों से विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दे रहे हैं।
अब प्रशिक्षकों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। सवाल यही है कि रक्षाबंधन भी इंतजार में बीत गया—क्या आने वाले त्योहार पर भी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को अपने मानदेय के लिए इंतजार करना पड़ेगा?
जागो राजस्थान सरकार
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व्यावसायिक शिक्षा की राजस्थान में वर्तमान स्थिति
जिला टोंक से आज का आदेश
देखिए शिक्षकों को कब से वेतन मिला हैं
विषय अनिवार्य किया हैं स्वागत
लेकिन शिक्षकों को वेतन कब मिलेगा कोई गारंटी नहीं
12 वर्षों से ठेके पर,न कोर्ट के आदेश की पालना,न कोई सुधार
@sharatjpr@pantlp@NSDCIndia