उत्तर प्रदेश के MBBS मेडिकल ऑफिसर जो कि विभिन्न जिलों में कार्यरत है आज वे अपने न्याय संगत वेतन के लिए UPDGME के ऑफिस पर निवारण के लिए बैठे हैं |क्या उत्तर प्रदेश की सरकार में उनका न्याय संगत वेतन नहीं मिलेगा|
#onebondonesalary@CMOfficeUP@brajeshpathakup@myogiadityanath
उत्तर प्रदेश में MBBS के बाद लागू 2 वर्षीय अनिवार्य बॉन्ड सेवा में CHC/PHC तथा कुछ मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड के तहत ₹63,000 की फिक्स सैलरी मिल रही है, जबकि अन्य मेडिकल कॉलेजों में इसी बॉन्ड में करीब ₹1 लाख वेतन दिया जा रहा है।#samebondsamepay#doctors#wewantjustice
Why are MBBS doctors in Uttar Pradesh facing this disparity?
After completing MBBS, doctors join the compulsory rural service bond. But many are shocked to find that batchmates posted in medical colleges earn ₹1 lakh+ with regular increments, while those posted at CHCs/PHCs receive only ₹50,000–₹65,000 fixed.
Same MBBS degree. Same batch. Same bond. Different pay.
Hon’ble CM @myogiadityanath ji, kindly look into this disparity and ensure equal and fair remuneration for all doctors serving under the same bond. 🙏🩺
#UPDoctors #MBBSDoctors #DoctorStipend #UttarPradesh
Ghatiya infrastructure on phc /chc
Low paying salary
No security
No proper basic facilities ….
Extra pay toh dena hi chahiye govt ko chc phc ko are vo bhi nhi toh atleast same post k liye jinko 1 lakh plus salary mil rha utna toh krna hi chahiye
@CMOfficeUP@myogiadityanath
Why MBBS doctors in Uttar Pradesh are being discriminated ?
MBBS Doctors of UP complete their mbbs and join their compulsory rural service bond.
This was fine till they got to know something strange !
Their own batchmates posted in medical colleges are getting 1 lakh plus salary with regular increments while those who are alloted CHC PHC are getting only 50-65k fixed amount with same work same degree same bond.
Requesting you to look into this hon @myogiadityanath ji and remove this partiality !
An interesting contrast from Iran nearly 50 years ago: doctors serving in smaller towns and remote areas were paid substantially more—sometimes nearly twice as much as those posted in major cities.
The principle was simple and pragmatic: the more difficult and less attractive the posting, the greater the incentive.
Even half a century ago, the logic was clear: if a health system wants doctors to serve underserved areas, reward rural service—do not financially penalise it.
माननीय
@myogiadityanath@myogioffice
जी ,आपने प्रदेश में सबसे ज्यादा मेडिकल कॉलेज खुलवा दिए
फिर पास होने वाले बच्चों को 2 साल नौकरी करना अनिवार्य कर दिया
इनसे जबरदस्ती नौकरी करवाने के बाद आप इन्हें ₹50000 तनख्वाह दे रहे हो जिससे ज्यादा प्रायमरी का टीचर पाते हैं
ये लड़के मिलने जाते है तो आप मिलते तक नहीं हो
आखिर इतना घमंड क्यों की बच्चे आप से मिलने आते है और पुलिस उन्हें भगा देती है आप मिलते तक नहीं
आखिर क्या आपने अपने 7 साल के राज्य में
@CMOfficeUP@UPGovt को कंगाल कर दिया है
जो स्वास्थ्य मंत्री
@brajeshpathakup
अपने प्रदेश के होनहार बच्चों को चपरासी जैसा वेतन दे रहे
इन 3000 बच्चों को 1 लाख देने पर 15 करोड़ ही खर्च आएगा
तो क्या यूपी सरकार आपके कार्यकाल में दिवालिया हो गई है
इतना अन्याय अपने ही बच्चों से करना था तो इतने मेडिकल कॉलेज क्यों खोले?
और उनसे जबरदस्ती सर्विस क्यों करवा रहे हो ?
बच्चों को सुनिए
शर्म करिए और इन्हें इनकी पढ़ाई के अनुसार 1 लाख वेतन दीजिए
जैसे NHM इन्हीं जगहों पर 1 लाख दे रहा है
यूपी चुनाव के जस्ट पहले ये संदेश क्यों की यूपी सरकार दिवालिया हो चुकी है
👉 Adv. Neetu Singh Ji
MBBS graduates in UP are forced into 2-yr rural bonds at just ₹55k/month. Meanwhile, same batchmates in medical colleges get ~₹1L & NHM doctors get ₹80k–90k for the exact same work!
Same duty. Same patients. Why the pay gap?
@myogiadityanath@brajeshpathakup@myogioffice
1. उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद में प्रसिद्ध मान्यवर श्री कांशीराम जी नगर में स्थित तथागत गौतम बुद्ध पार्क शहर का सबसे लोकप्रिय पार्क है। जो यह बौद्ध धर्म एवं बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जी व मान्यवर श्री कांशीराम जी एवं विभिन्न वर्गों, विशेषकर बहुजन समाज के अनुयायियों की आस्था का स्थल है। लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार गौतम बुद्ध पार्क में नगर निगम मुरादाबाद द्वारा सीनियर केयर सेन्टर का निर्माण किया जा रहा है जिससे लोगों में रोष व्याप्त है तथा अशान्ति का माहौल बना है। सरकार सीनियर केयर सेन्टर पर तत्काल रोक लगाये ताकि समाज में शान्ति-व्यवस्था, आपसी भाईचारा का वातावरण बिगड़ने ना पाये।
2. इसके साथ ही, भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कल्याण हेतु, स्पेशल कम्पोनेन्ट प्लान के तहत उत्तर प्रदेश में चार मेडिकल कालेजों की स्थापना की गयी थी, जिनमें भारत सरकार के निर्देशानुसार इन वर्गों को 70 प्रतिशत सीटें आवंटित की गयी थी। अब इन चारों मेडिकल कालेजों में माननीय न्यायालय द्वारा अन्य मेडिकल कालेजों की भाँति ही अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत आरक्षण व अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत का आदेश पारित किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार कमजोर वर्ग के व्यक्तियों के हित को ध्यान में रखते हुये माननीय न्यायालय के समक्ष वास्तविक तथ्य प्रस्तुत कर माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश निरस्त करवाये ताकि कमजोर लोगों का हित सुरक्षित रह सके।
माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की डबल बेंच ने भी सिंगल बेंच के फैसले से सहमति जताते हुए अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अनुसूचित जाति–जनजाति को दिए गए विशेष आरक्षण निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा।
ये निर्णय न सिर्फ़ शोषित वर्ग के साथ अन्याय है, बल्कि उन शर्तों से विश्वासघात है, जिनके आधार पर इन संस्थानों की स्थापना हुई थी। ये फैसला बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के सामने सर झुकाने वाली @myogiadityanath सरकार के दोहरे चरित्र को भी उजागर करती है। क्योंकि मेरे संज्ञान में आया है कि सरकार की तरफ से पक्ष रखने वालों ने भी हाईकोर्ट में इस फैसले पर सहमति जताई।
याद रखिए, इन मेडिकल कॉलेजों का निर्माण समाज कल्याण विभाग की विशेष घटक योजना से 70% बजट लगाकर हुआ था। उस समय यह स्पष्ट किया गया था कि जिस मद से निर्माण होगा, उसी के अनुरूप अनुसूचित जाति–जनजाति वर्ग को विशेष आरक्षण मिलेगा और MBBS सीटों का आवंटन भी उसी आधार पर होगा। लेकिन हाईकोर्ट का यह फैसला उस ऐतिहासिक न्याय और सामाजिक उद्देश्य को बेरहमी से रौंदता है।
@AzadSamajParty समाज के जागरूक लोगों और संगठनों से तालमेल बनाकर हाईकोर्ट के इस फैसले को माननीय सुप्रीम कोर्ट में चुनौती तो देंगे ही लेकिन साथ ही योगी सरकार से अपील करती है कि अगर वास्तव में वह अपने आप को दलित हितैषी कहती है तो इस बात को साबित करे और विधानसभा में कानून बनाकर इन 4 मेडिकल कॉलेजों का विशेष आरक्षण बरकरार रखे।
मैं फिर से दोहराता हूं अगर सरकार और कोर्ट से इंसाफ नहीं मिला तो @UPGovt का असली चेहरा समाज के सामने लाने के लिए दिल्ली से लखनऊ तक पैदल मार्च करूंगा।
यह यात्रा सिर्फ मेरे कदमों की नहीं होगी, बल्कि करोड़ों वंचितों की आवाज़ बनेगी।
#SocialJustice
#ReservationRights
#ConstitutionalMorality
#bahujanvoice
पूर्ववर्ती उत्तर प्रदेश सरकार के समय कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर मेडिकल कॉलेजों के निर्माण हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा विशेष घटक के तहत 70% बजट उपलब्ध कराया गया था।
उस समय यह स्पष्ट भी किया गया था कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण जिस मद में किया जा रहा है, उसका ध्यान रखते हुए अनुसूचित जाति वर्ग को विशेष आरक्षण का प्रावधान भी किया जाएगा और उसी हिसाब से एमबीबीएस सीटों का आवंटन भी होगा।
लेकिन अब माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने इस विशेष आरक्षण व्यवस्था को NEET-2025 से रद्द कर दिया है।
यह सिर्फ एक फैसला नहीं है, बल्कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। यह हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
मैं साफ कर देना चाहता हूँ कि यह लड़ाई केवल 340 सीटों की नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय और संविधान की आत्मा की रक्षा की लड़ाई है। इस अन्यायपूर्ण निर्णय को हम किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
मुझे पत्र, फोन और अन्य माध्यमों से छात्रों व अभिभावकों के अनेक संदेश प्राप्त हुए हैं। मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूँ कि इस संघर्ष में मैं पूरी तरह उनके साथ खड़ा हूँ।
हम माननीय उच्च न्यायालय की एकल बेंच के इस फैसले को हाईकोर्ट की उच्च बेंच में और आवश्यकता पड़ी तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय तक चुनौती देंगे।
याद रहे अगर फिर भी न्याय नहीं मिला तो मैं दिल्ली से लखनऊ तक पैदल यात्रा करूंगा।
यह यात्रा सिर्फ मेरे कदमों की नहीं होगी, बल्कि करोड़ों वंचितों की आवाज़ बनेगी।
#SocialJustice #Reservation #Bahujan
पूर्ववर्ती यूपी सरकार ने विशेष ग्रांट कॉम्पोनेंट के तहत उत्तर प्रदेश के 44 सरकारी/ऑटोनॉमस मेडिकल कॉलेजों में से सिर्फ 4 मेडिकल कॉलेजों - कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन, और सहारनपुर की कुल 340 सीटों पर एक आरक्षण फॉर्मूला लागू किया था। ताकि हाशिए पर पड़े समाज के बच्चे भी डॉक्टर बनकर समाज में बराबरी का स्थान हासिल कर सकें।
लेकिन अब माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंड़पीठ ने मेडिकल कॉलेजों की इस विशेष आरक्षण व्यवस्था को रद्द करके सीधे-सीधे अनुसूचित जाति के अधिकारों पर हमला कर दिया है।
यह विशेष आरक्षण व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि दशकों से शिक्षा से वंचित समाज को मेडिकल की पढ़ाई में बराबरी का मौका मिल सके। लेकिन कोर्ट ने संविधान की आत्मा, सामाजिक न्याय को नज़रअंदाज़ कर दिया।
याद रखिए, आरक्षण कोई भीख नहीं, यह ऐतिहासिक अन्याय का मुआवज़ा है। अगर समाज के सबसे वंचित तबके को ही मेडिकल कॉलेजों से बाहर कर दोगे, तो डॉक्टर बनने का सपना कौन पूरा करेगा? क्या सिर्फ़ अमीर और सवर्ण वर्ग के लिए शिक्षा का दरवाज़ा खुला रहेगा?
हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा या कॉलेज की सीट के लिए नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और आरक्षण के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। इस निर्णय के चलते हमारे विद्यार्थियों को उनके हक से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। हम इसे सहन नहीं करेंगे।
हम इसे अदालत तक सीमित नहीं रहने देंगे। एकल पीठ के इस फैसले को उच्च न्यायालय की डबल बेंच और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती देंगे, ताकि अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के शैक्षणिक अधिकार और न्याय सुनिश्चित हो सके।
आजाद समाज पार्टी @CMOfficeUP से मांग करती है कि अगर वह सच मे अनुसूचित जाति के हितैषी हैं तो इस फैसले के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील करे और मेडिकल शिक्षा में वंचित समाज का हिस्सा सुरक्षित रखे। यही बाबा साहेब अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अगर उत्तर प्रदेश सरकार इस प्रकरण मे लापरवाही करती है तो अनुसूचित जाति समाज को भी इनका असली चेहरा नजर आ जायेगा।
#SocialJustice #Reservation #Bahujan