सेवा में,
डॉ विनीत जोशी जी, आईएएस
अध्यक्ष, UGC, नई दिल्ली!
विषय: UGC Regulations-2026 को वापस लेने (Rollback) हेतु अनुरोध,
महोदय,
सविनय निवेदन है कि जातिगत भेदभाव को रोकना हर सभ्य एवं लोकतांत्रिक समाज की अनिवार्य जिम्मेदारी है। यह कार्य एकजुटता, निष्पक्षता और साफ़ नीयत से किया जाना चाहिए, न कि किसी प्रकार के सियासी हित साधने के उद्देश्य से। किसी भी नियम अथवा अधिसूचना के निर्माण में भारत की जटिल जातिगत पिरामिड संरचना तथा सामाजिक यथार्थ को समझना अत्यंत आवश्यक है।
UGC Regulations-2026 के कुछ प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित गंभीर आपत्तियाँ आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ:-
1. यदि कोई सवर्ण छात्र जातिगत भेदभाव करता है, तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी ही चाहिए। किंतु यदि किसी छात्र को व्यक्तिगत रंजिश, दुर्भावना या झूठे आरोपों के माध्यम से फँसाया जाता है, तो ऐसे मामलों में फँसाने वाले के विरुद्ध भी समान कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए। क़ानून का दुरुपयोग न्याय नहीं, बल्कि अन्याय को बढ़ावा देता है।
2. यदि कोई OBC वर्ग का छात्र SC/ST वर्ग के छात्र के साथ जातिगत भेदभाव करता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान क्यों नहीं है? क्या भेदभाव केवल एक ही दिशा में होता है? वास्तविकता यह है कि भेदभाव के मामले हर सामाजिक स्तर पर होते हैं और क़ानून को इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।
3. नए नियमों में OBC वर्ग को पीड़ित पक्ष के रूप में शामिल किया गया है, तो क्या सामान्य (General) वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है? न्याय व्यवस्था की बुनियाद पूर्वाग्रह पर नहीं, बल्कि तथ्यों और निष्पक्ष जांच पर आधारित होनी चाहिए।
4. शैक्षणिक संस्थान समाज की जड़ (roots) होते हैं, जिनका उद्देश्य समानता, समावेश और एकता को मजबूत करना है, न कि विभाजन और वर्गीकरण को बढ़ावा देना।
5. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, किंतु यह अधिसूचना (Gazette Notification) भारत के संविधान की मूल भावना, संवैधानिक दृष्टि और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप प्रतीत नहीं होती।
जातिगत भेदभाव देश के लिए एक नासूर है। दोषी के लिए सख़्त दंड का प्रावधान आवश्यक है, किंतु साथ ही निर्दोष व्यक्ति को स्वयं को बचाने का पूरा अवसर भी मिलना चाहिए। वर्ष 2012 में बने नियमों में यह संतुलन था कि यदि आरोप झूठे पाए जाएँ या फँसाने की मंशा सिद्ध हो, तो जुर्माने और कार्रवाई का प्रावधान रहेगा। UGC Regulations-2026 में यह संतुलन समाप्त कर दिया जाना अत्यंत चिंताजनक है।
यदि वास्तव में जातिगत पिरामिड और सामाजिक संरचना को समझना है, तो नियम बनाने वालों को गाँव-देहात और ज़मीनी स्तर पर जाकर सामाजिक यथार्थ को देखना चाहिए। एसी कमरों में बैठकर केवल हवा ठंडी लगती है, समाज की जातिगत गर्माहट और पीड़ा नहीं समझी जा सकती।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि भारत के संविधान में निहित समानता, न्याय एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के आलोक में UGC Regulations-2026 की पुनः समीक्षा की जाए एवं इसे तत्काल प्रभाव से वापस (Rollback) लिया जाए।
जय भारत।
सधन्यवाद,
डॉ राज शेखावत, पूर्व BSF
संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष
क्षत्रिय करणी सेना
@ugc_india@rashtrapatibhvn@PMOIndia@HMOIndia@ABPNews@CNNnews18@ZeeNews@BBCHindi@CNNnews18@NEWS@republic@indiatvnews@DainikBhaskar
महंत नरसिंहानंद जी UGC के विरोध में खड़े 🔥🤟
साधु संत भी खुलकर हमारे साथ है
पुलिस ने इन्हें रोक लिया है
UGC जैसी कानूनों की वजह से हिंदू आपस में लड़कर खत्म हो जाएंगे और राज करेंगे विधर्मी
👉 इनका संदेश सरकार तक पहुंचा दीजिए
#UGC Guidelines को ले कर देश भर में उग्र हुए प्रदर्शन, लोग सड़कों पर निकल कर अपने बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं, उधर IT सेलियों का कहना है कि यह कानून आपके फायदे का है, सांसद @nishikant_dubey जी ने तो हद्द ही कर दी इतनी ज्यादा बढ़ाई कर दी कि पूछो मत, उनका बस नहीं चल रहा वरना UGC वाले मुद्दे पर वो मोदी को भगवान घोषित कर देते, और सबसे बड़ी बात यह है कि वे अपने बच्चों को विदेश में पढ़ा रहे हैं, भला उन्हें क्या फर्क पड़ता है आपके बच्चे जिएं या मरें, उनके बच्चे 5 स्टार विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ कर भारत लौटेंगे और लेटरल एंट्री से सीधे IAS बन कर या नेता मंत्री बन कर देश पर राज करेंगे, ऐसा ही हाल हर उस व्यक्ति का है जो UGC जैसे काले कानून के पक्ष में लिख रहे हैं, बाकी आम जनता बेचारी सड़कों की धूल फांक रही है, जिस मोदी को इतना लाड़ प्यार दिया उसने UGC थोप कर उनके बच्चों का भविष्य ही बर्बाद कर दिया, भाई को भाई से लड़ाने वाले इस कानून से जनता ठगा सा महसूस कर रही है और सत्ता की मलाई खाने वाले जाम छलका रहे हैं पार्टी कर रहे हैं
#ShameOnUGC
झूठी शिकायत क्यों स्वीकार हो ? और झूठी शिकायत करने वाला क्यों दंडित ना हो ? वह किसी जाति का हो,वर्ग का हो ,समाज का हो, अगड़े का हो, पिछड़े का हो, दलित हो आदिवासी हो जो झूठी शिकायत करे उसे तो दंड मिलना ही चाहिए। "वो clause हटा दिया.." यानी दुरुपयोग के लिए यह व्यवस्था हाईवे पर आ गई,,, दुरुपयोग के एक्सेस वे पर आ गई, यहां कोई गति अवरोधक है ही नहीं।
जिसका जो मन आए वह चाहे किसी के खिलाफ शिकायत ठोंक दे,, मान लो शिकायत फर्जी भी निकली तो अपना पान खाए और मस्त घूमे। क्योंकि उसके खिलाफ तो कुछ हो नहीं सकता।
इसके पीछे लगता है कुछ माइंडसेट भी काम कर रहा है एक अलग किस्म का। सारी चीजें यदि यथा स्थिति पर भी मान लें तो भी यदि इतना ही होता बहुत स्पष्ट ढंग से कि झूठी पाई गई शिकायत तो खैर नहीं। यदि यह होता तो भी हम मान लेते कि चलो ठीक है।
@Aamitabh2 🔥
#UGC_RollBack
#DesiGaay #NationalGirlChildDay
UP Police परीक्षा की तैयारी कर रहे हजारों बच्चों के सपनों का सवाल है जो उम्र सीमा की दहलीज पर खड़े हैं .....
ऐसे में इन योग्य बच्चों को साथ लेकर चलना भी जरूरी है और माननीय मुख्य मंत्री जी ने स्वयं जनता दरबार में कई बार कहा है कि छूट दी जा रही है....
शासन इस विषय की गंभीरता को समझते हुए आदेश जारी करें ताकि उम्र सीमा की दहलीज पर खड़े युवाओं को भी मौका मिल सके।
#UPP_Age_Relaxation