आज तो सुशांत सिन्हा भी जनता का मुद्दा उठा रहा है !
E20 पर ऑटोमोबाइल कंपनियों का झूठ उजागर हो गया है !
अगर कार कंपनियों का दावा है कि E-10 वाली गाड़ियाँ E -20 वाले पेट्रोल से भी झमाझम चल रही हैं बिना किसी दिक्कत के तो फिर E-20 कम्प्लायंट गाड़ियाँ बना ही क्यों रहे हो
और लोगों को E -20 कम्प्लायंट हैं बताकर बेच क्यों रहे हो?
दुनिया के कई देशों में E-10 का ज़्यादा इस्तेमाल क्यों है?
M3M just got RERA approval for its Commercial Tower on Dwarka Expressway: International Financial Centre 2.0
Sector 113. 1.42 acres.
FAR 5.075. Rs 554 Cr Project Cost.
One Tower 22 Floors. Completion 2033.
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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की विधानसभा बुधनी के भेरुंदा में किसानो ने चक्काजाम किया !
सोचिये केन्द्रीय कृषिमंत्री की विधानसभा में किसानों का ये स्थिति है तो पूरे देश में किसानों का क्या हाल होगा !
भाजपा अध्यक्ष के रथ के आगे हनुमान जी को भाजपा का झंडा लेकर नचाया जा रहा है।
धर्म का दोहन करते-करते संघ परिवार और भाजपाइयों का दिमाग खराब हो गया है। ये लोग पाप और पतन की सारी सीमाएं लांघ रहे हैं।
यह काम तो कोई घनघोर निरीश्वरवादी भी नहीं करेगा। उसे भी इतनी तमीज होती है कि किसी की आस्था का तमाशा मत बनाओ। यह काम सिर्फ राम नाम और धर्म के व्यापारी कर सकते हैं जिनको सिर्फ धर्म का दोहन करना है।
इनका हर नेता अपने को धर्म, संस्कृति और आस्था का मालिक समझता है। अपने आपको भगवान से बड़ा समझता है। इनको इतना अहंकार आ गया है कि रामदूत हनुमान इनका झंडा लेकर इनकी गाड़ी के आगे डांस करेंगे।
इनके नेता नरेंद्र मोदी भी यही करते हैं। भगवान राम की उंगली पकड़कर उनको मंदिर में ले जाते हुए कृत्रिम फोटो जारी की गई थी। ये लोग जनता को बताते हैं कि "हम राम को लाए हैं"।
इनके अहंकार के आगे रावण शर्म से धंस जाए, ये अपने को परमपिता समझते हैं जो राम को ला सकता है, जो हनुमान जी को अपनी रैली में भाजपा का झंडा थमा सकता है और उनको रचा सकता है।
संघ परिवार और भाजपा का पतन अब भगवान भी नहीं रोक सकते। इनके पाप का घड़ा भर गया है।
देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृहजिले विदिशा में किस स्तर का फर्जीवाडा फैला हुआ है ये उसका एक डेमो मात्र है !
न बिल्डिंग पूरी, न स्टाफ, बंद पड़े 6 हॉस्पिटल में कागजों पर शुरू कर दी ओपीडी !
और जहाँ अस्पताल है वंहा डॉ नही है !
मप्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं खुद वेंटीलेटर पर आखरी सांस ले रही है !
ये है दिल्ली का इंजीनियरिंग मार्वल द्वारका एक्सप्रेसवे। एक ही बारिश में अंडरपास पानी से भर गया। अंडरपास को बंद करना पड़ा।
ये वही प्रोजेक्ट है जिसमें तय क़ीमत के हिसाब से 18 करोड़ रुपया प्रति किलोमीटर खर्चा आना था लेकिन बाद में अज्ञात कारणों से ये क़ीमत बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर कर दी गई थी। अब माननीय एथेनॉल मंत्री श्री धृतराष्ट्र गडकरी जी बताएं कि इस प्रोजेक्ट में किस ठेकेदार ने कितना खाया और आपको कितना प्रतिशत मिला?
350 करोड़ से बड़ी सड़क की पोल खोल दो एक निडर पत्रकार ने !
मप्र सरकार ने भ्रष्टाचार की सभी सीमाओं को पार कर दिया है, लोगों की जिंदगियों को खतरे में डाला जा रहा है !
सिर्फ 40 दिन में 70 बार राम मंदिर में चोरी हुई। इसके पहले कितनी हुई होगी? एक एक दिन में 5 लाख, 6 लाख रुपए पार किए गए।
यह बिना बड़े लोगों की संलिप्तता के संभव नहीं है। यह इतनी बड़ी चोरी है कि जांच होगी तो जनता हैरान रह जाएगी। फिर मध्यकाल के लुटेरे बौने लगने लगेंगे।
जिस स्तर की सूचनाएं बाहर आ रही हैं, उसके बाद RSS द्वारा आरोपों को राष्ट्रविरोधी, धर्मविरोधी षडयंत्र बताना यह साबित करता है कि चोरी बहुत बड़ी है, सबके संज्ञान में है और पूरे देश की सत्ता की ताकत लगाकर इसे दबाया जाएगा।
ये राहुल गांधी हैं जो माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए 14 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं।
वो चाहते तो हेलीकॉप्टर, रेड कार्पेट और 10 से ज़्यादा गाड़ियों के साथ VIP विज़िट कर सकते थे, लेकिन उन्होंने एक सच्चे भक्त का रास्ता चुना।
क्या आपने कभी नरेंद्र मोदी या किसी BJP नेता को मंदिरों में भी इस प्रकार जाते देखा है ?
सिर्फ़ 10 मिनट की बारिश… और Delhi के Lal Bahadur Shastri Hospital का हाल देखिए!
अस्पताल के अंदर जलभराव देखकर ऐसा लग रहा है मानो रेखा गुप्ता सरकार ने अस्पताल में स्विमिंग पूल बनवा दिया हो।
जहाँ मरीजों को इलाज मिलना चाहिए, वहाँ पानी भरा हुआ है। यह हाल तब है जब सरकार बड़े-बड़े दावे करती है।
क्या यही है भाजपा की “चार इंजन” सरकार का विकास मॉडल?
दिल्ली की जनता जवाब चाहती है — अस्पताल चाहिए या स्विमिंग पूल?
प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ समय के लिए विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी।
लेकिन भाजपा के राज्यसभा सांसद सतपाल सिंह संधू पहले ब्रिटेन और अब कनाडा में दिखाई दे रहे हैं।
अगर प्रधानमंत्री की अपील थी, तो क्या वह सभी नेताओं पर भी समान रूप से लागू होती है या सिर्फ आम जनता के लिए?
देश जानना चाहता है कि आखिर इस मामले की वास्तविक स्थिति क्या है।