@ChandanSharmaG सालों समाज में जातिवाद का जहर घोलने वालों कहा अपनी जाति के लोगों को देखते हो अपनी गांव मरवाने लगते हो। अब चंद्रशेखर ने पेला है तो समझ आ रहा।
उमाशंकर सिंह की यह खासियत !
यूपी विधानसभा चुनाव चुनाव से पहले उमाशंकर सिंह का निधन बसपा के लिए सबसे बड़ा झटका है!
उमाशंकर सिंह का राजनीतिक प्रभाव सिर्फ बलिया तक नही था।पूर्वांचल की कई सीटों पर था ,प्रदेश में बसपा की मजबूती के लिए हमेसा मायावती के साथ खड़े रहे।
बीएसपी के टिकट पर 2012 में पहली बार चुनाव जीता था।उनके रसूख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है 2017 में बीजेपी की लहर में भी वह रसड़ा से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुचे ,2022 में बीएसपी के इकलौते विधायक थे ,जो विधानसभा में पहुचे थे।
बसपा के कमजोर होने के बाद लोग बसपा को छोड़ कर दूसरी पार्टियो में जाने लगे।मगर उमाशंकर सिंह राजनीति की शुरुआत से अंत तक सदन में बीएसपी की आवाज बने रहे।
आंदोलन की आड़ में दंगा और हिंसा!
आंदोलन की सच्चाई आप स्वयं देख लीजिए..
एक युवक केमिकल स्प्रे शांत खड़ी हुई पुलिस पर छिड़कने लगता है,
फिर पुलिस उसे पकड़ती है और पीटने लगती है,
फिर प्रदर्शनकारी ऐसा दिखाने लगते हैं जैसे पुलिस ने युवक को बिना गलती पीटा हो..
@yadavakhilesh श्रीमान जी ये ढोंग और दिखावा करने से वोट नहीं मिलने वाला!
याद करिए जब उत्तर प्रदेश में आपकी सरकार थी अपनी पुलिस ने इन्हीं तथाकथित शंकराचार्य पर लाठियां बरसाई थी और इनको लहुलुहान कर दिया था।