NHAI finally "indirectly" concedes to the massive corruption in the ₹4700 crores Lucknow-Kanpur Expressway which was inaugurated by two cabinet ministers and UP CM Yogi Adityanath, less than a month ago.
The contractor PNC infratech limited, a company owned by brother of BJP MP Naveen Jain, has been declared a non performer. The company was earlier accused of bribing NHAI officials but still managed to bag a contract worth ₹4700 crores.
Hi @NHAI_Official
Why have you awarded two projects worth ₹3483 crores to the same PNC infratech which you are planning to declare as "non performer" for its shoddy execution of ₹4700 Lucknow-Kanpur Expressway? If this is not corruption, what is?
फ्रांस में बिकने वाली Fanta और भारत में बिकने वाली Fanta में जमीन आसमान का खतरा है।
•फ्रेंच फैंटा में लगभग 4 चम्मच चीनी होती है। •भारतीय फैंटा में लगभग 10 चम्मच चीनी होती है।
•फ्रेंच फैंटा में असली संतरे होते हैं।
•भारतीय फैंटा में संतरे नहीं होते और इसमें "संतरे के स्वाद" का उपयोग किया जाता है।
•फ्रेंच फैंटा में लगभग 69 कैलोरी होती हैं। •भारतीय फैंटा में लगभग 168 कैलोरी होती हैं।
एक ही ब्रांड के दोनों पेय पदार्थ हैं लेकिन विदेश में स्वास्थ्यवर्धक लेकिन भारत में हानिकारक ऐसा क्यों?
क्या भारत के लोगों को ये कम्पनियां जानवर समझती हैं??
“ना किसी से भीख मांग रहे
हम अपना हक़ मांग रहे…”
ये प्रदर्शन है राजस्थान का
राजस्थान के जालौर जिले में एक शासकीय स्कूल में शिक्षक की कमी से परेशान छात्राओं ने स्कूल में तालाबंद करने के बाद रोड जाम की भी धमकी दी। अभी समझाया बुझा कर इनको उठाया गया है।
The Hindu में छपी खबर के मुताबिक
राष्ट्रीय राजधानी में पहली बार सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों पर पैलेट गन और शॉक बैटन इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया।
डॉक्टरों के अनुसार पीड़ित के आंखों के नीचे फंसे पैलेट निकाल दिए गए हैं, लेकिन गर्दन में फंसा एक पैलेट निकालने के लिए दूसरी सर्जरी करनी पड़ सकती है। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट को 'झूठा' बताया है।
सोमवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लगभग 80 प्रदर्शनकारियों में से कम-से-कम एक व्यक्ति को पैलेट गन से चोट लगी है। यह जानकारी लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के एक सूत्र ने दी, जहां उसका इलाज चल रहा है।
घायल प्रदर्शनकारी की पहचान शेख इरशाद मंसूरी (25) के रूप में हुई है। उनके एक मित्र ने द हिंदू को बताया कि मंसूरी को पालीका बाज़ार के पास रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की वर्दी पहने एक जवान ने निशाना बनाया।
यदि यह दावा सही है, तो दिल्ली में आम नागरिकों पर सुरक्षा बलों द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल का यह पहला ज्ञात मामला होगा। मंगलवार को एक महिला का वीडियो भी सामने आया, जिसमें कथित तौर पर उसे शॉक बैटन से झटका दिया जा रहा था। दिल्ली में शॉक बैटन के इस्तेमाल का भी यह पहला ज्ञात मामला बताया जा रहा है।
पैलेट गन और शॉक बैटन, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की दंगा-रोधी इकाई RAF के उपकरणों का हिस्सा हैं। सोमवार को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में RAF तैनात थी।
हालांकि CRPF ने कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन सोशल मीडिया पर मंसूरी के घावों का वीडियो साझा होने के बाद नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल किए जाने के दावे पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि की गई जानकारी साझा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।
पहले भी हुआ है इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, पैलेट गन का इस्तेमाल इससे पहले 2024 के किसान आंदोलन के दौरान खनौरी और शंभू बॉर्डर पर किए जाने के आरोप लगे थे। 2023 में मणिपुर हिंसा के दौरान भी पैलेट गन के इस्तेमाल से भारी विवाद हुआ था। इससे पहले 2016 में जम्मू-कश्मीर में भी पैलेट गन के इस्तेमाल से कई लोगों की आंखों की रोशनी आंशिक या पूरी तरह चली गई थी।
घायल की हालत
मंगलवार को मंसूरी की सर्जरी कर उनके शरीर के ऊपरी हिस्से में फंसे कई पैलेट निकाल दिए गए। डॉक्टरों के अनुसार, गर्दन में एक पैलेट रक्त वाहिका के बहुत करीब फंसा हुआ है, जिसे अभी नहीं निकाला जा सका है और इसके लिए दूसरी सर्जरी करनी पड़ सकती है।
अस्पताल के एक सूत्र ने बताया कि शाम तक घायलों की संख्या बढ़कर 83 हो गई थी, जिनमें नागरिक और पुलिसकर्मी दोनों शामिल हैं।
एक अन्य प्रदर्शनकारी को भी आंख में चोट लगने के बाद एम्स भेजा गया। डॉक्टरों का अनुमान है कि उसकी चोट भी पैलेट से लगी हो सकती है। वहीं, 15 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी को अन्य चोटों के कारण कलावती सरन चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
मंगलवार दोपहर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने अस्पताल जाकर मंसूरी से मुलाकात की। मंसूरी के एक मित्र के अनुसार, उनके चेहरे और पूरे शरीर पर 30–40 चोटों के निशान हैं। मित्र ने बताया कि नड्डा ने जब पूछा कि वह प्रदर्शन में क्यों आए थे, तो मंसूरी ने जवाब दिया कि "शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं" के कारण वह आंदोलन में शामिल हुए।
इसके अलावा, 21 वर्षीय साक्षी नाम की एक महिला, जो पुलिस कार्रवाई में गंभीर रूप से घायल हुई थीं, राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। उनके परिवार का कहना है कि उनकी हालत पहले की तुलना में बेहतर है।
Rapid Action Force और Delhi Police के अधिकारियों इन जवानों को पहचानो. इसमें मुश्किल नहीं होनी चाहिए. इन सबको कड़ी सजा दो. और उनसे कहो कि इस लड़के से माफ़ी मांगें.
कल @DelhiPolice की मौजूदगी में इस आदमी ने बच्चों को दौड़ा दौड़ाकर मारा, दिल्ली पुलिस भी इसका खुलकर साथ दे रही थी।
ये कौन है? क्या करता है? दिल्ली पुलिस ने इसको स्पेशल अधिकार क्यों दे रखे थे?
We have marched to PM Modi’s house to demand answers from him for the brutalities against young students yesterday.
The Government doesn’t want to take any accountability or does it want to have a debate on it in Parliament.
PM and HM must resign for destroying the future of India’s youth.
ये कहानी इतनी मज़ेदार है, इस ख़त से समझिये ... 2016 में इस कॉलेज को विदिशा से शिफ्ट किया जाता है, NCTE की टीम आती है कहती है भव्य बिल्डिंग है, लैब है ... सब ठीक है ... हक़ीक़त में 10 साल बाद भी खेत है!
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
“न्यूज़क्लिक”मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करते हुए कहा कि इस मामले को जारी रखना “कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग (Gross Abuse of the Process of Law)” था।
अदालत ने पाया कि FIR में लगाए गए आरोपों से न तो धोखाधड़ी (Section 420 IPC) का अपराध बनता है और न ही आपराधिक न्यासभंग (Section 406 IPC) का। अदालत ने यह भी माना कि विदेशी निवेश (FDI), शेयरों का मूल्यांकन तथा निवेश समझौते अपने-आप में किसी आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं हैं।
फैसले में यह भी दर्ज है कि RBI की प्रतिक्रिया के अनुसार विदेशी निवेश स्वचालित मार्ग (automatic route) से प्राप्त हुआ था तथा FEMA नियमों के उल्लंघन का कोई संकेत नहीं मिला था।
चूंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का ECIR और PMLA जांच इसी FIR पर आधारित थे, FIR के निरस्त होने के बाद ED की कार्रवाई का आधार भी कमजोर पड़ गया।
यह फैसला केवल न्यूज़क्लिक तक सीमित नहीं है। यह जांच एजेंसियों की शक्तियों, मीडिया की स्वतंत्रता और आपराधिक कानून के उपयोग की न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।
न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ के बारे में तरह तरह की कहानियाँ मीडिया में लीक की गईं थीं । कई दर्जन पत्रकारों / मीडिया कर्मियों की रोज़ी रोटी इस पोर्टल के सहारे थी । पोर्टल को सरकार की नीतियों से असहमति की कीमत चुकानी पड़ी । पता नहीं इस सब की क्या भरपाई कैसे होगी लेकिन यह फ़ैसला फिर भी आज के हालात में बहुत ही महत्वपूर्ण है ।