Ajeet Bharti’s comments expose a deeply disturbing contempt for dignity, equality and constitutional values.
Derogatory remarks targeting SC citizens, elderlies, and women cannot be dismissed as “free speech”. Political disagreement is legitimate, casteist abuse and humiliation are not.
The Constitution that Ambedkar gave India protects even the right of people like Bharti to speak. That freedom comes with a responsibility not to weaponise caste and hatred. Our public discourse cannot be allowed to sink to this level.
केंद्रीय मंत्रियों के बंगलों के मरम्मत और रखरखाव पर खर्च किए गए
•2004 से 2009 = 93.50 करोड़
•2014-15 से 2025-26 = 547.68 करोड़
2025 से 2026 में 92 करोड़ अकेले खर्च हुए
आप लोग लगातार मेहनत करके टैक्स देते रहिए ताकि हमारे मंत्रियों के बंगले चमकते रहें।
मरीज़ की हालत गंभीर थी, मुंह से ब्लड निकल रहा था, बदायूं के अस्पताल ने बरेली के लिए रेफर किया लेकिन एंबुलेंस कांवड़ियों के बीच फंसी हुई, कांवड़ियों द्वारा रोड पर डांस, गाना, मनोरंजन किया जा रहा है मरीज़ की जान जाती रहें।
सड़कें तो चलने के लिए होती हैं न? सड़कें तो मुसाफ़िर को उसकी मंज़िल, बीमार को अस्पताल, मज़दूर को उसके काम तक पहुंचाने के लिए होती हैं न? फ़िर कांवड़ियों के लिए सरकार द्वारा रास्ते क्यों ब्लॉक किए जा रहे हैं? क्यों ऐसे इंतेज़ाम नहीं किए गए कि किसी को समस्याएं पेश न आए?
जिस एससी-एसटी वर्ग को मिलने वाले फंड को भीख कहते थे उसी को डकार गए।
तुम तो अपने भगवान का चंदा भी खा जाते हो तो ये कर सकते हो यही तुम्हारी मेरिट है।
इस भीख छोड़ देना चाहिए था अब मुंह कैसे दिखाओगे?
बड़ी ख़बर-
ये इस दौर की सबसे बड़ी ख़बर है।
योगी Vs मोदी?
आखिर क्यों सीबीआई जांच से डरे योगी?
आखिर उस फाइल में ऐसा क्या था?
क्या झारखंड खोल देगा वो बंद फाइल?
कहानी कुछ इस तरह से है कि जिस कंपनी ने झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में खेल किया,
उसी ने यूपी में विधानसभा और विधान परिषद की नियुक्तियों में खेल किया।
आरोप लगा कि नियुक्तियों में नेताओं और अधिकारियों के लड़के-बच्चों को भर लिया।
मामला हाईकोर्ट गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए।
आप ये जानकर दंग रह जाएंगे कि इस आदेश के खिलाफ खुद योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई ताकि सीबीआई जांच न होने पाए।
सोचिए, केंद्र में भी बीजेपी की सरकार!
यूपी में भी बीजेपी की सरकार!
और इसके बावजूद योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई कि सीबीआई इन्क्वायरी न होने पाए!!
मगर क्यों?
आखिर किस बात का डर था?
यूपी की विधान सभा और विधान परिषद की नियुक्तियों में किस-किस के रिश्तेदार का सिलेक्शन हुआ था?
बात सिर्फ प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे, प्रमुख सचिव राजेश सिंह, प्रमुख सचिव जेपी सिंह,
डिप्टी लोकायुक्त दिनेश सिंह आदि के लड़के-बच्चे और रिश्तेदारों के चयन भर की थी,
या खेल और बड़ा था?
कायदे से हेमंत सोरेन सरकार को चाहिए कि इस मामले में सीबीआई इन्क्वायरी का आर्डर कर दे,
और इस कंपनी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच करा दी जाए।
क्या पता ऐसा सच सामने आए कि आप सन्न रह जाएं!
ज़ीरो टॉलरेंस की सरकार का असली सच देखकर दंग रह जाएं!!
(नोट- संलग्नक अटैच-
सुप्रीम कोर्ट के आर्डर का पन्ना
और झारखंड में खेल करने वाली यूपी की कंपनी की पूरी स्टोरी।
खबर का लिंक कमेंट बॉक्स में)
@PMOIndia@narendramodi@HemantSorenJMM
• नाम - अभय तिवारी
• मेरिट - जन्मजात (इनके लोगों के अनुसार)
• आरक्षण - 10% आबादी को 10% आरक्षण
फिर भी इसे और इसके पूरे परिवार को झारखंड में नौकरी लेने के लिए सेटिंग का सहारा लेना पड़ा।
ये स्थिति है इन जन्मजात मेरिटधारियों की.
ये सब देखकर तो यही कहना है CGL रद्द होनी चाहिए।
@ajeetbharti जिनके बाप दादा और पुरखे का पेट भिक्षाम देहि- भिक्षाम देहि कह के भरता था उनके बच्चे आरक्षण को भीख बता रहे है, किसी गांव में एक गरीब ब्राह्मण रहता था के बच्चे 😂
20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प में एक पुलिस कांस्टेबल की मौत होने का दावा करते हुए एक पोस्टर वायरल है. हकीकत में अमित नामक इस पुलिसकर्मी की मौत रोड एक्सीडेंट में हुई थी. #AltNewsVideoReport#AltNews#FactCheck