"यदि तुम गाज़ी बनना चाहते हो, तो पहले राजपूत को मारो, और उसके बाद काफ़र (गैर-मुस्लिम) को मारो "
यह दोहा उस दौर की युद्ध-मानसिकता को दर्शाता है।
इससे संकेत मिलता है कि मुस्लिम के लिए राजपूत सबसे कठिन और सबसे ख़तरनाक प्रतिद्वंद्वियों में गिने जाते थे।
भूदान आंदोलन में बिहार–झारखंड से कुल 22 लाख एकड़ भूमि दान दी गई थी, जिसमें से 15 लाख एकड़ से अधिक भूमि क्षत्रिय (राजपूत) समाज द्वारा दान की गई थी |
तुलनात्मक रूप से यह दिल्ली के क्षेत्रफल का लगभग चार गुना है। और यह दान मात्र 02 प्रदेश के क्षत्रियों से प्राप्त है,
विचार करिए, पुरे भारतवर्ष के क्षत्रियों ने भूमिहीनों, वंचितों, पिछड़ों, गरीबों के लिए कितना जमीन दान किया...
आज उन्हीं दानकर्ताओं को शोषणकर्ता बताया जा रहा...
उन्हीं क्षत्रियों के बेटो व पोतों को गा’ली दिया जा रहा, फर्जी नैरेटिव गढ़कर उन्हें शोषणकर्ता बताकर उनका छवि धूमिल किया जा रहा है...
क्या उन क्षत्रियों के संघर्ष, बलिदान, त्याग व दान का यही ईनाम देने के लायक है आप ....?
खैर, प्रमुख 𝗥𝗔𝗝𝗣𝗨𝗧 दानकर्ता 👇
योगी आदित्यनाथ को लेकर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह एक साधू हैं और उनको ठाकुर कहने का काम सपा बहादुर अखिलेश यादव करते रहते हैं।
अब सवाल है कि इस देश में अब खुद को ठाकुर कहना गुनाह हो गया है? कोई खुद को खुलकर अब क्षत्रिय भी नहीं कह सकता और यदि कह देगा तो उसके खिलाफ फर्जी नैरेटिव चलकर अपमानित किया जाएगा?
इसी देश में शंकराचार्य से लेकर सिटिंग जज तक ब्राह्मण होने पर गर्व कर सकते हैं, बड़ा से बड़ा नेता खुद को ब्राह्मण और OBC सीना तानकर कह सकता है, लेकिन एक क्षत्रिय ऐसा नहीं कह सकता।
ठाकुरों को ऐसा अपराधबोध में डुबो दिया गया है, जो पहले कभी नहीं हुआ।
आने वाला समय बेहद भयानक है!
अभी मैंने पिछली पोस्ट पर ज़ब UP SI रिजल्ट मे क्षत्रियो के घटते चयन पर पोस्ट किया था तो उसमे आए कमेंट से तो यही लग रहा था की जिस समाज को ये पता ही न हो की दिक्क़त कहा से आ रही है उसका तो यही हाल होगा, अब लोग शराब मुर्गे को दोष दे रहे, मतलब सच मे? शराब आज की डेट मे तो मेरी जानकारी मे सबसे ज्यादा बनिया पी रहे है या सिक्ख पी रहे है फिर वो कामयाब कैसे है? मांस खाने से कौन सा दिक्क़त है? मीट खाने से तो कम से कम शरीर तो मजबूत होगा |
दिक्क़त कई चीजों की है जिसे समझना बहुत ज्यादा मुश्किल नहीँ है |
ऐसा नहीँ है की क्षत्रिय युवा पढ़ नहीँ रहे है, बहुत पढ़ रहे तभी तो उप्र मे UPPCS और UPSC जैसे परीक्षाओं मे ब्राह्मण के बाद सबसे ज्यादा चयन क्षत्रियो का हो रहा है, प्रोफेसर जैसे पदों पर ब्राह्मण के बाद सबसे ज्यादा चयन मे है, फिर दिक्क़त कहा आ रही?
दिक्कत ये है की चयन देने वाले जिले सीमित है, वही इस लाल घेरे मे दिखने वाले जिले " जौनपुर चंदोली आजमगढ़ बलिया गाजीपुर मऊ गोरखपुर गोण्डा अयोध्या सुल्तानपुर प्रतापगढ़ रायबरेली अमेठी " इन्ही जिलों से चयन हो रहा है, इसका अंदाजा इससे लगा लीजिये की जितना आजमगढ़ जौनपुर प्रतापगढ़ जिले को मिलाकर UPSC मे क्षत्रिय चयनित हुए थे वो राजस्थान मप्र गुजरात छतिसगढ़ झारखण्ड पश्चिम यूपी को सम्मलित मिलाने पर भी ज्यादा थे | इसी तरह UPPCS मे जौनपुर आजमगढ़ प्रतापगढ़ रायबरेली जिलों से कुल क्षत्रियो का चयन पश्चिम यूपी + बुंदेलखंड के क्षत्रियो के कुल चयन से ज्यादा था | मैं ज़ब पश्चिम यूपी की बात कर रहा हु तो वो मैनपुरी कन्नौज से शुरू हो जाता है |
अच्छा ज्यादातर लोगों की ये गलतफहमी है की पुरब ( पूर्वांचल + अवध ) मे क्षत्रियो की आबादी ज्यादा है जबकि ये सच नहीं है, पुरब की तुलना मे पश्चिम मे क्षत्रियो की आबादी काफ़ी ज्यादा है, जैसी घनी बसावट क्षत्रियो की पश्चिम यूपी मे दिखती है वैसी बसावट पुरब मे सिर्फ बलिया जिले मे है |
जिस तरह की घनी बसवाट क्षत्रियो की अलीगढ़ आगरा मथुरा हापुड़ हाथरस गाजियाबाद गौतम बुद्ध नगर बुलंदशहर मे है कायदे से तो इसी बेल्ट से 100+ चयन होना चाहिए था, लेकिन हकीकत मे 30 पर भी डाउट है |
इसी तरह बुंदेलखंड का हाल है, उधर से भी चयन ना के बराबर दिखता है, मुझे नही लगता की बुंदेलखंड से कुल 20 भी चयन हुआ होगा, 20 क्या मुझे 15 मे भी डाउट है |
इसी तरह मिर्ज़ापुर सोनभद्र इलाहबाद कुशीनगर देवरिया महराजगंज बस्ती साइड क्षत्रियो का चयन सिर्फ नाम मात्र का होता है,भूले भटके लोग चयनित होते रहते है
अब आप ये सोचिये की 75% क्षत्रिय आबादी जहाँ पर है वहा से चयन नाम मात्र का हो रहा है तो फिर ओवर ऑल रिजल्ट कहा से अच्छा होगा?
ब्राह्मणो यादवों का चयन इसलिए ज्यादा है की उनका रिजल्ट हर जगह से है, सिर्फ एक क्षेत्र विशेष से नहीँ |
सबसे बड़ी बात ये हाल सिर्फ परीक्षाओं मे चयन का नहीँ बल्कि क्षत्रियो मे अगर आप बड़े नेता, बाहुबली, बड़े ठेकेदार, बिजनेस मैंन, ब्योरोक्रेट्स, स्पोर्ट्स प्रसन, पत्रकार अगर खोजेंगे तो आपको इसी बेल्ट ( लाल घेरे ) मे मिलेंगे | एक क्षेत्र के भरोसे पुरे राज्य का प्रदर्शन बेहतर कभी नहीँ हो सकता |
और भी बहुत कारण है उनको अगले पोस्ट मे लिखूंगा...
Satendra Gaharwar
बुलंदशहर जिले में यूपी पुलिस के सिपाही सुधीर ठाकुर ने कथित तौर पर सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर जान दे दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्होंने एक ऑडियो संदेश छोड़ा, जिसमें थानेदार राहुल चौधरी, मुंशी अंकित गुर्जर और एक अन्य पुलिसकर्मी पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
“सपनों को अब नहीं तय करनी होगी दूरियों की मंज़िल…”
वर्ष 2019 में जिस राजकीय महिला महाविद्यालय की आधारशिला रखी गई थी, वह अब इसी सत्र से शुरू होने जा रहा है। हाल ही में लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से भेंट के दौरान इस महाविद्यालय को तत्काल शुरू करने का आग्रह किया गया था। माननीय मुख्यमंत्री जी के संवेदनशील निर्णय के परिणामस्वरूप अब 16 जुलाई से ऑनलाइन प्रवेश प्रारंभ होगा। यह जेवर की हर बेटी के सपनों को नई उड़ान देने वाला निर्णय है। इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का हृदय से आभार एवं क्षेत्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। #MLAJewar
#Jewar #YogiAdityanath #GirlsCollege #EducationForAll #WomenEmpowerment #Development
@chandan55056383@RanaSudhirG चले जाये मठ वापस हमें उनके रहते नुकसान ही हुआ है ना कोई मंत्री ना प्रशासन में बड़े पदो पर हिन्दुओ में सबसे ज्यादा एनकाउंटर यही सब मिला है बाबा के रहते
पन्ना में साल 2023 के जन्माष्टमी के दिन महारानी राजेश्वरी देवी के साथ जुगल किशोर मंदिर के गुंडे पुजारियों की करतूत।
नरोत्तम मिश्रा की पुलिस ने गुंडई करने वाले पुजारियों के बयान पर पीड़िता महारानी को गिरफ्तार किया था।
देश के यशस्वी रक्षामंत्री श्री @rajnathsingh जी आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ एवं दीर्घायु रहें। #MLAJewar
विजय मिश्रा जी की 100 करोड़ सम्पत्ति की दाल मिल महाराष्ट्र मे सीज कर दी गई है, कुल मिलाकर अब तक 250 करोड़ तक की सम्पत्ति उप्र सरकार ने सीज कर दी है |
प्रशासन द्वारा ये कारवाई होने के बाद मैं देख रहा हूँ सोशल मिडिया पर कई ब्राह्मण पेज / बड़े हैंडलर ये लिख रहे है की योगी जी ब्राह्मणो पर अत्याचार कर रहे है, सिर्फ ब्राह्मणो को परेशान कर रहे है, क्या ऐसी कारवाई किसी क्षत्रिय व्यक्तियों पर हुई हो तो बताये, क्षत्रियो पर कोई कार्रवाई नहीँ हो रही है
तो भाई ये गोरखपुर के सुधीर सिँह है, आप जहाँ 100 करोड़ की सम्पत्ति सीज किये जाने के बाद हाय तौबा मचाये पड़े है वही इनकी एक बार मे ही 400 करोड़ की सम्पत्ति सीज कर दी गई थी, उसके बाद 105 करोड़ की सम्पत्ति सीज की गई, एक बार 60 करोड़ की सम्पत्ति सीज की गई | ब्लॉक प्रमुख नहीँ बनने दिया गया, जेल भेजा गया, जमानत पर बाहर तो फिर चार्ज लगाकर जेल भेजा गया |मैं चैलेंज दे रहा हूँ यूपी मे किसी ब्राह्मण की एकबार मे इतनी सम्पत्ति सीज हुई रही हो तो बताये |
और ये गोरखपुर मे इकलौते नहीँ बल्कि प्रदीप सिँह,अजीत शाही की भी सैंकड़ो करोड़ की सम्पत्ति सीज की गई |
आजमगढ़ मउ मे कुंटू सिँह, संग्राम सिँह, उद्धव सिँह, अखंड प्रताप सिँह, रमेश काका, त्रिदेव ब्रदर्स की न जाने कितनी सम्पत्ति सीज की गई |
एक महीने के अंदर ही 3 क्षत्रियो के एनकाउंटर हुए है, अजय सिँह सिपाही और रमेश काका को आजीवन करावास इधर बीच ही हुआ है | हिन्दुओ मे सर्वाधिक 36 क्षत्रियो को एनकाउंटर हुए है |
इसीलिए योगी जी को कोसना है जमकर कोसो उससे मुझे समस्या नहीँ है, ये आपकी व्यक्तिगत मर्जी है पसंद नापसंद है, लेकिन उसकी आड़ मे ये झूठ मत फैलाओ की क्षत्रियो पर कार्रवाई नहीँ हुई है, तब सच बताना हमारी मजबूरी हो जाती है |
बाकी मुस्लिमो के बाद सबसे ज्यादा कार्रवाई ही क्षत्रियो पर हुआ है...
Satendra gaharwar
90° पर झुका हुआ पहलवान सामंती ठाकुर है जिसकी जमीन पूज्यनीय ब्राह्मण प्रधान ने कब्जा कर लिया है, मामला गोंडा का है
गजब का ठाकुरवाद चल रहा है यूपी में
@gondapolice@dmgonda2
भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के 48 टैंको को नेस्तनाबूद करते हुए बसंतर की लड़ाई में अपनी अदम्य वीरता, अद्भुत युद्ध कौशल और पराक्रम से राष्ट्र का गौरव बढ़ाने वाले, माँ भारती के महान सपूत, महावीर चक्र से अलंकृत लेफ्टिनेंट जनरल हणुत सिंह जी जसोल की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
ये शिवराज सिंह हैं। हमीरपुर पुलिस के उत्पीड़न के हालिया शिकार।
अगर आपके नाम में "सिंह" है तो आप विपक्ष और जातिवादी मीडिया के निशाने पर तो हैं ही, आप सरकार एवं पुलिस प्रशासन के निशाने पर भी हैं।
आप "सिंह" हैं तो आपको हर तरफ हेय दृष्टि से देखा जाएगा। आपके खिलाफ मुकदमे के लिए अभियान चलाया जाएगा। मुकदमा दर्ज कराने के बाद गलत तरीके से सजा दिलाने के लिए मीडिया अभियान चलाएगी। कभी कभी निष्पक्ष दिखने के लिए एनकाउंटर भी कर दिया जाएगा।
आज "सिंह" की यही सच्चाई है। ये सिंह चाहे सवर्ण हो या दलित या ओबीसी, लेकिन बदनाम एक जमात को किया जाएगा।
मैं खासकर यूपी के #क्षत्रिय समाज से कहना चाहता हूं इस पदयात्रा में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले। जिस जिस जिले गांव से यात्रा गुजरे ज्यादा न सही तो 1-2 किलोमीटर चलकर दिग्गी राजा का हौसला बढ़ायें। उम्र के इस पड़ाव पर जो व्यक्ति अपने राम के लिए 1000 किमी पैदल चल सकता है तो उसका साथ दीजिए।
आप पत्रकार हैं, आखिर कभी तो सच बोलिए। राम मंदिर की लड़ाई कोई 20-30 साल की नहीं है, बल्कि 500 वर्षों का संघर्ष है।
VHP तो पहली बार इस मुद्दे में 1964 में कूदी थी। आरएसएस ने इसे अपना आधिकारिक एजेंडा 1982 में बनाया। भाजपा 1986 में आई और मूर्तियाँ 1949 में महंत दिग्विजयनाथ की हिन्दू महासभा तथा अयोध्या के संतों द्वारा स्थापित की गई थीं।
महंत दिग्विजयनाथ अपनी अखिल भारतीय रामायण सभा के माध्यम से 1939 से ही राम मंदिर के लिए कार्य कर रहे थे, जिसमें उनकी सहायता अयोध्या के तत्कालीन मजिस्ट्रेट ठाकुर गुरुदत्त सिंह ने की।
इसके अलावा, कोर्ट में पहली याचिका हिन्दू महासभा की ओर से गोपाल सिंह विशारद ने 1950 में दायर की।
इसके बाद दूसरी याचिका दिगंबर अखाड़ा के स्वामी रामचंद्र परमहंस द्वारा दायर की गई।
फिर तीसरी याचिका निर्मोही अखाड़ा द्वारा 1959 में दायर की गई।
सबसे पहले राम मंदिर के काज हेतु 1528 में अपने प्राणों की आहुति देने वाले हँसबर के राजा रणविजय सिंह और उनकी रानी जया कुमारी थे।
1678 में राजेपुर के गजराज सिंह, सीरसिंदा के राजा गोपाल सिंह तथा बाबा केशव दास ने प्राणों की आहुति दी।
फिर 1800 में राजा गुरुदत्त सिंह और पिपरा के राजा राज कुमार सिंह तथा बाद में मकरही, गोंडा और अमेठी के राजाओं ने भी अपने प्राणों की आहुति दी, 1847-57 के बीच पूजा हेतु एक चबूतरा भी बनाया गया।
इसके साथ ही जयपुर के राजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने राम जन्मभूमि की रक्षा में जो योगदान दिया, वह संभवतः किसी भी शासक का सबसे अधिक दस्तावेजीकृत योगदान है।
सन 1717 में सवाई जय सिंह ने अयोध्या के नवाब बरहान-उल-मुल्क शहादत खाँ से अयोध्या में 983 एकड़ भूमि खरीदी और वहाँ जयसिंहपुरा की स्थापना की। इस भूमि में श्रीराम जन्मस्थान भी सम्मिलित था।
यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण इसलिए था क्योंकि मुग़ल राज्य ने भी इस स्वामित्व को सन 1717 से विधिक मान्यता दी। जयपुर के सिटी पैलेस में स्थित कपड़द्वारा संग्रह में इसके दस्तावेज़ मौजूद हैं।
इसके अतिरिक्त, सवाई जय सिंह द्वारा जयपुर के निर्मोही अखाड़े के बलानंद मठ के वीर साधुओं की एक सैनिक छावनी अयोध्या में स्थापित की गई, ताकि राम जन्मभूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उसके अलावा भी कई महत्त्वपूर्ण लोगों का इसमें संघर्ष रहा है, जिनके नाम निम्नलिखित हैं:
महंत अभिराम दास, निर्वाणी अखाड़ा
के. के. नायर, तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट
महंत रघुनाथ दास (वाद संख्या 4 में प्रतिवादी)
प्रियादत्त राम (वाद संख्या 4 में प्रतिवादी)
धर्म दास (महंत अभिराम दास के शिष्य)
रमेश चंद्र त्रिपाठी (वाद संख्या 4 में प्रतिवादी)
मदन मोहन गुप्ता, अखिल भारतीय श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति (संयोजक)
हरि शंकर जैन, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा (अधिवक्ता)
शर्म करिए थोड़ी, @chitraaum जी। राम मंदिर की लड़ाई को केवल भाजपा और संघ तक सीमित करके आप उन असंख्य बलिदानियों का मज़ाक बना रही हैं, जिन्होंने इसके लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
बहुत सारे क्षत्रियो को ये भ्रम है कि OBC आरक्षण से पहले ,वे राजनीतिक तौर पर या सरकारी नोकरियो में या बड़े पदों पर मजबूत थे। लेकिन OBC आरक्षण से कमजोर हुए है, तो आइये आज इसी पर बात ही कर ली जाए।
आजादी के बाद कैबिनेट मंत्रियों की संख्या सरकारों में:-
1947- 0
1952-0
1957-0
1962- 1 ( सत्य नारायण सिंह ,सूचना मंत्रालय)
1964- 1( राम सुभाग सिंह 4 दिन के लिए, फिर शास्त्री जी की सरकार में 1 साल के लिए)
1967- 2 ( करन सिंह ,दिनेश सिंह ,फिर दिनेश सिंह को हटाकर राम सुभाग सिंह,फिर इन्हें हटाकर सत्यनाराण सिन्हा)
1971- 1 ( करण सिंह)
1977-0
1979- 1 ( करण सिंह )
1980- 2 ( भीष्म नारायण सिंह,वीपी सिंह)
1985- 3 ( वीपी सिंह ,चन्द्रशेखर सिंह ,अर्जुन सिंह,फिर वीपी सिंह चन्द्रशेखर जी की जगह वीर बहादुर सिंह, दिनेश सिंह )
1989- 0
अब OBC आरक्षण के बाद:-
1990- 2 ( संजय सिंह, कल्याण सिंह कालवी)
1991- 2 ( दिनेश सिंह, अर्जुन सिंह)
1996- 1 ( जसवंत सिंह, बाजपेयी जी की सरकार)
1996- 1( रघुवंश प्रसाद सिंह,HD देवगौड़ा की सरकार)
1998- 1( जसवंत सिंह)
1999- 1-3 ( जसवंत सिंह ,1 साल के लिए राजनाथ सिंह,2 साल के लिए राजीव रूडी )
2004- 4 ( आजादी के इतने साल बाद जाकर पहली बार 5 साल के लिए रघुवंश बाबू, अर्जुन सिंह केबिनेट मंत्री ,बाकी 2 नाम शंकर सिंह बाघेला, सिंह,सन्तोष मोहन देव )
2009- 3-5 ( चंद्रेश कुमारी कटोच, वीरभद्र सिंह, हरीश रावत, जितेंद्र सिंह, किशोर देव)
2014- 5-6 ( पहली बार आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिला और बडे पद मिले)
(राजनाथ सिंह, नरेंद्र तोमर, राधा मोहन सिंह,वीके सिंह,जितेंद्र सिंह, राजीव रूडी ,राजीव रूडी (7) रक्षा रहे )
2019- 5-6 ( राजनाथ सिंह,आरके सिंह, गजेंद्र शेखावत, जितेंद्र सिंह, नरेंद्र तोमर, अनुराग ठाकुर )
2024-3 ( राजनाथ सिंह, गजेंद्र शेखावत, जितेंद्र सिंह)
अब आइये नौकरियो में:-
आंर्मी चीफ - महराज श्री राजेन्द्र सिंह जडेजा ( 1955, 36 दिन)
वीके सिंह( 2010 में ,2 साल 60 दिन)
विपिन रावत (2016,3 साल)
एयरफोर्स चीफ-
राकेश भदौरिया ( 2019,2 साल)
नवल स्टाफ चीफ -2
विजय शेखावत- 1993-1996
माधवेन्द्र सिंह- 2001-2004
अब आते है सुप्रीम कोर्ट ओर इलहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पर:-
सुप्रीम कोर्ट -
1- भुहनेश्वर प्रसाद सिन्हा ( 1959-64)
2-कमल नारायण सिंह ( 1991 ,17 दिन)
3-टीस ठाकुर ( 2015, 1 साल 31दिन)
इलाहाबाद हाईकोर्ट-1
शिव कीर्ति सिंह ( 2012 ,1 साल )
1- कमल नारायण सिंह
अब आइए मुख्यमंत्री पर ,OBC आरक्षण 1990 से पहले पूरे भारत मे 5 साल CM रहने वाले क्षत्रिय CM:-
1- अर्जुन सिंह ( मप्र)
2- वीर भद्र सिंह ( हिमाचल)
आज तक भारत रत्न- 0
अब ये बताओ भाई ,जब पहले क्षत्रियो का राजनीति में वर्चस्व था। फिर क्यों नहीं केबिनेट मंत्री बन रहे थे?
क्यों नही 5 साल Cm बन रहे थे ? क्यों नही बड़े पदों पर थे?
क्यों नही आंर्मी चीफ, चीफ़ जस्टिस बन रहे थे?क्यों नही किसी को भारत रत्न मिला ?
ये सच है कि OBC आरक्षण से पहले सवर्णों का हर फील्ड में वर्चस्व था ।
लेकिन ध्यान रहे ,उन सवर्णों में क्षत्रिय कहीं नहीं थे।ये सवर्ण शब्द में ही खेल है। जहां बड़ी चालाकी से सत्य को छुपा दिया जाता है ।
क्षत्रियो की तो असल राजनीतिक ताकत ,प्रसाशनिक ताकत OBC आरक्षण के बाद बढ़ी है ।
क्षत्रियो की असल कमर तो जमींदारी एक्ट ओर सीलिंग एक्ट लगाने से टूटी है ।
जिसके जिम्मेदार नेहरू जी, सरदार पटेल जी, इंदिरा जी और यूपी में बल्लभ पंत जी ,चौधरी चरण सिंह जी है |
लेकिन दुर्भाग्य देखिये कि क्षत्रिय इन सभी की जयंती धूम धाम से मनाएंगे ।लेकिन इनकी नजर में वीपी सिंह जी गद्दार है और उसी वीपी सिंह की सरकार को, बाहर से समर्थन देने वाले अटल जी महान हैं....
साभार:- Satendra singh
बांग्लादेश में दीपू दास लिंचिंग का मुख्य अभियुक्त हसन सहादत बिजली के तार से लटका हुआ पाया गया
उस्मान हादी से शुरू हुआ ये सिलसिला अब तक कई क्रांतिकारियों को निपटा चुका है
अज्ञात बंदूक़धारियों का ख़ौफ़ अब बांग्लादेश भी पहुंच चुका है