Elon Musk spent $290M to elect Trump. Now he wants to spend up to $200M to buy a Senate seat in Texas and keep Republicans in control of Congress.
That’s not democracy. That’s oligarchy.
End Citizens United. Ban super PACs. Get billionaires—from both parties—out of elections.
Hindus trolling Muslims for Cousin Marriage is very hypocritical when it is a norm amongst South-Indian/Maharashtrian Hindus to an extent that even Marathi Brahmins engage in Cousin and even Uncle-Niece marriages, It's their "culture".
नेता वो होता है
जो अपने केबिनेट मेंबर्स, पार्टी अध्यक्ष और तमाम दूसरे सहयोगियों को धकिया कर, कैमरे की जद से बाहर फेंकवा देता है। और खुद स्पॉटलाइट मे..
शेर की तरह अकेला चलता है।
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लेकिन जो युवाओं औऱ महिलाओ को आगे कर, उन्हें ताकत देने के लिए, खुद चुपचाप पीछे खड़ा हो जाता है उसे नेता नहीं,
महज, फैसिलिटेटर समझना चाहिए।
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और 21 वीं सदी के हिंदुस्तान को नेता नहीं,
नई पीढ़ी की क्षमताओं को, चुपचाप पीछे रहकर ताकत देने वाला फैसिलिटेटर ही चाहिए।।
वेल्डन राहुल!!
❤️🥰
CAG रिपोर्ट पर गंभीर सवाल!
BSNL ने सरकारी टावरों के इस्तेमाल का किराया करीब 10 वर्षों तक नहीं लिया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
यह साज़िश है या गंभीर लापरवाही? जिम्मेदार कौन है और कार्रवाई कब होगी?
जनता के पैसे का हिसाब दो!
थाने, औऱ कचहरी मे आप खडे हो गए जनता के लिए, तो सही नेता हो गए।
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चुनाव विकास से नहीं, कनेक्ट से जीते जाते हैं।
तहसील के मामूली काम, थाने मे सुनवाई मे दिए सहयोग का क्या महत्व होता है, सामान्य तौर पर डायनेस्टी, उच्च शिक्षित या ब्यूरोक्रेटिक बैकग्राऊँड से निकले नेता यह बात कभी नहीं समझ पाते।
दूसरी तरफ स्टूडेंट पॉलिटिक्स या जनसंघर्ष से निकले नेताओ को यह समझ, घुट्टी मे मिली होती है। इसलिए राजनीती मे वे रेजिलियेंट होते हैँ। कठिन समय गले पड़ जाये, तो भी बार बार बाउंस बैक होते हैं।
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तो डायनेस्ट शिरोमणि राहुल को, थाने मे एफ़आईआर के लिए खडे होते देखना सुखद है। बाकी के कांग्रेसी नेता भी यह करने लगे, तो कांग्रेस को
अबकी बार - 400 पार होते देर न लगेगी।
Pic 1 - see who's he
Pic 2 - he is attacking CJP Member
Pic 3 - This same guy is now saying he was attacked by CJP Members.
The classic Modi-Shah modus operandi..!!
हर गुजरते लम्हे के साथ BJP का किरदार 70-80 के दशक की फिल्मों के खलनायक जैसा होता जा रहा है...
स्कूल ठीक कराने के लिए गांव जाओ—तो गुंडे भेजकर पिटाई करवाओ।
पुलिस थाने में शिकायत करने जाओ—तो शिकायत दर्ज मत करो।
बलात्कारी को बार-बार पैरोल पर रिहा करो।
वीडियो पर सैकड़ों लड़कियों का बलात्कार करने वाले शख्स के लिए वोट मांगो।
मीडिया के जरिए दुष्प्रचार और झूठ फैलाओ।
और जब सवाल पूछे जाएं—तो मीडिया के प्रोपेगेंडा के जरिए असली मुद्दे से ध्यान भटकाओ!
सुधर jao!
All levels of disgust have been crossed today.
रामपुरा, कंवरपुरा में पिछले काफ़ी सालों से स्कूल भैंसों के तबेले में चल रहा है। लेकिन जब हम वहाँ निरीक्षण करने पहुंचे तो सरेआम मारपीट, पत्थरबाजी की गई। कारों के शीशे फोड़े गए, टीम पर पत्थर बरसाये गए। कपड़े फाड़े गए। ट्यूब में पत्थर डालकर टीम को मारा गया। मेरे कपड़े फाड़े गए।
यह सब मदन दिलावर के कहने पर हुआ है। मदन दिलावर को बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहे, यह मंज़ूर है। लेकिन स्कूल ठीक हो जाये, यह मंज़ूर नहीं।
मदन दिलावर जी - आपने आज गुंडे भेजकर पूरे देश में राजस्थान को शर्मसार कर दिया। लेकिन हम इस गुंडागर्दी से डरने वाले लोग नहीं है।
स्कूल तो ठीक कराने ही होंगे।
The excuse for hiding the names of those behind ₹35,715 crore in Bank of Baroda loan write-offs during just 6 years is “privacy” under Section 8(1)(j) of the RTI Act.
If that is the logic, why are small borrowers publicly shamed and subjected to public recovery action?
These are public funds, and the public has a right to know who benefited from such massive write-offs.
One can’t help but ask: are these big borrowers, who have caused considerable losses to the bank, connected to the BJP - and is that why they are being shielded?
हिमंता बिस्वा सरमा के मुख्यमंत्री बनने से पहले 5 वर्षों में प्रचार पर 145 करोड़ रुपये खर्च हुए जबकि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद के 5 वर्षों में यह खर्च बढ़कर 460.82 करोड़ रुपये हो गया. और यह पैसा गया किसके पास?
@Basantrajsonu
और फिर इसके बाद BJP और VHP ने डिबेट में अपने प्रवक्ताओं को भेजना बंद कर दिया. 😂😂😂 अब राजनैतिक विश्लेषकों के नाम पर वे अपने समर्थक भेज रहे हैं:
संदीप चौधरी: मैं वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियाँ बोल रहा हूँ, आप मुझे उनका अर्थ बताइए
VHP प्रवक्ता: क्या आप मेरा टेस्ट ले रहे हैं?
संदीप चौधरी: हाँ 😂
VHP प्रवक्ता: आप वंदे मातरम् का विरोध करने वालों से सवाल क्यों नहीं पूछते?
संदीप चौधरी: पहले आप मेरे सवाल का जवाब दीजिए 😂
VHP प्रवक्ता: आप कम्युनिस्ट मानसिकता दिखा रहे हैं।
संदीप चौधरी: कोई बात नहीं, दूसरों का टेस्ट लेने की कला मैंने आप लोगों से ही सीखी है 😂
VHP प्रवक्ता: मुझे आपकी आवाज़ सुनाई नहीं दे रही।
संदीप चौधरी: फिर आप वहाँ से मेरी बातों का जवाब कैसे दे रहे हैं? 😂
A couple in Chennai booked a flat in 2019.
Paid ₹46 lakh.
The builder promised possession in 2022.
2022 came. No flat.
2023. No flat.
2024. No flat.
They kept paying EMIs on a home loan.
And rent the house they were living in.
For 6 years they paid double.
In 2025 they approached RERA.
The builder kept asking for extensions.
They moved to the consumer court.
2025 ruling:
The builder was ordered to refund ₹46 lakh.
Plus 19% interest from 2019.
That’s ₹46 lakh becoming ₹1.06 crore.
The builder was delayed by 6 years.
The court added ₹60 lakh in interest.
If your builder has delayed possession – you have two options: RERA or consumer court.
Both can order interest on your money.
Most homebuyers don’t know they can get interest.