देश को अब ऐसी राजनीति चाहिए जो जाति-धर्म के शोर से ऊपर उठकर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, भ्रष्टाचार और न्याय जैसे असली मुद्दों पर बात करे।
समय आ गया है कि जनता खुद आगे आए और एक ऐसी नई राजनीतिक शक्ति बनाए —
जो किसी परिवार या पूंजीपति की नहीं, बल्कि आम नागरिक की आवाज़ हो। इसलिए आइए साफ राजनीति, जवाबदेही और वास्तविक बदलाव के लिए एक नया संगठित जनान्दोलन शुरू करते हैं
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बिहार के भरत तिवारी हत्याकांड मामले में सभी समाज के लोग आवाज़ उठा रहे है। एक दलित महिला भरत को भगवान बोल रही थी। अब यह पासवान चाचा रो रहे हैं
इससे इतना समझ आ रहा कि समाजसेवी भरत तिवारी ने ग्रामीणों के लिए बहुत कार्य किए है। यह किसी एक समाज का नहीं बल्कि सर्व समाज का मामला है।
इस Video को तब तक शेयर करें जब तक इन सभी कर्मचारियों के ऊपर सख्त कार्रवाई नहीं होती
ये हाल है @IndiaPostOffice के ना ही समय से खुलता है ना ही डिलीवरी मिलती है।
कमीशनबाज़ी का खेल चरम पर, छूते ही ढह गया आज़मगढ़ का डिवाइडर! भाजपा राज में जनता की गाढ़ी कमाई पर ठेकेदारों का सरेआम डाका।
यूपी में तथाकथित 'ज़ीरो टॉलरेंस' की हवा निकालता आज़मगढ़ का यह वीडियो देखिए! जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स से बने डिवाइडर की क्वालिटी ऐसी है कि हाथ लगाते ही वह ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है। ठेकेदारों और अफ़सरों की जुगलबंदी, हिस्सेदारी और अंधाधुंध कमीशनबाज़ी ने प्रदेश के विकास को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया है।
सरकार दावों के विज्ञापन छपवाने में व्यस्त है और यहाँ धरातल पर जनता के पैसे को दोनों हाथों से लूटा जा रहा है। आख़िर इस महा-घोटाले और घटिया निर्माण के असली ज़िम्मेदार अफ़सरों और ठेकेदारों पर बुलडोज़र कब चलेगा?
उम्र बढ़ने के साथ शरीर भले ही कमजोर पड़ने लगे, लेकिन असली ताकत इंसान के हौसलों और सोच में होती है। अगर इरादे मजबूत हों तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है।
ये हैं रोशनी देवी। इन्होंने 68 साल की उम्र में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और आज 71 साल की उम्र में भी ऐसा प्रदर्शन कर रही हैं कि कई युवा लड़के लड़कियां भी पीछे रह जाएं। 103 किलोग्राम वजन उठाकर दादी ने साबित कर दिया कि जुनून, मेहनत और आत्मविश्वास के आगे उम्र की कोई सीमा नहीं होती।
*भरत तिवारी की मौत: एक सवाल, जो हर नागरिक को बेचैन करता है*
आज सवाल केवल भरत तिवारी का नहीं है।
सवाल यह है कि क्या इस देश में किसी व्यक्ति को अपनी बात रखने, आत्मसमर्पण करने और अदालत में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए या नहीं?
भरत तिवारी कौन था, उसके ऊपर क्या आरोप थे, वह निर्दोष था या दोषी—इन सबका निर्णय अदालत को करना था। लेकिन यदि यह सच है कि आत्मसमर्पण के बाद उसे गोली मारी गई, तो यह केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि न्याय की उस भावना पर चोट है जिस पर हमारा संविधान खड़ा है।
एक मां ने बेटा खोया है, एक परिवार ने अपना सहारा खोया है। किसी भी मृत्यु पर संवेदनशील समाज का सिर झुक जाता है। क्योंकि इंसान की जान वापस नहीं लाई जा सकती। अदालत की सजा बाद में भी दी जा सकती थी, लेकिन जीवन समाप्त हो जाने के बाद कोई फैसला उस जीवन को वापस नहीं लौटा सकता।
लोकतंत्र की ताकत बंदूक की गोली में नहीं, कानून की किताब में होती है। यदि अपराधी को भी अदालत में सुनवाई का अधिकार नहीं मिलेगा, तो फिर आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
आज बिहार का यह मामला पूरे देश के सामने एक आईना बनकर खड़ा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर सच क्या है? क्या मुठभेड़ वास्तव में अपरिहार्य थी या कोई और रास्ता भी था? क्या कानून की प्रक्रिया का पालन हुआ? क्या किसी व्यक्ति को अपनी सफाई देने का अवसर मिला?
ये प्रश्न किसी एक दल, जाति या विचारधारा के नहीं हैं। ये प्रश्न लोकतंत्र, संविधान और मानवता के हैं।
हम अपराध का समर्थन नहीं करते। हम अपराधियों के प्रति सहानुभूति की बात भी नहीं कर रहे। लेकिन हम यह अवश्य कहते हैं कि अपराध से लड़ते-लड़ते कहीं हम कानून को ही कमजोर न कर दें।
क्योंकि जिस दिन न्यायालय की जगह सड़क या बंदूक फैसला करने लगेगी, उस दिन कोई भी व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएगा।
भरत तिवारी अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनकी मौत एक ऐसा प्रश्न छोड़ गई है जिसका उत्तर बिहार ही नहीं, पूरे देश को चाहिए।
यदि वह दोषी था, तो अदालत सजा देती।
यदि वह निर्दोष था, तो न्याय उसे बचा लेता।
लेकिन जब किसी की मौत पहले हो जाए और फैसला बाद में खोजा जाए, तब लोकतंत्र के माथे पर एक प्रश्नचिह्न खड़ा हो जाता है।
सत्य जो भी हो, उसकी निष्पक्ष जांच हो।
न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई दे।
#भरत_तिवारी #न्याय #संविधान #RuleOfLaw #Bihar #JusticeForTruth
वो दिन लद गए जब जनता को लूट लिया जाता था वेवकूफ बना दिया जाता था आज के समय जनता जागरूक और होशियार हो गई है, अभी तक पुलिस बाले जनता का चालान ढूंढ ढूंढकर काटते थे अब जनता वीडियो बना बनाकर काट रही है।
मेरठ पुलिस के SP सिटी विनायक भोसले जी खुद बिना हेलमेट मोटरसाइकिल पर अपने दरोगाओं के साथ चलते नजर आ रहे हैं
जबकि साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने भी हेलमेट नहीं लगाया है।
जब एक IPS अधिकारी ही यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखाई दें, तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जाए?
क्या यातायात नियम सिर्फ जनता के लिए हैं या पुलिस अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं?
महाराष्ट्र के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टरों द्वारा शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। इसमें एक पीड़ित व्यक्ति का कहना है कि उसके परिवार की एक महिला हॉस्पिटल में मर चुकी थी, लेकिन रात भर डॉक्टर बहाना बनाते रहे कि इलाज में पैसा लगेगा।
घर वाले बेचारे कर्ज लेकर पैसे अस्पताल में भरते रहे और सुबह होते ही डॉक्टरों ने दुखभरी खबर सुनाई कि हम बचा नहीं पाए।
लेकिन मरीज का कहना है कि लड़की रात में ही मर चुकी थी। पूरे मामले की जांच में महाराष्ट्र पुलिस लग चुकी है।
किसी के अंतिम यात्रा के लिए ये भीड़ देखकर आप समझ सकते हैं कि वो अपने गाँव समाज के लिए कितना किया होगा और उसका उनके जीवन में कितना अहम योगदान रहा होगा।
कई नेता जीवन भर चप्पल घिस देंगे अपना तब भी ये भीड़ नहीं जुटा पाएंगे। ये भीड़ उस तथाकथित पागल भरत तिवारी के लिए है जो अपने हक अधिकार के लिए सिस्टम तक को झुका दिया।
भरत तिवारी निसंदेह एक देशभक्त, निर्भीक, क़ाबिल, दूरदर्शी और सम्मान योग्य थे हैं और रहेंगे।
शत शत नमन 🙏
मैंने कुछ साल पहले एक सरकारी बैंक से लोन लिया था 4 लाख 69000 का.
तीन साल तक EMI समय पर दिया..कोविड आया तो 2 EMI बाउंस हुईं..मुझे बैंक द्वारा 3 हज़ार की पेनल्टी लगी..लोन पूरा भरवाया गया. कोई छुट् नहीं
लेकि इन साहब के केस में तो जबरदस्त बात हुईं
अनिल अम्बानी की RCOM पर 53 बैंको के 49000 करोड़ बकाया थे.
सबसे ज्यादा SBI का 13000 करोड़ रूपये थे
इन्होने तीन साल तक एक पैसा नहीं भरा.
NCLT ने कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया.
IBC यानि बैंक इंसोल्वेसी और BANKRUPTCY नियम बताकर 49000 करोड़ का लोन मात्र 455 करोड़ में सेटल कर दिया गया.
अकॉउंट को फ़्रॉड घोषित करने के बाद आम आदमी को तो पुलिस पकड़ लेतीं है.
पर बड़े लोगों को कौन पकड़े? कहने को तो Ed सीबीआई जाँच हुईं है, हो रही होगी.
आम आदमी का 490 रूपये रह जाये तो लोन क्लोज नहीं होता, यहाँ इनके 49 हज़ार करोड़ रह गए तब भी लोन क्लोज??
किसकी मेहरबानी से, नाम नहीं लिखूंगा 😊
यूपी: उमेश घर पर थे, उनकी इलेक्ट्रिक बाइक UP-13-CN-7659 भी घर पर थी, अचानक उमेश के फोन पर बाइक के 1000₹ चालान का मिसेज आया। चालान में नम्बर उमेश की बाइक का था, जबकि तस्वीर R-1 फाइव बाइक की थी। ये कारनामा बुलंदशहर ट्रैफिक पुलिस का है।
DCM बृजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग का कबाड़ा कर दिया है।
उसका सिर्फ़ इतना काम है दिखावटी छापा मारना और अखिलेश यादव जी को बदनाम करना..
अपने विभाग में क्या हो रहा क्या नहीं उससे कोई मतलब नहीं है।
ये हैं तेलंगाना के जल बोर्ड के GM
₹80,000 Salary
जब इन्होंने अपनी बेटी की शादी में ₹35 करोड़ खर्च किए, तो विभाग और ACB के कान खड़े हो गए
फिर इनकी संपत्ति की जांच शुरू हुई तो इनके घर से
» Bank खातों में ₹100 करोड़ की रकम
» 18 एकड़ जमीन के कागज
» कई Plot और Flats की रजिस्ट्री
» भारी मात्रा में Gold, Diamond की ज्वैलरी मिले
सोचिए ये तो एक हैं जो पकड़ा गया ऐसे और कितने होंगे हमारे सिस्टम में
जब लाखों लोग कड़ी मेहनत करते हैं, टैक्स भरते है उसी टैक्स के पैसे से System में बैठे ऐसे भ्रष्ट लोग करोड़पति बन जाते हैं
इन सरकारी अधिकारियों के पास इतनी बड़ी संपत्ति कैसे इकट्ठी हो जाती है ❓
फर्जी एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी जब अपने गांव बिलौटी शाहपुर से पैदल यात्रा करके मध्य प्रदेश बागेश्वर धाम पहुंचे थे।
बड़ा सवाल- अपराधी ऐसे होते हैं क्या? #JusticeForBharatTiwari#FakeEncounter#bihar
इंसानियत को शर्मसार करती भीड़
₹20 की कोल्ड ड्रिंक के लिए। बच्चा मार खाता रहा
पब्लिक तमाशा देखती रही*****, किसी से इतना नहीं हुआ
बच्चे को बचा ले******। क्या टाइम आ गया है
#मत_बदलना_राहुल
लोगों को लगता है कि राहुल गांधी को सफलता पाने के लिए बदलना होगा। उन्हें अपनी राजनीति का तरीका दूसरे “सफल” नेताओं से सीखना चाहिए।
लेकिन हकीकत ठीक उलट है। राहुल गांधी को नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े हिस्से को अपनी सोच बदलनी होगी।
हम राहुल को इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि उनका एक खास व्यक्तित्व है ईमानदार, सरल, पढ़ा-लिखा और बिना नफरत के राजनीति करने वाला।
हम उन्हें राजीव गांधी का बेटा होने के कारण नहीं, बल्कि उनके अपने व्यक्तित्व के कारण समर्थन देते हैं। अगर आप उसी व्यक्तित्व को बदलने पर तुले हैं, तो भले ही वो चुनाव जीत जाएं, वो उन्हीं की कैटेगरी में आ जाएंगे जिन्हें हम पहले से देखते आ रहे हैं।
अब्राहम लिंकन अपनी जिंदगी में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 25-30 चुनाव हार चुके थे। उस वक्त शायद उन्हें भी “पप्पू” ही कहा जाता रहा होगा।
लेकिन हार-जीत से ज्यादा मायने रखता है कि हार के बावजूद अपने उसूलों पर टिके रहना।
मैंने अपने ऑफिस में उन लोगों को भी राहुल को “पप्पू” कहते सुना है जिन्हें यह तक नहीं पता कि उच्च सदन और निम्न सदन किसे कहते हैं।
नफरत, विभाजन और दंगे फैलाकर, कोर्ट में गंभीर आरोप झेलकर चुनाव जीतने को अगर आप “समझदारी” कहते हैं, तो शायद वो समझदार है। लेकिन देश और समाज के लिए हितकर बिल्कुल नहीं है। और न ही उन्हें चुनने वाले समझदार कहे जा सकते हैं।
केवल हिटलर दोषी नहीं था, दोषी जर्मनी की जनता भी थी। केवल मुसोलिनी दोषी नहीं था, दोषी इटली की जनता भी थी।
अगर पूरा समाज उन्माद और नफरत पसंद करता है, तो एक नेता का व्यक्तित्व बदल जाने से क्या फर्क पड़ेगा? लोग दूसरा उन्मादी चुन लेंगे।
क्योंकि उन्हें वो सोच चाहिए जिसे उन्होंने सालों तक पोषित किया है समझिए.... जब कोई कट्टर नेता दूसरे धर्म, जाति या नस्ल के खिलाफ जहर उगलकर सत्ता में आता है और फिर एक दिन उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है, वह प्रेम की बात करने लगता है, तो उसी नेता को उसके समर्थक गालियां देने लगते हैं।
यानी समस्या सिर्फ नेता की नहीं, समाज की भी है — जो व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके नफरती व्यक्तित्व को पसंद करता है। इसलिए समाज को भी बदलना होगा।
जब आप कहते हैं कि “राहुल गांधी राजनीति के लिए नहीं बने”, तो इसका मतलब आप खुद मान चुके हैं कि आज की राजनीति झूठ, फरेब, छल और मक्कारी से भरी पड़ी है।
और जिन्हें आप सत्ता सौंपते हैं, वे उसी गंदगी में अच्छे से फिट बैठते हैं। तो फिर उनमें कौन-से गुण हैं?
राहुल अगर राजनीति में न होते तो कहीं इंजीनियर, डॉक्टर या प्रोफेसर होते। क्या वहाँ भी वे “फिट” नहीं होते?
हम किसी से यह नहीं कह सकते कि “तुम सफेद कपड़े पहने हो तो कीचड़ में मत आओ”। हमें कीचड़ साफ करना है, ताकि सफेद कपड़े पहनकर भी इंसान आ-जा सके।
“राजनीति तो ऐसी ही होती है” कहकर छुट्टी नहीं मिलेगी। क्यों ऐसी होती है? क्यों हम इसे बदलने की कोशिश नहीं करते?
हम कातिलों, अपराधियों और धर्म-जाति के नाम पर लोगों को लड़ाने वालों को कभी नहीं चुनेंगे।
इसलिए आईटी सेल वाला काम छोड़िए। फेक फोटो, एडिटेड ट्वीट्स फैलाने से बेहतर है कि खुद समझिए, परखिए और सोचिए।देश को बदलना है तो पहले सोच को बदलना होगा।
जन्मदिन मुबारक हो राहुल हो,💐 "Leader of Opposition"