अगर उस दिन किसी ने उसकी बात सुन ली होती, तो शायद अमायरा आज ज़िंदा होती।
9 साल की अमायरा... कक्षा 4 की छात्रा। बताया जा रहा है कि वह लगभग 18 महीनों तक लगातार बुलिंग झेलती रही। वह बार-बार अपने शिक्षकों से मदद मांगती रही। उसके माता-पिता भी शिकायत करते रहे। लेकिन हर बार जवाब मिला— "Adjust कर लो."
पर एक बच्चा आखिर कितना "Adjust" करे❓️
जिस दिन उसकी मौत हुई, उस दिन भी CCTV फुटेज के अनुसार वह कई बार मदद मांगने गई। अगर उस समय कोई एक शिक्षक उसकी बात सुन लेता... अगर कोई एक वयस्क उसके दर्द को गंभीरता से ले लेता... शायद आज वह ज़िंदा होती।
यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह हम सबके लिए आईना है।
बुलिंग कोई "बच्चों की शरारत" नहीं होती। बार-बार किया गया अपमान, गालियाँ और मानसिक प्रताड़ना एक बच्चे को अंदर से तोड़ सकती हैं।
हर स्कूल में केवल स्मार्ट क्लासरूम नहीं, बल्कि:
• प्रभावी Anti-Bullying Policy,
• प्रशिक्षित Counsellors,
• संवेदनशील शिक्षक,
• और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
किसी भी बच्चे की मदद की पुकार को "Adjust कर लो" कहकर कभी खारिज मत कीजिए।
एक बच्चा जब मदद मांगता है, तो वह ध्यान नहीं..... जीवन मांग रहा होता है।
#JusticeForAmaira #StopBullying #ChildSafety #MentalHealth #SchoolSafety
In Raebareli, Uttar Pradesh, a young man, while transporting the remains of his younger sister, recounted the heart-breaking story of his 10-year-old sister's passing. She had undergone tonsil surgery and her death is attributed to alleged medical negligence at a private hospital.
Over to you, @brajeshpathakup ji.
भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है। मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम के लिए न्याय की आवाज़ उठाने पर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार सहित अन्य लोगों पर किया प्रहार और लाठी चार्ज बेहद निंदनीय है।
जब प्रदेश-प्रमुख ही सरेआम एक मृतक की माँ के साथ असंवेदनशील होने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो उनकी पुलिस से कोई उम्मीद करना बेमानी है।
घोर निंदनीय!
जिन कोंचिगवालों ने पेपर लीक, शिक्षकों व शिक्षार्थियों की समस्याओं व अन्य मुद्दों पर आवाज़ उठाई है, उन पर लगे मुक़दमे वापस हों। 2027 में हम सरकार में आकर ‘नौकरी का कैलेंडर’ बनाकर बेरोज़गारी की समस्या का समयबद्ध-निश्चित समाधान निकालेंगे। संविदा की ठेकेदारी में कमीशन खाने व पीडीए का आरक्षण मारने के चक्कर में, नौकरी न देने की ‘भाजपाई साज़िश’ का अब पर्दाफाश हो गया है।
हमने हमेशा कहा है आज फिर दोहरा रहे हैं:
नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं!
सच तो ये है कि ‘भर्ती-नौकरी’ के पीछे भाजपाइयों और उनके unregistered-underground संगी-साथियों का बेहद ख़ुफ़िया चौतरफ़ा प्लान काम कर रहा है।
1.एक बड़ा plan तो PDA का आरक्षण लूटना है।
2.नौकरियों में NFS (Not Found Suitable) के माध्यम से पहले ही लोगों की छँटनी कर देना है।
3.Lateral Entry के बहाने अपनी संकीर्ण सोच के लोगों को जगह-जगह Adjust और Set करना है।
4.नौकरी-भर्ती की प्रक्रिया को रोकना और अटकाना है।
भाजपा परीक्षा प्रणाली का वो रावण है जिसके दस चेहरे हैं… इन दशानन के दस रूप हैं:
- परीक्षा प्रणाली में हेरफेर-हेराफेरी करनेवाले भाजपाई ,
- गलत प्रश्नोत्तर के पेपर छपवानेवाले भाजपाई,
- पेपर लीक करवानेवाले भाजपाई
- परीक्षा की तारीख़ें टलवानेवाले भाजपाई,
- परीक्षा रद्द करवानेवाले भाजपाई,
- कॉपी बदलवानेवाले भाजपाई,
- आरक्षण मारनेवाले भाजपाई,
- रिज़ल्ट लटकानेवाले भाजपाई,
- भर्ती-नौकरी कोर्ट में ले जानेवाले भाजपाई
- कोर्ट में परिणाम उलझानेवाले भाजपाई
इसीलिए हम प्रयागराज में संपन्न हुई ‘विज़न इंडिया’ : पीडीए समिट में कही गई, अपनी बात फिर दोहरा रहे हैं :
शिक्षा अच्छी हो,
परीक्षा सच्ची हो,
तो तरक़्क़ी पक्की हो!
युवा कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
#UPSC
#UPPCS
#NEET
#NEET_REEXAM
#TET
#69000
#SSC
मध्य प्रदेश पुलिस में जिस DSP संतोष कुमार पटेल का तबादला उनकी पत्नी रोशनी पटेल की फेसबुक पोस्ट के बाद हुआ, अब उनकी बालाघाट से विदाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सात गांवों के लोगों ने उनको बैलगाड़ी पर बैठाकर विदा किया. बारिश के दौरान भी उनकी गाड़ी को रोककर आशीर्वाद देने की होड़ सी लगी रही.
#DSPSantoshKumar #Farewell #MadhyaPradesh
आज कस्बा विषधन में रसूलाबाद-अरौल-मकनपुर मार्ग का निरीक्षण किया गया। सड़क की दयनीय स्थिति को देखकर चिंता व्यक्त की गई।
सरकार द्वारा बड़े-बड़े मंचों से यह दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की सड़कें "अमेरिका जैसी" हैं और प्रदेश में कहीं कोई गड्ढा नहीं है। परंतु बिसधन कस्बे में इस मुख्य मार्ग की वास्तविक स्थिति इसके ठीक विपरीत है।
इस मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे और जलभराव की स्थिति है। कीचड़ और गड्ढों के कारण यहां प्रतिदिन दुर्घटनाएं और हादसे हो रहे हैं, जिससे अनेक राहगीरों को जानमाल की क्षति का सामना करना पड़ रहा है।
यह मार्ग दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ता है। स्कूली बच्चे, मरीज, व्यापारी और आम नागरिक प्रतिदिन इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण सामग्री के कारण सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। लंबे समय से न मरम्मत कार्य हुआ है और न ही संबंधित विभाग द्वारा कोई सुध ली जा रही है।
संबंधित विभाग और शासन से मांग की जाती है:
1.तत्काल प्रभाव से इस मार्ग की मरम्मत कराकर सभी गड्ढों को भरा जाए।
2.उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ सड़क का पुनर्निर्माण* कराया जाए।
3.दोषी ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों* के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जनता की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि शीघ्र इस मार्ग की मरम्मत नहीं की गई, तो बिल्हौर की जनता के साथ मिलकर सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
@DMKanpur@yadavakhilesh@myogiadityanath@myogioffice@PMOIndia@narendramodi
हमीरपुर जिले की बहादुर पुलिस का बड़ा कारनामा
सदर कोतवाली पुलिस ने वारंटी शिवराज नाम की जगह दूसरे शिवराज को उठा लिया
निर्दोष शिवराज को में टॉर्चर किया, थर्ड डिग्री दी। सीने और हेड पर जमकर जूतों से मारा।
पुलिस के टॉर्चर से निर्दोष को हेड इंजरी हो गई, शरीर पर गंभीर चोटे आई। डॉक्टर्स ने घायल को कानपुर किया रेफर, गंभीर हालत में शिवराज का इलाज़ जारी है।।
ये वर्दी पहने दारोगा गिरीश मिश्रा है, इनपर आरोप है कि इन्होने ट्रक ड्राइवर के 20 हजार रूपये चोरी कर लिए।
ट्रक ड्राइवर के मुताबिक- वर्दी पहनकर घाटमपुर से हमीरपुर के लिए ट्रक में बैठा था दरोगा गिरीश मिश्रा, जैसे ही ट्रक हमीरपुर पहुंची तभी 20 हजार रखे रूपये चोरी किया और उतरकर भागने लगा।
ड्राइवर ने दौड़ कर दारोगा जी को पकड़ा और बीच सड़क पर कुटाई कर दी। दारोगा को चालक ने पुलिस के हवाले कर दिया। सदर कोतवाली के यमुना पुल का मामला
हमीरपुर, उत्तर प्रदेश
बेहद दुखद, निंदनीय, शर्मनाक समाचार : उप्र के हमीरपुर में पुलिस ने मिलते-जुलते नाम के चक्कर में बेकसूर को दी ‘थर्ड डिग्री’ प्रताड़ना।
उप्र की जनता थाने के सभी दोषियों को नौकरी से बर्ख़ास्त करने की माँग कर रही है। शायद कल ही मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि प्रशासन को संवेदनशील होना चाहिए, लगता है पुलिस मुख्यालय ने इसे सुना नहीं या वो मुख्यमंत्री जी की सुनते नहीं हैं। अपनी चमचमाती छविवाले मुख्यमंत्री जी का बस चलता तो इस बात पर गृहमंत्री को ही बर्ख़ास्त कर देते लेकिन मजबूरी ये है कि उस पद पर भी वो ख़ुद ही बैठे हैं। इसलिए हम इस मामले में, उनसे किसी भी कार्रवाई की उम्मीद नहीं रखते हैं। मुख्यमंत्री जी के अंदर अगर कहीं अंश मात्र भी मानवता या किसी के दर्द के लिए संवेदना या भावना है तो अपने विवेक से कार्रवाई करके दिखाएं।
‘संविधान’ को नहीं माननेवाले भाजपा और उनके संगी-साथी कम से कम दान दी गई
सोने की ‘रामचरितमानस’ को तो छोड़ देते।
भाजपाई हिसाब से लेकर किताब तक सबमें घपला करते हैं।
जनता पूछ रही है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के उप्र के पहले दौरे में जनता ने ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ के गुस्से की वजह से उनका बहिष्कार तो किया ही है, क्या डबल इंजन की टकराहट भी इस सन्नाटे की वजह है?
दरअसल उप्र का भाजपा संगठन जन-आक्रोश के डर के मारे अपने घरों में दुबका बैठा है या प्रदेश से बाहर भाग गया है, नहीं तो कुछ लोग तो ज़रूर दिखाई देते, बेचारे ‘नव-निर्मित अध्यक्ष जी’ हाथ हिलाने के लिए तरसते दिखाई न देते। आज उन्हें भी पता चला होगा कि ‘5’ बड़ा या ‘7’।
भगवान से धोखा करनेवालों का दुर्भाग्य देखिए कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करनेवालों का झंडा तक उठानेवाले अब कोई नहीं बचा, वो भी किराये पर ही लाए गए।
उप्र ने भाजपा की रिटर्न टिकट कन्फ़र्म कर दी है।
"दो मासूम बच्चे बेबसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं,पिता डेढ़ साल पहले जेल गया, मां बच्चों को छोड़कर चली गई"
यूपी के हापुड़ के थाना गढ़मुक्तेश्वर इलाके में बेसहारा बच्चे बेबसी की जिंदगी बिताने पर मजबूर हैं। जिला प्रशासन सहित अन्य जिम्मेदारों ने आंखे मूंद ली।
यह पिछले 12 वर्षों के इतिहास में किसी भी न्यायालय द्वारा दिया गया अकेला न्याय है जिसमें संविधान, देश और आम आदमी के मौलिक अधिकारों की विजय हुई है। यह बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस माधव जामदार हैं। इस विद्वान न्यायाधीश ने अपने एक फैसले में जो कहा है वो नजीर है, नजीर रहेगीं। इनका फैसला बीजेपी और मोदी एवं शाह की आँखों के किरचों की तरह चुभेगी।
दरअसल सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी के खिलाफ एक साल के लिए जिला बदर आदेश पारित किया था। सईद केंद्र सरकार के विभिन्न फैसलों जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे
जस्टिस जामदार इस आदेश पर आगबबूला हो गए। उन्होंने कहा "यह क्या है? सभी नागरिकों को भारतीय सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते ।यह सब क्या है? अब इतने सारे पेपर लीक हो रहे हैं। अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे। यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।
याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'बीजेपी सरकार मुर्दाबाद', 'अमित शाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए.।नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
जस्टिस जामदार ने आगे मौखिक रूप से टिप्पणी की कि पुलिस नागरिकों को सिर्फ इसलिए बाहर नहीं कर सकती क्योंकि उन्होंने सरकार के फैसलों का विरोध किया है।"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है, वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "हॉर्स ट्रेडिंग" पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा "कल परसों एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में क्या चर्चा हो रही थी कि प्रेसिडिंग ऑफिसर कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे शिफ्ट हो गया।यह क्या है? वैसे भी पूरे महाराष्ट्र में हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। आपके पास कुछ FIRs हैं।केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।" और सईद अहमद का जिला बदर रद्द कर दिया गया।
सैल्यूट जस्टिस माधव, सैल्यूट बॉम्बे हाईकोर्ट
“दिमाग सही कर लो. काम तुम नहीं, तुम्हारा बाप करेगा “
योगी सरकार के मंत्री का लहजा देखिए. अपने ही कार्यकर्ता पर कैसे भड़के हैं. ये सब यूपी के जालौन में हुआ है.