@yadavakhilesh अगर AK 47 से कोई घायल होता है ये आपकी जानकारी है तो आप नशे में है..
जरूर छात्रों ने जय श्री राम बोला होगा तब ही ऐसा हुआ है.
क्योंकि मुलायम सिंह भी तो जय श्री राम सुनते ही गोली मरवा देते थे सैकड़ों मरवा कर सरजू में बहा दिए थे
@BattaKashmiri जंतर मंतर पर GB रोड से कुछ वैश्या और किन्नर भी आ रहे थे लेकिन उन्होंने जब देखा कि यहां तो सारे वैश्या और किन्नर पहले से मौजूद है तो वो वही से वापस चले गए.
Today was a rainy day in Kolkata, and 25,000 Bengali nationalists participated in the Tiranga Yatra to show their support for India and Prime Minister Narendra Modi. Now is the time for nationalists and youth to unite against those filthy sewer vermin(cockroaches), with black hit spray👍👍👍
@Mrsinha जंतर मंतर पर GB रोड से कुछ वैश्या और किन्नर भी आ रहे थे लेकिन उन्होंने जब देखा कि यहां तो सारे वैश्या और किन्नर पहले से मौजूद है तो वो वही से वापस चले गए.
CJP के 20 जुलाई के संसद मार्च में अभिजीत दीपके ने 400 हिस्ट्री शीटर्स को क्यों बुलाया। पुलिस के अनुसार 400 हिस्ट्री शीटर्स की पहचान कर ली है...
अब दिल्ली पुलिस इनको मिट्टी में मिलाएगी...
CJP के 20 जुलाई के संसद मार्च में अभिजीत दीपके ने 400 हिस्ट्री शीटर्स को क्यों बुलाया। पुलिस के अनुसार 400 हिस्ट्री शीटर्स की पहचान कर ली है...
अब दिल्ली पुलिस इनको मिट्टी में मिलाएगी...
यह देखिए यह वामपंथी किस तरह से मंदिरों के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं
पहले सीसीटीवी फुटेज में यह दोनों अंबेडकरवादी वामपंथी लड़कियां नजर आ रही हैं जो पुलिस की लाठी चार्ज में कनॉट प्लेस हनुमानजी मंदिर के अंदर शरण ली
इन्हें बाकायदा मंदिर में आने दिया गया इन्हें बिठाया गया इन्हें अपनी भी पिलाया गया
फिर जब उन्होंने शरण ले लिया तब उनके मन में ख्याल आया अरे यह तो मंदिर है यह तो मस्जिद नहीं है
मस्जिद होता तब इन्हें तारीफ करने का एक बढ़िया बहाना मिलता
उन्होंने सोचा तो क्यों ना मंदिरों को बदनाम किया जाए और उसके बाद इस वामपंथी लड़की ने इस मंदिर को बदनाम करना शुरू कर दिया जिस मंदिर ने इन्हें शरण दिया था
कि मैं मंदिर में आई तो मुझे मेरी जाति पूछी गई और जब पता चला कि मैं दलित हूं तब मुझे मंदिर में नहीं घुसने दिया गया
उफ्फ हे भगवान कोई इतना कैसे गिर सकता है
यह देखिए यह वामपंथी किस तरह से मंदिरों के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं
पहले सीसीटीवी फुटेज में यह दोनों अंबेडकरवादी वामपंथी लड़कियां नजर आ रही हैं जो पुलिस की लाठी चार्ज में कनॉट प्लेस हनुमानजी मंदिर के अंदर शरण ली
इन्हें बाकायदा मंदिर में आने दिया गया इन्हें बिठाया गया इन्हें अपनी भी पिलाया गया
फिर जब उन्होंने शरण ले लिया तब उनके मन में ख्याल आया अरे यह तो मंदिर है यह तो मस्जिद नहीं है
मस्जिद होता तब इन्हें तारीफ करने का एक बढ़िया बहाना मिलता
उन्होंने सोचा तो क्यों ना मंदिरों को बदनाम किया जाए और उसके बाद इस वामपंथी लड़की ने इस मंदिर को बदनाम करना शुरू कर दिया जिस मंदिर ने इन्हें शरण दिया था
कि मैं मंदिर में आई तो मुझे मेरी जाति पूछी गई और जब पता चला कि मैं दलित हूं तब मुझे मंदिर में नहीं घुसने दिया गया
उफ्फ हे भगवान कोई इतना कैसे गिर सकता है
यह देखिए यह वामपंथी किस तरह से मंदिरों के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं
पहले सीसीटीवी फुटेज में यह दोनों अंबेडकरवादी वामपंथी लड़कियां नजर आ रही हैं जो पुलिस की लाठी चार्ज में कनॉट प्लेस हनुमानजी मंदिर के अंदर शरण ली
इन्हें बाकायदा मंदिर में आने दिया गया इन्हें बिठाया गया इन्हें अपनी भी पिलाया गया
फिर जब उन्होंने शरण ले लिया तब उनके मन में ख्याल आया अरे यह तो मंदिर है यह तो मस्जिद नहीं है
मस्जिद होता तब इन्हें तारीफ करने का एक बढ़िया बहाना मिलता
उन्होंने सोचा तो क्यों ना मंदिरों को बदनाम किया जाए और उसके बाद इस वामपंथी लड़की ने इस मंदिर को बदनाम करना शुरू कर दिया जिस मंदिर ने इन्हें शरण दिया था
कि मैं मंदिर में आई तो मुझे मेरी जाति पूछी गई और जब पता चला कि मैं दलित हूं तब मुझे मंदिर में नहीं घुसने दिया गया
उफ्फ हे भगवान कोई इतना कैसे गिर सकता है
गजब का दोगलापन है भाई
एक पुलिस वाला अपने बचाव में अगर हवाई फायरिंग कर रहा है तब वह अखिलेश यादव की नजर में गलत है
लेकिन अखिलेश यादव का प्यारा दुलारा मुख्तार अंसारी अगर मऊ दंगे के दौरान जिप्सी की छत पर बैठकर खुलेआम AK-56 लेकर 17 हिंदुओं को मारा तब वह गलत नहीं है
तब अखिलेश यादव मुख्तार अंसारी के लिए आंसू बहाते हैं
और यह दंगा मुख्तार अंसारी ने सिर्फ इसलिए भड़काया था ताकि हिंदू रामलीला और भारत मिलाप का त्यौहार का आयोजन न कर सके
और इस तरह से खुलेआम जिप्सी पर AK-56 लेकर घूमता था सबसे पहले हत्या राम प्रकाश यादव नामक एक युवक की की थी और इस दंगे में 17 हिंदू मारे गए थे जिसमें से 14 तो यादव समुदाय के थे लेकिन फिर भी मुलायम सिंह ने और समाजवादी पार्टी ने यादवों का साथ इसलिए नहीं दिया कि कहीं मुसलमान नाराज ना हो जाए
और मुख्तार अंसारी को हिंदुओं को और यादव लोगों का कत्ल करने का खुली छूट दे दिया था
और यह सत्य है कि वैसे तो समाजवादी पार्टी कहती है कि हम यादव जी लोगों की पार्टी हैं लेकिन जब भी किसी दंगे में या झगड़े में या विवाद में दूसरा पक्ष मुस्लिम होता है तब समाजवादी पार्टी यादव जी लोगों से कहती है कौन है आप ? हम तो आपको पहचानते नहीं
और फिर समाजवादी पार्टी मुसलमानो के साथ खड़ी हो जाती है
मथुरा में लस्सी विक्रेता भारत यादव का हत्या इसका उदाहरण है
मात्र ₹20 मांगने पर मुसलमानो ने भरत लाल यादव की पीट-पीटकर हत्या कर दिया था
अखिलेश यादव न तो भरत लाल की विधवा पत्नी और दो प्रमोद बच्चियों से मिलने गए ना कोई मदद किया और ना ही अपने पार्टी के किसी सदस्य को भेजा
क्योंकि अखिलेश यादव डर रहे थे कि कहीं मुस्लिम नाराज ना हो जाए
गजब का दोगलापन है भाई
एक पुलिस वाला अपने बचाव में अगर हवाई फायरिंग कर रहा है तब वह अखिलेश यादव की नजर में गलत है
लेकिन अखिलेश यादव का प्यारा दुलारा मुख्तार अंसारी अगर मऊ दंगे के दौरान जिप्सी की छत पर बैठकर खुलेआम AK-56 लेकर 17 हिंदुओं को मारा तब वह गलत नहीं है
तब अखिलेश यादव मुख्तार अंसारी के लिए आंसू बहाते हैं
और यह दंगा मुख्तार अंसारी ने सिर्फ इसलिए भड़काया था ताकि हिंदू रामलीला और भारत मिलाप का त्यौहार का आयोजन न कर सके
और इस तरह से खुलेआम जिप्सी पर AK-56 लेकर घूमता था सबसे पहले हत्या राम प्रकाश यादव नामक एक युवक की की थी और इस दंगे में 17 हिंदू मारे गए थे जिसमें से 14 तो यादव समुदाय के थे लेकिन फिर भी मुलायम सिंह ने और समाजवादी पार्टी ने यादवों का साथ इसलिए नहीं दिया कि कहीं मुसलमान नाराज ना हो जाए
और मुख्तार अंसारी को हिंदुओं को और यादव लोगों का कत्ल करने का खुली छूट दे दिया था
और यह सत्य है कि वैसे तो समाजवादी पार्टी कहती है कि हम यादव जी लोगों की पार्टी हैं लेकिन जब भी किसी दंगे में या झगड़े में या विवाद में दूसरा पक्ष मुस्लिम होता है तब समाजवादी पार्टी यादव जी लोगों से कहती है कौन है आप ? हम तो आपको पहचानते नहीं
और फिर समाजवादी पार्टी मुसलमानो के साथ खड़ी हो जाती है
मथुरा में लस्सी विक्रेता भारत यादव का हत्या इसका उदाहरण है
मात्र ₹20 मांगने पर मुसलमानो ने भरत लाल यादव की पीट-पीटकर हत्या कर दिया था
अखिलेश यादव न तो भरत लाल की विधवा पत्नी और दो प्रमोद बच्चियों से मिलने गए ना कोई मदद किया और ना ही अपने पार्टी के किसी सदस्य को भेजा
क्योंकि अखिलेश यादव डर रहे थे कि कहीं मुस्लिम नाराज ना हो जाए